यह दो दिवसीय कार्यक्रम 27 और 28 अक्टूबर 2026 को AISSMS Institute of Information Technology (IOIT), पुणे में आयोजित किया गया। संस्थान के आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एंड डेटा साइंस विभाग ने इस समिट का आयोजन किया था। इसका मुख्य उद्देश्य छात्रों में रिसर्च और इनोवेशन को बढ़ावा देना तथा शिक्षा जगत और टेक्नोलॉजी इंडस्ट्री के बीच सहयोग को मजबूत करना था।
54 प्रोजेक्ट्स में दिखी AI की नई संभावनाएं
AI Summit 2026 का सबसे बड़ा आकर्षण छात्रों द्वारा प्रस्तुत किए गए 54 प्रोजेक्ट रहे। इन प्रोजेक्ट्स के जरिए विद्यार्थियों ने दिखाया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल केवल चैटबॉट या फोटो बनाने तक सीमित नहीं है। इसकी मदद से शहरों के प्रबंधन, पर्यावरण संरक्षण, डेटा विश्लेषण और कई वास्तविक समस्याओं के समाधान तलाशे जा सकते हैं। समिट में स्मार्ट सिटी और सस्टेनेबिलिटी से जुड़े विचारों के साथ कंप्यूटर विजन, जनरेटिव AI, एक्सप्लेनेबल AI, एज AI और लार्ज लैंग्वेज मॉडल पर आधारित प्रोजेक्ट भी शामिल रहे।
इन तकनीकों का महत्व तेजी से बढ़ रहा है। उदाहरण के लिए, कंप्यूटर विजन की मदद से मशीनें तस्वीरों और वीडियो में मौजूद वस्तुओं को पहचान सकती हैं। जनरेटिव AI नए टेक्स्ट, तस्वीरें और दूसरी डिजिटल सामग्री तैयार कर सकता है। वहीं, एक्सप्लेनेबल AI का उद्देश्य यह समझाना है कि किसी AI सिस्टम ने कोई विशेष परिणाम या निर्णय क्यों दिया। इस तरह के प्रोजेक्ट छात्रों को केवल तकनीक सीखने का ही नहीं, बल्कि उसे वास्तविक परिस्थितियों में लागू करने का अनुभव भी देते हैं।
Agentic AI बना समिट का प्रमुख विषय
कार्यक्रम में सबसे ज्यादा चर्चा Agentic AI को लेकर हुई। इसी विषय पर 'Agentic AI: The Next Frontier of Intelligent Systems' नाम से विशेष कीनोट सत्र आयोजित किया गया। Agentic AI ऐसी तकनीक है जिसमें AI सिस्टम केवल सवालों के जवाब देने तक सीमित नहीं रहता, बल्कि किसी निर्धारित लक्ष्य को पूरा करने के लिए कई चरणों में काम करने की योजना बना सकता है। जरूरत पड़ने पर यह अलग-अलग डिजिटल टूल्स का इस्तेमाल करके काम को आगे बढ़ा सकता है।
उदाहरण के तौर पर, सामान्य AI किसी उपयोगकर्ता को यात्रा की जानकारी दे सकता है, जबकि एजेंटिक AI को उचित अनुमति और उपलब्ध टूल्स मिलने पर यात्रा की योजना बनाने, विकल्पों की तुलना करने और अलग-अलग चरणों में सहायता करने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। हालांकि, ऐसे सिस्टम में मानवीय निगरानी, डेटा सुरक्षा और सही अनुमति बेहद जरूरी हैं। यही कारण है कि AI Summit में नई तकनीकों के साथ उनके जिम्मेदार इस्तेमाल पर भी चर्चा की गई।
AI Innovation Challenge में तीन टीमों ने जीते पुरस्कार
समिट का एक महत्वपूर्ण हिस्सा AI Innovation Challenge 2026 रहा, जिसका आयोजन 28 अक्टूबर को किया गया। इसमें छात्रों ने अपने प्रोजेक्ट प्रस्तुत किए और उनके विचारों तथा नवाचार को परखा गया। प्रतियोगिता में विजेता टीमों को नकद पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया।
पहला पुरस्कार ₹10,000 का Safiya Khan और Yashas Salian की टीम को मिला। उनकी परियोजना का नाम 'Brains Behind Brands' था।
