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‘Mirzapur: The Movie’ पर CBFC की कैंची: 35 सेकंड हटे, गालियों और संवादों में भी बदलाव

‘Mirzapur: The Movie’ को ‘A’ सर्टिफिकेट देने से पहले CBFC ने अंतरंग दृश्यों, आपत्तिजनक भाषा और कुछ संवादों में बदलाव करवाए। फिल्म 4 सितंबर 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होगी।

‘Mirzapur: The Movie’ पर CBFC की कैंची: 35 सेकंड हटे, गालियों और संवादों में भी बदलाव
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द्वारा जीत निर्मल

स्रोत: Bollywood Hungama

‘Mirzapur: The Movie’ में CBFC ने करवाए कई बदलाव, 35 सेकंड के दृश्य हटाए गए

लोकप्रिय क्राइम फ्रेंचाइजी ‘मिर्जापुर’ के बड़े पर्दे पर पहुंचने से पहले फिल्म के कंटेंट में कई बदलाव किए गए हैं। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड यानी CBFC ने ‘Mirzapur: The Movie’ को वयस्क दर्शकों के लिए ‘A’ सर्टिफिकेट देने से पहले कुछ संवादों, आपत्तिजनक शब्दों और अंतरंग दृश्यों को संशोधित करने का निर्देश दिया।

फिल्म को 29 अगस्त 2026 को प्रमाणपत्र मिला और इसकी प्रमाणित अवधि 197 मिनट 19 सेकंड, यानी लगभग 3 घंटे 17 मिनट बताई गई है। ‘A’ श्रेणी का अर्थ है कि इसका सार्वजनिक प्रदर्शन केवल वयस्क दर्शकों के लिए होगा।

किन हिस्सों में बदलाव किया गया?

प्रकाशित कट-लिस्ट संबंधी रिपोर्ट के अनुसार, फिल्म में चार स्थानों पर आपत्तिजनक शब्दों को म्यूट किया गया है, जबकि छह जगह इस्तेमाल की गई गालियों को अपेक्षाकृत उपयुक्त शब्दों से बदला गया।

इसके अतिरिक्त, कुछ संवादों में अलग-अलग संशोधन किए गए। पहले भाग में एक शब्द बदलने, इंटरवल के बाद एक अन्य अभिव्यक्ति संशोधित करने तथा जाति से जुड़े एक संदर्भ को बदलने का निर्देश भी दिया गया।

दो अंतरंग दृश्यों से हटे कुल 35 सेकंड

रिपोर्ट के मुताबिक, फिल्म के पहले और दूसरे भाग में मौजूद दो अंतरंग दृश्यों को दृश्य और ध्वनि—दोनों स्तरों पर लगभग 50 प्रतिशत कम करने के लिए कहा गया। इन संशोधनों के बाद दोनों दृश्यों से कुल 35 सेकंड हटाए गए।

दिलचस्प बात यह है कि रिपोर्ट में दावा किया गया है कि फिल्म के हिंसक या रक्तपात वाले दृश्यों में कोई कटौती नहीं की गई। बदलाव मुख्य रूप से अंतरंग सामग्री, भाषा और कुछ संवेदनशील संवादों तक सीमित रहे।

Revising Committee ने किया फिल्म का मूल्यांकन

फिल्म का प्रमाणपत्र CBFC की Revising Committee की समीक्षा के बाद जारी किया गया। सामान्य प्रक्रिया में फिल्म पहले Examining Committee के सामने जाती है। आवश्यकता होने पर निर्माता या बोर्ड के स्तर से मामला Revising Committee को भेजा जा सकता है, जो फिल्म देखकर प्रमाणन और प्रस्तावित संशोधनों पर निर्णय लेती है।

CBFC भारत में फिल्मों के सार्वजनिक प्रदर्शन को Cinematograph Act और संबंधित प्रमाणन नियमों के अंतर्गत नियंत्रित करता है। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अनुसार, बोर्ड वैधानिक मानकों से टकराव की स्थिति में कटौती या संशोधन सुझा सकता है।

बड़े पर्दे पर पहली बार ‘मिर्जापुर’ की दुनिया

‘Mirzapur: The Movie’ लोकप्रिय स्ट्रीमिंग सीरीज के क्राइम यूनिवर्स को पहली बार सिनेमाघरों तक ले जा रही है। फिल्म का निर्देशन गुरमीत सिंह ने किया है, जबकि पुनीत कृष्णा इसके क्रिएटर हैं।

