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AI में नवाचार जरूरी, लेकिन सुरक्षा जोखिमों की अनदेखी नहीं: जयशंकर ने UN में बताई भारत की सोच

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान आयोजित एक कार्यक्रम में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की संभावनाओं के साथ उससे पैदा होने वाले सुरक्षा जोखिमों पर ध्यान खींचा। समुद्री क्षेत्र का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि AI खोज एवं बचाव, आपदा प्रतिक्रिया और निगरानी में मदद कर सकता है, लेकिन यही तकनीक साइबर हमलों, निगरानी और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की कमजोरियों की पहचान के लिए भी इस्तेमाल हो सकती है।

AI में नवाचार जरूरी, लेकिन सुरक्षा जोखिमों की अनदेखी नहीं: जयशंकर ने UN में बताई भारत की सोचAI-जनरेटेड सांकेतिक चित्र / JantaScope
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द्वारा जीत निर्मल

स्रोत: LiveMint, Moneycontrol, ANI की रिपोर्ट और भारत-जापान AI सहयोग पर भारत सरकार का आधिकारिक संयुक्त वक्तव्य।

नई दिल्ली/न्यूयॉर्क: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की तेजी से बढ़ती क्षमताओं के बीच विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने नवाचार को आगे बढ़ाने के साथ उससे जुड़े सुरक्षा जोखिमों को समय रहते समझने और कम करने की जरूरत पर जोर दिया है।

जयशंकर ने न्यूयॉर्क में 81वीं संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के दौरान “AI in the Context of International Peace & Security, with an Emphasis on Maritime Security” विषय पर आयोजित कार्यक्रम की सह-अध्यक्षता ग्रीस के विदेश मंत्री जॉर्ज गेरापेट्रिटिस के साथ की।

जयशंकर के मुताबिक, AI की संभावनाओं का लाभ उठाने के साथ उसके परिणामों का पहले से आकलन करना और संभावित जोखिमों को कम करना जरूरी है। उन्होंने ऐसी नीति की आवश्यकता बताई जो नवाचार को आगे बढ़ने दे, लेकिन उसके सुरक्षा प्रभावों के प्रति भी सतर्क रहे।

समुद्री सुरक्षा में AI: अवसर भी, जोखिम भी

जयशंकर ने समुद्री क्षेत्र को उदाहरण बनाकर समझाया कि AI का प्रभाव दोतरफा हो सकता है।

उनके अनुसार, AI समुद्री गतिविधियों की निगरानी यानी maritime domain awareness को बेहतर कर सकता है। इसका इस्तेमाल search and rescue operations, disaster response, संदिग्ध गतिविधियों की पहचान तथा बंदरगाहों और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की resilience बढ़ाने में किया जा सकता है।

लेकिन यही क्षमताएं सुरक्षा चुनौती भी बन सकती हैं।

जयशंकर ने आगाह किया कि AI का इस्तेमाल अत्याधुनिक निगरानी, कमजोरियों की पहचान और जहाजों, संचार नेटवर्क तथा समुद्र के नीचे मौजूद बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने वाले साइबर ऑपरेशनों में किया जा सकता है।

यह अंतर महत्वपूर्ण है: भारत की ओर से सामने रखा गया संदेश AI के विकास को रोकने का नहीं, बल्कि उसके उपयोग के साथ सुरक्षा व्यवस्था विकसित करने का है।

ज्यादा automation से जवाबदेही का सवाल

समुद्री प्रणालियों में बढ़ती automation पर भी जयशंकर ने चिंता जताई।

उनके अनुसार, autonomous systems का बढ़ता इस्तेमाल किसी घटना के लिए जिम्मेदारी तय करने (attribution), जवाबदेही (accountability) और तनाव बढ़ने (escalation) जैसे सवालों को अधिक जटिल बना सकता है। इसके साथ ही तेजी से काम करने वाली स्वचालित प्रणालियां महत्वपूर्ण परिस्थितियों में निर्णय लेने के लिए उपलब्ध समय को भी कम कर सकती हैं।

इसका व्यावहारिक महत्व इसलिए है क्योंकि समुद्री सुरक्षा केवल जहाजों तक सीमित नहीं है। संचार नेटवर्क, बंदरगाह और undersea infrastructure भी वैश्विक व्यापार तथा डिजिटल कनेक्टिविटी से जुड़े महत्वपूर्ण संसाधन हैं।

अंतरराष्ट्रीय कानून की भूमिका पर जोर

जयशंकर ने कहा कि समुद्री क्षेत्र में AI के बढ़ते उपयोग के बावजूद संयुक्त राष्ट्र चार्टर और अंतरराष्ट्रीय कानून—जिसमें समुद्र से संबंधित कानून भी शामिल हैं—राज्यों के आचरण के लिए महत्वपूर्ण ढांचा बने हुए हैं।

उन्होंने देशों के बीच अधिक पारदर्शिता, विश्वास बढ़ाने के उपाय, क्षमता निर्माण, तकनीकी सहयोग और best practices साझा करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

New Delhi Declaration का भी किया उल्लेख

जयशंकर ने अपने संबोधन में New Delhi Declaration का जिक्र करते हुए कहा कि इसमें AI संसाधनों तक अधिक लोकतांत्रिक पहुंच, सुरक्षित और भरोसेमंद AI systems का निर्माण, मानव क्षमताओं में निवेश और आर्थिक विकास व सामाजिक हित के लिए AI के उपयोग पर जोर दिया गया है।

भारत की यह व्यापक दिशा अन्य आधिकारिक दस्तावेजों में भी दिखाई देती है। जुलाई 2026 के भारत-जापान संयुक्त AI वक्तव्य में दोनों देशों ने सुरक्षित, भरोसेमंद, समावेशी और innovation-oriented AI ecosystem के साथ जोखिमों को उचित तरीके से कम करने की जरूरत पर सहमति जताई थी।

क्यों महत्वपूर्ण है जयशंकर का बयान?

जयशंकर की टिप्पणी AI पर चल रही बहस के एक महत्वपूर्ण हिस्से को सामने लाती है—तकनीक की उपयोगिता और उससे जुड़े सुरक्षा जोखिम एक-दूसरे से अलग विषय नहीं हैं।

समुद्री क्षेत्र में AI बेहतर निगरानी, तेज आपदा प्रतिक्रिया और critical infrastructure की सुरक्षा में सहायता कर सकता है। दूसरी ओर, वही तकनीकी क्षमता reconnaissance, cyber operations और vulnerability mapping जैसे सुरक्षा जोखिमों को अधिक उन्नत बना सकती है।

इसी कारण भारत की ओर से सामने रखा गया दृष्टिकोण नवाचार और सुरक्षा के बीच संतुलन पर केंद्रित है: AI के लाभों का इस्तेमाल किया जाए, लेकिन उसके संभावित दुरुपयोग और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर पड़ने वाले प्रभावों के लिए पहले से safeguards तैयार किए जाएं।

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