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AI से भारत में बढ़ सकती हैं नौकरियां और आय, World Bank MD ने बताया किन क्षेत्रों को होगा फायदा

विश्व बैंक के प्रबंध निदेशक पास्कल डोनोहो ने कहा है कि सही नीतियों, कौशल और स्थानीय भाषाओं के अनुरूप इस्तेमाल होने पर AI भारत में उत्पादकता, रोजगार और जीवन स्तर सुधारने का बड़ा अवसर बन सकता है।

AI से भारत में बढ़ सकती हैं नौकरियां और आय, World Bank MD ने बताया किन क्षेत्रों को होगा फायदा
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द्वारा जीत निर्मल

स्रोत: The Economic Times

AI भारत में रोजगार और जीवन स्तर सुधारने का बड़ा अवसर: विश्व बैंक के MD पास्कल डोनोहो

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से नौकरियां समाप्त होने की आशंकाओं के बीच विश्व बैंक के प्रबंध निदेशक और मुख्य ज्ञान अधिकारी पास्कल डोनोहो ने भारत के लिए अपेक्षाकृत आशावादी तस्वीर पेश की है। उनका मानना है कि AI का सही तरीके से उपयोग किया जाए तो यह भारत में उत्पादकता बढ़ाने, नए रोजगार अवसर तैयार करने और लोगों के जीवन स्तर में सुधार लाने का प्रभावशाली माध्यम बन सकता है।

भारत यात्रा के दौरान दिए एक साक्षात्कार में डोनोहो ने कहा कि देश की मजबूत होती डिजिटल व्यवस्था, युवाओं की तकनीकी रुचि और AI उपकरणों को तेजी से अपनाने की क्षमता भारत को इस बदलाव से लाभ उठाने की स्थिति में रखती है। हालांकि, उन्होंने रोजगार को लेकर युवाओं की चिंताओं को भी स्वीकार किया।

AI को लेकर भारत के लिए आशावादी क्यों है विश्व बैंक?

डोनोहो के अनुसार, तकनीकी बदलाव का लाभ केवल उन देशों तक सीमित नहीं रहता जो नई तकनीक विकसित करते हैं। असली आर्थिक प्रभाव इस बात पर भी निर्भर करता है कि किसी तकनीक को कितनी तेजी और व्यापकता से अपनाया जाता है।

भारत पहले ही डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और ऑनलाइन सेवाओं के क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रगति कर चुका है। यदि AI को कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा, विनिर्माण और छोटे कारोबारों की वास्तविक जरूरतों से जोड़ा जाता है, तो इसका लाभ बड़ी आबादी तक पहुंच सकता है।

डोनोहो ने कहा कि भारत के संदर्भ में AI मॉडल को स्थानीय संस्कृति, भाषाओं और कानूनों के अनुकूल बनाना जरूरी है। केवल विदेशों में विकसित मॉडल इस्तेमाल करना पर्याप्त नहीं होगा; उन्हें भारतीय परिस्थितियों के अनुसार ढालना भी होगा।

पांच क्षेत्रों में रोजगार बढ़ने की संभावना

विश्व बैंक ने पांच ऐसे क्षेत्रों की पहचान की है जहां AI के विस्तार के बावजूद रोजगार वृद्धि की संभावना बनी रह सकती है:

  • विनिर्माण

  • स्वास्थ्य सेवाएं

  • पर्यटन

  • कृषि

  • खाद्य क्षेत्र

इन क्षेत्रों में AI इंसानी श्रम को पूरी तरह बदलने के बजाय कर्मचारियों और उद्यमियों की क्षमता बढ़ाने का काम कर सकता है। उदाहरण के लिए, स्वास्थ्यकर्मी AI की मदद से जांच और रोग पहचान की प्रक्रिया तेज कर सकते हैं। किसान मौसम, कीट, फसल और बाजार मूल्य से संबंधित बेहतर निर्णय ले सकते हैं। विनिर्माण कंपनियां गुणवत्ता नियंत्रण और आपूर्ति व्यवस्था को अधिक प्रभावी बना सकती हैं।

डोनोहो के अनुसार, ये क्षेत्र तकनीकी बदलावों के सामने अपेक्षाकृत अधिक टिकाऊ हैं और बड़े पैमाने पर रोजगार पैदा करने की क्षमता रखते हैं।

उत्तर प्रदेश में किसान ने AI से पहचाना फसल का कीट

डोनोहो ने अपनी उत्तर प्रदेश यात्रा का एक उदाहरण भी साझा किया। उन्होंने वहां किसानों को फसल संबंधी सलाह, मौसम की जानकारी और उपज का बेहतर मूल्य प्राप्त करने के लिए AI का उपयोग करते देखा।

