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Maharashtra Police AI: अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस करेगी अपराधों की जांच में मदद, MahaCrimeOS AI से बदलेगा पुलिसिंग का तरीका।

ऑनलाइन निवेश के नाम पर ठगी, फर्जी बैंकिंग कॉल, डिजिटल अरेस्ट और सोशल मीडिया के जरिए होने वाले फ्रॉड में अपराधी नई-नई तकनीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं। ऐसे में अपराधियों तक पहुंचने के लिए पुलिस को भी आधुनिक तकनीक की जरूरत है। इसी दिशा में महाराष्ट्र पुलिस ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद लेना शुरू किया है। राज्य में MahaCrimeOS AI नाम का एक विशेष प्लेटफॉर्म विकसित किया गया है, जो साइबर अपराधों की जांच को तेज और व्यवस्थित बनाने में पुलिस अधिकारियों की सहायता कर रहा है।

Maharashtra Police AI: अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस करेगी अपराधों की जांच में मदद, MahaCrimeOS AI से बदलेगा पुलिसिंग का तरीका।
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द्वारा साधना गुप्ता

स्रोत: इंडियन एक्स्प्रेस , moneycontroll, akashvani news, microsoft.

यह पहल महाराष्ट्र सरकार, माइक्रोसॉफ्ट और टेक्नोलॉजी कंपनी CyberEye के सहयोग से शुरू की गई है। दिसंबर 2025 में मुंबई में Microsoft AI Tour के दौरान इस प्लेटफॉर्म को सार्वजनिक रूप से पेश किया गया था। शुरुआत में यह नागपुर के 23 पुलिस थानों में इस्तेमाल किया जा रहा था। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इसे राज्य के सभी 1,100 पुलिस थानों तक विस्तारित करने की योजना भी सामने रखी थी। हालांकि, पूरे राज्य में इसका विस्तार पूरा हो चुका है, इसकी पुष्टि उपलब्ध आधिकारिक जानकारी से नहीं होती।

क्या है MahaCrimeOS AI और कैसे करेगा काम?

MahaCrimeOS AI एक AI आधारित क्राइम इन्वेस्टिगेशन प्लेटफॉर्म है। इसे इस तरह तैयार किया गया है कि पुलिस अधिकारी किसी साइबर अपराध की शिकायत और उससे जुड़े डिजिटल सबूतों को एक ही जगह व्यवस्थित कर सकें। यह तकनीक शिकायतों में मौजूद जानकारी को पढ़ने, जरूरी तथ्यों को अलग करने, केस फाइल तैयार करने और जांच के संभावित अगले कदम सुझाने में मदद करती है।

इस प्लेटफॉर्म को Microsoft Azure OpenAI Service और Microsoft Foundry जैसी तकनीकों के आधार पर तैयार किया गया है। इसके विकास में महाराष्ट्र सरकार की पहल MARVEL और CyberEye की भी महत्वपूर्ण भूमिका है।

उदाहरण के लिए, अगर किसी व्यक्ति के साथ ऑनलाइन निवेश के नाम पर धोखाधड़ी होती है, तो वह पुलिस को बैंक स्टेटमेंट, मोबाइल नंबर, वेबसाइट का लिंक, सोशल मीडिया अकाउंट, चैट के स्क्रीनशॉट और अन्य दस्तावेज उपलब्ध करा सकता है। MahaCrimeOS AI इन जानकारियों को पढ़कर उनसे जुड़े जरूरी विवरण निकालने और केस फाइल में व्यवस्थित करने में मदद कर सकता है। इससे पुलिसकर्मियों को हर दस्तावेज की जानकारी अलग-अलग हाथ से दर्ज करने में लगने वाला समय कम हो सकता है।

हिंदी और मराठी में भी समझेगा शिकायतों की जानकारी

इस प्लेटफॉर्म की एक खास बात इसकी बहुभाषी क्षमता है। साइबर अपराध की शिकायतें हमेशा अंग्रेजी में नहीं होतीं। कई बार पीड़ित हिंदी, मराठी या स्थानीय भाषा में अपनी बात बताते हैं। कुछ लोग हाथ से लिखे दस्तावेज, बैंक रिकॉर्ड या मोबाइल स्क्रीनशॉट भी जमा करते हैं।

MahaCrimeOS AI अंग्रेजी, हिंदी और मराठी में उपलब्ध है। माइक्रोसॉफ्ट के अनुसार, यह PDF, तस्वीरों और हस्तलिखित नोट्स सहित अलग-अलग प्रारूपों में दी गई जानकारी को प्रोसेस कर सकता है। इससे उन पुलिस अधिकारियों को मदद मिल सकती है जिन्हें तकनीकी मामलों में बड़ी मात्रा में दस्तावेजों का विश्लेषण करना पड़ता है।

प्लेटफॉर्म में भारत के आपराधिक कानूनों से जुड़ी जानकारी भी एकीकृत की गई है। इसके जरिए अधिकारी किसी मामले से संबंधित कानूनी प्रावधानों को समझने और जांच की प्रक्रिया के लिए उपयोगी जानकारी प्राप्त करने में सहायता ले सकते हैं।

जांच में महीनों का काम कुछ दिनों में पूरा करने का दावा

MahaCrimeOS AI के संभावित प्रभाव को समझने के लिए नागपुर के एक साइबर ठगी मामले का उदाहरण सामने आया है। माइक्रोसॉफ्ट की प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक, नीतू नाम की एक महिला ऑनलाइन शेयर ट्रेडिंग ऐप के जरिए धोखाधड़ी का शिकार हुई थीं। उन्होंने फर्जी निवेश प्लेटफॉर्म पर पैसे लगाए और बाद में अपनी रकम निकालने के लिए अतिरिक्त शुल्क मांगे जाने पर ठगी का शक हुआ।

