कोइटा फाउंडेशन के सह-संस्थापक रिज़वान कोइटा का कहना है कि स्वास्थ्य सेवाओं में डिजिटल तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उपयोग भविष्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, लेकिन इसे लागू करना आसान नहीं है। उनके अनुसार, स्वास्थ्य क्षेत्र में मरीजों के संवेदनशील डेटा की सुरक्षा, गोपनीयता, विभिन्न अस्पतालों और स्वास्थ्य संस्थानों के अलग-अलग डिजिटल सिस्टम तथा कड़े नियामकीय मानकों के कारण AI आधारित समाधान विकसित करना और उन्हें बड़े स्तर पर लागू करना अन्य क्षेत्रों की तुलना में अधिक जटिल हो जाता है।
उन्होंने कहा कि AI का उपयोग रोगों की पहचान, मेडिकल इमेजिंग, उपचार योजना, अस्पताल प्रबंधन और मरीजों की देखभाल को बेहतर बनाने में किया जा सकता है। हालांकि, इन तकनीकों को सफल बनाने के लिए मजबूत डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, उच्च गुणवत्ता वाले डेटा, प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों और विभिन्न संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता होती है। बिना इन आधारभूत व्यवस्थाओं के AI का प्रभावी उपयोग संभव नहीं है।
रिज़वान कोइटा ने यह भी कहा कि भारत में डिजिटल हेल्थ इकोसिस्टम तेजी से विकसित हो रहा है और आने वाले वर्षों में AI स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ, तेज़ और सटीक बनाने में अहम भूमिका निभा सकता है। उनका मानना है कि सरकार, निजी क्षेत्र, अस्पतालों और टेक्नोलॉजी कंपनियों के सहयोग से स्वास्थ्य सेवाओं में डिजिटल परिवर्तन को गति दी जा सकती है, जिससे मरीजों को बेहतर और अधिक प्रभावी चिकित्सा सुविधाएं मिल सकेंगी।