एक महिला किसान ने पौधे की पत्ती का विश्लेषण करने के लिए AI उपकरण का इस्तेमाल किया। इससे फसल को नुकसान पहुंचाने वाले कीट की पहचान करने और उचित समाधान चुनने में मदद मिली।

यह उदाहरण बताता है कि AI का प्रभाव केवल बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनियों या शहरों तक सीमित रहने की जरूरत नहीं है। स्थानीय भाषा में उपलब्ध सरल और कम लागत वाले AI उपकरण छोटे किसानों तथा ग्रामीण उद्यमियों के लिए भी उपयोगी हो सकते हैं।

विकासशील देशों में कितनी नौकरियों पर खतरा?

विश्व बैंक की World Development Report 2026 के अनुसार, विकासशील अर्थव्यवस्थाओं में लगभग 4.5 प्रतिशत मौजूदा नौकरियां जनरेटिव AI से ऑटोमेशन के जोखिम में आ सकती हैं। उच्च आय वाले देशों में यह अनुपात 14.2 प्रतिशत बताया गया है।

इसके विपरीत, विकासशील देशों की लगभग 16.2 प्रतिशत नौकरियों में AI के कारण उत्पादकता में महत्वपूर्ण सुधार होने की संभावना जताई गई है। उच्च आय वाले देशों के लिए यह अनुमान 18.7 प्रतिशत है।

ये आंकड़े विकासशील अर्थव्यवस्थाओं का सामूहिक आकलन हैं, केवल भारत का अलग पूर्वानुमान नहीं। इसलिए यह निष्कर्ष निकालना सही नहीं होगा कि भारत में निश्चित रूप से केवल 4.5 प्रतिशत नौकरियां प्रभावित होंगी।

रोजगार पर वास्तविक असर भारत के अलग-अलग उद्योगों, कर्मचारियों के कौशल, कंपनियों की ऑटोमेशन रणनीति और सरकार की नीतियों पर निर्भर करेगा।

‘Adopt, Adapt और Advance’ का रास्ता

विश्व बैंक ने विकासशील देशों के लिए AI अपनाने की तीन चरणों वाली रणनीति सुझाई है:

1. Adopt—उपलब्ध तकनीक को अपनाना

हर देश को अपना विशाल AI मॉडल विकसित करने की जरूरत नहीं है। पहले से उपलब्ध और कम लागत वाले उपकरणों का इस्तेमाल कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा तथा सरकारी सेवाओं में किया जा सकता है।

2. Adapt—स्थानीय जरूरतों के अनुसार बदलाव

AI मॉडल को स्थानीय भाषाओं, कानूनों, सांस्कृतिक संदर्भों और क्षेत्रीय डेटा के अनुरूप बनाना होगा। भारत जैसे बहुभाषी देश के लिए यह चरण विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।

3. Advance—धीरे-धीरे उन्नत क्षमता विकसित करना

मजबूत डिजिटल आधार, प्रशिक्षित कार्यबल और स्पष्ट नियम तैयार होने के बाद देश अधिक उन्नत AI अनुसंधान और मॉडल विकास की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।

भारत के जीवन स्तर में कैसे आ सकता है सुधार?

AI का इस्तेमाल केवल कंपनियों की लागत घटाने तक सीमित नहीं रहना चाहिए। इसका व्यापक लाभ तब दिखाई देगा जब तकनीक रोजमर्रा की सार्वजनिक और आर्थिक सेवाओं को बेहतर बनाए।

संभावित उपयोगों में शामिल हैं:

  • मरीजों की प्राथमिक जांच और चिकित्सा सलाह में सहायता।

  • विद्यार्थियों के लिए उनकी जरूरत के अनुसार सीखने की सामग्री।

  • किसानों को मौसम, कीट और बाजार की जानकारी।

  • सरकारी योजनाओं के पात्र लाभार्थियों की पहचान।

  • छोटे कारोबारों के लिए लेखांकन और ग्राहक सेवा।

  • क्षेत्रीय भाषाओं में कानूनी एवं प्रशासनिक जानकारी।

  • आपदा की चेतावनी और राहत प्रबंधन।

इन उपयोगों से सेवाओं की उपलब्धता और गुणवत्ता बढ़ सकती है। इससे कम आय तथा ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को विशेषज्ञ जानकारी तक पहुंचने में मदद मिल सकती है।

