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AI का अगला दौर: 2026 में रोबोटिक्स और साइंटिफिक रिसर्च को नई रफ्तार, बदल सकती है दुनिया की तस्वीर।

साल 2026 में AI का इस्तेमाल वैज्ञानिक अनुसंधान, मेडिकल रिसर्च, औद्योगिक रोबोटिक्स और जटिल समस्याओं को हल करने में तेजी से बढ़ रहा है। नई तकनीक की मदद से मशीनें अपने आसपास के वातावरण को समझने, परिस्थितियों के अनुसार काम करने और वैज्ञानिकों को रिसर्च के नए रास्ते खोजने में मदद कर रही हैं। McKinsey की Technology Trends Outlook 2026 रिपोर्ट में भी Agentic AI, रोबोटिक्स, AI आधारित वैज्ञानिक खोजों और डेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर को महत्वपूर्ण तकनीकी रुझानों में शामिल किया गया है।

AI का अगला दौर: 2026 में रोबोटिक्स और साइंटिफिक रिसर्च को नई रफ्तार, बदल सकती है दुनिया की तस्वीर।
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द्वारा साधना गुप्ता

स्रोत: McKinsey Technology Trends Outlook, Stanford HAI – AI Index Report, US Department of Energy, Chalmers University of Technology, University of Nottingham और King's College London.

वैज्ञानिक खोजों में AI की बढ़ती भूमिका

AI के इस नए दौर में वैज्ञानिकों के काम करने का तरीका भी बदल रहा है। पहले किसी नई दवा, केमिकल या मटेरियल की खोज के लिए वैज्ञानिकों को लंबे समय तक प्रयोग करने पड़ते थे। एक प्रयोग के परिणाम के आधार पर अगला परीक्षण तैयार किया जाता था। अब AI मॉडल उपलब्ध वैज्ञानिक डेटा का विश्लेषण करके नई परिकल्पनाएं तैयार करने, प्रयोगों की योजना बनाने और संभावित परिणामों का अनुमान लगाने में मदद कर रहे हैं।

McKinsey की 2026 रिपोर्ट के अनुसार, AI for Scientific Discovery and Engineering के क्षेत्र में 2025 के दौरान करीब 7.9 अरब डॉलर का इक्विटी निवेश हुआ। इस क्षेत्र में 2024 से 2025 के बीच नौकरी से जुड़ी पोस्टिंग में भी 18 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। रिपोर्ट में इस तकनीक को 2026 के उभरते हुए महत्वपूर्ण रुझानों में शामिल किया गया है।

इसका इस्तेमाल कई क्षेत्रों में हो सकता है:

  • मेडिकल रिसर्च: नई दवाओं और संभावित उपचारों की खोज में मदद।

  • केमिस्ट्री: नए रासायनिक पदार्थों और उपयोगी कंपाउंड की पहचान।

  • मटेरियल साइंस: मजबूत, हल्के और अधिक तापमान सहने वाले पदार्थ विकसित करना।

  • जलवायु विज्ञान: मौसम और पर्यावरण से जुड़े जटिल डेटा का विश्लेषण।

  • ऊर्जा: बेहतर बैटरी, सेमीकंडक्टर और ऊर्जा तकनीक के विकास में सहयोग।

इस बदलाव का मतलब यह नहीं है कि AI वैज्ञानिकों की जगह ले रहा है। बल्कि यह उनके शोध को अधिक व्यवस्थित बनाने और प्रयोगों की गति बढ़ाने वाला सहायक बन रहा है।

अब प्रयोगशालाओं में रोबोट करेंगे वैज्ञानिकों की मदद

इस तकनीकी बदलाव का सबसे दिलचस्प उदाहरण है Self-Driving Laboratory यानी ऐसी प्रयोगशाला, जहां AI और रोबोट मिलकर प्रयोगों के कई चरणों को स्वचालित तरीके से पूरा कर सकते हैं।

इस व्यवस्था में AI पहले उपलब्ध डेटा का अध्ययन करता है। फिर वह संभावित प्रयोग का सुझाव देता है। रोबोटिक उपकरण उस प्रयोग को अंजाम देते हैं और सेंसर उसके परिणाम रिकॉर्ड करते हैं। इसके बाद AI उन परिणामों का विश्लेषण करके अगला प्रयोग तय करने में मदद करता है। इस प्रक्रिया को Closed-Loop Research कहा जाता है।

सितंबर 2026 में स्वीडन की Chalmers University of Technology के शोधकर्ताओं ने एक ऐसे AI वैज्ञानिक सिस्टम की जानकारी दी, जो ब्रूअर यीस्ट पर शोध के दौरान वैज्ञानिक सवाल तैयार कर सकता है, प्रयोग सुझा सकता है और उनके परिणामों का मूल्यांकन कर सकता है। इस सिस्टम में बड़े भाषा मॉडल, ऑटोमेटेड रीजनिंग और प्रयोगशाला ऑटोमेशन को एक साथ जोड़ा गया है।