इस मामले की जांच करने वाले नागपुर ग्रामीण पुलिस के सहायक पुलिस निरीक्षक आशीष सिंह ठाकुर के अनुसार, पहले इस तरह के मामले में अलग-अलग बैंकों से जानकारी जुटाने, मोबाइल नंबरों के कॉल डिटेल रिकॉर्ड मांगने और संबंधित दस्तावेज तैयार करने में दो से तीन महीने लग सकते थे।

लेकिन MahaCrimeOS AI की मदद से इस प्रक्रिया को लगभग एक सप्ताह में पूरा किया गया। रिपोर्ट में अधिकारी ने बताया कि अब प्लेटफॉर्म की सहायता से कई मोबाइल नंबरों के कॉल डिटेल रिकॉर्ड मांगने के लिए जरूरी पत्र तैयार करना आसान हो गया है। उन्होंने यह भी बताया कि इससे वह पहले की तुलना में अधिक मामलों पर काम कर पा रहे हैं।

यह उदाहरण माइक्रोसॉफ्ट की प्रकाशित केस स्टडी पर आधारित है। इसे पूरे महाराष्ट्र में जांच की गति का प्रमाण नहीं माना जाना चाहिए, लेकिन इससे यह समझने में मदद मिलती है कि AI प्रशासनिक काम का बोझ किस तरह कम कर सकता है।

AI पुलिस को जांच के अगले कदम भी सुझाएगा

इस प्लेटफॉर्म का काम केवल दस्तावेजों को व्यवस्थित करना नहीं है। इसमें Investigation Copilot नाम का AI सहायक भी शामिल है। यह केस से जुड़ी जानकारी का विश्लेषण करके जांच अधिकारियों को संभावित कदम सुझा सकता है।

उदाहरण के तौर पर, किसी वित्तीय धोखाधड़ी में बैंक खाते की जानकारी जुटाना, संबंधित मोबाइल नंबरों के रिकॉर्ड मंगाना, सोशल मीडिया अकाउंट की जांच करना या उपलब्ध डिजिटल सबूतों के बीच संबंध तलाशना जरूरी हो सकता है। AI सहायक इन कामों के लिए जांच की संभावित प्रक्रिया सुझा सकता है।

यह तकनीक अलग-अलग मामलों के बीच समानताएं खोजने में भी मदद कर सकती है। यदि कई शिकायतों में एक जैसे मोबाइल नंबर, वेबसाइट, बैंक खाते या सोशल मीडिया पहचान सामने आती हैं, तो अधिकारी उन मामलों के संभावित संबंधों की जांच कर सकते हैं। हालांकि, AI द्वारा दिए गए सुझाव अंतिम पुलिस निष्कर्ष नहीं होते। जांच अधिकारी को तथ्यों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर ही आगे का फैसला लेना होता है।

1,100 पुलिस थानों तक विस्तार की योजना

महाराष्ट्र सरकार ने MahaCrimeOS AI को राज्य के सभी 1,100 पुलिस थानों तक पहुंचाने की योजना घोषित की थी। इसका उद्देश्य साइबर अपराधों की जांच के लिए एक समान डिजिटल प्रक्रिया तैयार करना है, ताकि अलग-अलग जिलों में काम करने वाले पुलिस अधिकारियों को शिकायत दर्ज करने, सबूतों का विश्लेषण करने और केस से जुड़े दस्तावेज तैयार करने में तकनीकी सहायता मिल सके।

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी राज्य में AI के इस्तेमाल को प्रशासनिक सुधार का हिस्सा बताया है। 3 नवंबर 2026 को Mumbai Tech Week में उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र सरकार पुलिसिंग सहित कई क्षेत्रों में AI तकनीक का इस्तेमाल बढ़ा रही है।

AI के इस्तेमाल के साथ सुरक्षा और जवाबदेही भी जरूरी

पुलिस जांच में AI का इस्तेमाल जितना उपयोगी हो सकता है, उससे जुड़े जोखिमों को समझना भी उतना ही जरूरी है। किसी गलत या अधूरी जानकारी के आधार पर AI गलत सुझाव दे सकता है। पुराने पुलिस रिकॉर्ड में मौजूद पक्षपात भी AI के परिणामों को प्रभावित कर सकता है। इसके अलावा, शिकायतकर्ताओं के बैंक रिकॉर्ड, मोबाइल नंबर और निजी दस्तावेजों की सुरक्षा बेहद महत्वपूर्ण है।

इसलिए यह जरूरी है कि AI से मिले सुझावों की जांच प्रशिक्षित पुलिस अधिकारी करें। डिजिटल सबूतों की प्रमाणिकता, डेटा की गोपनीयता, सिस्टम की पारदर्शिता और कानूनी जवाबदेही से समझौता नहीं होना चाहिए। AI को जांच अधिकारी का विकल्प नहीं, बल्कि उसकी क्षमता बढ़ाने वाला सहायक उपकरण माना जाना चाहिए।

कुल मिलाकर, MahaCrimeOS AI महाराष्ट्र में डिजिटल पुलिसिंग की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। अगर इसे सुरक्षित तरीके से लागू किया गया और पुलिसकर्मियों को सही प्रशिक्षण मिला, तो यह साइबर अपराधों की जांच में लगने वाला समय और प्रशासनिक बोझ कम करने में मदद कर सकता है। लेकिन इसकी असली सफलता केवल तकनीक की रफ्तार से नहीं, बल्कि पीड़ितों को समय पर न्याय दिलाने और जांच की विश्वसनीयता बनाए रखने से तय होगी।

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