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NCERT का बड़ा फैसला: अब कक्षा 9 से 12 तक के छात्र सीखेंगे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, AI का सुरक्षित इस्तेमाल भी होगा पढ़ाई का हिस्सा

NCERT AI Learning Module 2026: राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप तैयार नए मॉड्यूल में विद्यार्थियों को AI की बुनियादी समझ, डीपफेक की पहचान, डेटा प्राइवेसी और समस्याओं के समाधान की तकनीक सिखाई जाएगी। खास बात यह है कि सीमित डिजिटल सुविधाओं वाले स्कूलों में भी गतिविधियों के जरिए इसकी पढ़ाई संभव होगी।

NCERT का बड़ा फैसला: अब कक्षा 9 से 12 तक के छात्र सीखेंगे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, AI का सुरक्षित इस्तेमाल भी होगा पढ़ाई का हिस्सा
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द्वारा साधना गुप्ता

स्रोत: एनसीईआरटी, सीबीएसई ऐकडेमिक , हिंदुस्तान टाइम्स , the indian express

नई दिल्ली, 24 अक्टूबर 2026। भारत की स्कूली शिक्षा में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को शामिल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल हुई है। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने कक्षा 9 से 12 तक के विद्यार्थियों के लिए कंप्यूटेशनल थिंकिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर आधारित नया शिक्षण मॉड्यूल पेश किया है।

23 अक्टूबर 2026 को घोषित इस पहल का उद्देश्य छात्रों को केवल आधुनिक तकनीक से परिचित कराना नहीं, बल्कि उन्हें तार्किक सोच, रचनात्मकता और समस्याओं को सुलझाने की क्षमता विकसित करने में मदद देना भी है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के अनुरूप तैयार यह मॉड्यूल ऐसे विद्यार्थियों के लिए भी उपयोगी है, जिन्होंने पहले कभी AI या कंप्यूटर प्रोग्रामिंग नहीं सीखी है।

क्या है NCERT का नया AI लर्निंग मॉड्यूल?

NCERT का यह प्रारंभिक मॉड्यूल लगभग 20 घंटे की शिक्षण योजना पर आधारित है। इसमें विद्यार्थियों को समझाया जाएगा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कैसे काम करता है, मशीनें उपलब्ध डेटा से पैटर्न कैसे पहचानती हैं और रोजमर्रा के जीवन में इस तकनीक का इस्तेमाल कहां होता है।

इसका एक महत्वपूर्ण हिस्सा कंप्यूटेशनल थिंकिंग है। इसका अर्थ है किसी बड़ी समस्या को छोटे हिस्सों में बांटना, उपलब्ध जानकारी का विश्लेषण करना और व्यवस्थित तरीके से समाधान तक पहुंचना। इस प्रक्रिया का उद्देश्य विद्यार्थियों में स्वतंत्र सोच विकसित करना है, ताकि वे तकनीक का उपयोग समझदारी से कर सकें।

पांच हिस्सों में मिलेगी AI की व्यावहारिक जानकारी

नए मॉड्यूल में AI से जुड़े विषयों को पांच प्रमुख इकाइयों में व्यवस्थित किया गया है। शुरुआती हिस्से में छात्र समझेंगे कि स्मार्टफोन, ऑनलाइन सर्च, संगीत की सिफारिश करने वाले ऐप और दूसरी डिजिटल सेवाओं में AI कैसे इस्तेमाल होता है। इसके बाद उन्हें बताया जाएगा कि मशीनें उदाहरणों और डेटा से कैसे सीखती हैं तथा गलत या सीमित डेटा किसी AI सिस्टम के परिणाम को कैसे प्रभावित कर सकता है।

तीसरे हिस्से में AI की गलतियों, डीपफेक और भ्रामक सामग्री पर चर्चा होगी। चौथी इकाई डेटा सुरक्षा, सहमति और तकनीक के जिम्मेदार उपयोग से संबंधित है। अंतिम हिस्सा आधुनिक AI टूल्स को सही निर्देश देने और उनके जवाबों का मूल्यांकन करने पर केंद्रित है।

डीपफेक और फर्जी जानकारी पहचानना भी सीखेंगे बच्चे

आज सोशल मीडिया पर AI से तैयार तस्वीरें, वीडियो और संदेश तेजी से प्रसारित हो रहे हैं। कई बार ऐसी सामग्री वास्तविक दिखाई देती है, जबकि उसकी जानकारी गलत हो सकती है। इसी चुनौती को ध्यान में रखते हुए मॉड्यूल में तथ्य-जांच और डिजिटल जागरूकता को महत्व दिया गया है। विद्यार्थियों को समझाया जाएगा कि AI से मिला हर जवाब सही नहीं होता। कभी-कभी तकनीक आत्मविश्वास के साथ ऐसी जानकारी भी प्रस्तुत कर सकती है, जिसका वास्तविक आधार नहीं होता। इसलिए छात्रों को जानकारी साझा करने से पहले उसकी विश्वसनीयता जांचने और जरूरत पड़ने पर भरोसेमंद स्रोतों से पुष्टि करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।