यह शोध दिखाता है कि AI अब केवल वैज्ञानिकों को जानकारी देने तक सीमित नहीं है, बल्कि नियंत्रित परिस्थितियों में रिसर्च की प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका भी निभा सकता है। हालांकि, प्रयोगों के परिणामों की वैज्ञानिक पुष्टि और उनकी विश्वसनीयता जांचना अभी भी महत्वपूर्ण है।

रोबोटिक्स में AI का नया प्रयोग, मशीनें समझेंगी आसपास का वातावरण

रोबोटिक्स के क्षेत्र में भी AI बड़ा बदलाव ला रहा है। पहले औद्योगिक रोबोट को एक निश्चित काम करने के लिए प्रोग्राम किया जाता था। वे तय रास्ते पर चलकर किसी वस्तु को उठाने, जोड़ने या पैक करने जैसे काम करते थे। लेकिन नई पीढ़ी के AI आधारित रोबोट सेंसर और कैमरों से मिलने वाली जानकारी का इस्तेमाल करके अपने आसपास की परिस्थितियों को समझने और उसके अनुसार प्रतिक्रिया देने की क्षमता विकसित कर रहे हैं।

McKinsey की रिपोर्ट में इसे Physical AI के रूप में देखा गया है। इसके तहत रोबोटिक्स, सेंसर, मोशन कंट्रोल और AI मॉडल मिलकर मशीनों को अधिक स्वायत्त बनाने में मदद करते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में भविष्य के रोबोटिक्स क्षेत्र में लगभग 19.5 अरब डॉलर का इक्विटी निवेश हुआ।

इस तकनीक के संभावित उपयोग कई क्षेत्रों में हैं:

  1. अस्पताल: सर्जरी में सहायता, मेडिकल उपकरणों की आवाजाही और मरीजों की देखभाल से जुड़े काम।

  2. फैक्ट्री: मशीनों की निगरानी, असेंबली और गुणवत्ता जांच।

  3. कृषि: फसल की निगरानी, खरपतवार की पहचान और चुनिंदा कृषि कार्य।

  4. वेयरहाउस: सामान की छंटाई, पैकिंग और एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाना।

  5. वैज्ञानिक प्रयोगशालाएं: सैंपल तैयार करना, उपकरण संचालित करना और प्रयोगों का डेटा जुटाना।

हालांकि, हर परिस्थिति में रोबोट का पूरी तरह स्वायत्त होना अभी संभव नहीं है। खासकर अस्पताल, सार्वजनिक स्थान और खतरनाक औद्योगिक क्षेत्रों में सुरक्षा तथा मानव निगरानी बेहद जरूरी है।

अमेरिका ने वैज्ञानिक खोजों के लिए रोबोटिक्स पर 3 करोड़ डॉलर लगाए

AI और रोबोटिक्स के इस बदलाव को बढ़ावा देने के लिए अमेरिका के ऊर्जा विभाग (Department of Energy) ने 8 अक्टूबर 2026 को एक महत्वपूर्ण घोषणा की। विभाग ने अपने राष्ट्रीय प्रयोगशालाओं के नेतृत्व वाली चार परियोजनाओं को चुना है, जिनका उद्देश्य वैज्ञानिक अनुसंधान में रोबोटिक्स और ऑटोमेशन का इस्तेमाल बढ़ाना है।

इन परियोजनाओं के लिए कुल 3 करोड़ डॉलर की फंडिंग निर्धारित की गई है। इसका लक्ष्य ऐसी तकनीक विकसित करना है, जिससे अलग-अलग वैज्ञानिक प्रयोगशालाओं में रोबोट और AI सिस्टम एक साथ काम कर सकें।

इन चार परियोजनाओं में Argonne National Laboratory की MAESTRO परियोजना प्रयोगशाला रोबोटिक्स को अधिक सक्षम बनाने पर काम करेगी। Brookhaven National Laboratory की DART परियोजना यह जांचेगी कि रोबोटिक सिस्टम अलग-अलग प्रयोगों और परिस्थितियों में कितने भरोसेमंद हैं। Oak Ridge National Laboratory की TRACE परियोजना विभिन्न वैज्ञानिक उपकरणों और AI सिस्टम को आपस में जोड़ने पर ध्यान देगी। वहीं SLAC National Accelerator Laboratory की SPIRE परियोजना वैज्ञानिक उपकरणों और रोबोटिक्स को एकीकृत करने की दिशा में काम करेगी।

इस पहल का उद्देश्य केवल कुछ आधुनिक रोबोट बनाना नहीं है, बल्कि ऐसे सॉफ्टवेयर, डेटा और सुरक्षा मानक विकसित करना है, जिनका इस्तेमाल भविष्य में दूसरी वैज्ञानिक प्रयोगशालाएं भी कर सकें।

