मुंबई: अभिनेता आयुष्मान खुराना का मानना है कि मनोरंजन की दुनिया में स्टार बनने का अर्थ तेजी से बदल रहा है। सोशल मीडिया, YouTube और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अपनी अलग पहचान बनाने वाले creators के उभार ने स्टारडम को केवल फिल्मी सितारों तक सीमित नहीं रहने दिया है। उन्होंने यह विचार मुंबई में आयोजित FICCI Frames 2026 के दौरान साझा किए।
अब एक ही तरह का ‘स्टार’ नहीं
FICCI Frames के सत्र ‘Cinema at Crossroads – The Rules of the Big Screen’ में आयुष्मान ने कहा कि आज मनोरंजन कई अलग-अलग दुनिया में बंट चुका है। Influencers और YouTubers के अपने दर्शक हैं और इनमें से कई creators अपने समुदायों के बीच बड़े सितारों जैसी लोकप्रियता रखते हैं।
उनका तर्क था कि इसी बदलाव के कारण स्टारडम अब पहले की तरह किसी सीमित समूह तक नहीं रह गया है। किसी व्यक्ति की लोकप्रियता एक audience के बीच बहुत बड़ी हो सकती है, जबकि दूसरी audience उससे परिचित भी न हो।
यानी डिजिटल दौर में लोकप्रियता का पैमाना पहले की तुलना में कहीं अधिक fragmented हो गया है।
आयुष्मान के लिए ‘स्क्रिप्ट ही स्टार’
आयुष्मान ने स्टार पावर के साथ फिल्म की कहानी के महत्व पर भी जोर दिया। उनके मुताबिक फिल्म को दर्शकों तक पहुंचाने में केवल अभिनेता का नाम पर्याप्त नहीं है; कहानी और विषय की प्रामाणिकता भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
उन्होंने कहा कि अपने करियर की शुरुआत से ही उनका विश्वास रहा है कि कहानी अभिनेता से बड़ी होनी चाहिए। अलग-अलग genres में काम करने के बाद अब वह फिर ऐसी कहानियों की ओर लौटना चाहते हैं जिनमें authenticity प्रमुख हो।
‘Udta Teer’ को बताया अपनी जड़ों की ओर वापसी
इस चर्चा के दौरान आयुष्मान ने अपनी आगामी spy comedy ‘Udta Teer’ का भी जिक्र किया।
उन्होंने फिल्म को अपनी मूल storytelling sensibility की ओर वापसी से जोड़ा। उनका कहना था कि दर्शकों के सामने authentic subject पेश करना आज भी उन्हें सिनेमाघरों तक खींचने की क्षमता रखता है।
यह विचार आयुष्मान के उस फिल्मी सफर से भी मेल खाता है जिसमें उन्होंने पारंपरिक commercial formulas के साथ-साथ अलग विषयों वाली फिल्मों में लगातार प्रयोग किए हैं।
दर्शकों से जुड़े रहना क्यों जरूरी मानते हैं आयुष्मान?
आयुष्मान ने अपनी radio और television background का जिक्र करते हुए बताया कि लोगों के साथ संवाद उनके लिए महत्वपूर्ण है।
उनके अनुसार उनकी कई कहानियां जमीनी जीवन से जुड़ी होती हैं, इसलिए आम लोगों के संपर्क में रहना उन्हें बतौर कलाकार अपनी संवेदनशीलता बनाए रखने में मदद करता है।
यह दृष्टिकोण उस पुराने superstar model से अलग है जिसमें रहस्य और सीमित public access को अक्सर स्टार की छवि का हिस्सा माना जाता था।
Sriram Raghavan ने भी audience connection पर दिया जोर
चर्चा में फिल्म निर्देशक Sriram Raghavan भी मौजूद थे, जिन्होंने आयुष्मान के साथ 2018 की फिल्म Andhadhun में काम किया था।
राघवन ने theatrical success को केवल फिल्म के scale से जोड़ने के बजाय audience connection को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने Andhadhun को उदाहरण के तौर पर याद किया, जिसे भारत के बाद चीन में भी उल्लेखनीय दर्शक प्रतिक्रिया मिली थी।
Andhadhun के sequel के सवाल पर राघवन ने संकेत दिया कि वह अगली फिल्म तभी बनाना चाहेंगे जब उन्हें ऐसी उपयुक्त कहानी मिले जो पहली फिल्म की विरासत को नुकसान न पहुंचाए।
छोटे बजट की फिल्मों के लिए भी अवसर
आयुष्मान ने चर्चा में छोटे बजट की फिल्मों का भी उल्लेख किया और कहा कि बड़े scale के बिना भी दर्शकों से मजबूत जुड़ाव बनाया जा सकता है।
उनका जोर ऐसी फिल्मों पर था जिनका बजट नियंत्रित हो और जिनकी कहानी audience से प्रभावी तरीके से जुड़ सके।
क्यों महत्वपूर्ण है आयुष्मान का बयान?
आयुष्मान का बयान बॉलीवुड में हो रहे व्यापक बदलाव की ओर इशारा करता है। पहले ‘स्टार’ की पहचान मुख्य रूप से फिल्मों, बॉक्स ऑफिस और बड़े पर्दे की लोकप्रियता से जुड़ी होती थी। आज YouTube, Instagram और दूसरे digital platforms ने creators को सीधे अपनी audience बनाने का अवसर दिया है।
हालांकि इसका अर्थ यह नहीं है कि पारंपरिक फिल्म स्टार की अहमियत समाप्त हो गई है। बड़े अभिनेताओं की theatrical pull और mainstream visibility अब भी entertainment business का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
बदलाव मुख्य रूप से यह है कि attention अब केवल एक माध्यम के पास नहीं है।
फिल्म अभिनेता, YouTubers, influencers और दूसरे digital creators अलग-अलग audience communities में एक साथ प्रभावशाली हो सकते हैं। इसी संदर्भ में आयुष्मान का ‘स्टारडम अब exclusive club नहीं है’ वाला विचार आधुनिक entertainment ecosystem में लोकप्रियता की बदलती परिभाषा को सामने रखता है।
