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केबीसी 18 में कपिला की आपबीती सुन भावुक हुए अमिताभ बच्चन, बोलीं—दहेज के लिए मुझे जलाने की कोशिश हुई

बिलासपुर की कपिला तनेजा ने केबीसी 18 में अमिताभ बच्चन के सामने 2002 की उस घटना को याद किया, जिसमें उनके मुताबिक ससुराल वालों ने दहेज को लेकर उन्हें जलाने की कोशिश की थी। उन्होंने 24 साल से बेटी से न मिल पाने का दर्द भी साझा किया।

केबीसी 18 में कपिला की आपबीती सुन भावुक हुए अमिताभ बच्चन, बोलीं—दहेज के लिए मुझे जलाने की कोशिश हुई
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द्वारा जीत निर्मल

स्रोत: JantaScope

नई दिल्ली, 18 सितंबर 2026: ‘कौन बनेगा करोड़पति 18’ का एक हालिया एपिसोड सामान्य ज्ञान के सवालों से आगे बढ़कर घरेलू हिंसा और दहेज प्रताड़ना की एक दर्दनाक कहानी का मंच बन गया। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर से आईं प्रतियोगी कपिला तनेजा ने अमिताभ बच्चन के सामने बताया कि 2002 में उनके ससुराल वालों ने कथित तौर पर उन्हें आग लगाकर मारने की कोशिश की थी। उन्होंने यह भी कहा कि इस घटना और उसके बाद के घटनाक्रम ने उन्हें अपनी बेटी से अलग कर दिया और वे 24 वर्षों से उससे नहीं मिली हैं।

कपिला की कहानी सुनते हुए अमिताभ बच्चन भावुक दिखाई दिए। हालांकि इस पूरे मामले में एक महत्वपूर्ण सावधानी जरूरी है: घटना और दहेज प्रताड़ना से जुड़े विवरण कपिला द्वारा कार्यक्रम में बताए गए उनके व्यक्तिगत आरोप हैं। उपलब्ध सार्वजनिक रिपोर्टों में इस पुराने मामले की पुलिस प्राथमिकी, अदालती आदेश या अंतिम न्यायिक निष्कर्ष सामने नहीं आए हैं। इसलिए ससुराल पक्ष पर लगाए गए आरोपों को स्थापित तथ्य की तरह प्रस्तुत करना उचित नहीं होगा।

चेहरे और गर्दन के निशानों से शुरू हुई बातचीत

कार्यक्रम के दौरान अमिताभ बच्चन ने कपिला के चेहरे और गर्दन पर मौजूद निशानों के बारे में पूछा। इसी सवाल के बाद उन्होंने 2002 की उस घटना के बारे में बताया, जिसे उन्होंने ‘अग्निकांड’ कहा।

कपिला के अनुसार, उन्होंने परिवार की इच्छा के विरुद्ध विवाह किया था और उनके ससुराल वाले इस रिश्ते से खुश नहीं थे। उन्होंने आरोप लगाया कि उनसे दहेज की अपेक्षा की गई और समय के साथ प्रताड़ना बढ़ती चली गई।

कपिला ने कार्यक्रम में अपनी सास पर उन्हें आग लगाने की योजना बनाने का आरोप लगाया। एनडीटीवी की कार्यक्रम-आधारित रिपोर्ट के अनुसार, कपिला ने कहा कि उन पर मिट्टी का तेल डालकर आग लगाई गई। उन्होंने किसी तरह अपनी जान बचाई और घटना के बाद दो सप्ताह से अधिक समय तक होश में नहीं रहीं। होश आने के बाद उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज कराने और लंबे इलाज तथा कई शल्य चिकित्साओं से गुजरने की बात कही।

यह विवरण गंभीर आपराधिक आरोपों से जुड़ा है। स्वतंत्र पुलिस या न्यायालय अभिलेख उपलब्ध न होने के कारण इसे कपिला का बयान ही माना जाना चाहिए।

