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भारत की ग्रोथ आउटलुक हुई मजबूत, लेकिन AI, रोजगार और BOP की चुनौतियां बरकरार: Nomura

भारत की आर्थिक वृद्धि को लेकर बाजार का भरोसा मजबूत हुआ है। Nomura के अनुसार, कई बाजार प्रतिभागियों को FY27 में उम्मीद से बेहतर GDP ग्रोथ की संभावना दिखाई दे रही है। हालांकि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से रोजगार में बदलाव, नई नौकरियां पैदा करने की चुनौती और बैलेंस ऑफ पेमेंट्स (BOP) से जुड़े जोखिम अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण मुद्दे बने हुए हैं।

भारत की ग्रोथ आउटलुक हुई मजबूत, लेकिन AI, रोजगार और BOP की चुनौतियां बरकरार: Nomura
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द्वारा जीत निर्मल

स्रोत: Moneycontrol

मुख्य खबर

भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर धारणा पहले की तुलना में अधिक सकारात्मक होती दिखाई दे रही है। वैश्विक अनिश्चितताओं और पश्चिम एशिया में तनाव के बावजूद घरेलू आर्थिक गतिविधियों की मजबूती ने विकास दर को लेकर उम्मीद बढ़ाई है।

Nomura ने मुंबई और दिल्ली में नीति निर्माताओं, बैंकों, निवेशकों और राजनीतिक मामलों के जानकारों के साथ हुई बैठकों के बाद कहा कि ज्यादातर प्रतिभागियों को भारत की GDP ग्रोथ में सकारात्मक सरप्राइज की संभावना दिखाई देती है। बाजार की उम्मीद है कि वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही यानी Q1FY27 में वृद्धि दर 7% से ऊपर रह सकती है, जबकि पूरे FY27 के लिए 6.8% से 7% के आसपास की ग्रोथ का अनुमान सामने आया। दूसरी ओर, Nomura का अपना FY27 GDP ग्रोथ अनुमान 6.6% है।

मजबूत शुरुआत बदल सकती है FY27 की तस्वीर

यदि पहली तिमाही में अर्थव्यवस्था उम्मीद से तेज रफ्तार दिखाती है तो पूरे वित्त वर्ष की विकास दर भी Nomura के मौजूदा अनुमान से बेहतर रह सकती है।

यह बदलाव इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि पिछले वर्ष व्यापार और वैश्विक परिस्थितियों से जुड़ी चिंताओं के बीच ग्रोथ को लेकर धारणा अपेक्षाकृत कमजोर थी। अब चर्चा केवल विकास दर की मजबूती तक सीमित नहीं है; निवेशकों का ध्यान AI, विदेशी निवेश की अनिश्चितता और रोजगार सृजन जैसी अगली चुनौतियों पर भी जा रहा है।

महंगाई में खाद्य कीमतें बन सकती हैं चुनौती

ग्रोथ के बेहतर संकेतों के साथ महंगाई का जोखिम पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। Nomura की बैठकों में शामिल प्रतिभागियों का अनुमान है कि अगस्त-सितंबर में खाद्य महंगाई करीब 8% तक पहुंच सकती है, जो जुलाई में 6% से नीचे थी।

खाद्य तेल, दालें, सब्जियां और दूध कीमतों पर दबाव बढ़ाने वाले प्रमुख कारक हो सकते हैं। हालांकि कोर इन्फ्लेशन में लागत का असर अभी सीमित दिखाई देने की बात कही गई है। इसी वजह से FY27 की कुल CPI महंगाई लगभग 5% या इससे कुछ नीचे रहने की संभावना जताई गई है।

AI: अवसर भी, रोजगार के लिए चुनौती भी

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए सबसे महत्वपूर्ण संरचनात्मक बदलावों में से एक बन रहा है। एक तरफ कंपनियों में AI का इस्तेमाल बढ़ने से उत्पादकता और नई तकनीकी सेवाओं की मांग बढ़ सकती है। स्थानीय बाजार और कारोबारी जरूरतों को समझने वाले कर्मचारियों की आवश्यकता भारत के सर्विस एक्सपोर्ट के लिए नया अवसर भी पैदा कर सकती है।

दूसरी तरफ, कम जटिलता वाले कोडिंग और दूसरे रूटीन कार्यों पर AI का प्रभाव पड़ने का जोखिम है। इससे खासतौर पर शुरुआती स्तर की कुछ नौकरियों पर दबाव बढ़ सकता है और कर्मचारियों को नई तकनीकी क्षमताएं सिखाने की जरूरत तेज हो सकती है। Nomura के एक अन्य हालिया विश्लेषण में भारत में AI से जुड़ी हायरिंग को अब तक छंटनी और एट्रिशन से अधिक पाया गया, लेकिन उसने यह भी चेताया कि कुल आंकड़े अलग-अलग कौशल वाले कर्मचारियों पर पड़ने वाले असमान प्रभाव को छिपा सकते हैं।

