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ग्रेट निकोबार में Green AI Data Centre की संभावना तलाशेगा अंडमान प्रशासन, निजी कंपनियों से मांगी रुचि

अंडमान एवं निकोबार प्रशासन ने ग्रेट निकोबार या लिटिल अंडमान में निजी क्षेत्र के नेतृत्व वाला पर्यावरण-अनुकूल AI/Data Centre इकोसिस्टम विकसित करने की व्यवहार्यता जांचने की दिशा में कदम बढ़ाया है। प्रशासन ने क्लाउड सेवा प्रदाताओं, AI इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियों, डेटा सेंटर ऑपरेटरों, रिन्यूएबल एनर्जी कंपनियों और अन्य तकनीकी संस्थाओं से Expression of Interest (EoI) आमंत्रित किया है। यह प्रक्रिया फिलहाल किसी परियोजना की मंजूरी या ठेका देने की गारंटी नहीं है, बल्कि बाजार की रुचि और तकनीकी व्यवहार्यता समझ

ग्रेट निकोबार में Green AI Data Centre की संभावना तलाशेगा अंडमान प्रशासन, निजी कंपनियों से मांगी रुचि
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द्वारा जीत निर्मल

स्रोत: Economic Times

ग्रेट निकोबार में AI Data Centre की संभावनाओं पर प्रशासन की नजर

अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह भविष्य में भारत के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के एक नए केंद्र के रूप में उभर सकता है। प्रशासन ने ग्रेट निकोबार और लिटिल अंडमान में Green AI/Data Centre Vertical स्थापित करने की संभावना का अध्ययन करने के लिए निजी कंपनियों से रुचि मांगी है।

10 अगस्त के Expression of Interest के अनुसार, यह पहल मुख्य रूप से मार्केट साउंडिंग, तकनीकी आकलन, व्यवहार्यता जांच और निजी क्षेत्र की संभावित रुचि का पता लगाने के लिए है।

इसका अर्थ यह है कि फिलहाल प्रशासन ने किसी डेटा सेंटर के निर्माण को अंतिम मंजूरी नहीं दी है। मौजूदा प्रक्रिया से यह समझने की कोशिश की जाएगी कि क्या द्वीपों पर बड़े पैमाने की आधुनिक डिजिटल और AI कंप्यूटिंग सुविधाएं तकनीकी, आर्थिक और पर्यावरणीय रूप से व्यावहारिक हो सकती हैं।

किन कंपनियों से मांगी गई है रुचि?

इस पहल में केवल पारंपरिक डेटा सेंटर कंपनियों तक दायरा सीमित नहीं रखा गया है। Hyperscalers, cloud service providers, AI infrastructure कंपनियों, data-centre developers और operators के अलावा marine engineering, renewable energy और subsea connectivity से जुड़ी योग्य कंपनियां भी अपनी रुचि दिखा सकती हैं।

इससे संकेत मिलता है कि प्रशासन डेटा सेंटर को सिर्फ सर्वर रखने वाली इमारत के रूप में नहीं, बल्कि बिजली, कूलिंग और समुद्र के नीचे बिछे डिजिटल नेटवर्क सहित एक व्यापक तकनीकी इकोसिस्टम के तौर पर देख रहा है।

GPU और High-Performance Computing भी हो सकते हैं शामिल

प्रस्तावित डिजिटल इकोसिस्टम में AI-केंद्रित और hyperscale data centres के साथ GPU infrastructure, High-Performance Computing (HPC), cloud computing और sovereign digital infrastructure जैसी क्षमताओं की संभावनाएं भी तलाशी जा सकती हैं।

AI मॉडल को ट्रेन करने और बड़े स्तर पर चलाने के लिए अत्यधिक कंप्यूटिंग क्षमता की आवश्यकता होती है। यही कारण है कि वैश्विक स्तर पर GPU और AI-केंद्रित डेटा सेंटर डिजिटल अर्थव्यवस्था के महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर के रूप में उभर रहे हैं।

यदि द्वीप समूह में ऐसी सुविधा व्यवहार्य पाई जाती है, तो यह भारत के AI इंफ्रास्ट्रक्चर के भौगोलिक विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयोग हो सकता है।

Green Data Centre पर क्यों है जोर?