24 साल से बेटी से नहीं मिलने का दर्द

कपिला की कहानी का सबसे भावुक हिस्सा उनकी बेटी से जुड़ा था।

उन्होंने बताया कि घटना के समय उनकी एक छोटी बेटी थी और वे पिछले 24 वर्षों से उससे नहीं मिल पाई हैं। कपिला के मुताबिक, ससुराल वालों ने उन्हें बेटी से मिलने नहीं दिया। पड़ोसियों से उन्हें बाद में पता चला कि उनकी बेटी काम के सिलसिले में दूसरे शहर चली गई है।

कपिला ने कार्यक्रम में कहा, “मैं हर दिन उसके लिए प्रार्थना करती हूं।” यह कथन कार्यक्रम की रिपोर्टिंग में दर्ज है।

इस दावे का दूसरा पक्ष या बेटी की ओर से कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया उपलब्ध रिपोर्टों में नहीं मिली। इसलिए बेटी से अलग किए जाने की परिस्थितियां भी कपिला के बताए विवरण पर आधारित हैं।

यहीं यह एपिसोड एक प्रश्नोत्तरी कार्यक्रम से कहीं अधिक निजी और संवेदनशील हो गया। बच्चन ने उनकी बात ध्यान से सुनी और उनकी जीवन यात्रा पर संवेदना व्यक्त की।

7.5 लाख रुपये जीतकर छोड़ा खेल

इतनी कठिन निजी कहानी साझा करने के बावजूद कपिला ने खेल में भी अच्छा प्रदर्शन किया।

उन्होंने 7.5 लाख रुपये जीते। इसके अलावा ‘सुपर संदूक’ में जीते 90,000 रुपये को जीवनरेखा के बदले न देने के कारण वह अतिरिक्त राशि भी उनके पास रही, जैसा कि इंडियन एक्सप्रेस ने कार्यक्रम के आधार पर बताया।

कपिला 12वें सवाल पर पहुंचीं। उनसे पूछा गया कि पश्चिम एशिया के इनमें से किस शहर को 1930 के दशक में ब्रिटिश भारत से अलग किया गया था। विकल्प थे—मोसुल, बसरा, जेद्दा और अदन।

जवाब को लेकर आश्वस्त नहीं होने पर उन्होंने खेल छोड़ने का फैसला किया और 7.5 लाख रुपये सुरक्षित किए। खेल छोड़ने के बाद अनुमान लगाने को कहा गया तो उन्होंने मोसुल चुना, जबकि सही उत्तर अदन था।

अदन 1937 तक ब्रिटिश भारत के प्रशासन के अधीन था, जिसके बाद उसे अलग क्राउन कॉलोनी बनाया गया था।

पुरस्कार राशि से कृत्रिम कान की शल्य चिकित्सा कराने की योजना

कपिला ने कार्यक्रम में बताया कि वह जीती हुई रकम का इस्तेमाल अपनी शल्य चिकित्सा के लिए करना चाहती हैं।

आग से लगी चोटों के कारण उन्हें कृत्रिम कान लगवाने के लिए चिकित्सा प्रक्रिया की आवश्यकता है और उन्होंने पुरस्कार राशि को इसी दिशा में इस्तेमाल करने की बात कही। उन्होंने अविवाहित माताओं के लिए एक घर शुरू करने की इच्छा भी जताई, ताकि सामाजिक भेदभाव का सामना करने वाली महिलाओं को सहारा मिल सके।

वर्तमान में कपिला गृह शिक्षक के रूप में काम करती हैं और उन्होंने बताया कि वह अपना अधिकांश समय घर के भीतर बिताती हैं।

उनकी भावी शल्य चिकित्सा की तारीख, अस्पताल या चिकित्सा योजना से संबंधित स्वतंत्र जानकारी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है। इसलिए इसे फिलहाल उनकी घोषित योजना के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

एक व्यक्तिगत कहानी के पीछे दहेज हिंसा का बड़ा सवाल

कपिला का मामला पुराना है, लेकिन जिस समस्या की ओर उनकी कहानी इशारा करती है, वह भारत में समाप्त नहीं हुई है।