रोजगार की गुणवत्ता होगी अगली बड़ी परीक्षा

भारत के लिए केवल तेज GDP ग्रोथ पर्याप्त नहीं होगी। यह भी महत्वपूर्ण होगा कि आर्थिक विस्तार कितनी नई और टिकाऊ नौकरियां पैदा करता है।

AI के कारण श्रम बाजार में कौशल की मांग बदलने की स्थिति में शिक्षा, प्रशिक्षण और री-स्किलिंग की भूमिका और बढ़ जाएगी। उच्च कौशल वाले कर्मचारियों को नई तकनीक से फायदा मिल सकता है, जबकि दोहराए जाने वाले और आसानी से ऑटोमेट होने वाले काम करने वाले कर्मचारियों को ज्यादा चुनौती का सामना करना पड़ सकता है।

इसलिए आने वाले वर्षों में भारत की ग्रोथ स्टोरी का मूल्यांकन GDP के साथ-साथ रोजगार की मात्रा और गुणवत्ता के आधार पर भी होगा।

Balance of Payments को लेकर क्यों बनी हुई है चिंता?

भारत के बैलेंस ऑफ पेमेंट्स को लेकर बाजार में एक राय नहीं है। कुछ विशेषज्ञ मौजूदा दबाव को चक्रीय मान रहे हैं, जबकि दूसरे इसे अधिक संरचनात्मक चुनौती के रूप में देखते हैं।

Nomura के अनुसार, अधिकांश कमर्शियल बैंकों को FCNR(B) और External Commercial Borrowings यानी ECB के जरिए कुल 80 से 90 अरब डॉलर तक के प्रवाह की उम्मीद है। इसके बावजूद AI से जुड़े पोर्टफोलियो निवेश प्रवाह में बदलाव और भारत के IT सर्विस एक्सपोर्ट पर संभावित दबाव जैसी चिंताएं बनी हुई हैं।

भारत के लिए यह पहलू महत्वपूर्ण है क्योंकि मजबूत बाहरी वित्तीय स्थिति रुपये, विदेशी मुद्रा भंडार और निवेशकों के भरोसे को सहारा देती है।

ब्याज दरों पर बाजार और Nomura की राय अलग

मौद्रिक नीति को लेकर भी दिलचस्प अंतर दिखाई देता है। अधिकांश निवेशकों को दिसंबर से 50-75 बेसिस पॉइंट की सीमित और बाद के हिस्से में केंद्रित ब्याज दर बढ़ोतरी की संभावना दिखाई दे रही है।

Nomura की राय इससे अलग है। उसका मानना है कि अंतर्निहित महंगाई का दबाव नरम रहने से मौद्रिक नीति में इस वर्ष के बाकी हिस्से और अगले वर्ष भी दरों को यथावत रखने की गुंजाइश बन सकती है।

भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह आउटलुक?

भारत के लिए सकारात्मक संकेत यह है कि ग्रोथ, राजकोषीय स्थिति और चालू खाते को लेकर बाजार की चिंता पहले की तुलना में कम हुई है। लेकिन अर्थव्यवस्था की अगली परीक्षा केवल तेज विकास दर बनाए रखने की नहीं होगी।

AI से पैदा होने वाले तकनीकी बदलावों को रोजगार के अवसरों में बदलना, कर्मचारियों को नई क्षमताओं के लिए तैयार करना, विदेशी पूंजी आकर्षित करना और बाहरी खाते को स्थिर रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण होगा।

संतुलित विश्लेषण

Nomura की टिप्पणियां भारतीय अर्थव्यवस्था की दो अलग तस्वीरें सामने रखती हैं। पहली तस्वीर में मजबूत घरेलू गतिविधियां और उम्मीद से बेहतर GDP वृद्धि की संभावना है। दूसरी तस्वीर में तेजी से बदलती टेक्नोलॉजी, रोजगार की गुणवत्ता और बाहरी वित्तीय संतुलन से जुड़े जोखिम हैं।

अगर मजबूत GDP वृद्धि के साथ व्यापक रोजगार सृजन, कौशल विकास और स्थिर विदेशी पूंजी प्रवाह भी बना रहता है तो भारत अपनी विकास गति को अधिक टिकाऊ बना सकता है। लेकिन यदि AI से उत्पादकता तो बढ़ती है पर रोजगार बाजार उसी गति से अनुकूल नहीं होता, या बाहरी खाते पर दबाव बढ़ता है, तो तेज GDP ग्रोथ के बावजूद अर्थव्यवस्था के कुछ हिस्सों में असंतुलन दिखाई दे सकता है।

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