विज्ञापन - शीर्ष बैनर
Read in English —JantaScope English
बॉलीवुड

मनोज बाजपेयी का बॉलीवुड पर तीखा बयान, बोले- कई बेहतरीन कलाकारों की प्रतिभा को इंडस्ट्री ने किया बर्बाद

बॉलीवुड के जाने-माने अभिनेता मनोज बाजपेयी ने हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में कलाकारों के साथ होने वाले व्यवहार को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। अपने दमदार अभिनय और बेबाक विचारों के लिए पहचाने जाने वाले मनोज ने कहा है कि फिल्म जगत में कई प्रतिभाशाली कलाकारों को उनकी योग्यता के अनुरूप अवसर नहीं दिए गए। कुछ कलाकारों को सीमित भूमिकाओं में बांध दिया गया, जबकि कई अपनी असली क्षमता दिखाए बिना ही गुमनामी में चले गए।

मनोज बाजपेयी का बॉलीवुड पर तीखा बयान, बोले- कई बेहतरीन कलाकारों की प्रतिभा को इंडस्ट्री ने किया बर्बाद
विज्ञापन

द्वारा साधना गुप्ता

स्रोत: hindustan times, bollywood news, the indian express.

मनोज बाजपेयी का यह बयान ऐसे समय सामने आया है, जब वह अपनी नई फिल्म 'गजब रात' के प्रचार में व्यस्त हैं। उनके मुताबिक, हिंदी सिनेमा में प्रतिभा की कमी नहीं है, लेकिन कलाकारों को पहचानने और उन्हें सही अवसर देने की व्यवस्था में लंबे समय से समस्याएं रही हैं।

इंडस्ट्री की कार्यप्रणाली पर उठाए गंभीर सवाल

हाल ही में Zoom को दिए एक इंटरव्यू में मनोज बाजपेयी ने कहा कि हिंदी फिल्म इंडस्ट्री ने कई शानदार कलाकारों की प्रतिभा का सही इस्तेमाल नहीं किया। उनके अनुसार, किसी अभिनेता को एक खास तरह की भूमिका में सीमित कर देना उसकी रचनात्मक संभावनाओं को कम कर देता है।

उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री की खराब प्रतिष्ठा और उसके व्यवहार पर भी नाराजगी जाहिर की। मनोज का मानना है कि अनेक कलाकार ऐसे रहे, जिन्हें सेट पर पर्याप्त महत्व नहीं मिला और उनकी भूमिकाएं लगातार छोटी होती चली गईं।

उनके मुताबिक, कई प्रतिभाशाली लोग पहचान और सम्मान की उम्मीद में वर्षों तक संघर्ष करते रहे, लेकिन उन्हें अपनी क्षमता के अनुरूप काम नहीं मिल सका। आखिरकार कुछ कलाकार फिल्मी दुनिया से दूर हो गए।

अपनी अभिनय क्षमता को लेकर किया बड़ा खुलासा

बातचीत के दौरान मनोज बाजपेयी ने अपने करियर का उदाहरण देते हुए एक दिलचस्प बात कही। उन्होंने बताया कि उन्हें आज भी लगता है कि उनकी अभिनय क्षमता का केवल 25 प्रतिशत हिस्सा ही इस्तेमाल हो पाया है।

तीन दशक से अधिक समय तक अभिनय करने और अनेक यादगार किरदार निभाने के बावजूद वह मानते हैं कि उनके भीतर अभी बहुत कुछ बाकी है।

हालांकि, उन्होंने इसे केवल शिकायत के रूप में पेश नहीं किया। मनोज के अनुसार, एक कलाकार के भीतर नई भूमिकाएं निभाने और खुद को चुनौती देने की इच्छा हमेशा बनी रहनी चाहिए।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वह खुश हैं कि अभिनय के प्रति उनका उत्साह आज भी बरकरार है। उनके लिए यह रचनात्मक भूख आगे बढ़ने की प्रेरणा है।

छोटे और सपोर्टिंग किरदारों पर भी छिड़ी चर्चा

इस इंटरव्यू में अभिनेत्री दिव्या दत्ता ने भी कलाकारों को अलग-अलग श्रेणियों में बांटने की परंपरा पर आपत्ति जताई।

दिव्या ने कहा कि उन्हें 'सपोर्टिंग एक्टर' या 'कैरेक्टर एक्टर' जैसे लेबल पसंद नहीं हैं। उनके अनुसार, ऐसे शब्द किसी कलाकार की बहुमुखी प्रतिभा को एक सीमित पहचान तक समेट देते हैं।

उनका कहना था कि किसी अभिनेता को केवल मुख्य भूमिका या सहायक भूमिका के आधार पर नहीं परखा जाना चाहिए। एक अच्छा कलाकार कहानी की जरूरत के अनुसार अलग-अलग तरह के किरदार निभा सकता है।

मनोज बाजपेयी ने दिव्या की बातों से सहमति जताई। उन्होंने कहा कि फिल्म जगत में मुख्य अभिनेता, सहायक अभिनेता और चरित्र अभिनेता जैसी श्रेणियां एक तरह का पदानुक्रम तैयार करती हैं। इससे कलाकारों के प्रति व्यवहार और अवसरों में अंतर पैदा हो सकता है।

