हिंदी सिनेमा में किसी खास तरह की भूमिका में सफल होने के बाद कलाकारों को उसी दायरे में देखने की प्रवृत्ति नई नहीं है। तापसी पन्नू का कहना है कि यह समस्या केवल अभिनेताओं तक सीमित नहीं है। फिल्मकार भी अक्सर किसी जॉनर के लिए उन्हीं चेहरों की ओर लौटते हैं जिन्हें दर्शक पहले उसी तरह के किरदारों में देख चुके होते हैं।
तापसी के मुताबिक, इसका असर सिर्फ कलाकारों को मिलने वाले अवसरों पर नहीं पड़ता। इससे फिल्मों की अपनी अलग पहचान भी कमजोर हो सकती है। उन्होंने रोमांटिक कॉमेडी, ग्लैमरस फिल्मों और थ्रिलर का उदाहरण देते हुए कहा कि सीमित कलाकारों को बार-बार चुनने से अलग कहानियां भी पर्दे पर परिचित लगने लगती हैं।
‘फिल्म अलग दिखानी है तो कास्टिंग भी अलग होनी चाहिए’
तापसी ने अपनी बात को फिल्म की कास्टिंग से सीधे जोड़ा। उनके मुताबिक, नई कहानी या अलग प्रस्तुति की कोशिश तब अधूरी रह जाती है जब पर्दे पर फिर वही परिचित चेहरे उसी तरह की भूमिकाओं में दिखाई देते हैं।
उन्होंने कहा, “If you really want your film to look different, something new, something different, then you need to cast people who can bring that difference on screen.”
उनकी दलील है कि किसी फिल्म की अलग पहचान केवल कहानी, लोकेशन, कॉस्ट्यूम या विजुअल ट्रीटमेंट से नहीं बनती। अभिनेता भी उस दुनिया को आकार देते हैं। ऐसे में नए या अप्रत्याशित कास्टिंग विकल्प किसी परिचित जॉनर को भी अलग अनुभव दे सकते हैं।
रोम-कॉम और ग्लैमरस फिल्मों का दिया उदाहरण
तापसी ने रोमांटिक कॉमेडी और ग्लैमरस फिल्मों की कास्टिंग का जिक्र करते हुए कहा कि इनमें अक्सर कुछ ही कलाकार बार-बार नजर आते हैं।
उन्होंने कहा, “All the rom-coms, glam stuff looks the same because there are only those four or five actors, actresses who are doing that.”
उनका कहना था कि यही पैटर्न थ्रिलर जैसी फिल्मों में भी दिखाई देता है। किसी कलाकार की एक खास छवि बन जाने के बाद फिल्मकार उसे उसी तरह के अगले प्रोजेक्ट के लिए स्वाभाविक विकल्प मानने लगते हैं।
यहां तापसी की आपत्ति कलाकारों से नहीं, बल्कि उस कास्टिंग सोच से है जो उनकी स्थापित स्क्रीन इमेज पर जरूरत से ज्यादा निर्भर हो जाती है।
तापसी खुद भी महसूस कर चुकी हैं टाइपकास्टिंग का असर
तापसी का यह नजरिया उनकी अपनी फिल्मोग्राफी से भी जुड़ा है। Pink, Badla, Thappad, Haseen Dillruba और कई अन्य फिल्मों के बाद उनकी पहचान मजबूत, जटिल या गंभीर महिला किरदारों से जुड़ती गई।
अभिनेत्री ने समझाया कि अगर उनके पास लगातार गंभीर भूमिकाओं के प्रस्ताव आते हैं, तो उनमें से बेहतर फिल्म चुनने के बावजूद पर्दे पर उनकी छवि बहुत अलग नहीं दिखेगी। विकल्पों की प्रकृति आखिरकार कलाकार की फिल्मोग्राफी को प्रभावित करती है।
उन्होंने यह भी बताया कि Baby और Naam Shabana के बाद उन्हें कई एक्शन प्रोजेक्ट ऑफर हुए, लेकिन उन्होंने उनमें से कई को स्वीकार नहीं किया। वह लगातार उसी तरह के किरदारों में सीमित नहीं होना चाहती थीं।
इस संदर्भ में तापसी ने फिल्म इंडस्ट्री में “a certain creative bankruptcy” की बात भी कही। उनका संकेत उस स्थिति की ओर था जहां किसी कलाकार को एक भूमिका में देखने के बाद फिल्मकार उसके लिए उसी तरह के किरदारों की कल्पना करने लगते हैं।
अब रोमांटिक कॉमेडी करना चाहती हैं तापसी
एक्शन और गंभीर भूमिकाओं के लिए पहचानी जाने वाली तापसी ने रोमांटिक कॉमेडी करने में भी दिलचस्पी दिखाई है।
यह उनके तर्क का अहम हिस्सा है। कलाकार अलग तरह का काम करना चाहे, तब भी अंतिम फैसला इस पर निर्भर करता है कि निर्माता और निर्देशक उसे उस भूमिका के लिए संभावित विकल्प मानते हैं या नहीं।
तापसी ने Manmarziyaan का जिक्र अपनी रोमांटिक भूमिकाओं के संदर्भ में किया। वहीं 2024 में रिलीज हुई Khel Khel Mein ने उन्हें अपनी गंभीर स्क्रीन इमेज से अलग कॉमेडी स्पेस में काम करने का मौका दिया।
‘Gandhari’ में फिर इंटेंस भूमिका में नजर आईं तापसी
तापसी की कास्टिंग और टाइपकास्टिंग पर यह बातचीत उनकी फिल्म Gandhari के समय सामने आई है।
देवाशीष मखीजा के निर्देशन में बनी फिल्म को कनिका ढिल्लों ने लिखा और प्रोड्यूस किया है। तापसी इसमें बानी की भूमिका निभाती हैं, जिसकी बेटी के अपहरण के बाद कहानी एक हिंसक और भावनात्मक संघर्ष की ओर बढ़ती है।
फिल्म में इश्वाक सिंह, जतिन सरना, स्वस्तिका मुखर्जी, मीता वशिष्ठ और छाया कदम भी हैं। Gandhari 3 सितंबर को Netflix पर रिलीज हुई।
तापसी की आपत्ति कलाकारों से ज्यादा कास्टिंग की सोच पर
तापसी की टिप्पणी को केवल इस शिकायत के रूप में देखना कि बॉलीवुड में “वही अभिनेता” काम कर रहे हैं, उनकी बात को अधूरा कर देगा। उनका बड़ा तर्क यह है कि इंडस्ट्री कलाकारों की स्थापित छवि के आधार पर सुरक्षित चुनाव करने की आदी हो सकती है।
यह व्यवस्था व्यावसायिक दृष्टि से समझ में आ सकती है। किसी सफल रोमांटिक, एक्शन या थ्रिलर स्टार को उसी जॉनर में दोबारा लेना निर्माताओं के लिए अपेक्षाकृत परिचित विकल्प है। लेकिन लगातार ऐसा होने पर कलाकारों को अपनी रेंज दिखाने के कम मौके मिलते हैं और नई फिल्मों के लिए अलग पहचान बनाना भी मुश्किल हो सकता है।
तापसी जिस बदलाव की बात कर रही हैं, वह इसलिए केवल नए कलाकारों को मौका देने तक सीमित नहीं है। वह स्थापित अभिनेताओं को भी उन भूमिकाओं में देखने की वकालत कर रही हैं जिनसे दर्शक उन्हें पहले नहीं जोड़ते।
