फिल्म और टेलीविजन कलाकारों की संस्था CINTAA के भीतर कई सप्ताह से जारी सत्ता संघर्ष अब एक नए और गंभीर चरण में पहुंच गया है।
अभिनेत्री Upasana Singh ने पूर्व CINTAA अध्यक्ष Poonam Dhillon और पूर्व उपाध्यक्ष Padmini Kolhapure पर association के documents को कथित तौर पर premises से बाहर ले जाने की कोशिश करने का आरोप लगाया है।
Upasana का कहना है कि इस घटना के बाद पुलिस को बुलाया गया और शिकायत दर्ज कराई गई।
सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में Upasana Singh और अभिनेत्री Priti Sapru को पुलिस अधिकारियों से बहस करते देखा गया, जबकि Poonam Dhillon और Padmini Kolhapure भी मौके पर मौजूद थीं।
हालांकि यह स्पष्ट करना जरूरी है कि documents को गलत तरीके से हटाने या किसी गड़बड़ी को छिपाने संबंधी बातें फिलहाल आरोप हैं। इन आरोपों पर अंतिम कानूनी निष्कर्ष सामने नहीं आया है।
आखिर CINTAA Office में क्या हुआ?
Upasana Singh के मुताबिक उन्हें एक अभिनेता का फोन आया, जिसने बताया कि CINTAA office में कुछ documents और सामान बाहर ले जाया जा रहा है।
Upasana ने दावा किया कि जानकारी मिलने के बाद वह तुरंत मौके पर पहुंचीं और पुलिस को बुलाया।
उनका आरोप है कि Poonam Dhillon और Padmini Kolhapure CINTAA से संबंधित documents को एक tempo में बाहर ले जाने की कोशिश कर रही थीं।
Upasana ने इसे unauthorized action बताते हुए सवाल उठाया कि चुनाव से ठीक पहले association के records को वहां से क्यों हटाया जा रहा था।
इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।
Police के सामने हुई तीखी बहस
घटना का वीडियो सामने आने के बाद मामला और चर्चा में आ गया।
रिपोर्ट्स के अनुसार वीडियो में Upasana Singh और Priti Sapru पुलिस अधिकारियों से documents वापस करने की मांग करते दिखाई देती हैं।
एक अन्य वीडियो में पुलिस अधिकारी दोनों पक्षों को शांत कराने की कोशिश करते नजर आए।
Hindustan Times की रिपोर्ट के अनुसार एक पुलिस अधिकारी ने वहां मौजूद लोगों को उनकी सार्वजनिक प्रतिष्ठा का ध्यान रखने की सलाह भी दी।
इस घटनाक्रम ने साफ कर दिया कि CINTAA का internal administrative dispute अब private organisational disagreement तक सीमित नहीं रहा है।
Upasana Singh ने क्या आरोप लगाए?
Upasana Singh ने दावा किया कि CINTAA के documents में कथित irregularities को लेकर पहले ही सवाल उठाए गए थे और forensic examination की मांग भी की गई थी।
इसके बाद documents को premises से बाहर ले जाने की कथित कोशिश ने उनके संदेह को और बढ़ाया।
उन्होंने इसे कथित तौर पर “cover their tracks” करने की कोशिश बताया।
Upasana ने यह भी कहा कि मामले में police complaint दाखिल की गई है।
यहां distinction महत्वपूर्ण है: documents में irregularity, उन्हें छिपाने की कोशिश और unauthorized removal—ये सभी Upasana Singh के आरोप हैं, जांच में स्थापित तथ्य नहीं।
Poonam Dhillon और Padmini Kolhapure का पक्ष
मौजूदा document-removal allegations पर शुरुआती रिपोर्टिंग में Poonam Dhillon और Padmini Kolhapure की विस्तृत सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी।
हालांकि व्यापक CINTAA विवाद में दोनों पहले अपने खिलाफ लगाए गए आरोपों को खारिज कर चुकी हैं।
अगस्त में Poonam और Padmini ने एक press conference में dissenting members द्वारा लगाए गए आरोपों का जवाब दिया था और अपने पक्ष की CINTAA committee भी प्रस्तुत की थी।
इसलिए मौजूदा विवाद को केवल एक दिन की घटना के रूप में नहीं देखा जा सकता। यह association के नियंत्रण, governance और चुनाव प्रक्रिया को लेकर लंबे समय से चल रहे संघर्ष का हिस्सा है।
विवाद की शुरुआत कहां से हुई?
