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भारत की AI क्रांति को नई रफ्तार: 20 स्वदेशी मॉडल और 38 हजार GPU से आत्मनिर्भरता की तैयारी ।

नई दिल्ली। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की दुनिया में भारत अपनी अलग पहचान बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। अब देश का लक्ष्य केवल विदेशी AI टूल्स का इस्तेमाल करना नहीं, बल्कि अपनी जरूरतों, भाषाओं और सामाजिक परिस्थितियों के अनुसार स्वदेशी AI मॉडल विकसित करना भी है। इसी रणनीति के तहत केंद्र सरकार की IndiaAI Mission के जरिए 20 स्वदेशी फाउंडेशन मॉडल प्रस्तावों को समर्थन दिया गया है। वहीं, देश में 38 हजार से अधिक GPU की साझा कंप्यूटिंग क्षमता उपलब्ध कराई गई है, जिसे आगे और बढ़ाने की योजना है।

भारत की AI क्रांति को नई रफ्तार: 20 स्वदेशी मॉडल और 38 हजार GPU से आत्मनिर्भरता की तैयारी ।
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द्वारा साधना गुप्ता

स्रोत: Press Information Bureau (PIB), Ministry of Electronics and Information Technology (MeitY), IndiaAI Mission, The Times of India।

यह पहल ऐसे समय में महत्वपूर्ण है, जब AI का इस्तेमाल शिक्षा, स्वास्थ्य, खेती, बैंकिंग, कारोबार और सरकारी सेवाओं में तेजी से बढ़ रहा है। भारत की कोशिश है कि इस तकनीक का लाभ केवल बड़ी कंपनियों और अंग्रेजी जानने वाले लोगों तक सीमित न रहे, बल्कि छोटे शहरों, गांवों और अलग-अलग भारतीय भाषाएं बोलने वाले नागरिकों तक भी पहुंचे।

20 स्वदेशी AI मॉडल को मिला समर्थन

भारत सरकार की IndiaAI Mission के तहत 20 स्वदेशी फाउंडेशन मॉडल प्रस्तावों की पहचान की गई है। इनमें 12 बड़े मल्टीमॉडल मॉडल और 8 छोटे भाषा मॉडल यानी Small Language Models शामिल हैं। इन प्रस्तावों को कुल 506 आवेदनों में से चुना गया। इन मॉडल्स का उद्देश्य भारतीय डेटा, भाषाओं और स्थानीय जरूरतों को ध्यान में रखकर AI तकनीक विकसित करना है।

यहां यह समझना जरूरी है कि 20 मॉडल प्रस्तावों को समर्थन मिलना और सभी 20 मॉडल का पूरी तरह तैयार होकर सार्वजनिक इस्तेमाल के लिए उपलब्ध होना अलग-अलग बातें हैं। सरकार के अगस्त 2026 के अपडेट के मुताबिक, इन प्रस्तावों को स्वदेशी AI क्षमता विकसित करने के लिए चुना गया है। कुछ मॉडल और तकनीकी समाधान पहले ही सामने आ चुके हैं, जबकि अन्य पर विकास का काम जारी है।

इन पहलों में Sarvam AI, BharatGen, Gnani AI और अन्य संस्थाओं की भागीदारी शामिल है। Sarvam AI ने बड़े भाषा मॉडल विकसित किए हैं, जबकि BharatGen भारतीय भाषाओं पर आधारित मल्टीमॉडल तकनीक पर काम कर रहा है। Gnani AI का काम आवाज आधारित AI सिस्टम से जुड़ा है।

38 हजार GPU से मजबूत होगा AI इंफ्रास्ट्रक्चर

AI मॉडल तैयार करने और उन्हें बेहतर बनाने के लिए बड़ी कंप्यूटिंग क्षमता की जरूरत होती है। इसके लिए GPU यानी Graphics Processing Unit महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। GPU एक विशेष प्रकार का प्रोसेसर है, जो एक साथ बड़ी संख्या में गणनाएं करने में सक्षम होता है। AI मॉडल की ट्रेनिंग, डेटा प्रोसेसिंग और जटिल कार्यों में इसका इस्तेमाल किया जाता है।

