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बैंकिंग में AI बढ़े, लेकिन इंसानी निगरानी बनी रहे: RBI ने ह्यूमन ओवरसाइट पर दिया जोर

भारतीय रिजर्व बैंक ने बैंकों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते इस्तेमाल के बीच मानव निगरानी, जवाबदेही और मजबूत जोखिम प्रबंधन की जरूरत पर जोर दिया है। RBI का कहना है कि AI बैंकिंग को अधिक कुशल बना सकता है, लेकिन गलत या अनियंत्रित स्वचालित फैसले ग्राहकों और वित्तीय प्रणाली के लिए जोखिम भी पैदा कर सकते हैं।

बैंकिंग में AI बढ़े, लेकिन इंसानी निगरानी बनी रहे: RBI ने ह्यूमन ओवरसाइट पर दिया जोरAI-generated editorial illustration / JantaScope
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द्वारा जीत निर्मल

स्रोत: Reserve Bank of India, Mint, News On AIR, Business Standard

भारत के बैंक तेजी से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और ऑटोमेशन को अपना रहे हैं, लेकिन भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) का संदेश है कि महत्वपूर्ण बैंकिंग फैसलों में तकनीक के साथ मानवीय निगरानी और स्पष्ट जवाबदेही भी बनी रहनी चाहिए।

सितंबर 2026 के RBI Bulletin पर आधारित रिपोर्टिंग के अनुसार, केंद्रीय बैंक ने AI को बैंकिंग क्षेत्र के लिए अवसर और जोखिम—दोनों के रूप में देखा है। AI ग्राहक सेवा, धोखाधड़ी की पहचान, जोखिम आकलन और उत्पादकता में सुधार कर सकता है, लेकिन यही तकनीक गलतियों को बड़े पैमाने पर और तेजी से फैलाने की क्षमता भी रखती है।

AI से बैंकिंग को क्या फायदा हो सकता है?

RBI के आकलन के मुताबिक, AI वित्तीय संस्थानों को बड़ी मात्रा में उपलब्ध जानकारी का तेजी से विश्लेषण करने में मदद कर सकता है। इसका इस्तेमाल फ्रॉड डिटेक्शन, ग्राहक सेवा, जोखिम आकलन और साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में किया जा सकता है।

AI आधारित सिस्टम व्यवहार में असामान्य गतिविधियों की पहचान करने, संभावित साइबर खतरों पर नजर रखने और कुछ परिस्थितियों में घटनाओं पर तेजी से प्रतिक्रिया देने में भी उपयोगी हो सकते हैं।

हालांकि, RBI का जोर केवल AI अपनाने पर नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करने पर है कि उसका इस्तेमाल नियंत्रित और जवाबदेह तरीके से हो।

गलती भी तेजी से बढ़ा सकता है AI

AI की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक उसके फैसलों का व्यापक असर है। किसी मॉडल में मौजूद त्रुटि या गलत धारणा अगर समय रहते नहीं पकड़ी जाती है, तो ऑटोमेशन उसे बड़ी संख्या में ग्राहकों तक पहुंचा सकता है।

बैंकिंग में इसका महत्व इसलिए बढ़ जाता है क्योंकि AI आधारित आउटपुट क्रेडिट असेसमेंट, फ्रॉड अलर्ट, ग्राहक की सेवाओं तक पहुंच, मूल्य निर्धारण और अन्य वित्तीय फैसलों को प्रभावित कर सकते हैं।

इसी वजह से RBI ने AI के इस्तेमाल के साथ उचित validation, monitoring, human oversight और clear accountability की जरूरत पर जोर दिया है।

इंसानी निगरानी क्यों जरूरी?

RBI का रुख यह संकेत देता है कि महत्वपूर्ण वित्तीय फैसलों में AI को पूरी तरह स्वतंत्र निर्णयकर्ता मानने के बजाय एक नियंत्रित प्रणाली के रूप में इस्तेमाल किया जाना चाहिए।

अगस्त में RBI के डिप्टी गवर्नर शिरीष चंद्र मुर्मू ने भी बैंकिंग में AI और टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल को महत्वपूर्ण बताया था, लेकिन साथ ही मानव हस्तक्षेप की आवश्यकता पर जोर दिया था।

इसी तरह RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने अगस्त 2026 में बैंकों से AI का जिम्मेदारी से इस्तेमाल करने को कहा था। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि बैंक के फैसलों की जिम्मेदारी संस्था की रहती है, उसके एल्गोरिदम की नहीं।

RBI का प्रस्तावित AI और मॉडल रिस्क फ्रेमवर्क

RBI ने जून 2026 में Model Risk Management से जुड़ा एक draft framework भी जारी किया था। इसमें AI और मशीन लर्निंग मॉडल सहित बैंकों तथा अन्य विनियमित संस्थाओं द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले मॉडल के जोखिम प्रबंधन के लिए विस्तृत सिद्धांत प्रस्तावित किए गए थे।