मनोज बाजपेयी ने भी किया लंबा संघर्ष

बिहार से निकलकर हिंदी सिनेमा में अपनी पहचान बनाने वाले मनोज बाजपेयी का सफर आसान नहीं रहा है।

वर्ष 1998 में रिलीज हुई फिल्म 'सत्या' में भीकू म्हात्रे का किरदार निभाकर उन्होंने दर्शकों और फिल्म समीक्षकों का ध्यान आकर्षित किया। इसके बाद 'शूल', 'पिंजर', 'राजनीति', 'गैंग्स ऑफ वासेपुर' और 'अलीगढ़' जैसी फिल्मों में अपने अभिनय से अलग पहचान बनाई।

इसके बावजूद मनोज ने कई मौकों पर स्वीकार किया है कि उन्हें करियर के दौरान अनेक चुनौतियों का सामना करना पड़ा।

वह इससे पहले भी हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में प्रतिभा को मिलने वाले अवसरों पर सवाल उठा चुके हैं। जून 2020 के एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि कई योग्य कलाकारों को उनकी वास्तविक क्षमता के अनुरूप पहचान नहीं मिल पाती।

इस तरह उनका ताजा बयान किसी अचानक पैदा हुई नाराजगी के बजाय लंबे समय से व्यक्त की जा रही चिंता का हिस्सा है।

OTT प्लेटफॉर्म ने बदली कलाकारों की स्थिति

इंडस्ट्री की आलोचना के साथ मनोज बाजपेयी ने सकारात्मक बदलावों का भी जिक्र किया। उनके अनुसार, डिजिटल प्लेटफॉर्म और OTT के विस्तार ने अभिनय आधारित कहानियों तथा अलग तरह के किरदारों के लिए नए अवसर पैदा किए हैं।

पहले जहां फिल्मों में कई सहायक कलाकारों को पर्याप्त महत्व नहीं मिलता था, वहीं अब दर्शक कहानी के छोटे-बड़े सभी किरदारों पर ध्यान देने लगे हैं। मनोज ने कहा कि OTT आने के बाद निर्माता भी कलाकारों के साथ व्यवहार को लेकर अधिक सजग हुए हैं। उनका मानना है कि दर्शक अब केवल बड़े सितारों के नाम पर फिल्म या सीरीज नहीं देखते, बल्कि कहानी, अभिनय और किरदारों की बारीकियों पर भी चर्चा करते हैं हालांकि, इससे हिंदी सिनेमा में अवसरों की असमानता पूरी तरह समाप्त हो गई है, ऐसा कहना जल्दबाजी होगी।

नई फिल्म 'गजब रात' को लेकर चर्चा में अभिनेता

मनोज बाजपेयी इन दिनों अपनी फिल्म 'गजब रात' को लेकर भी सुर्खियों में हैं। फिल्म 23 अक्टूबर 2026 से नेटफ्लिक्स पर स्ट्रीमिंग के लिए निर्धारित है। रितेश शाह के निर्देशन में बनी इस क्राइम थ्रिलर का निर्माण नीरज पांडे से जुड़ा है। फिल्म में दिव्या दत्ता, साकिब सलीम और नुसरत भरूचा सहित कई कलाकार नजर आएंगे।

फिल्म की कहानी दिल्ली की पृष्ठभूमि में एक पुलिस अधिकारी और एक रहस्यमय घटना के इर्द-गिर्द घूमती है। इस फिल्म का नाम पहले 'घूसखोर पंडत' रखा गया था, लेकिन शीर्षक को लेकर उठे विवाद और कानूनी घटनाक्रम के बाद इसे बदलकर 'गजब रात' किया गया।

क्या बॉलीवुड में प्रतिभा को मिलता है पूरा सम्मान?

मनोज बाजपेयी के बयान ने हिंदी फिल्म उद्योग की एक पुरानी बहस को फिर सामने ला दिया है। यह सवाल केवल स्टारडम या लोकप्रियता का नहीं, बल्कि कलाकारों को उनकी योग्यता के अनुसार काम और सम्मान देने का भी है।

फिल्म निर्माण में व्यावसायिक जरूरतों और दर्शकों की पसंद की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इसके बावजूद कलाकारों को एक ही तरह के किरदारों तक सीमित रखना उनकी रचनात्मक क्षमता के इस्तेमाल में बाधा बन सकता है। मनोज और दिव्या की टिप्पणियां इसी चुनौती की ओर ध्यान दिलाती हैं।

फिलहाल, मनोज बाजपेयी का ताजा बयान बॉलीवुड में अवसरों, कलाकारों की पहचान और अभिनय प्रतिभा के सम्मान पर एक महत्वपूर्ण चर्चा को आगे बढ़ाता है। उनका संदेश साफ है कि किसी अभिनेता को उसकी पुरानी छवि या भूमिका की श्रेणी तक सीमित करने के बजाय उसकी नई संभावनाओं को भी महत्व दिया जाना चाहिए।

साझा करें
विज्ञापन - मध्य लेख
विज्ञापन - नीचे