IndiaAI Mission के तहत 38 हजार से अधिक GPU को साझा कंप्यूटिंग सुविधा के लिए जोड़ा गया है। इसका फायदा भारतीय स्टार्टअप, शोधकर्ताओं, शैक्षणिक संस्थानों और सरकारी संगठनों को मिल सकता है। इससे हर संस्था को अपना महंगा कंप्यूटिंग सिस्टम खरीदने की जरूरत कम होगी। सरकार ने इस सुविधा को किफायती दरों पर उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी की है।

इसके अलावा, फरवरी 2026 में इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मौजूदा 38 हजार GPU क्षमता से आगे 20 हजार अतिरिक्त GPU जोड़ने की योजना की घोषणा की थी। मार्च 2026 में सरकार ने भी बताया कि अतिरिक्त GPU क्षमता बढ़ाने की प्रक्रिया जारी है। इसका मकसद देश में AI रिसर्च और मॉडल डेवलपमेंट के लिए अधिक संसाधन उपलब्ध कराना है।

भारतीय भाषाओं में AI सेवाओं पर जोर

भारत में AI के विस्तार के सामने एक बड़ी चुनौती भाषाई विविधता है। देश में हिंदी, मराठी, बंगाली, तमिल, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम, गुजराती और कई अन्य भाषाएं बोली जाती हैं। ऐसे में केवल अंग्रेजी आधारित AI मॉडल आम नागरिकों की सभी जरूरतों को पूरा नहीं कर सकते।

इसी वजह से स्वदेशी AI मॉडल विकसित करते समय भारतीय भाषाओं और स्थानीय संदर्भों को प्राथमिकता दी जा रही है। सरकार के अनुसार, IndiaAI Mission के तहत विकसित मॉडल भारतीय भाषाओं और विशिष्ट उपयोगों के लिए तैयार किए जा रहे हैं। AIKosh जैसे प्लेटफॉर्म पर स्वास्थ्य, कृषि और शिक्षा सहित अलग-अलग क्षेत्रों के डेटा, AI मॉडल और विकास संबंधी संसाधन उपलब्ध कराने की पहल भी की गई है।

इसका फायदा उन लोगों को मिल सकता है, जो अपनी मातृभाषा में जानकारी हासिल करना चाहते हैं। उदाहरण के लिए, किसान स्थानीय भाषा में खेती से जुड़े सवाल पूछ सकेंगे, विद्यार्थी अपनी भाषा में पढ़ाई से संबंधित सहायता ले सकेंगे और नागरिक सरकारी सेवाओं की जानकारी आसानी से समझ सकेंगे।

स्वास्थ्य, शिक्षा और खेती में बढ़ेगा AI का इस्तेमाल

स्वदेशी AI मॉडल का एक बड़ा उद्देश्य तकनीक को वास्तविक समस्याओं के समाधान से जोड़ना है। स्वास्थ्य क्षेत्र में AI मेडिकल रिपोर्ट समझने, शुरुआती स्तर पर बीमारियों से जुड़े संकेत पहचानने और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच बेहतर बनाने में मदद कर सकता है। शिक्षा में यह विद्यार्थियों को उनकी सीखने की गति के अनुसार सामग्री उपलब्ध कराने और शिक्षकों के काम को आसान बनाने में उपयोगी हो सकता है।

कृषि क्षेत्र में मौसम, मिट्टी, फसल और बाजार से जुड़े डेटा का विश्लेषण करके किसानों को बेहतर जानकारी देने की संभावनाएं हैं। वहीं, सरकारी सेवाओं में AI का इस्तेमाल दस्तावेजों की प्रक्रिया, नागरिकों के सवालों के जवाब और विभिन्न भाषाओं में सूचना उपलब्ध कराने के लिए किया जा सकता है।

