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कृत्रिम बुद्धिमत्ता समाचार

भारत में बना ‘Gnani Artha’ AI Stack लॉन्च: 11 भारतीय भाषाओं, डेटा सुरक्षा और कम लागत पर जोर

बेंगलुरु की Gnani AI ने स्वदेशी सॉवरेन AI स्टैक ‘Artha’ पेश किया है। इसमें 30 अरब पैरामीटर वाला Evon 3.3 भाषा मॉडल और संस्थानों के लिए विकसित Plexus एजेंटिक AI प्लेटफॉर्म शामिल हैं।

भारत में बना ‘Gnani Artha’ AI Stack लॉन्च: 11 भारतीय भाषाओं, डेटा सुरक्षा और कम लागत पर जोर
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द्वारा जीत निर्मल

स्रोत: The Economic Times

Gnani AI ने लॉन्च किया स्वदेशी ‘Artha’ AI Stack, भारतीय भाषाओं और सुरक्षित डेटा पर रहेगा फोकस

भारत में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के स्थानीय विकास को आगे बढ़ाते हुए बेंगलुरु की वॉइस AI कंपनी Gnani AI ने अपना सॉवरेन AI स्टैक ‘Gnani Artha’ लॉन्च किया है। इसे 28 अगस्त 2026 को नई दिल्ली स्थित उपराष्ट्रपति भवन में उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन की मौजूदगी में पेश किया गया। यह स्टैक मुख्य रूप से Evon 3.3 लार्ज लैंग्वेज मॉडल और Plexus एजेंटिक AI प्लेटफॉर्म को एक साथ लाता है।

कंपनी ने Artha को खास तौर पर भारतीय उद्यमों और सार्वजनिक संस्थानों की भाषाई, परिचालन तथा डेटा-सुरक्षा संबंधी जरूरतों को ध्यान में रखकर विकसित किया है।

क्या है Gnani Artha?

Gnani Artha केवल एक चैटबॉट या भाषा मॉडल नहीं, बल्कि एक संपूर्ण AI प्रौद्योगिकी ढांचा है। इसका उद्देश्य संस्थानों को AI मॉडल, ऑटोमेशन प्लेटफॉर्म और आवश्यक डिप्लॉयमेंट व्यवस्था एक ही प्रणाली में उपलब्ध कराना है।

इसके दो प्रमुख हिस्से हैं:

  • Evon 3.3: भारतीय भाषाओं में समझने, तर्क करने और उत्तर देने के लिए बनाया गया ओपन-वेट लार्ज लैंग्वेज मॉडल।

  • Plexus: AI की क्षमताओं को वास्तविक संस्थागत कार्यों और नियंत्रित ऑटोमेटेड वर्कफ्लो से जोड़ने वाला एजेंटिक प्लेटफॉर्म।

Plexus में अलग-अलग AI एजेंट मिलकर निर्धारित परिणामों पर काम कर सकते हैं। कंपनी के अनुसार इन प्रक्रियाओं को पूरी तरह AI द्वारा या मानवीय निगरानी के साथ चलाया जा सकता है।

Evon 3.3 की प्रमुख विशेषताएं

Evon 3.3 एक 30 अरब पैरामीटर वाला ओपन-वेट मॉडल है, जिसमें किसी अनुरोध को प्रोसेस करते समय लगभग 3.5 अरब पैरामीटर सक्रिय होते हैं। इसे 11 भारतीय भाषाओं और भारतीय संदर्भ वाले डेटा पर प्रशिक्षित किए जाने का दावा किया गया है। मॉडल को एक सर्वर नोड पर स्वयं होस्ट किया जा सकता है और इसके वेट Apache 2.0 लाइसेंस के अंतर्गत उपलब्ध कराने की योजना है।

कंपनी ने भारतीय लिपियों के लिए मॉडल का टोकनाइजर भी अनुकूलित किया है। टोकनाइजर शब्दों और वाक्यों को उन छोटी इकाइयों में बदलता है जिन्हें AI मॉडल प्रोसेस कर सकता है। Gnani AI का दावा है कि उसका समाधान GPT-5 परिवार के टोकनाइजर की तुलना में प्रत्येक भारतीय शब्द पर लगभग 20 प्रतिशत कम टोकन इस्तेमाल करता है। हालांकि यह कंपनी द्वारा प्रस्तुत आंकड़ा है और वास्तविक लागत अलग-अलग उपयोग, हार्डवेयर एवं कार्यभार पर निर्भर करेगी।

भारतीय भाषाओं को क्यों दी गई प्राथमिकता?

