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मृणाल ठाकुर की AI डीपफेक बनाने वालों को सख्त चेतावनी, बोलीं- ‘इसे तुरंत रोकने का औपचारिक नोटिस समझें’

अभिनेत्री मृणाल ठाकुर ने उनकी पहचान और तस्वीरों का इस्तेमाल कर AI से डीपफेक कंटेंट बनाने और उसे शेयर करने वालों को कड़ी चेतावनी दी है। अभिनेत्री ने इस तरह के अनधिकृत इस्तेमाल को अस्वीकार्य बताते हुए साफ किया कि आगे उनकी पहचान का दुरुपयोग होने पर कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

मृणाल ठाकुर की AI डीपफेक बनाने वालों को सख्त चेतावनी, बोलीं- ‘इसे तुरंत रोकने का औपचारिक नोटिस समझें’
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द्वारा जीत निर्मल

स्रोत: Moneycontrol

AI डीपफेक के खिलाफ मृणाल ठाकुर का कड़ा रुख

बॉलीवुड अभिनेत्री मृणाल ठाकुर ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से बनाए जा रहे डीपफेक कंटेंट को लेकर सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक बयान जारी कर उन लोगों को चेतावनी दी, जो उनकी तस्वीर, चेहरे या पहचान का इस्तेमाल करके AI-जनरेटेड फर्जी तस्वीरें और वीडियो तैयार या प्रसारित कर रहे हैं।

मृणाल ने स्पष्ट किया कि उनकी अनुमति के बिना उनकी पहचान का इस तरह इस्तेमाल स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने ऐसे कंटेंट को बनाने और फैलाने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की चेतावनी भी दी है।

‘इसे औपचारिक नोटिस समझें’

मृणाल ठाकुर की चेतावनी का सबसे अहम पहलू यह है कि उन्होंने इसे केवल सोशल मीडिया अपील तक सीमित नहीं रखा। अभिनेत्री ने अपने संदेश में साफ संकेत दिया कि इसे तुरंत रुकने के लिए औपचारिक चेतावनी माना जाए।

उन्होंने डीपफेक कंटेंट के जरिए किसी व्यक्ति की पहचान के अनधिकृत इस्तेमाल को गंभीर मुद्दा बताया। उनका रुख बताता है कि AI के जरिए सेलिब्रिटीज की नकली तस्वीरें या वीडियो तैयार करने को अब केवल ऑनलाइन मजाक या मनोरंजन के रूप में नहीं देखा जा सकता।

क्या है AI डीपफेक?

डीपफेक ऐसी तकनीक है जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल करके किसी व्यक्ति के चेहरे, आवाज या रूप को डिजिटल रूप से बदलकर नकली तस्वीर, ऑडियो या वीडियो बनाया जा सकता है।

तकनीक का इस्तेमाल वैध रचनात्मक उद्देश्यों के लिए भी किया जा सकता है, लेकिन किसी वास्तविक व्यक्ति की अनुमति के बिना उसकी पहचान का इस्तेमाल करके भ्रामक सामग्री बनाना गोपनीयता, प्रतिष्ठा और सहमति से जुड़े गंभीर सवाल खड़े करता है।

विशेष रूप से मशहूर हस्तियों के लिए यह समस्या बड़ी है क्योंकि उनकी बड़ी संख्या में तस्वीरें और वीडियो पहले से इंटरनेट पर उपलब्ध रहते हैं।

सेलिब्रिटीज के लिए क्यों बढ़ रही है चिंता?

AI टूल्स के तेजी से विकसित होने के कारण वास्तविक दिखने वाली नकली तस्वीरें और वीडियो तैयार करना पहले की तुलना में आसान हो गया है। इससे सार्वजनिक हस्तियों की डिजिटल पहचान के दुरुपयोग का जोखिम भी बढ़ा है।

यदि कोई डीपफेक वीडियो बिना उचित जानकारी या लेबल के सोशल मीडिया पर वायरल हो जाता है, तो दर्शक उसे वास्तविक मान सकते हैं। इससे संबंधित व्यक्ति की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचने के साथ गलत सूचना भी तेजी से फैल सकती है।

मृणाल ठाकुर का मामला इसी व्यापक चुनौती की ओर ध्यान खींचता है।

केवल सेलिब्रिटीज तक सीमित नहीं है डीपफेक का खतरा

डीपफेक से जुड़ी समस्या सिर्फ फिल्म सितारों या अन्य प्रसिद्ध लोगों तक सीमित नहीं है। इसी तकनीक का इस्तेमाल आम लोगों की पहचान की नकल करने, फर्जी वीडियो तैयार करने या डिजिटल धोखाधड़ी जैसे उद्देश्यों के लिए भी किया जा सकता है।

यही वजह है कि AI से तैयार सामग्री में सहमति और पारदर्शिता को लेकर बहस लगातार तेज हो रही है।

AI की रचनात्मकता बनाम व्यक्ति की सहमति

Generative AI ने फिल्म निर्माण, विजुअल इफेक्ट्स, विज्ञापन और डिजिटल क्रिएटिव इंडस्ट्री के लिए कई नई संभावनाएं पैदा की हैं। ऐसे में AI तकनीक को अपने आप में समस्या मानना सही नहीं होगा।

असल सवाल इस बात का है कि किसी व्यक्ति की पहचान का इस्तेमाल उसकी अनुमति से किया गया है या नहीं।

स्पष्ट रूप से लेबल किए गए और सहमति के साथ तैयार AI कंटेंट तथा किसी व्यक्ति की पहचान का इस्तेमाल कर बनाया गया भ्रामक डीपफेक—दोनों में बड़ा अंतर है।

मृणाल ठाकुर की चेतावनी इसी सीमा को स्पष्ट करती है कि तकनीक उपलब्ध होने का मतलब यह नहीं है कि किसी व्यक्ति के चेहरे या पहचान का बिना अनुमति इस्तेमाल किया जा सकता है।

आगे क्या?

मृणाल ठाकुर ने अपनी चेतावनी के जरिए साफ कर दिया है कि उनकी पहचान से जुड़ा अनधिकृत AI या डीपफेक कंटेंट स्वीकार नहीं किया जाएगा और आगे ऐसा होने पर कानूनी रास्ता अपनाया जा सकता है।

यह मामला मनोरंजन जगत में AI के इस्तेमाल, डिजिटल पहचान और व्यक्तिगत सहमति को लेकर बढ़ती चिंता को एक बार फिर सामने लाता है।

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