CINTAA में मौजूदा संकट अगस्त 2026 में खुलकर सामने आया था।
Association की Executive Committee के 11 सदस्यों, जिनमें आठ elected members शामिल बताए गए, ने इस्तीफा दे दिया था।
Resigning members ने leadership पर collective decision-making से हटने और महत्वपूर्ण फैसलों में पर्याप्त consultation नहीं करने जैसे आरोप लगाए।
Poonam Dhillon और Padmini Kolhapure ने इन आरोपों से इनकार किया।
यहीं से CINTAA के भीतर दो स्पष्ट factions के बीच संघर्ष सार्वजनिक होता चला गया।
FWICE की Entry से और बढ़ा विवाद
मामले में Federation of Western India Cine Employees यानी FWICE की भूमिका आने के बाद स्थिति और जटिल हो गई।
Leadership crisis के बाद FWICE ने CINTAA के fresh elections की घोषणा की और 12 सितंबर 2026 को चुनाव की तारीख तय की।
लेकिन Poonam Dhillon से जुड़े faction ने इस election process की वैधता को अदालत में चुनौती दी।
इसके कारण संगठनात्मक विवाद कानूनी लड़ाई में बदल गया।
Court ने Elections को नहीं रोका
CINTAA election dispute अदालत तक पहुंचने के बाद एक महत्वपूर्ण आदेश सामने आया।
रिपोर्ट्स के मुताबिक अदालत ने 12 सितंबर को निर्धारित चुनाव को रोकने से इनकार कर दिया।
हालांकि एक महत्वपूर्ण शर्त लगाई गई—election का result ongoing legal proceedings के final outcome के अधीन रहेगा।
मामले की अगली सुनवाई 26 अक्टूबर के लिए निर्धारित की गई है।
इसका अर्थ है कि चुनाव होने के बावजूद CINTAA leadership का कानूनी विवाद तुरंत समाप्त होना जरूरी नहीं है।
Documents का विवाद इतना महत्वपूर्ण क्यों?
किसी association में official records केवल administrative papers नहीं होते।
इनमें financial records, membership information, meeting minutes, correspondence और governance से संबंधित अन्य documents हो सकते हैं।
हालांकि मौजूदा मामले में वास्तव में कौन-से documents ले जाए जा रहे थे और उनका महत्व क्या था, इसकी पूरी verified inventory सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है।
इसीलिए किसी financial wrongdoing या evidence destruction का निष्कर्ष निकालना अभी जल्दबाजी होगी।
Upasana Singh ने irregularities और forensic examination का मुद्दा उठाया है, लेकिन इन दावों को investigation या court findings से प्रमाणित होना बाकी है।
Police Intervention का क्या मतलब है?
पुलिस का घटनास्थल पर पहुंचना अपने आप में किसी पक्ष के आरोप सही साबित नहीं करता।
Police intervention का तत्काल उद्देश्य मौके पर विवाद को नियंत्रित करना और शिकायत मिलने पर facts को रिकॉर्ड करना हो सकता है।
इसी तरह police complaint और FIR में भी अंतर होता है।
उपलब्ध विश्वसनीय रिपोर्टिंग Upasana Singh द्वारा police complaint किए जाने की बात करती है। इसलिए जब तक पुलिस की ओर से स्पष्ट पुष्टि न हो, इसे किसी आरोपी के खिलाफ अपराध सिद्ध होने या conviction के रूप में नहीं लिखा जाना चाहिए।
Poonam Dhillon बनाम Upasana Singh नहीं, Governance का बड़ा सवाल
इस विवाद को केवल दो लोकप्रिय अभिनेत्रियों के बीच व्यक्तिगत लड़ाई के रूप में देखना पूरी तस्वीर नहीं दिखाता।
CINTAA film और television actors का प्रतिनिधित्व करने वाली संस्था है। इसलिए उसके भीतर leadership, elections, records और decision-making को लेकर विवाद का असर broader artist community पर भी पड़ सकता है।
Executive Committee members के resignations, FWICE का intervention, fresh elections, court proceedings और अब police complaint—ये सभी developments बताते हैं कि विवाद मूल रूप से institutional control और governance से जुड़ा है।
यही कारण है कि आने वाले दिनों में personalities से ज्यादा महत्वपूर्ण सवाल यह होगा कि CINTAA का प्रशासनिक नियंत्रण किसके पास रहता है और उसके records तथा election process की वैधता कैसे तय होती है।
आगे क्या होगा?
12 सितंबर का CINTAA election इस विवाद का महत्वपूर्ण पड़ाव है, लेकिन संभवतः अंतिम अध्याय नहीं।
Election result ongoing court case के outcome के अधीन है और अगली सुनवाई 26 अक्टूबर के लिए निर्धारित है।
दूसरी तरफ Upasana Singh की police complaint से documents से जुड़ा एक अलग पहलू भी खुल गया है।
अब तीन developments महत्वपूर्ण होंगी—पुलिस शिकायत पर आगे क्या कार्रवाई करती है, document-removal allegations पर Poonam Dhillon और Padmini Kolhapure का विस्तृत पक्ष क्या आता है, और अदालत CINTAA election तथा leadership dispute पर आगे क्या फैसला देती है।
जब तक इन प्रक्रियाओं से स्पष्ट निष्कर्ष नहीं निकलता, दोनों पक्षों द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों को claims और allegations के रूप में ही देखना उचित होगा।