दूसरा पुरस्कार ₹5,000 का Shrushti Pardeshi, Aditya Pawar और Shriharsh Pisal की टीम को उनके प्रोजेक्ट 'Code Catalyst' के लिए दिया गया।
वहीं, तीसरा पुरस्कार ₹3,000 का Gargee Bhanage, Dinesh Seervi और Siddhi Pansare की टीम ने अपने प्रोजेक्ट 'Curio' के लिए हासिल किया।
इन पुरस्कारों का उद्देश्य छात्रों के तकनीकी विचारों और रचनात्मक प्रयासों को प्रोत्साहित करना था। प्रतियोगिता ने विद्यार्थियों को अपने काम को विशेषज्ञों के सामने प्रस्तुत करने और उससे जुड़ी प्रतिक्रिया प्राप्त करने का अवसर भी दिया।
साइबर सिक्योरिटी पर भी हुई चर्चा
AI के बढ़ते इस्तेमाल के साथ साइबर सुरक्षा से जुड़े खतरे भी तेजी से बदल रहे हैं। डीपफेक, AI आधारित फिशिंग, पहचान की चोरी और ऑटोमेटेड साइबर हमलों जैसी चुनौतियां डिजिटल दुनिया के लिए चिंता का विषय बन रही हैं।
इसी मुद्दे को ध्यान में रखते हुए समिट में 'Cybersecurity in AI' विषय पर ऑनलाइन पैनल चर्चा आयोजित की गई। इसमें AI के कारण बदलते डिजिटल खतरों और नई तकनीकों को सुरक्षित तरीके से अपनाने की जरूरत पर चर्चा हुई।
AI सिस्टम जितने अधिक सक्षम हो रहे हैं, उनकी सुरक्षा और जवाबदेही उतनी ही महत्वपूर्ण होती जा रही है। इसलिए भविष्य के AI विशेषज्ञों के लिए केवल कोडिंग और मॉडल बनाना ही नहीं, बल्कि साइबर सुरक्षा और जिम्मेदार तकनीकी विकास को समझना भी जरूरी है।
उद्योग जगत के विशेषज्ञों की रही मौजूदगी
AI Summit 2026 का उद्घाटन BMC Helix के डायरेक्टर – टेक्निकल सपोर्ट Vivyek Kanchan और VOIS के जनरल मैनेजर Sandeep Kumar की मौजूदगी में हुआ। कार्यक्रम का आयोजन AISSMS Society के सचिव Chhatrapati Maloji Raje, संस्थान के प्राचार्य Dr. Pradeep B. Mane और AI एवं डेटा साइंस विभाग के प्रमुख Dr. R. A. Jamadar के मार्गदर्शन में किया गया।
Artificial Intelligence Student Association (AISA) ने इस कार्यक्रम के समन्वय की जिम्मेदारी संभाली। संस्थान के अनुसार, इस समिट ने छात्रों को इंडस्ट्री के विशेषज्ञों से बातचीत करने, अपने विचार प्रस्तुत करने और AI के व्यावहारिक इस्तेमाल को समझने का अवसर दिया।
पुणे के छात्रों के लिए AI में नए अवसर
भारत में AI और डेटा साइंस के क्षेत्र में कुशल युवाओं की मांग बढ़ रही है। ऐसे समय में कॉलेज स्तर पर आयोजित होने वाले टेक्नोलॉजी समिट छात्रों को अपनी प्रतिभा दिखाने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान कर सकते हैं।
AI Summit 2026 में प्रस्तुत 54 प्रोजेक्ट इस बात का संकेत हैं कि विद्यार्थी अब केवल पाठ्यक्रम तक सीमित नहीं रहना चाहते, बल्कि वास्तविक समस्याओं को समझकर तकनीकी समाधान विकसित करने में भी रुचि ले रहे हैं।
हालांकि, किसी प्रोजेक्ट का प्रदर्शन अपने आप में व्यावसायिक सफलता या बड़े स्तर पर लागू होने की गारंटी नहीं है। इसके लिए तकनीकी परीक्षण, डेटा की गुणवत्ता, सुरक्षा, लागत और वास्तविक उपयोगकर्ताओं की जरूरतों को समझना जरूरी होगा।
कुल मिलाकर, पुणे का AI Summit 2026 छात्रों के लिए नई तकनीकों को समझने और अपने विचारों को सामने लाने का महत्वपूर्ण मंच रहा। 54 प्रोजेक्ट्स, Agentic AI पर चर्चा और साइबर सुरक्षा जैसे विषयों ने यह दिखाया कि आने वाले समय में AI की दुनिया में कॉलेजों और युवा इनोवेटर्स की भूमिका भी बेहद अहम होने वाली है।