दुनिया के अधिकतर प्रमुख AI मॉडल अंग्रेजी-केंद्रित डेटा पर विकसित हुए हैं। ऐसे मॉडल भारतीय भाषाओं को समझने के लिए अक्सर अनुवाद या अतिरिक्त प्रोसेसिंग पर निर्भर रहते हैं। इसके कारण स्थानीय बोलियों, मिश्रित भाषा, क्षेत्रीय अभिव्यक्तियों और विशिष्ट प्रशासनिक शब्दों को समझने में कठिनाई आ सकती है।

Artha को भारतीय भाषाओं में मूल रूप से प्रशिक्षित समाधान के रूप में प्रस्तुत किया गया है। इससे बैंकिंग, बीमा, स्वास्थ्य सेवा, दूरसंचार और सरकारी सेवाओं जैसे क्षेत्रों में स्थानीय भाषा आधारित AI अनुप्रयोग तैयार करने में सहायता मिल सकती है।

अपने ही इंफ्रास्ट्रक्चर पर चलाने की सुविधा

Artha का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि संस्थान इसे अपने डेटा सेंटर या निजी वर्चुअल क्लाउड में चला सकते हैं। इससे संवेदनशील ग्राहक अथवा विभागीय डेटा को बाहरी सिस्टम पर भेजने की आवश्यकता कम हो सकती है।

यह सुविधा उन संगठनों के लिए उपयोगी हो सकती है जिन्हें डेटा रेजिडेंसी, गोपनीयता, ऑडिट और नियामकीय अनुपालन की कठोर शर्तें पूरी करनी होती हैं। कंपनी का कहना है कि ग्राहक का डेटा संगठन के अपने नेटवर्क के भीतर रखा जा सकता है।

फिर भी केवल स्थानीय सर्वर पर मॉडल चलाना पूर्ण सुरक्षा की गारंटी नहीं देता। प्रभावी सुरक्षा के लिए एक्सेस कंट्रोल, एन्क्रिप्शन, नियमित परीक्षण, साइबर सुरक्षा निगरानी और स्पष्ट जवाबदेही व्यवस्था भी जरूरी होगी।

भारत के लिए इस लॉन्च का महत्व

Gnani Artha का लॉन्च ऐसे समय हुआ है जब सरकारों और कंपनियों के बीच सॉवरेन AI को लेकर चर्चा तेज हो रही है। इसका व्यापक अर्थ ऐसी AI क्षमता से है जिसमें किसी देश या संस्था का अपने डेटा, मॉडल, कंप्यूटिंग व्यवस्था और संचालन पर अधिक नियंत्रण हो।

भारत जैसे बहुभाषी देश में स्थानीय AI मॉडल तीन स्तरों पर महत्वपूर्ण हो सकते हैं:

  • नागरिकों को उनकी भाषा में डिजिटल सेवाएं उपलब्ध कराना।

  • संवेदनशील डेटा पर संस्थागत नियंत्रण बनाए रखना।

  • विदेशी AI सेवाओं और उनकी मूल्य-नीतियों पर निर्भरता घटाना।

लॉन्च के दौरान उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत को केवल नई तकनीक का उपभोक्ता बने रहने के बजाय उसका निर्माता भी बनना चाहिए। उन्होंने खुले, किफायती और सुलभ AI विकास की आवश्यकता पर जोर दिया।

किन क्षेत्रों में हो सकता है उपयोग?

