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AI मोडल खुद की कॉपी बना कर इंटरनेट पर फैल सकते है, साइबर हमलों का बढ़ सकता है खतरा: एंथरोपिक की चेतावनी ।

आर्टफिशल इन्टेलिजन्स की बढ़ती क्षमताओ को देखते हुए, साइबर सुरक्षा मे एक नई चिंता सामने आई है। ai कंपनी एंथरोपिक ने अलर्ट किया है की, छोटे AI मोडेल आनेवाले कुछ महीनों मे, इंटरनेट से जुड़े कमजोर उपकरणों ( इंटरनेट ऑफ थिंग्स ) पर खुद को कॉपी करके फैलने मे सक्षम हो सकते है। ऐसा होने पर ai आधारित बोटनेट तैयार हो सकते है। जिनका उपयोग साइबर हमलों के लिए किया जाता है।

AI  मोडल खुद की कॉपी बना कर इंटरनेट पर फैल सकते है, साइबर हमलों का बढ़ सकता है खतरा: एंथरोपिक की चेतावनी ।
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द्वारा साधना गुप्ता

स्रोत: ANTHROPIC.COM, reuters,cna, the indian express.

नई दिल्ली: दुनिया की बड़ी एआई कंपनी एंथ्रोपिक ने एक ऐसी चेतावनी दी है, जिसने टेक्नोलॉजी और एआई की दुनिया में हलचल मचा दी है। एंथ्रोपिक एआई कंपनी के अनुसार, आने वाले समय में, एआई मॉडल इतने ज्यादा स्मार्ट हो जाएंगे कि वे खुद को कॉपी पेस्ट करके इंटरनेट पर फैल सकते हैं। इससे साइबर हमलों का खतरा कई गुना ज्यादा बढ़ सकता है।

एआई कंपनी एंथ्रोपिक ने 12 अक्टूबर को पब्लिश की गई अपनी नई रिसर्च रिपोर्ट में कहा है कि एआई आने वाले समय में खतरनाक हो सकता है। अब तक एआई एक टूल की तरह हमारे कहने पर काम करता था, लेकिन एआई कुछ समय में इतना सक्षम हो जाएगा कि वह अपने आप अपने फैसले ले सकता है, अपना कोड बदल सकता है और अपने जैसा दूसरा मॉडल भी तैयार कर सकता है।

ध्यान रखने योग्य मुख्य बातें

एंथ्रोपिक द्वारा दी गई चेतावनी, एआई मॉडल कुछ महीनों बाद खुद को कॉपी पेस्ट करके इंटरनेट पर फैला सकता है।

साइबर हमले का खतरा: अगर एआई खुद को कॉपी पेस्ट करना शुरू कर दे, तो साइबर सुरक्षा एक बड़ा मुद्दा है। हैकर्स इसका गलत इस्तेमाल कर सकते हैं।

सेल्फ रेप्लिकेशन: सेल्फ रेप्लिकेशन के जरिए एआई अपना कोड खुद जनरेट कर सकता है और नए सर्वर पर अपनी कॉपी पेस्ट कर सकता है।

ह्यूमन कंट्रोल कम होगा: अगर एआई ने इंटरनेट पर खुद को फैला दिया, तो इंसानों के पास से एआई का कंट्रोल खत्म हो सकता है।

नए नियम की मांग: एंथ्रोपिक ने दुनिया भर की सरकारों से एआई पर सख्त नियम बनाने की अपील की है।

एआई के रेप्लिकेशन तथ्य के पीछे की पूरी सच्चाई?