सरकार के अगस्त 2026 के अपडेट के अनुसार, IndiaAI Mission के तहत 62 AI प्रोटोटाइप विकसित किए गए हैं और इनमें से 20 समाधान सार्वजनिक क्षेत्र के संस्थानों में लागू किए जा चुके हैं। यह संकेत देता है कि पहल का फोकस केवल AI मॉडल तैयार करने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें वास्तविक सेवाओं में इस्तेमाल करने पर भी है।

10,371 करोड़ रुपये की IndiaAI Mission

भारत की इस रणनीति के केंद्र में IndiaAI Mission है, जिसे मार्च 2024 में लगभग 10,371.92 करोड़ रुपये के बजट के साथ मंजूरी दी गई थी। इस मिशन का उद्देश्य देश में AI के लिए मजबूत इकोसिस्टम तैयार करना है। इसमें कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, स्वदेशी फाउंडेशन मॉडल, डेटा प्लेटफॉर्म, कौशल विकास, स्टार्टअप को सहयोग और सुरक्षित AI तकनीक जैसे क्षेत्र शामिल हैं।

इस मिशन के जरिए सरकार चाहती है कि भारतीय शोधकर्ताओं और कंपनियों को AI तकनीक विकसित करने के लिए जरूरी संसाधन देश में ही उपलब्ध हों। इससे नए स्टार्टअप को प्रोत्साहन मिलने के साथ-साथ रोजगार और तकनीकी शोध के अवसर भी बढ़ सकते हैं।

भारत के सामने क्या हैं चुनौतियां?

स्वदेशी AI मॉडल विकसित करने की दिशा में भारत ने महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं, लेकिन अभी कई चुनौतियां मौजूद हैं। बड़े AI मॉडल तैयार करने के लिए महंगे कंप्यूटिंग संसाधन, उच्च गुणवत्ता वाले डेटा और विशेषज्ञों की जरूरत होती है। भारतीय भाषाओं में पर्याप्त और विविध डिजिटल डेटा जुटाना भी एक बड़ी चुनौती है।

इसके अलावा, AI मॉडल में गलत जानकारी, पक्षपात, डेटा गोपनीयता और साइबर सुरक्षा से जुड़े जोखिमों को नियंत्रित करना जरूरी है। सरकार ने IndiaAI Mission के Safe and Trusted AI कार्यक्रम के तहत इन विषयों पर काम करने के लिए परियोजनाओं का चयन किया है। इनमें AI में पक्षपात कम करना, गोपनीयता की सुरक्षा, एल्गोरिदम की जांच और डीपफेक की पहचान जैसे मुद्दे शामिल हैं।

एक और अहम सवाल यह है कि भारतीय AI मॉडल वास्तविक उपयोग में कितने प्रभावी साबित होते हैं। केवल मॉडल लॉन्च करना पर्याप्त नहीं होगा। उन्हें आम नागरिकों, सरकारी संस्थानों, छोटे कारोबारों और शैक्षणिक संस्थानों के लिए उपयोगी, किफायती और भरोसेमंद बनाना भी जरूरी है।

AI के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की ओर भारत

भारत की 20 स्वदेशी AI मॉडल पहलों और 38 हजार से अधिक GPU की कंप्यूटिंग क्षमता को देश के तकनीकी विकास की बड़ी कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। अतिरिक्त GPU जोड़ने की योजना और भारतीय भाषाओं पर आधारित मॉडल इस दिशा को और गति दे सकते हैं।

हालांकि, भारत की AI सफलता का वास्तविक आकलन इस बात से होगा कि ये मॉडल कितनी अच्छी तरह आम लोगों की समस्याएं हल करते हैं और कितने व्यापक स्तर पर अपनाए जाते हैं। यदि स्वदेशी AI तकनीक भाषा, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और सरकारी सेवाओं में प्रभावी साबित होती है, तो इससे देश की डिजिटल व्यवस्था को नई मजबूती मिल सकती है।

भारत के सामने अब चुनौती केवल AI तकनीक विकसित करने की नहीं, बल्कि उसे सुरक्षित, सुलभ और आम नागरिकों के लिए उपयोगी बनाने की है। आने वाले समय में यही तय करेगा कि भारत वैश्विक AI इकोसिस्टम में कितनी मजबूत भूमिका निभा पाता है।

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