कुकू कोहली का 77 वर्ष की उम्र में निधन
बॉलीवुड के अनुभवी निर्देशक कुकू कोहली अब नहीं रहे। 77 वर्षीय फिल्ममेकर का मंगलवार, 25 अगस्त 2026 को मुंबई में निधन हो गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक उन्हें दिल का दौरा पड़ा और उन्होंने कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी अस्पताल में अंतिम सांस ली।
उनके निधन की पुष्टि फिल्म जगत से जुड़े लोगों ने की। कुकू कोहली के दोस्त और फिल्ममेकर अशोक पंडित ने भी उनके निधन की जानकारी साझा की।
उनके निधन से हिंदी सिनेमा ने उस पीढ़ी के एक ऐसे निर्देशक को खो दिया है, जिसने 1990 के दशक में एक्शन, रोमांस, कॉमेडी और पारिवारिक मनोरंजन के मिश्रण वाली कई लोकप्रिय फिल्मों पर काम किया।
‘फूल और कांटे’ ने बदल दी कुकू कोहली और अजय देवगन की कहानी
कुकू कोहली का नाम सबसे ज्यादा 1991 में रिलीज हुई ‘फूल और कांटे’ से जुड़ा है। यह उनकी बतौर निर्देशक पहली फिल्म थी और इसी फिल्म से अजय देवगन ने मुख्य अभिनेता के रूप में हिंदी सिनेमा में कदम रखा था।
फिल्म व्यावसायिक रूप से सफल रही और अजय देवगन की दो चलती मोटरसाइकिलों पर खड़े होकर की गई एंट्री हिंदी सिनेमा के सबसे यादगार स्टार-इंट्रोडक्शन दृश्यों में शामिल हो गई।
इस फिल्म में मधु, अमरीश पुरी, अरुणा ईरानी और जगदीप जैसे कलाकार भी महत्वपूर्ण भूमिकाओं में थे।
‘फूल और कांटे’ की सफलता ने एक तरफ अजय देवगन के लंबे फिल्मी करियर की नींव रखी, तो दूसरी तरफ कुकू कोहली को मुख्यधारा के सफल निर्देशकों के बीच पहचान दिलाई।
राज कपूर के साथ काम करके सीखी फिल्ममेकिंग
निर्देशक बनने से पहले कुकू कोहली ने हिंदी सिनेमा के बड़े फिल्मकारों के साथ काम करके फिल्म निर्माण की बारीकियां सीखी थीं।
उनका शुरुआती फिल्मी सफर दिग्गज फिल्मकार राज कपूर के मार्गदर्शन में आगे बढ़ा। बाद में उन्होंने निर्देशक राहुल रवैल को भी असिस्ट किया और सनी देओल की शुरुआती महत्वपूर्ण फिल्मों ‘बेताब’ और ‘अर्जुन’ से जुड़े।
इस अनुभव ने कुकू कोहली को उस दौर के कमर्शियल हिंदी सिनेमा की भाषा समझने में मदद की—जहां कहानी के साथ स्टार पावर, संगीत, एक्शन और भावनाओं का संतुलन बॉक्स ऑफिस सफलता में बड़ी भूमिका निभाता था।
‘सुहाग’ से ‘अनाड़ी नंबर 1’ तक कई चर्चित फिल्में
‘फूल और कांटे’ के बाद कुकू कोहली ने कई प्रमुख सितारों के साथ फिल्में बनाईं।
उनकी महत्वपूर्ण फिल्मों में ‘सुहाग’ (1994) शामिल है, जिसमें अजय देवगन, अक्षय कुमार, करिश्मा कपूर और नगमा जैसे कलाकार थे। इसके बाद उन्होंने अजय देवगन और तब्बू के साथ ‘हकीकत’ (1995) बनाई।
1999 में आई गोविंदा और रवीना टंडन अभिनीत ‘अनाड़ी नंबर 1’ ने उनकी फिल्मोग्राफी में कॉमेडी का एक लोकप्रिय अध्याय जोड़ा। इसी दौर में उन्होंने अक्षय कुमार और ट्विंकल खन्ना के साथ ‘जुल्मी’ का निर्देशन भी किया।
नई सदी में उन्होंने ‘ये दिल आशिकाना’ (2002) और ‘वो तेरा नाम था’ (2004) जैसी फिल्मों का निर्देशन किया। ‘वो तेरा नाम था’ उनकी आखिरी निर्देशित फिल्म रही।
अजय देवगन को लॉन्च करना क्यों बना उनकी विरासत का अहम हिस्सा?
