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दिशा सालियान केस में नया मोड़: वकील ने CBI को सौंपा नया सबूत, कस्टोडियल पूछताछ की मांग

दिशा सालियान की 2020 में हुई मौत की जांच में नया घटनाक्रम सामने आया है। उनके पिता सतीश सालियान का प्रतिनिधित्व कर रहे वकील नीलेश ओझा ने CBI को एक नया दस्तावेज सौंपने का दावा किया है। यह दस्तावेज पूर्व पुलिस अधिकारी सचिन वाझे की जून 2020 में हुई बहाली से संबंधित बताया गया है। वकील ने इस बहाली को लेकर सवाल उठाए हैं और हाई कोर्ट में नई याचिका दाखिल करने की बात कही है। हालांकि, वकील द्वारा लगाए गए गंभीर आरोप अभी जांच का विषय हैं और उन्हें साबित तथ्य नहीं माना जा सकता।

दिशा सालियान केस में नया मोड़: वकील ने CBI को सौंपा नया सबूत, कस्टोडियल पूछताछ की मांग
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द्वारा जीत निर्मल

स्रोत: Hindustan Times/ANI और अन्य समकालीन रिपोर्ट्स; आरोपों को स्वतंत्र रूप से स्थापित तथ्य नहीं माना गया है।

शा सालियान की मौत की जांच में उनके पिता सतीश सालियान के वकील नीलेश ओझा ने नया सबूत मिलने का दावा किया है।

ओझा के अनुसार, यह एक रिपोर्ट है जो गृह मंत्रालय को सौंपी गई थी और इसमें पूर्व पुलिस अधिकारी सचिन वाझे की सेवा में बहाली से संबंधित जानकारी मौजूद है।

उन्होंने कहा कि इस दस्तावेज सहित संबंधित जानकारी CBI को सौंप दी गई है।

सचिन वाझे की बहाली पर उठाए सवाल

ओझा के मुताबिक, रिपोर्ट में कहा गया है कि सचिन वाझे को 5 जून 2020 को सेवा में बहाल किया गया और Crime Intelligence Unit यानी CIU में नियुक्त किया गया।

वकील ने दावा किया कि नियुक्ति की प्रक्रिया और वाझे की रैंक को लेकर नियमों से जुड़े सवाल हैं।

इसके आधार पर उन्होंने वाझे की बहाली और दिशा सालियान की मौत के आसपास के घटनाक्रम के बीच संबंध होने का आरोप लगाया है।

हालांकि, यह महत्वपूर्ण है कि ये ओझा द्वारा लगाए गए आरोप हैं। किसी अदालत या जांच एजेंसी ने इस आधार पर आपराधिक साजिश को अंतिम रूप से स्थापित नहीं किया है।

कस्टोडियल पूछताछ की मांग

ओझा ने कहा कि CBI को भेजे गए पत्र में कई मांगें भी रखी गई हैं।

उनके मुताबिक, वे हाई कोर्ट में नई याचिका दाखिल करने की तैयारी कर रहे हैं। इसमें मामले से जुड़े आरोपियों की तत्काल कस्टोडियल पूछताछ और जांच को हाई कोर्ट की निगरानी में आगे बढ़ाने की मांग की जा सकती है।

अब यह जांच एजेंसी और अदालत पर निर्भर करेगा कि प्रस्तुत सामग्री का कानूनी और साक्ष्य संबंधी महत्व कितना है।

दिशा सालियान की मौत कब हुई थी?

दिशा सालियान मनोरंजन उद्योग में सेलिब्रिटी मैनेजर के रूप में काम कर चुकी थीं और कुछ समय के लिए अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत से भी पेशेवर रूप से जुड़ी थीं।

जून 2020 में मुंबई के मलाड इलाके की एक ऊंची इमारत से गिरने के बाद उनकी मौत हो गई थी।

मामले की शुरुआती जांच मुंबई पुलिस ने की थी। पुलिस जांच में उनकी मौत के पीछे किसी आपराधिक साजिश का प्रमाण नहीं मिलने की बात सामने आई थी।

बाद में महाराष्ट्र सरकार द्वारा गठित Special Investigation Team (SIT) ने भी मामले की जांच की।

छह साल बाद CBI जांच तक कैसे पहुंचा मामला?

मामले में बड़ा कानूनी बदलाव तब आया जब दिशा के पिता सतीश सालियान ने उनकी मौत की परिस्थितियों को लेकर नए सिरे से जांच की मांग की।

2026 में बॉम्बे हाई कोर्ट के निर्देश के बाद CBI ने FIR दर्ज कर मामले की जांच शुरू की।

इससे जांच एक नए चरण में पहुंच गई, जिसमें केंद्रीय एजेंसी पहले की जांच, उपलब्ध दस्तावेजों और शिकायतकर्ता की ओर से उठाए गए बिंदुओं की पड़ताल कर रही है।

नया सबूत क्यों महत्वपूर्ण हो सकता है?

किसी भी पुराने मामले में नया दस्तावेज तभी महत्वपूर्ण साबित होता है जब उसकी प्रामाणिकता की पुष्टि हो और उसका जांच के मुख्य घटनाक्रम से स्पष्ट संबंध स्थापित किया जा सके।

इस मामले में वकील का कहना है कि सचिन वाझे की बहाली से जुड़ा दस्तावेज जांच के लिए प्रासंगिक है।

लेकिन केवल किसी दस्तावेज का CBI को सौंपा जाना उसमें लगाए गए आरोपों को प्रमाणित नहीं करता।

जांच एजेंसी को दस्तावेज की उत्पत्ति, प्रामाणिकता, संदर्भ और मामले से उसके वास्तविक संबंध की जांच करनी होगी।

पुराने निष्कर्ष और नए आरोप—दोनों को समझना जरूरी

इस मामले में दो अलग-अलग पहलुओं को स्पष्ट रूप से अलग रखना जरूरी है।

पहला, पहले की पुलिस जांच और SIT की पड़ताल में दिशा सालियान की मौत में आपराधिक साजिश के प्रमाण नहीं मिलने की बात सामने आई थी।

दूसरा, दिशा के पिता और उनके वकील इन निष्कर्षों से असहमत रहे हैं और अब CBI के सामने अतिरिक्त सामग्री और आरोप रख रहे हैं।

CBI की मौजूदा जांच का उद्देश्य उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर इन पहलुओं की स्वतंत्र रूप से जांच करना है।

संतुलित विश्लेषण

नए दस्तावेज का सामने आना अपने आप में किसी आरोप को साबित नहीं करता, लेकिन अगर जांच एजेंसी उसे प्रासंगिक और प्रमाणिक पाती है तो वह आगे की जांच का आधार बन सकता है।

दूसरी ओर, इस मामले से जुड़े गंभीर आरोपों को जांच पूरी होने से पहले तथ्य के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं होगा।

इसलिए इस घटनाक्रम का वास्तविक महत्व इस बात से तय होगा कि CBI दस्तावेज की जांच के बाद क्या निष्कर्ष निकालती है और क्या इससे कोई नया सत्यापन योग्य साक्ष्य सामने आता है।

फिलहाल सबसे सटीक स्थिति यही है कि नया दस्तावेज CBI के सामने प्रस्तुत किए जाने का दावा किया गया है और उससे जुड़े आरोप जांच के दायरे में हैं।

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