बड़े AI डेटा सेंटर भारी मात्रा में बिजली इस्तेमाल कर सकते हैं और सर्वर को ठंडा रखने के लिए प्रभावी cooling infrastructure की जरूरत होती है। इसलिए प्रस्ताव में ऊर्जा दक्षता और पर्यावरणीय स्थिरता महत्वपूर्ण विषय हैं।

EoI में renewable-energy-powered operations के अलावा seawater-based या अन्य innovative cooling systems, freshwater-free cooling और waste-heat recovery जैसी तकनीकों की संभावनाओं का उल्लेख किया गया है। अतिरिक्त गर्मी का इस्तेमाल कम तापमान वाले desalination या अन्य उपयोगी गतिविधियों के लिए किए जाने की संभावना भी तलाशने की बात है।

द्वीप क्षेत्र के लिए यह पहलू विशेष रूप से महत्वपूर्ण होगा, क्योंकि किसी भी बड़े डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की उपयोगिता को उसके पर्यावरणीय प्रभाव के साथ संतुलित करना पड़ेगा।

Great Nicobar का रणनीतिक महत्व

ग्रेट निकोबार भारत के दक्षिणी हिस्से में रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण स्थान पर स्थित है। यहां पहले से बड़े बुनियादी ढांचा विकास की योजनाएं चर्चा में हैं। ग्रेट निकोबार परियोजना में ट्रांसशिपमेंट पोर्ट, एयरपोर्ट, टाउनशिप और ऊर्जा संबंधी इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे घटक शामिल हैं।

ऐसे में AI और डेटा सेंटर से जुड़ी संभावनाओं की जांच यह दिखाती है कि द्वीप के भविष्य को केवल परिवहन और लॉजिस्टिक्स के नजरिए से नहीं, बल्कि डिजिटल कनेक्टिविटी के संदर्भ में भी देखा जा रहा है।

अंडमान एवं निकोबार में सरकारी डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और नेटवर्किंग सेवाएं पहले से मौजूद हैं, जबकि प्रशासन औद्योगिक गतिविधियों के लिए Campbell Bay और Little Andaman जैसे क्षेत्रों में औद्योगिक परिसरों की जानकारी भी उपलब्ध कराता है।

पर्यावरण से जुड़े सवाल भी होंगे महत्वपूर्ण

इस प्रस्ताव का दूसरा पक्ष पर्यावरणीय संवेदनशीलता है। ग्रेट निकोबार से जुड़ी बड़ी इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं को लेकर पर्यावरणीय प्रभाव पहले भी सार्वजनिक बहस का विषय रहा है। द्वीप के कुछ हिस्से संवेदनशील coastal और ecological zones में आते हैं। उदाहरण के लिए, इंदिरा पॉइंट से संबंधित एक अन्य विकास प्रस्ताव में भी पर्यावरण और तटीय क्षेत्र की मंजूरियों की आवश्यकता सामने आई है।

डेटा सेंटर को लगातार बिजली, मजबूत नेटवर्क कनेक्टिविटी और cooling की आवश्यकता होती है। इसलिए किसी भी संभावित परियोजना का मूल्यांकन केवल निवेश या तकनीकी क्षमता के आधार पर नहीं किया जा सकता।

ऊर्जा की उपलब्धता, प्राकृतिक आपदाओं से सुरक्षा, समुद्री परिस्थितियां, स्थानीय पारिस्थितिकी, पानी की जरूरत और निर्माण से पड़ने वाला प्रभाव भी व्यवहार्यता अध्ययन के महत्वपूर्ण हिस्से हो सकते हैं।

अभी परियोजना तय नहीं, केवल संभावनाओं की जांच

इस पहल से जुड़ा सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि EoI को किसी tender, Request for Proposal, परियोजना आवंटन या सरकारी वित्तीय सहायता की प्रतिबद्धता नहीं माना गया है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि इससे जमीन आवंटन या किसी अन्य व्यावसायिक लाभ की गारंटी भी नहीं मिलती।

इच्छुक कंपनियों को EoI प्रकाशित होने के 45 दिनों के भीतर अंडमान एवं निकोबार प्रशासन के सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव के कार्यालय में अपने प्रस्ताव भेजने हैं।

यह पहल क्यों मायने रखती है?

भारत में AI का विस्तार अब केवल सॉफ्टवेयर और AI मॉडल विकसित करने तक सीमित नहीं है। इसके पीछे आवश्यक GPU, cloud computing, बिजली और डेटा सेंटर क्षमता भी रणनीतिक महत्व हासिल कर रही है।

ग्रेट निकोबार या लिटिल अंडमान जैसे द्वीपों में Green AI infrastructure की व्यवहार्यता जांचना इसलिए दिलचस्प है क्योंकि यह डिजिटल क्षमता, renewable energy और समुद्री connectivity को एक साथ जोड़ने की संभावना पेश करता है।

हालांकि इसकी वास्तविक सफलता कई कठिन सवालों के जवाब पर निर्भर करेगी—क्या पर्याप्त और विश्वसनीय ऊर्जा उपलब्ध होगी, क्या समुद्री नेटवर्क पर्याप्त मजबूत होगा, क्या प्राकृतिक आपदाओं से जुड़े जोखिमों को नियंत्रित किया जा सकेगा और सबसे महत्वपूर्ण, क्या इतना बड़ा डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर संवेदनशील द्वीपीय पर्यावरण के साथ संतुलित किया जा सकता है।

इसलिए फिलहाल इसे निश्चित निवेश परियोजना के बजाय एक शुरुआती feasibility exercise के रूप में देखना अधिक उचित होगा।


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