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बॉलीवुड

‘उड़ता तीर’ आज सिनेमाघरों में: आयुष्मान की स्पाई-कॉमेडी पर पहले रिव्यू में क्या कहा गया?

आयुष्मान खुराना और सारा अली खान की फिल्म ‘उड़ता तीर’ आज सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है। जासूसी की कहानी को हास्य के साथ पेश करने वाली इस फिल्म के शुरुआती रिव्यू भी सामने आ गए हैं। समीक्षकों को इसकी अनोखी कहानी और कुछ कलाकारों की कॉमिक टाइमिंग पसंद आई है, लेकिन फिल्म के दूसरे हिस्से और हास्य के अंदाज पर उनकी राय बंटी हुई है। आकाश ए. कौशिक की यह बतौर निर्देशक पहली फिल्म है। इसका निर्माण धर्मा प्रोडक्शंस और सिख्या एंटरटेनमेंट ने किया है।

‘उड़ता तीर’ आज सिनेमाघरों में: आयुष्मान की स्पाई-कॉमेडी पर पहले रिव्यू में क्या कहा गया?
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द्वारा साधना गुप्ता

स्रोत: News - Bollywood Hungama, AajTak, indianexpress.com

पहचान भूलने वाले जासूस की कहानी

फिल्म में आयुष्मान का किरदार भारतीय काउंटर टेररिज्म स्क्वॉड के अधिकारी विक्रांत थापर के नाम से जाना जाता है। उसकी असली पहचान बिलाल अहमद की है, जो पाकिस्तान का जासूस है। एक हादसे के बाद बिलाल की याददाश्त चली जाती है। जब वह होश में आता है, तो आसपास के लोगों की बातों पर भरोसा करके खुद को भारत का वफादार अधिकारी मानने लगता है। इसके बाद वह उन्हीं योजनाओं के खिलाफ काम करने लगता है जिनसे पहले जुड़ा था। सारा अली खान ने यामिनी की भूमिका निभाई है। यही बदली हुई पहचान फिल्म में उलझन, तनाव और हंसी की स्थितियां पैदा करती है।

इस कहानी का आकर्षण केवल यह सवाल नहीं है कि विक्रांत को अपनी असलियत कब याद आएगी। दिलचस्प बात यह भी है कि उसकी बदली हुई सोच से उसके साथी और उसे निर्देश देने वाले लोग कैसे निपटते हैं। आम जासूसी फिल्मों में नायक अपनी पहचान छिपाकर मिशन पूरा करता है; यहां मुख्य किरदार खुद अपनी पहचान से अनजान है। फिल्म इसी उलटफेर के सहारे देशभक्ति, एक्शन और कॉमेडी को साथ लाने की कोशिश करती है।

शुरुआती समीक्षाओं में क्या पसंद आया?

आज तक की समीक्षा ने फिल्म को पांच में तीन अंक दिए हैं। समीक्षा के अनुसार, कहानी अपने किरदारों को स्थापित करने में कुछ समय लेती है, लेकिन बाद में पहचान की गड़बड़ी से पैदा होने वाली परिस्थितियां मनोरंजन करती हैं। इसमें आयुष्मान के अभिनय के साथ राहुल बोस की कॉमिक टाइमिंग और दिवंगत अभिनेता मुकुल देव की मौजूदगी की भी सराहना की गई है। समीक्षा यह भी मानती है कि मध्यांतर के बाद कुछ देर के लिए रफ्तार धीमी पड़ती है।

बॉलीवुड हंगामा ने भी फिल्म को पांच में तीन अंक दिए हैं। उसके समीक्षक को फिल्म की मूल कल्पना, हास्य वाले दृश्य और कलाकारों का प्रदर्शन प्रभावी लगा। खास तौर पर राहुल बोस और मुकुल देव के हिस्से आए दृश्यों को फिल्म की ताकत बताया गया। हालांकि, इसी समीक्षा में कहा गया है कि दूसरे हिस्से में कहानी अधिक गंभीर और पेचीदा हो जाती है। कई मोड़ों के कारण किरदारों की मंशा पर नजर बनाए रखना मुश्किल हो सकता है। यह बात बताती है कि फिल्म के बारे में सकारात्मक राय रखने वाले समीक्षक भी इसकी गति से पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं।

आलोचकों की राय कहां अलग है?

द इंडियन एक्सप्रेस की समीक्षक शुभ्रा गुप्ता ने फिल्म को पांच में दो अंक दिए हैं। उनकी राय में कलाकारों की टोली और कहानी का विचार अधिक असरदार कॉमेडी बना सकते थे, लेकिन व्यंग्य और भावनात्मक दृश्यों के बीच फिल्म कभी-कभी ही अपनी लय पकड़ती है। दूसरी ओर, स्क्रॉल की समीक्षा मानती है कि बिलाल का खुद को विक्रांत समझने से पैदा हुआ भ्रम सबसे कारगर हास्य देता है। उसके बाहर फिल्म कई जगह अतिरंजित ढंग अपनाती है। स्क्रॉल ने पाकिस्तान और मुस्लिम पहचान से जुड़े चुटकुलों के प्रस्तुतिकरण पर भी आपत्ति जताई है।

इस तरह पहले रिव्यू फिल्म को एक जैसा फैसला नहीं देते। जिन समीक्षकों को हल्की-फुल्की, उलझनों से चलने वाली कॉमेडी पसंद आई, उन्होंने इसके प्रदर्शन और मजेदार दृश्यों की तारीफ की है। असहमत समीक्षकों का सवाल है कि क्या चुटकुले और देशभक्ति का भाव पूरी कहानी को मजबूती दे पाते हैं। ये समीक्षकों की अलग-अलग राय हैं, फिल्म की सफलता या दर्शकों के अंतिम फैसले का प्रमाण नहीं।

रिलीज के पहले दिन की स्थिति

‘उड़ता तीर’ पहले 9 अक्टूबर को रिलीज होने वाली थी, फिर इसकी तारीख बदलकर 23 अक्टूबर की गई। रिलीज के दिन द इंडियन एक्सप्रेस ने टिकट बिक्री पर नजर रखने वाली वेबसाइट सैकनिल्क के हवाले से बताया कि पहले दिन की अग्रिम बुकिंग में ब्लॉक सीटों सहित करीब ₹2.59 करोड़ दर्ज हुए थे; ब्लॉक सीटों को हटाने पर यह आंकड़ा करीब ₹1.12 करोड़ था। अग्रिम बुकिंग का आंकड़ा अंतिम कमाई नहीं होता। फिल्म पहले दिन कुल कितना कारोबार करेगी, यह शो पूरे होने और पुष्टि किए गए आंकड़े आने के बाद ही स्पष्ट होगा।

फिलहाल ‘उड़ता तीर’ के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि शुरुआती मिश्रित प्रतिक्रियाओं के बीच दर्शक इसके हास्य और अनोखी कहानी से कितना जुड़ते हैं। आयुष्मान का किरदार फिल्म को एक अलग शुरुआत देता है; अब सिनेमाघरों में दर्शकों की प्रतिक्रिया बताएगी कि यह विचार पूरे समय उनका ध्यान बनाए रख पाता है या नहीं।

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