30 अक्टूबर को सामने आई Reuters की रिपोर्ट के मुताबिक, RBI ने हालिया बैठकों में बैंकों से उनके साइबर सुरक्षा नियमों के पालन का प्रमाण मांगा है। केंद्रीय बैंक ने उनसे यह भी जानना चाहा है कि वे AI से जुड़े संभावित साइबर खतरों से निपटने के लिए कितने तैयार हैं। इसके साथ ही बैंकों को अपने एप्लीकेशन प्रोग्रामिंग इंटरफेस (API) की सुरक्षा कमजोरियों की जांच करने के लिए कहा गया है। यह कदम ऐसे समय आया है, जब देश के वित्तीय क्षेत्र में डेटा लीक और अनधिकृत लेनदेन की कई घटनाएं सामने आई हैं।
RBI ने क्यों बढ़ाई बैंकों की निगरानी?
RBI की चिंता केवल साइबर हमलों की बढ़ती संख्या तक सीमित नहीं है। बैंकों के बीच तकनीकी संपर्क बढ़ने के कारण अब एक सिस्टम की कमजोरी दूसरे संस्थान के लिए भी खतरा बन सकती है। बैंक आज NBFC, फिनटेक कंपनियों और दूसरे डिजिटल प्लेटफॉर्म के साथ तकनीकी रूप से जुड़े हुए हैं। इन कनेक्शनों के लिए API का इस्तेमाल किया जाता है।
API एक ऐसी तकनीक है, जिसकी मदद से दो अलग-अलग सॉफ्टवेयर या डिजिटल सिस्टम आपस में जानकारी साझा कर सकते हैं और निर्देशों का आदान-प्रदान कर सकते हैं। उदाहरण के लिए, किसी NBFC की ओर से लोन की रकम जारी करने का निर्देश बैंक तक API के माध्यम से पहुंच सकता है।
यदि इस कनेक्शन की सुरक्षा कमजोर हो या इसके लॉगिन क्रेडेंशियल किसी अपराधी के हाथ लग जाएं, तो उसका गलत इस्तेमाल करके संवेदनशील जानकारी तक पहुंचने या अनधिकृत लेनदेन करने की कोशिश की जा सकती है।
Reuters की रिपोर्ट के अनुसार, RBI ने बैंकों को अपने API सिस्टम की कमजोरियों की जांच करने को कहा है। रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से यह भी बताया गया कि छोटे वित्तीय संस्थान और थर्ड-पार्टी टेक्नोलॉजी कंपनियां साइबर अपराधियों के लिए अपेक्षाकृत आसान निशाना बन सकती हैं।
SBI के करीब 3,900 ग्राहकों का डेटा लीक
RBI की बढ़ी हुई निगरानी के पीछे हाल में सामने आई साइबर सुरक्षा घटनाएं भी एक अहम वजह हैं। अक्टूबर 2026 में देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) ने लगभग 3,897 ग्राहकों से जुड़े व्यक्तिगत रिकॉर्ड के डार्क वेब पर मिलने की जानकारी दी थी।
प्रारंभिक जांच के मुताबिक, लीक हुए रिकॉर्ड में ग्राहकों के नाम, मोबाइल नंबर, जन्मतिथि, ईमेल आईडी, घर के पते और लोन से संबंधित जानकारी शामिल थी। बैंक ने मामले की जांच के लिए स्वतंत्र साइबर सुरक्षा एजेंसी की मदद ली है।
SBI ने स्पष्ट किया था कि ग्राहकों के बैंक बैलेंस सुरक्षित हैं और इस घटना से बैंक के मुख्य कामकाज या वित्तीय स्थिति पर किसी बड़े प्रभाव की आशंका नहीं है। हालांकि, व्यक्तिगत जानकारी का इस तरह सामने आना ग्राहकों की गोपनीयता और डिजिटल सुरक्षा के लिहाज से गंभीर चिंता का विषय है।
मुंबई की दो NBFC कंपनियों को करीब 2 मिलियन डॉलर का नुकसान
साइबर सुरक्षा से जुड़ी एक अन्य घटना में मुंबई की दो गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFC) को कथित तौर पर करीब 20 लाख डॉलर का नुकसान हुआ। Reuters की 30 अक्टूबर की रिपोर्ट के मुताबिक, 8 और 9 अक्टूबर को ICICI Bank में मौजूद खातों से 700 से अधिक अनधिकृत इंस्टेंट ट्रांसफर किए गए।
Reuters द्वारा देखी गई पुलिस शिकायत में आरोप लगाया गया कि हैकर्स ने लोन वितरण से जुड़े निर्देश भेजने वाले API कनेक्शन को निशाना बनाया था। इस कनेक्शन में सेंध लगाकर कथित तौर पर अनधिकृत ट्रांजैक्शन किए गए।
यह मामला बताता है कि साइबर सुरक्षा केवल बैंक के अपने मोबाइल ऐप या वेबसाइट को सुरक्षित रखने तक सीमित नहीं है। बैंक से जुड़े दूसरे वित्तीय संस्थानों और तकनीकी सेवा प्रदाताओं के सिस्टम की सुरक्षा भी उतनी ही जरूरी है। इस मामले में ICICI Bank की ओर से तत्काल कोई टिप्पणी उपलब्ध नहीं थी। इसलिए पुलिस शिकायत में लगाए गए आरोपों को जांच के निष्कर्ष के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
AI की मदद से साइबर हमले कैसे हो सकते हैं?
