उनके निधन की खबर सामने आने के बाद फिल्म इंडस्ट्री के कई कलाकारों, निर्देशकों और निर्माताओं ने सोशल मीडिया के जरिए उन्हें याद किया। अभिनेता संजय दत्त से लेकर अभिषेक बच्चन और राकेश रोशन तक कई फिल्मी हस्तियां उनके अंतिम दर्शन के लिए पहुंचीं। तीन दशक से अधिक समय तक सिनेमा में सक्रिय रहने वाले संजय गुप्ता का जाना हिंदी फिल्म जगत के लिए एक बड़ी क्षति माना जा रहा है।
कैसे हुआ संजय गुप्ता का निधन? मुंबई पुलिस कर रही है जांच
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, संजय गुप्ता 30 अक्टूबर की रात मुंबई के वर्सोवा स्थित अपने घर में दुर्घटनावश गिर गए थे। शुरुआती पुलिस जानकारी के मुताबिक, वह घर के किचन में फिसलकर गिर पड़े थे, जिससे उनके सिर में गंभीर चोट आई। हादसे के समय उनकी पत्नी, दोनों बेटे और घर में काम करने वाला एक सहायक भी मौजूद थे, लेकिन घटना का पता तुरंत नहीं चल पाया।
परिवार के सदस्यों को बाद में उनके घायल होने की जानकारी मिली। इसके बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इस घटना के बाद वर्सोवा पुलिस ने आकस्मिक मृत्यु रिपोर्ट (ADR) दर्ज की और मामले की जांच शुरू की।
मुंबई पुलिस के अधिकारियों के अनुसार, शुरुआती जांच में परिवार ने किसी तरह की संदिग्ध गतिविधि की आशंका नहीं जताई है। हालांकि, हादसे की परिस्थितियों को समझने के लिए पुलिस अपनी प्रक्रिया के तहत जांच कर रही है। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर इसे दुर्घटनावश हुई मौत माना जा रहा है।
1994 में शुरू हुआ था फिल्मी सफर, 'आतिश' से किया निर्देशन में डेब्यू
संजय गुप्ता ने हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में अपनी पहचान बनाने के लिए लंबे समय तक मेहनत की थी। उन्होंने साल 1994 में फिल्म 'आतिश: फील द फायर' से निर्देशन की दुनिया में कदम रखा। इस फिल्म में संजय दत्त, आदित्य पंचोली और रवीना टंडन जैसे कलाकार नजर आए थे।
शुरुआती दौर से ही संजय गुप्ता को एक्शन, अपराध और गैंगस्टर आधारित कहानियों में दिलचस्पी थी। उन्होंने अपनी फिल्मों में मुंबई की अंडरवर्ल्ड दुनिया, गैंगवार, बदले और अपराध की कहानियों को एक अलग सिनेमाई अंदाज में पेश किया।
साल 1995 में उन्होंने 'राम शास्त्र' और बाद में 'जंग' तथा 'खौफ' जैसी फिल्मों के जरिए निर्देशन का अनुभव बढ़ाया। धीरे-धीरे उनकी पहचान ऐसे फिल्मकार के रूप में बनने लगी, जो पारंपरिक कहानी कहने के तरीके से अलग एक्शन और सस्पेंस को पर्दे पर उतारना पसंद करते थे।
'कांटे' से मिली खास पहचान, संजय दत्त के साथ रही यादगार साझेदारी
संजय गुप्ता के करियर की सबसे चर्चित फिल्मों में साल 2002 में रिलीज हुई 'कांटे' का नाम प्रमुखता से लिया जाता है। इस फिल्म में अमिताभ बच्चन, संजय दत्त, सुनील शेट्टी और कई अन्य कलाकार शामिल थे।
फिल्म की कहानी अपराध की दुनिया से जुड़े कुछ लोगों के इर्द-गिर्द घूमती है, जो एक बड़ी बैंक डकैती की योजना बनाते हैं। फिल्म की स्टाइलिश सिनेमैटोग्राफी, संवाद और एक्शन ने दर्शकों के बीच इसे अलग पहचान दिलाई।
इसके बाद उन्होंने 'मुसाफिर' (2004) और 'जिंदा' (2006) जैसी फिल्मों का निर्देशन किया। अभिनेता संजय दत्त के साथ उनका पेशेवर रिश्ता भी काफी चर्चित रहा। दोनों ने कई फिल्मों में साथ काम किया और उनकी जोड़ी ने हिंदी सिनेमा को कई यादगार प्रोजेक्ट दिए।
संजय गुप्ता की फिल्मों में तेज रफ्तार कहानी, दमदार किरदार और शहरी अपराध की दुनिया का प्रभाव साफ दिखाई देता था। यही वजह थी कि उनकी फिल्में मुख्यधारा के बॉलीवुड से कुछ अलग अंदाज रखती थीं।
'शूटआउट' सीरीज और 'काबिल' जैसी फिल्मों से बनाई अलग पहचान
संजय गुप्ता के करियर में 'शूटआउट' फ्रेंचाइजी का भी खास स्थान रहा। साल 2007 में रिलीज हुई 'शूटआउट एट लोखंडवाला' में उन्होंने निर्माता और सह-लेखक के रूप में काम किया था। इस फिल्म का निर्देशन अपूर्व लाखिया ने किया था। फिल्म मुंबई के चर्चित लोखंडवाला एनकाउंटर पर आधारित थी और बॉक्स ऑफिस पर इसे अच्छी प्रतिक्रिया मिली थी।