Artha जैसे AI स्टैक का संभावित इस्तेमाल कई क्षेत्रों में किया जा सकता है:

  • बैंकिंग दस्तावेजों और ऋण आवेदनों का विश्लेषण

  • बीमा दावों की प्रारंभिक जांच

  • क्षेत्रीय भाषाओं में ग्राहक सहायता

  • सरकारी फाइलों और नागरिक आवेदनों का प्रसंस्करण

  • स्वास्थ्य सेवा संबंधी प्रशासनिक कार्य

  • कॉल सेंटर एवं दूरसंचार सेवाओं का ऑटोमेशन

  • नियमों के अंतर्गत काम करने वाले AI एजेंट तैयार करना

इन उपयोगों की वास्तविक सफलता मॉडल की सटीकता, स्थानीय भाषाओं की समझ, निष्पक्षता और जटिल मामलों में मानवीय निगरानी पर निर्भर करेगी।

अवसर के साथ चुनौतियां भी

Artha भारतीय AI उद्योग के लिए उत्साहजनक पहल है, लेकिन इसके व्यावसायिक प्रभाव का आकलन स्वतंत्र परीक्षणों और वास्तविक संस्थागत प्रयोगों के बाद ही बेहतर ढंग से किया जा सकेगा।

कंपनी ने MILU भारतीय-भाषा बेंचमार्क पर प्रतिस्पर्धी प्रदर्शन के दावे किए हैं। ऐसे परिणाम शुरुआती क्षमता का संकेत देते हैं, परंतु कोई भी बेंचमार्क मॉडल की सुरक्षा, तथ्यात्मक विश्वसनीयता और वास्तविक कार्यस्थल के प्रदर्शन का संपूर्ण प्रमाण नहीं होता।

इसके अतिरिक्त, AI एजेंटों को संस्थागत कार्यों की अनुमति देने से गलत निर्णय, पक्षपात, अनधिकृत कार्रवाई और उत्तरदायित्व से जुड़ी चिंताएं पैदा हो सकती हैं। इसलिए उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में अंतिम निर्णय मनुष्य के नियंत्रण में रखना आवश्यक होगा।

संतुलित विश्लेषण

Gnani Artha की सबसे बड़ी संभावित ताकत उसका भारतीय भाषाओं, स्थानीय डिप्लॉयमेंट और संस्थागत नियंत्रण पर केंद्रित होना है। यदि यह बड़े स्तर पर कम लागत, स्थिर प्रदर्शन और बेहतर भाषाई समझ प्रदान करता है, तो इससे भारत में AI अपनाने की गति बढ़ सकती है।

दूसरी ओर, “सॉवरेन” या “स्वदेशी” पहचान को अपने आप तकनीकी श्रेष्ठता का प्रमाण नहीं माना जा सकता। मॉडल की उपयोगिता स्वतंत्र मूल्यांकन, सुरक्षा परीक्षण, पारदर्शी दस्तावेजीकरण और वास्तविक ग्राहक अनुभव से तय होगी। उपलब्धता भी फिलहाल सीमित है—कंपनी की वेबसाइट के अनुसार Evon 3.3 के वेट अनुरोध पर उपलब्ध होंगे, जबकि Plexus के लिए प्रतीक्षा सूची दी गई है।

निष्कर्ष

Gnani Artha भारत के लिए भाषा-केंद्रित और संस्थागत नियंत्रण वाला AI ढांचा विकसित करने की दिशा में एक उल्लेखनीय कदम है। Evon 3.3 और Plexus का मेल स्थानीय भाषा की समझ से आगे बढ़कर वास्तविक कार्यों को स्वचालित करने का प्रयास करता है।

अब निगाह इस बात पर रहेगी कि यह तकनीक वास्तविक संस्थागत वातावरण में कितनी सटीक, सुरक्षित, किफायती और विश्वसनीय साबित होती है। यदि कंपनी अपने दावों को व्यावहारिक स्तर पर सिद्ध कर पाती है, तो Artha भारत के सॉवरेन AI पारिस्थितिकी तंत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

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