पंकज त्रिपाठी कालीन भैया, अली फजल गुड्डू पंडित और दिव्येंदु मुन्ना त्रिपाठी की भूमिका में लौट रहे हैं। अभिषेक बनर्जी भी कंपाउंडर के किरदार में दिखाई देंगे। फिल्म का निर्माण रितेश सिधवानी और फरहान अख्तर ने Excel Entertainment के अंतर्गत किया है। इसकी देशव्यापी थिएट्रिकल रिलीज 4 सितंबर 2026 के लिए निर्धारित है।

यह घटनाक्रम क्यों महत्वपूर्ण है?

यह फिल्म किसी नई कहानी पर आधारित सामान्य क्राइम ड्रामा नहीं है, बल्कि पहले से स्थापित स्ट्रीमिंग फ्रेंचाइजी का सिनेमाई विस्तार है। सीरीज की पहचान तीखी भाषा, अपराध, हिंसा और जटिल पात्रों से जुड़ी रही है। ऐसे में थिएट्रिकल प्रमाणन के दौरान किए गए बदलाव यह तय कर सकते हैं कि बड़े पर्दे का संस्करण मूल फ्रेंचाइजी के प्रभाव को किस हद तक बनाए रखता है।

35 सेकंड की कटौती लगभग साढ़े तीन घंटे की फिल्म के मुकाबले बहुत छोटी है। इसलिए कहानी या फिल्म की समग्र अवधि पर इसका बड़ा प्रभाव पड़ने की संभावना कम दिखाई देती है। हालांकि संवादों और भाषा में बदलाव कुछ विशेष दृश्यों के लहजे को प्रभावित कर सकते हैं।

संतुलित विश्लेषण: ‘A’ सर्टिफिकेट के बाद भी बदलाव क्यों?

CBFC के पक्ष से देखें तो ‘A’ प्रमाणपत्र किसी फिल्म को प्रमाणन संबंधी नियमों से पूरी तरह मुक्त नहीं करता। वयस्क श्रेणी की फिल्म में भी बोर्ड वैधानिक दिशानिर्देशों के आधार पर संशोधन सुझा सकता है।

दूसरी ओर, यह सवाल भी उठ सकता है कि जब फिल्म पहले ही केवल वयस्कों के लिए सीमित है, तो अंतरंग दृश्यों और भाषा में अतिरिक्त कटौती कितनी आवश्यक थी। खासकर तब, जब रिपोर्ट के अनुसार हिंसक दृश्यों को नहीं बदला गया। यह अंतर भारतीय फिल्म प्रमाणन में हिंसा, भाषा और अंतरंग सामग्री को दिए जाने वाले अलग-अलग महत्व पर चर्चा बढ़ा सकता है।

व्यावसायिक नजरिए से ‘A’ प्रमाणपत्र दर्शकों का दायरा सीमित करता है, क्योंकि नाबालिग फिल्म नहीं देख सकेंगे। इसके साथ 3 घंटे 17 मिनट से अधिक की अवधि सिनेमाघरों में प्रतिदिन उपलब्ध शो की संख्या को भी प्रभावित कर सकती है। हालांकि स्थापित किरदारों और फ्रेंचाइजी की लोकप्रियता फिल्म के लिए मजबूत शुरुआती आकर्षण बन सकती है।

निष्कर्ष

‘Mirzapur: The Movie’ ने आवश्यक बदलावों के बाद CBFC की प्रमाणन प्रक्रिया पूरी कर ली है। फिल्म में भाषा और अंतरंग दृश्यों को संशोधित किया गया है, लेकिन इसकी मूल अपराध-केंद्रित तथा हिंसक दुनिया को बड़े स्तर पर बरकरार रखा गया प्रतीत होता है।

अब असली परीक्षा 4 सितंबर को होगी, जब यह सामने आएगा कि स्ट्रीमिंग पर लोकप्रिय हुई ‘मिर्जापुर’ की कहानी सिनेमाघरों के लंबे प्रारूप और वयस्क प्रमाणपत्र के साथ दर्शकों को कितना आकर्षित कर पाती है।


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