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कर्नाटक में बनेगी भारत की पहली सरकारी AI यूनिवर्सिटी, बेंगलुरु में 100 एकड़ में तैयार होगा कैंपस।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI अब केवल तकनीकी कंपनियों तक सीमित नहीं रह गया है। शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, बैंकिंग और सरकारी सेवाओं में भी इसका इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। इसी बदलते तकनीकी दौर को देखते हुए कर्नाटक सरकार ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में एक बड़ी पहल की घोषणा की है। राज्य में भारत की पहली सरकार संचालित AI यूनिवर्सिटी स्थापित करने की योजना बनाई गई है।

कर्नाटक में बनेगी भारत की पहली सरकारी AI यूनिवर्सिटी, बेंगलुरु में 100 एकड़ में तैयार होगा कैंपस।
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द्वारा साधना गुप्ता

स्रोत: आकाशवाणी न्यूज, business standard, the print, economic times, india today, ndtv

कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने 14 जुलाई 2026 को बेंगलुरु में आयोजित Google I/O Connect India कार्यक्रम के उद्घाटन के दौरान इस योजना की घोषणा की थी। इसके साथ ही राज्य में एक विशेष AI Hub बनाने की बात भी कही गई। सरकार की योजना है कि कर्नाटक को ऐसा राज्य बनाया जाए, जहां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल केवल तकनीकी क्षेत्र में ही नहीं, बल्कि आम लोगों की जिंदगी और सरकारी सेवाओं को बेहतर बनाने में भी हो।

बेंगलुरु में बनेगा 100 एकड़ का AI यूनिवर्सिटी कैंपस

कर्नाटक सरकार की प्रस्तावित योजना के अनुसार, AI यूनिवर्सिटी का मुख्य कैंपस बेंगलुरु में लगभग 100 एकड़ जमीन पर विकसित किया जाएगा। इसके अलावा राज्य के दूसरे हिस्सों में भी क्षेत्रीय कैंपस स्थापित करने की योजना बताई गई है। इनमें कलबुर्गी, बेलगावी, हुबली-धारवाड़, मंगलुरु और मैसूरु जैसे शहर शामिल हैं।

इस पहल का मकसद AI शिक्षा को केवल बेंगलुरु तक सीमित रखना नहीं, बल्कि राज्य के अलग-अलग क्षेत्रों के विद्यार्थियों तक पहुंचाना है। इससे छोटे शहरों और दूसरे जिलों के युवाओं को भी उभरती तकनीकों से जुड़ी शिक्षा और प्रशिक्षण के अवसर मिल सकते हैं।

Business Standard की रिपोर्ट के अनुसार, विश्वविद्यालय को AI शिक्षा, उन्नत शोध और तकनीकी नवाचार का प्रमुख केंद्र बनाने की योजना है। हालांकि, अभी विश्वविद्यालय के निर्माण की समयसीमा, पाठ्यक्रम, प्रवेश प्रक्रिया और फीस से संबंधित विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।

AI Hub से स्टार्टअप और रिसर्च को मिलेगा बढ़ावा

AI यूनिवर्सिटी के साथ सरकार एक अलग AI Hub भी स्थापित करना चाहती है। इसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े स्टार्टअप, कंपनियों, शोधकर्ताओं और शैक्षणिक संस्थानों के लिए इनक्यूबेशन सेंटर के रूप में विकसित करने की योजना है।

इनक्यूबेशन सेंटर का काम नए विचारों को व्यावहारिक तकनीकी उत्पादों और सेवाओं में बदलने में सहायता करना होता है। यहां नए स्टार्टअप को शोध, तकनीकी मार्गदर्शन, उद्योग से संपर्क और अपने प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने के अवसर मिल सकते हैं।

उदाहरण के लिए, यदि कोई युवा किसान की फसल में बीमारी की पहचान करने वाला AI टूल बनाना चाहता है, तो उसे रिसर्च और तकनीकी सहयोग की जरूरत होगी। इसी तरह स्वास्थ्य क्षेत्र में बीमारी की शुरुआती पहचान, शिक्षा में व्यक्तिगत पढ़ाई और सरकारी सेवाओं में दस्तावेजों के विश्लेषण जैसे क्षेत्रों में भी नए AI समाधान विकसित किए जा सकते हैं।सरकार की मंशा विश्वविद्यालय और AI Hub के माध्यम से शिक्षा, उद्योग और शोध के बीच बेहतर तालमेल तैयार करने की है।

कक्षा 6 से AI शिक्षा देने की भी योजना

कर्नाटक सरकार की AI पहल केवल उच्च शिक्षा तक सीमित नहीं है। राज्य में स्कूली स्तर पर भी विद्यार्थियों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और कोडिंग की शुरुआती जानकारी देने की योजना बनाई गई है।

15 अगस्त 2026 को उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने घोषणा की थी कि राज्य के स्कूलों में कक्षा 6 से AI शिक्षा शुरू करने की दिशा में काम किया जाएगा। इसके साथ AI Akshara Abhiyana और Coding Gurukul जैसी पहलों का भी उल्लेख किया गया था।