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ने बैंकिंग और वित्तीय सेवाओं को तेज और सुविधाजनक बनाया है। लेकिन इसी तकनीक का गलत इस्तेमाल साइबर अपराधियों के लिए भी नए रास्ते खोल सकता है।
AI आधारित टूल्स की मदद से अपराधी किसी सिस्टम की कमजोरियों को पहचानने, बड़ी मात्रा में डिजिटल गतिविधियों का विश्लेषण करने और फर्जी संदेश तैयार करने की प्रक्रिया को तेज कर सकते हैं। इसके अलावा, AI की मदद से तैयार किए गए नकली ईमेल, आवाज और वीडियो का इस्तेमाल लोगों को धोखा देने के लिए किया जा सकता है।
इस तरह के हमलों में ऑटोमेशन का भी महत्वपूर्ण योगदान है। पहले जहां किसी सिस्टम की कमजोरी तलाशने और उसका गलत फायदा उठाने में अधिक समय लग सकता था, वहीं स्वचालित टूल्स इस प्रक्रिया को तेज कर सकते हैं।
हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि हर साइबर हमले में AI का इस्तेमाल होने की पुष्टि नहीं हुई है। CERT-In ने अक्टूबर में जारी अपनी चेतावनी में कुछ वित्तीय संस्थानों को निशाना बनाने वाले हमलों में AI-सहायता प्राप्त टूल्स के संभावित इस्तेमाल की बात कही थी।
CERT-In ने भी जारी की थी साइबर सुरक्षा चेतावनी
भारत की साइबर सुरक्षा एजेंसी इंडियन कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम (CERT-In) ने 9 अक्टूबर को वित्तीय संस्थानों को API क्रेडेंशियल चोरी होने और उनके गलत इस्तेमाल के खतरे के बारे में चेतावनी दी थी।
एजेंसी ने बैंकों और वित्तीय कंपनियों को संदिग्ध API कनेक्शन की जांच करने, कमजोर इंटरफेस को बंद करने, सुरक्षा क्रेडेंशियल बदलने और लेनदेन पर कड़ी निगरानी रखने की सलाह दी थी।
इसके अलावा, CERT-In ने 300 अधिकारियों को साइबर सुरक्षा से जुड़ा प्रशिक्षण भी दिया। ये अधिकारी 55 से अधिक वित्तीय संस्थानों का प्रतिनिधित्व करते थे। इसका उद्देश्य वित्तीय क्षेत्र में साइबर हमलों की पहचान करने और उनसे निपटने की क्षमता को बेहतर बनाना था।
RBI के कदम का आम बैंक ग्राहकों पर क्या असर होगा?
RBI की इस बढ़ी हुई निगरानी का उद्देश्य बैंकिंग सिस्टम को अधिक सुरक्षित बनाना है। यदि बैंक अपने डिजिटल सिस्टम, API और थर्ड-पार्टी सेवाओं की कमजोरियों को समय रहते पहचान लेते हैं, तो ग्राहकों की व्यक्तिगत जानकारी और पैसों को सुरक्षित रखने में मदद मिल सकती है।
हालांकि, ग्राहकों को भी अपनी डिजिटल सुरक्षा को लेकर सतर्क रहना चाहिए। बैंकिंग से जुड़े OTP, PIN, पासवर्ड और अन्य गोपनीय जानकारियां किसी के साथ साझा नहीं करनी चाहिए। अनजान लिंक पर क्लिक करने, संदिग्ध ऐप डाउनलोड करने और किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर स्क्रीन शेयर करने से बचना चाहिए।
यदि किसी खाते में संदिग्ध लेनदेन दिखाई दे, तो तुरंत बैंक को सूचना दें और साइबर वित्तीय धोखाधड़ी की स्थिति में भारत के राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क करें। शिकायत आधिकारिक पोर्टल cybercrime.gov.in पर भी दर्ज की जा सकती है।
डिजिटल बैंकिंग के भविष्य के लिए सुरक्षा सबसे बड़ी चुनौती
भारत में डिजिटल भुगतान और ऑनलाइन बैंकिंग का विस्तार अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है। लेकिन जैसे-जैसे बैंकिंग सेवाएं तकनीक पर अधिक निर्भर होंगी, वैसे-वैसे साइबर सुरक्षा की जिम्मेदारी भी बढ़ेगी।
RBI की हालिया कार्रवाई से स्पष्ट है कि अब केवल साइबर सुरक्षा से जुड़े नियम बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनका सही तरीके से पालन करना भी जरूरी है। बैंकों को अपने सिस्टम के साथ-साथ उन कंपनियों की सुरक्षा व्यवस्था की भी जांच करनी होगी, जिनके साथ वे डिजिटल रूप से जुड़े हैं।
AI भविष्य की बैंकिंग व्यवस्था को अधिक तेज और सुविधाजनक बना सकता है, लेकिन इसके साथ आने वाले जोखिमों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। ऐसे में बैंक, नियामक संस्थाएं, टेक्नोलॉजी कंपनियां और ग्राहक—सभी की सतर्कता ही डिजिटल बैंकिंग पर भरोसा बनाए रखने में अहम भूमिका निभाएगी।