डेटा प्राइवेसी और डिजिटल सुरक्षा पर विशेष जोर

मॉड्यूल का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य विद्यार्थियों को अपनी निजी जानकारी सुरक्षित रखना सिखाना है। छात्रों को पासवर्ड, ओटीपी, आधार या पैन से संबंधित संवेदनशील विवरण और व्यक्तिगत दस्तावेज AI टूल्स पर साझा करने के जोखिम समझाए जाएंगे। इसके अलावा वे जानेंगे कि डिजिटल सेवाएं किस प्रकार व्यक्तिगत डेटा एकत्र करती हैं और इस जानकारी का इस्तेमाल कैसे किया जा सकता है। पाठ्य सामग्री में निष्पक्षता, सहमति और भारत के डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 से जुड़े विषयों का भी परिचय दिया गया है।

बिना कंप्यूटर और इंटरनेट के भी संभव होगी पढ़ाई

इस पहल की एक खास बात इसकी गतिविधि-आधारित शिक्षण व्यवस्था है। NCERT के अनुसार, मॉड्यूल की कई गतिविधियां डिजिटल उपकरणों के साथ या उनके बिना भी आयोजित की जा सकती हैं। शिक्षक कक्षा में समूह चर्चा, कागज पर अभ्यास, उदाहरणों और समस्या-समाधान गतिविधियों के जरिए अवधारणाएं समझा सकेंगे। जहां कंप्यूटर उपलब्ध होंगे, वहां विद्यार्थी डिजिटल प्रयोग कर सकेंगे। सीमित संसाधनों वाले स्कूलों में शिक्षक प्रदर्शन और ऑफलाइन गतिविधियों का सहारा ले सकेंगे। हालांकि, सभी विद्यालयों तक प्रभावी पहुंच सुनिश्चित करने के लिए शिक्षकों का प्रशिक्षण और पर्याप्त शिक्षण सामग्री महत्वपूर्ण होगी।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 से कैसे जुड़ी है पहल?

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में तकनीकी जागरूकता, गणितीय चिंतन और नए कौशल को स्कूली शिक्षा का हिस्सा बनाने पर जोर दिया गया है। सरकार ने पहले भी कंप्यूटेशनल थिंकिंग और AI को शुरुआती कक्षाओं तक पहुंचाने की दिशा में कदम उठाए हैं।

CBSE के अप्रैल 2026 के दिशा-निर्देशों में कक्षा 9 से 12 के लिए NCERT मॉड्यूल को शैक्षणिक सत्र 2026-27 में आंतरिक मूल्यांकन से जोड़ने का प्रावधान बताया गया था। हालांकि, इसे सभी शिक्षा बोर्डों में एक समान नए अनिवार्य विषय की घोषणा मानना सही नहीं होगा। वास्तविक पढ़ाई और मूल्यांकन संबंधित बोर्ड तथा विद्यालय के दिशा-निर्देशों पर निर्भर करेंगे।

विद्यार्थियों के भविष्य पर क्या होगा असर?

AI का उपयोग अब शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, उद्योग और डिजिटल सेवाओं जैसे अनेक क्षेत्रों में बढ़ रहा है। ऐसे वातावरण में छात्रों के लिए केवल तकनीक चलाना जानना पर्याप्त नहीं है। उन्हें यह भी समझना होगा कि AI के परिणाम कैसे बनते हैं, उनकी सीमाएं क्या हैं और कब मानवीय निर्णय जरूरी होता है। नया मॉड्यूल विद्यार्थियों में तार्किक सोच, रचनात्मकता और डिजिटल जिम्मेदारी बढ़ाने में मदद कर सकता है। लेकिन इसका वास्तविक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि स्कूल इसे कितनी प्रभावी तरीके से पढ़ाते हैं और विद्यार्थियों को कितने व्यावहारिक अवसर मिलते हैं।

निष्कर्ष: तकनीक के साथ स्वतंत्र सोच पर जोर

NCERT की यह पहल भारतीय शिक्षा व्यवस्था में AI साक्षरता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इसका मूल संदेश है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस विद्यार्थियों की समझ और रचनात्मकता को मजबूत करने वाला साधन बने, उनकी स्वतंत्र सोच का विकल्प नहीं। यदि मॉड्यूल को प्रभावी ढंग से लागू किया गया, तो विद्यार्थियों को नई तकनीक समझने के साथ उसका सुरक्षित, जिम्मेदार और विवेकपूर्ण उपयोग सीखने का अवसर मिलेगा।

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