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने मार्च 2026 में संसद को बताया कि राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो की नवीनतम प्रकाशित ‘क्राइम इन इंडिया’ रिपोर्ट 2023 की है। सरकार के आधिकारिक उत्तर के अनुसार, दहेज मृत्यु के मामलों को भारतीय न्याय संहिता की धारा 80 के तहत संबोधित किया जाता है; इससे पहले यही अपराध भारतीय दंड संहिता की धारा 304बी के तहत आता था।

भारत में दहेज लेना या देना दहेज प्रतिषेध अधिनियम, 1961 के तहत प्रतिबंधित है। कानून 1 जुलाई 1961 से लागू है।

भारतीय न्याय संहिता की धारा 85 पति या पति के रिश्तेदार द्वारा महिला के साथ क्रूरता को दंडनीय बनाती है। धारा 86 में ऐसी क्रूरता में वह उत्पीड़न भी शामिल है जिसका उद्देश्य महिला या उसके रिश्तेदारों पर संपत्ति या मूल्यवान वस्तु की गैरकानूनी मांग पूरी करने का दबाव बनाना हो।

हालांकि कपिला के 2002 के मामले पर आज के कानून को सीधे लागू करके कानूनी निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। उस समय लागू कानून और किसी वास्तविक मुकदमे की स्थिति अलग कानूनी प्रश्न हैं।

घरेलू हिंसा की तस्वीर दहेज मामलों से भी बड़ी है

राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 के आधार पर स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के आंकड़े समस्या का व्यापक संदर्भ देते हैं।

2019-21 के आंकड़ों के अनुसार, भारत में 18 से 49 वर्ष की कभी विवाहित रही महिलाओं में 26.8 प्रतिशत ने सर्वेक्षण से पिछले 12 महीनों के दौरान पति या साथी द्वारा शारीरिक, यौन या भावनात्मक हिंसा का अनुभव बताया था। छत्तीसगढ़ में यह अनुपात 18.4 प्रतिशत था।

यह आंकड़ा कपिला के व्यक्तिगत आरोपों को साबित नहीं करता और न ही सभी घरेलू हिंसा को दहेज से जोड़ता है। लेकिन यह दिखाता है कि वैवाहिक हिंसा को केवल अलग-अलग सनसनीखेज मामलों के रूप में देखने से समस्या की पूरी तस्वीर सामने नहीं आती।

इसी वजह से केबीसी जैसे व्यापक दर्शक वर्ग वाले मंच पर ऐसी कहानी सामने आने का असर मनोरंजन समाचार से आगे जाता है।

अमिताभ बच्चन की प्रतिक्रिया क्यों चर्चा में आई?

‘कौन बनेगा करोड़पति’ की बुनियाद प्रश्नों और पुरस्कार राशि पर है, लेकिन वर्षों से कार्यक्रम में प्रतियोगियों की निजी कहानियां भी महत्वपूर्ण हिस्सा रही हैं। सोनी लिव के अनुसार, केबीसी 18 का विषय ‘सोचना पड़ेगा’ है और अमिताभ बच्चन इस संस्करण की मेजबानी कर रहे हैं।

कपिला का एपिसोड अलग इसलिए दिखाई देता है क्योंकि उनकी कहानी किसी उपलब्धि से पहले आई मुश्किल भर नहीं थी। इसमें घरेलू हिंसा, दहेज, गंभीर शारीरिक चोट और मां-बेटी के लंबे अलगाव के आरोप एक साथ सामने आए।

बच्चन की भावुक प्रतिक्रिया ने इस बातचीत को और ध्यान दिलाया, लेकिन कहानी का केंद्र अंततः कपिला का अपना बयान और उनकी आगे की योजना है।

यह अंतर संपादकीय रूप से भी महत्वपूर्ण है। किसी चर्चित अभिनेता की प्रतिक्रिया आकर्षक शीर्षक बन सकती है, लेकिन घटना के गंभीर आरोपों को केवल भावनात्मक टेलीविजन क्षण में बदल देना उसके सामाजिक और कानूनी संदर्भ को छोटा कर देता है।

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