इसके बाद संजय गुप्ता ने 2013 में 'शूटआउट एट वडाला' का निर्देशन किया। यह फिल्म मुंबई के गैंगस्टर मान्या सुर्वे और 1982 के वडाला पुलिस एनकाउंटर की कहानी पर आधारित थी। जॉन अब्राहम, अनिल कपूर और कंगना रनौत जैसे कलाकारों ने इसमें महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाईं।
उन्होंने अपने करियर में केवल क्राइम और एक्शन फिल्मों तक खुद को सीमित नहीं रखा। ऐश्वर्या राय बच्चन की 'जज्बा' और ऋतिक रोशन तथा यामी गौतम की 'काबिल' जैसी फिल्मों के जरिए उन्होंने अलग-अलग विषयों पर भी काम किया। इसके अलावा 'एसिड फैक्ट्री', 'दस कहानियां' और 'मुंबई सागा' भी उनकी उल्लेखनीय फिल्मों में शामिल हैं।
व्हाइट फेदर फिल्म्स के जरिए भी दिया योगदान
निर्देशन के अलावा संजय गुप्ता ने फिल्म निर्माण के क्षेत्र में भी अपनी अलग पहचान बनाई। उन्होंने साल 2001 में व्हाइट फेदर फिल्म्स नाम से अपना प्रोडक्शन हाउस शुरू किया था। इस बैनर के तहत उन्होंने कई फिल्मों के निर्माण में योगदान दिया।
उनकी हालिया फिल्मों में 'द मिरांडा ब्रदर्स' (2024) और 'विस्फोट' (2024) का नाम शामिल है। 'द मिरांडा ब्रदर्स' में हर्षवर्धन राणे और मीजान जाफरी नजर आए थे, जबकि 'विस्फोट' में रितेश देशमुख और फरदीन खान ने अभिनय किया था।
संजय गुप्ता का फिल्म निर्माण के प्रति जुनून उनकी फिल्मों में साफ नजर आता था। वह कहानी, किरदारों और पर्दे पर दिखाए जाने वाले एक्शन को लेकर अपनी अलग सोच रखते थे।
संजय दत्त, अभिषेक बच्चन और मिका सिंह ने जताया दुख
संजय गुप्ता के निधन की खबर से फिल्म जगत के कई कलाकार भावुक हो गए। फिल्म निर्माता अशोक पंडित ने सबसे पहले सोशल मीडिया पर उनके निधन की जानकारी साझा की और उन्हें एक बेहतरीन कहानीकार तथा जुनूनी फिल्मकार बताया।
गायक मिका सिंह ने भी संजय गुप्ता को याद करते हुए भावुक पोस्ट लिखी। उन्होंने उन्हें अपना गॉडफादर बताया और कहा कि संजय गुप्ता ने उन्हें बॉलीवुड में पहला बड़ा मौका दिया था। मिका को फिल्म 'शूटआउट एट लोखंडवाला' के गाने 'गणपत' से बॉलीवुड में पहचान मिली थी।
अभिनेता हर्षवर्धन राणे ने भी उनके साथ काम करने के अनुभव साझा किए। उन्होंने फिल्म 'द मिरांडा ब्रदर्स' की शूटिंग के दौरान बिताए पलों को याद करते हुए बताया कि संजय गुप्ता परिवार से बेहद प्यार करने वाले और सेट पर खुशमिजाज इंसान थे।
मुंबई में हुआ अंतिम संस्कार, कई सितारे पहुंचे श्रद्धांजलि देने
31 अक्टूबर 2026 को मुंबई के वर्सोवा श्मशान घाट में संजय गुप्ता का अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान उनके परिवार के सदस्यों और फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े करीबी लोगों ने उन्हें अंतिम विदाई दी।
अभिषेक बच्चन, मनोज बाजपेयी, राजपाल यादव, राकेश रोशन, विवेक अग्निहोत्री और कई अन्य फिल्मी हस्तियां उनके अंतिम संस्कार में शामिल हुईं। उनके बेटे शिवांश ने मुखाग्नि दी। अंतिम संस्कार के दौरान माहौल काफी भावुक रहा। फिल्म जगत के लोगों ने उन्हें एक प्रतिभाशाली निर्देशक और अच्छे इंसान के रूप में याद किया।
हिंदी सिनेमा में हमेशा याद किए जाएंगे संजय गुप्ता
संजय गुप्ता का जाना केवल एक निर्देशक का दुनिया से चले जाना नहीं है, बल्कि हिंदी सिनेमा के उस दौर का भी अंत है, जिसमें एक्शन, अपराध और गैंगस्टर कहानियों को एक अलग अंदाज में प्रस्तुत किया गया।
उन्होंने अपने करियर में कई ऐसे किरदार और फिल्में दर्शकों को दीं, जिन्हें लंबे समय तक याद किया जाएगा। 'कांटे', 'जिंदा', 'मुसाफिर' और 'शूटआउट एट वडाला' जैसी फिल्मों के जरिए उन्होंने अपनी एक अलग सिनेमाई पहचान बनाई।
भले ही संजय गुप्ता अब हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके निर्देशन में बनी फिल्में और हिंदी सिनेमा में उनका योगदान हमेशा याद किया जाएगा। फिल्म इंडस्ट्री के लिए उनका अचानक जाना एक ऐसी क्षति है, जिसकी भरपाई आसान नहीं होगी।