AI से नए मटेरियल की खोज में मिल सकती है तेजी

AI और रोबोटिक्स के संयुक्त इस्तेमाल का एक और उदाहरण ब्रिटेन की University of Nottingham से सामने आया है। 26 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित जानकारी के अनुसार, वहां के शोधकर्ताओं ने AI आधारित रोबोटिक प्रयोगशाला विकसित की है, जो गर्मी सहने वाली नई कोटिंग्स की खोज और उनके परीक्षण में मदद कर सकती है।

यह सिस्टम रासायनिक पदार्थों को मापने और मिलाने से लेकर उच्च तापमान वाली भट्ठी में प्रोसेसिंग तथा सैंपल निकालने तक के कई काम स्वचालित रूप से कर सकता है।

ऐसी तकनीक एयरोस्पेस, ऊर्जा और उच्च तापमान पर काम करने वाले इंजीनियरिंग उपकरणों के लिए उपयोगी मटेरियल विकसित करने में मदद कर सकती है। पारंपरिक तरीके में वैज्ञानिकों को अलग-अलग मिश्रण तैयार करके बार-बार परीक्षण करना पड़ता है। रोबोटिक लैब इस प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित और तेज बनाने की क्षमता रखती है।

AI के बढ़ते इस्तेमाल के साथ चुनौतियां भी होंगी

AI और रोबोटिक्स से वैज्ञानिक अनुसंधान को गति मिल सकती है, लेकिन इस तकनीक के सामने कुछ बड़ी चुनौतियां भी हैं। सबसे महत्वपूर्ण सवाल है AI से मिलने वाले परिणामों की विश्वसनीयता। अगर मॉडल गलत डेटा पर प्रशिक्षित है या किसी प्रयोग के परिणामों की गलत व्याख्या करता है, तो वैज्ञानिकों को गलत निष्कर्ष मिल सकते हैं।

Stanford University के 2026 AI Index Report में भी इस अंतर को रेखांकित किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, कुछ AI मॉडल रसायन विज्ञान से जुड़े सवालों में विशेषज्ञों के औसत प्रदर्शन से बेहतर रहे हैं, लेकिन वास्तविक वैज्ञानिक शोध को दोहराने और उसके परिणामों को प्रमाणित करने में अभी कमजोरियां मौजूद हैं। एक शोध बेंचमार्क में सर्वश्रेष्ठ AI एजेंट ने 38.8 प्रतिशत अंक हासिल किए, जबकि PhD विशेषज्ञों का प्रदर्शन 83.5 प्रतिशत था।

इससे स्पष्ट होता है कि AI कई कामों में उपयोगी हो सकता है, लेकिन वैज्ञानिक प्रमाण, प्रयोगों की जांच और अंतिम निष्कर्षों के लिए मानव विशेषज्ञों की भूमिका अभी भी बेहद महत्वपूर्ण है।

इसके अलावा, रोबोटिक प्रयोगशालाओं को स्थापित करने में भारी निवेश, प्रशिक्षित कर्मचारियों की जरूरत, डेटा सुरक्षा और मशीनों की तकनीकी विश्वसनीयता जैसी चुनौतियां भी सामने आएंगी। कंपनियों और शोध संस्थानों को यह सुनिश्चित करना होगा कि AI से मिलने वाले सुझावों की जांच हो और महत्वपूर्ण फैसले जिम्मेदार विशेषज्ञों की निगरानी में लिए जाएं।

क्या AI वैज्ञानिकों और रोबोटिक्स का भविष्य बदल देगा?

2026 में सामने आ रहे शोध और निवेश यह संकेत देते हैं कि AI का अगला बड़ा चरण डिजिटल दुनिया से आगे बढ़कर वास्तविक दुनिया में प्रवेश कर रहा है। अब मशीनें केवल निर्देशों का पालन करने के बजाय अपने आसपास की जानकारी समझने, प्रयोग करने और नए समाधान खोजने में भी मदद कर रही हैं।

वैज्ञानिक अनुसंधान में AI और रोबोटिक्स का मेल नई दवाओं, बेहतर ऊर्जा तकनीक, उन्नत मटेरियल और औद्योगिक प्रक्रियाओं के विकास को गति दे सकता है। वहीं कंपनियों के लिए यह उत्पादन क्षमता बढ़ाने और समय की बचत करने का अवसर बन सकता है।

हालांकि, इस बदलाव की असली सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि तकनीक कितनी सुरक्षित, भरोसेमंद और व्यावहारिक साबित होती है। फिलहाल इतना स्पष्ट है कि AI का भविष्य केवल स्क्रीन पर जवाब देने तक सीमित नहीं रहने वाला। आने वाले वर्षों में प्रयोगशालाओं, अस्पतालों, फैक्ट्रियों और वैज्ञानिक अनुसंधान केंद्रों में इसकी भूमिका और महत्वपूर्ण हो सकती है।

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