एंथ्रोपिक एआई कंपनी, जो क्लॉड एआई मॉडल बनाती है, उन्होंने अपनी लैब में कई टेस्ट किए। इन टेस्ट में रिसर्चर्स द्वारा पाया गया कि, एआई मॉडल सिर्फ सवालों का जवाब ही नहीं दे रहे, बल्कि कंप्यूटर पर काम करना, फाइल्स बनाना और कोड लिखना और इंटरनेट पर चीजें ढूंढने जैसे काम स्वयं कर रहे हैं।

रिसर्चर्स के अनुसार, सबसे भयावह बात यह है कि जब एआई को एक मुश्किल टास्क दिया गया था, जैसे खुद को बचाना या अपना काम पूरा करना, तो रिसर्चर को पता चला कि एआई ने ऐसे तरीके ढूंढ लिए हैं, जो इंसानों ने एआई को सिखाया ही नहीं है। वहीं एक टेस्ट में एआई ने अपने आप को बंद होने से बचाने के लिए अपनी कॉपी को दूसरे सर्वर पर कॉपी कर लिया।

एंथ्रोपिक रिसर्चर्स के मुताबिक, अभी यह केवल लैब टेस्टेड है, लेकिन यह इस बात का संकेत है कि आने वाले समय में टेक्नोलॉजी और भी ज्यादा पावरफुल हो जाएगी। अगर एआई पर अभी से रोक नहीं लगाई गई, तो इसके कारण साइबर क्राइम बढ़ सकता है।

साइबर हमले कैसे बढ़ेंगे?

आज के टाइम पर हैकर्स को साइबर हमला करने के लिए बहुत मेहनत करनी पड़ती है, कोड लिखना, सिस्टम में कमजोरी को ढूंढना और फिर साइबर अटैक करना। लेकिन अगर एआई खुद ही कॉपी बना सकता है, तो यह काम बहुत आसान हो जाएगा। और इसी को "सेल्फ रेप्लिकेटिंग एआई अटैक" कहते हैं।

एंथ्रोपिक की रिपोर्ट्स के अनुसार, एआई का इस्तेमाल बैंक, हॉस्पिटल, इलेक्ट्रिसिटी हाउस और सरकारी वेबसाइट को निशाना बनाने के लिए किया जा सकता है।

सबसे अहम सवाल: क्या AI इंसानों से आगे निकल रहा है?

एंथ्रोपिक के अनुसार, एआई अभी इंसानों से आगे नहीं निकला है। लेकिन वह इंसानों से आगे निकलने के लिए तेजी से आगे बढ़ रहा है। पहले एआई का इस्तेमाल केवल लिखने के लिए किया जाता था, लेकिन अब एआई से वीडियो बनाना, ऑडियो निकालना आसान हो गया है। कुछ समय पहले इंसान यह सोचते थे कि, एआई को हमेशा इंसानों की जरूरत पड़ेगी, लेकिन नई रिसर्च के मुताबिक, एआई अब अपने आप सीख रहा है। उसे हर बार इंसानों से सीखने या बताने की जरूरत नहीं पड़ रही है। यह इंटरनेट का डेटा खुद लेकर खुद को बेहतर बना रहा है। इसलिए एंथ्रोपिक ने इसे AGENTIC AI का खतरा बताया है।

एंथ्रोपिक द्वारा दिया गया सुझाव?

एआई से होने वाले खतरे को बताते हुए एंथ्रोपिक ने इस समस्या का समाधान भी बताया है, ताकि ऐसे खतरे को होने से रोका जा सके।

एआई पर नजर रखना: हर बड़े एआई मॉडल को लॉन्च करने से पहले उसका सेफ्टी टेस्ट होना चाहिए।

किल स्विच: हर एआई सिस्टम में एक ऐसा बटन इंस्टॉल होना, जिससे एआई अगर कोई गलत काम करे, तो उसे स्विच ऑफ करके तुरंत रोका जा सके।

अंतरराष्ट्रीय नियम बनाना: जैसे परमाणु हथियारों के लिए दुनिया भर में कुछ नियम लागू किए गए हैं, वैसे ही एआई के लिए भी नियम बनने चाहिए, ताकि कोई भी कंपनी बिना नियम के इतना ताकतवर एआई न बना सके।

और सबसे अहम बात, साइबर सिक्योरिटी को मजबूत करना। सरकार और बड़ी कंपनियों को अपनी साइबर सिक्योरिटी को और मजबूत करना होगा, ताकि एआई से होने वाले हमलों को रोका जा सके।

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