अवसर के साथ रोजगार का खतरा भी वास्तविक

विश्व बैंक का सकारात्मक रुख यह नहीं कहता कि AI से कोई नौकरी प्रभावित नहीं होगी। ऐसे कार्य जिनमें बार-बार दोहराई जाने वाली डिजिटल प्रक्रिया, सामान्य दस्तावेज तैयार करना, डेटा वर्गीकरण या बुनियादी ग्राहक सहायता शामिल है, उनमें ऑटोमेशन बढ़ सकता है।

भारत के IT, BPO और बैक-ऑफिस उद्योगों में बड़ी संख्या में युवा काम करते हैं। यदि कंपनियां AI को केवल कर्मचारियों की संख्या घटाने के लिए इस्तेमाल करती हैं, तो शुरुआती स्तर की नौकरियों पर दबाव पड़ सकता है। नए रोजगार उत्पन्न होने और पुराने कार्य समाप्त होने की गति समान होना भी जरूरी नहीं है।

इसलिए केवल “AI नई नौकरियां बनाएगा” कहना पर्याप्त नहीं होगा। यह भी देखना होगा कि नई नौकरियां कहां बनेंगी, उनके लिए कौन-से कौशल चाहिए और प्रभावित कर्मचारियों को वहां तक कैसे पहुंचाया जाएगा।

किन चुनौतियों का समाधान जरूरी है?

विश्व बैंक की रिपोर्ट ने चेतावनी दी है कि तैयारी के बिना AI देशों और सामाजिक वर्गों के बीच असमानता बढ़ा सकता है। इसके साथ बाजार पर कुछ बड़ी कंपनियों का नियंत्रण, गलत सूचनाएं, डेटा गोपनीयता और सरकारी निर्णयों में पक्षपात जैसे जोखिम भी जुड़े हैं।

भारत के सामने प्रमुख चुनौतियां हैं:

  • ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच इंटरनेट तथा उपकरणों की असमान उपलब्धता।

  • कर्मचारियों में AI-संबंधी कौशल की कमी।

  • भारतीय भाषाओं में पर्याप्त और गुणवत्तापूर्ण डेटा का अभाव।

  • AI के गलत निर्णयों के लिए जवाबदेही तय करना।

  • व्यक्तिगत एवं व्यावसायिक डेटा की सुरक्षा।

  • छोटे कारोबारों के लिए तकनीक की लागत।

  • एल्गोरिदम में सामाजिक या भाषाई पक्षपात।

संतुलित विश्लेषण: फायदा अपने आप नहीं मिलेगा

डोनोहो का बयान भारत के लिए AI की संभावनाओं पर भरोसा दिखाता है, लेकिन यह किसी निश्चित रोजगार वृद्धि की गारंटी नहीं है। तकनीक से होने वाला आर्थिक लाभ इस बात पर निर्भर करेगा कि उसका स्वामित्व किसके पास है, कर्मचारी उसका उपयोग करना जानते हैं या नहीं और उससे बढ़ी उत्पादकता का लाभ किस प्रकार बांटा जाता है।

यदि AI से होने वाली बचत केवल कुछ बड़ी कंपनियों तक सीमित रहती है, तो उत्पादकता बढ़ने के बावजूद रोजगार और आय में व्यापक सुधार नहीं आएगा। इसके विपरीत, छोटे उद्योगों, किसानों, स्वास्थ्यकर्मियों और स्थानीय उद्यमियों तक तकनीक पहुंचने से इसका लाभ अधिक समावेशी हो सकता है।

सरकार और उद्योग को तकनीकी प्रशिक्षण, रोजगार परिवर्तन सहायता, स्थानीय भाषा के मॉडल, सुरक्षित डेटा व्यवस्था तथा मानव निगरानी में निवेश करना होगा। स्कूलों, कॉलेजों और औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों के पाठ्यक्रम भी तेजी से बदलती कार्य जरूरतों के अनुरूप अपडेट करने होंगे।

भारत के लिए आगे का रास्ता

भारत के पास विशाल युवा कार्यबल, बड़ा घरेलू बाजार और डिजिटल सेवाओं का मजबूत आधार है। ये खूबियां देश को AI के उपयोग से आर्थिक लाभ प्राप्त करने में मदद कर सकती हैं।

लेकिन भविष्य इस बात से तय होगा कि भारत AI को कर्मचारियों का विकल्प बनाता है या उनकी क्षमता बढ़ाने वाला उपकरण। रोजगार और जीवन स्तर में वास्तविक सुधार के लिए AI नीति का केंद्र केवल नई तकनीक नहीं, बल्कि लोग, कौशल, छोटे व्यवसाय और सार्वजनिक सेवाएं होनी चाहिए।

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