प्रस्तावों में AI आधारित फैसलों पर मानवीय निगरानी, मॉडल की जांच और मॉनिटरिंग तथा असामान्य या तनावपूर्ण परिस्थितियों में मॉडल के प्रदर्शन का परीक्षण शामिल है।

ग्राहकों से सीधे जुड़ने वाले AI सिस्टम के मामले में प्रस्तावित व्यवस्था में यह बताना भी शामिल है कि ग्राहक AI सिस्टम से बातचीत कर रहा है और जरूरत पड़ने पर उसे मानव सहायता चुनने का विकल्प मिले।

महत्वपूर्ण: ये जून में जारी प्रस्तावित/draft प्रावधान थे। इन्हें RBI की सभी बैंकों पर लागू अंतिम AI नियमावली समझना सही नहीं होगा।

AI साइबर सुरक्षा में हथियार भी, सुरक्षा कवच भी

RBI ने AI के साइबर सुरक्षा से जुड़े दोहरे प्रभाव की ओर भी ध्यान दिलाया है।

एक तरफ अपराधी AI का इस्तेमाल phishing, impersonation और vulnerability exploitation जैसे साइबर हमलों को बड़े स्तर पर करने के लिए कर सकते हैं। दूसरी तरफ बैंक इसी तकनीक का इस्तेमाल लगातार खतरे पहचानने, असामान्य व्यवहार का विश्लेषण करने और घटनाओं पर प्रतिक्रिया देने के लिए कर सकते हैं।

इसका अर्थ है कि बैंकिंग क्षेत्र में AI की दौड़ केवल सबसे उन्नत मॉडल हासिल करने की नहीं है। यह भी महत्वपूर्ण होगा कि संस्थान उस तकनीक को कितनी अच्छी तरह समझते, नियंत्रित करते और उसके जोखिमों का प्रबंधन करते हैं।

बोर्ड और वरिष्ठ प्रबंधन की जिम्मेदारी भी बढ़ेगी

24 सितंबर को SBI Banking & Economics Conclave 2026 में RBI के डिप्टी गवर्नर रोहित जैन ने कहा कि टेक्नोलॉजी अब बैंकिंग की केवल सहायक व्यवस्था नहीं रही, बल्कि बैंकों के जोखिम ढांचे का हिस्सा बनती जा रही है।

उन्होंने कहा कि बोर्ड और वरिष्ठ प्रबंधन के पास इतनी तकनीकी समझ होनी चाहिए कि वे महत्वपूर्ण धारणाओं पर सवाल उठा सकें, तकनीकी निर्भरता को समझ सकें और यह जांच सकें कि बैंक की resilience व्यवस्था वास्तव में परीक्षण से गुजरी है या नहीं।

ग्राहकों के लिए इसका क्या मतलब है?

आने वाले समय में बैंक लोन प्रोसेसिंग, फ्रॉड डिटेक्शन, ग्राहक सहायता और जोखिम आकलन जैसे क्षेत्रों में AI का इस्तेमाल और बढ़ा सकते हैं।

लेकिन RBI की हालिया टिप्पणियां एक महत्वपूर्ण सिद्धांत सामने रखती हैं: ऑटोमेशन बढ़ने का मतलब मानवीय जवाबदेही खत्म होना नहीं है।

यदि किसी AI सिस्टम का फैसला किसी ग्राहक के लोन, खाते तक पहुंच, फ्रॉड अलर्ट या अन्य महत्वपूर्ण बैंकिंग सेवा को प्रभावित करता है, तो बैंक के पास उस सिस्टम की निगरानी, जांच और जरूरत पड़ने पर मानवीय हस्तक्षेप की पर्याप्त व्यवस्था होना महत्वपूर्ण होगा।

निष्कर्ष

RBI का रुख AI को बैंकिंग से दूर रखने का नहीं, बल्कि उसे जिम्मेदारी के साथ अपनाने का है। केंद्रीय बैंक की हालिया टिप्पणियां और प्रस्तावित मॉडल-रिस्क ढांचा बताते हैं कि तेजी से बढ़ते ऑटोमेशन के साथ validation, monitoring, human oversight और institutional accountability को भी मजबूत करना होगा।

बैंकों के लिए अगली चुनौती केवल बेहतर AI सिस्टम बनाना या खरीदना नहीं होगी। उतना ही महत्वपूर्ण यह सुनिश्चित करना होगा कि तकनीक के फैसलों को समझा जा सके, जोखिमों को समय रहते पहचाना जा सके और महत्वपूर्ण परिस्थितियों में इंसान के पास हस्तक्षेप करने की वास्तविक क्षमता मौजूद रहे।

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