फिल्म उद्योग में किसी नए कलाकार को मौका देना हमेशा जोखिम से जुड़ा फैसला होता है। खासकर उस दौर में जब फिल्म की सफलता बड़े सितारों की लोकप्रियता पर काफी निर्भर रहती थी।
कुकू कोहली की ‘फूल और कांटे’ ने अजय देवगन को न केवल लॉन्च किया, बल्कि पहली ही फिल्म में उनके लिए एक मजबूत एक्शन-हीरो पहचान तैयार करने में भूमिका निभाई।
आने वाले दशकों में अजय देवगन हिंदी फिल्म उद्योग के प्रमुख अभिनेताओं में शामिल हुए। इसलिए कुकू कोहली के करियर को याद करते समय ‘फूल और कांटे’ सिर्फ एक सफल फिल्म नहीं, बल्कि हिंदी सिनेमा में एक बड़े स्टार के आगमन का महत्वपूर्ण अध्याय भी है।
अरुणा ईरानी और कुकू कोहली
कुकू कोहली की पत्नी हिंदी सिनेमा की दिग्गज अभिनेत्री अरुणा ईरानी हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार दोनों ने 1990 में शादी की थी।
कुकू कोहली की पहली शादी रीता कोहली से हुई थी और उस विवाह से उनकी दो बेटियां पूजा कोहली और करिश्मा कोहली हैं। करिश्मा ने भी फिल्म और वेब मनोरंजन की दुनिया में निर्देशन से अपनी पहचान बनाई है।
कुकू कोहली के निधन के बाद परिवार और फिल्म जगत में शोक का माहौल है।
फिल्म इंडस्ट्री में संगठनात्मक भूमिका भी रही महत्वपूर्ण
कुकू कोहली केवल फिल्मों के निर्देशन तक सीमित नहीं रहे। फिल्ममेकर अशोक पंडित के मुताबिक वह Indian Film and Television Directors’ Association (IFTDA) के जनरल सेक्रेटरी भी थे।
इस भूमिका के कारण उनका योगदान पर्दे पर दिखाई देने वाली फिल्मों से आगे फिल्म निर्देशकों के पेशेवर समुदाय तक फैला हुआ था।
ऐसे फिल्मकारों का महत्व इसलिए भी होता है क्योंकि लंबे अनुभव के बाद वे इंडस्ट्री के संस्थागत ढांचे और नई पीढ़ी के पेशेवरों के बीच एक कड़ी की भूमिका निभाते हैं।
1990 के दशक के बॉलीवुड की एक खास पहचान
कुकू कोहली का प्रमुख दौर वह समय था जब हिंदी सिनेमा तेजी से बदल रहा था।
1990 के दशक में एक्शन फिल्मों के साथ रोमांस, संगीत और पारिवारिक ड्रामा की लोकप्रियता बहुत मजबूत थी। कुकू कोहली की फिल्मों में भी इस दौर के मुख्यधारा बॉलीवुड की कई विशेषताएं दिखाई देती थीं।
उनकी फिल्मोग्राफी को केवल आज के सिनेमाई मानकों से आंकने के बजाय उस समय के दर्शकों की पसंद और स्टार-सिस्टम के संदर्भ में देखना जरूरी है।
संतुलित विश्लेषण: कुकू कोहली की सबसे बड़ी विरासत क्या रहेगी?
कुकू कोहली का फिल्मी करियर हिंदी सिनेमा के उस दौर का प्रतिनिधित्व करता है जब बड़े पर्दे पर स्टार की एंट्री, संगीत, एक्शन और भावनात्मक कहानी दर्शकों को सिनेमाघरों तक लाने के प्रमुख साधन हुआ करते थे।
उनकी हर फिल्म को समान सफलता नहीं मिली और 2000 के दशक में उनका निर्देशन काफी सीमित हो गया। लेकिन किसी फिल्मकार की विरासत केवल फिल्मों की संख्या से निर्धारित नहीं होती।
कुकू कोहली के मामले में ‘फूल और कांटे’ विशेष महत्व रखती है। एक सफल फिल्म बनाने के साथ उन्होंने अजय देवगन जैसे अभिनेता को लॉन्च किया, जो आगे चलकर हिंदी सिनेमा के सबसे लंबे समय तक सक्रिय रहने वाले प्रमुख सितारों में शामिल हुए।
‘सुहाग’, ‘हकीकत’, ‘अनाड़ी नंबर 1’ और ‘ये दिल आशिकाना’ जैसी फिल्में भी अलग-अलग पीढ़ियों के दर्शकों की यादों का हिस्सा बनीं।
77 वर्ष की उम्र में कुकू कोहली का निधन हिंदी सिनेमा के उस फिल्मकार की विदाई है जिसकी सबसे प्रसिद्ध फिल्म ने 1990 के दशक की शुरुआत में बॉलीवुड को एक नया स्टार दिया और जिसकी मोटरसाइकिल वाली एंट्री आज भी लोकप्रिय संस्कृति का हिस्सा है।