इसके बाद 6 अक्टूबर को मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक में अधिकारियों को कक्षा 6 से सरकारी स्कूलों में AI प्रशिक्षण शुरू करने के विकल्प तलाशने के निर्देश दिए गए। India Today की रिपोर्ट के अनुसार, उस समय सरकारी स्कूलों में कक्षा 9 के विद्यार्थियों के लिए AI प्रशिक्षण शुरू हो चुका था और इसे आगे बढ़ाने की योजना पर विचार किया जा रहा था।

इसका उद्देश्य बच्चों को कम उम्र से ही डिजिटल तकनीक, कोडिंग और AI की बुनियादी समझ देना है। हालांकि, सभी स्कूलों में इसे लागू करने की अंतिम समयसीमा और पूरा पाठ्यक्रम अभी स्पष्ट नहीं है।

AI शिक्षा के साथ डेटा सेंटर विकसित करने पर भी जोर

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को चलाने के लिए बड़ी मात्रा में डेटा और कंप्यूटिंग क्षमता की जरूरत होती है। इसके लिए डेटा सेंटर महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कर्नाटक सरकार ने अपनी AI योजना के तहत दो बड़े ग्रीन डेटा सेंटर विकसित करने की भी बात कही है।

इन डेटा सेंटर का उद्देश्य AI रिसर्च, क्लाउड कंप्यूटिंग और बड़े स्तर पर डेटा प्रोसेसिंग के लिए जरूरी डिजिटल आधारभूत ढांचा तैयार करना है। ग्रीन डेटा सेंटर का मतलब ऐसी सुविधाओं से है, जिनमें ऊर्जा की खपत और पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव को कम करने के उपायों पर ध्यान दिया जाता है।

राज्य सरकार का मानना है कि बेहतर डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध होने से AI कंपनियों, शोधकर्ताओं और स्टार्टअप्स को नई तकनीक विकसित करने में मदद मिल सकती है। इससे कर्नाटक में निवेश और रोजगार के नए अवसर भी पैदा हो सकते हैं।

Google के साथ सहयोग बढ़ाने की तैयारी

कर्नाटक सरकार अपनी AI योजनाओं को आगे बढ़ाने के लिए बड़ी तकनीकी कंपनियों के साथ साझेदारी को भी महत्वपूर्ण मान रही है। Google I/O Connect India कार्यक्रम के दौरान डी.के. शिवकुमार ने Google को राज्य के AI इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए सहयोग बढ़ाने का आमंत्रण दिया था।

प्रस्तावित सहयोग के प्रमुख क्षेत्र शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, जलवायु परिवर्तन से निपटने की तैयारी, शहरी परिवहन और सरकारी सेवाएं हैं। इसके अलावा AI स्टार्टअप्स को समर्थन देने और विद्यार्थियों के लिए तकनीकी प्रशिक्षण के अवसर बढ़ाने पर भी जोर दिया गया।

हालांकि, किसी विशेष परियोजना या साझेदारी के लागू होने की पुष्टि के बिना इसे पूरी तरह शुरू हो चुका कार्यक्रम नहीं माना जाना चाहिए। फिलहाल यह राज्य सरकार की घोषित प्राथमिकताओं और प्रस्तावित सहयोग का हिस्सा है।

क्या कर्नाटक बन सकता है भारत का बड़ा AI एजुकेशन हब?

कर्नाटक पहले से ही भारत के प्रमुख तकनीकी राज्यों में शामिल है। बेंगलुरु में बड़ी संख्या में IT कंपनियां, स्टार्टअप और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर मौजूद हैं। उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने जुलाई में अपने संबोधन के दौरान दावा किया था कि राज्य भारत के सॉफ्टवेयर निर्यात में लगभग 40 प्रतिशत योगदान देता है और बेंगलुरु में 17,000 से अधिक स्टार्टअप हैं।

ऐसे में AI यूनिवर्सिटी की योजना राज्य के मौजूदा तकनीकी इकोसिस्टम को नई दिशा दे सकती है। यदि विश्वविद्यालय, AI Hub, स्कूलों में प्रशिक्षण और डेटा सेंटर से जुड़ी योजनाएं सही तरीके से लागू होती हैं, तो युवाओं के लिए शोध, तकनीकी शिक्षा और उद्यमिता के नए रास्ते खुल सकते हैं।

लेकिन इस योजना की वास्तविक सफलता केवल घोषणा पर निर्भर नहीं करेगी। इसके लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षक, आधुनिक प्रयोगशालाएं, उद्योग के साथ साझेदारी, किफायती शिक्षा और विद्यार्थियों के लिए व्यावहारिक प्रशिक्षण जरूरी होगा।

फिलहाल कर्नाटक सरकार की प्रस्तावित AI यूनिवर्सिटी देश में तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण पहल हो सकती है। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि सरकार इस योजना को जमीन पर उतारने के लिए कब निर्माण कार्य, पाठ्यक्रम, प्रवेश प्रक्रिया और अन्य जरूरी व्यवस्थाओं की आधिकारिक जानकारी जारी करती है।

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