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अमेरिकी बॉन्ड यील्ड 18 साल के उच्च स्तर पर, सोने पर दबाव; चांदी करीब 1% फिसली

अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में तेज बढ़ोतरी और आगे ब्याज दरें बढ़ने की आशंका ने सोने-चांदी पर दबाव बढ़ा दिया है। मंगलवार, 29 सितंबर 2026 को COMEX गोल्ड फ्यूचर्स करीब $4,168 प्रति औंस पर लगभग सपाट रहे, जबकि सिल्वर फ्यूचर्स 1% से अधिक गिरकर करीब $61 प्रति औंस पर आ गए। भारत में भी MCX सिल्वर फ्यूचर्स में कमजोरी दर्ज हुई।

अमेरिकी बॉन्ड यील्ड 18 साल के उच्च स्तर पर, सोने पर दबाव; चांदी करीब 1% फिसली
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द्वारा जीत निर्मल

स्रोत: Financial Express की 29 सितंबर की रिपोर्ट, Reuters की 28 सितंबर की bullion-market रिपोर्ट और अमेरिकी बॉन्ड बाजार पर Associated Press की रिपोर्ट।

सोना संभला, लेकिन बाजार पर दबाव बरकरार

सोमवार की बड़ी गिरावट के बाद मंगलवार को सोने में कुछ स्थिरता दिखाई दी, लेकिन अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी, मजबूत डॉलर और ऊंची ब्याज दरों की आशंका की वजह से कीमती धातुओं के लिए माहौल अभी चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में COMEX गोल्ड फ्यूचर्स करीब $4,168 प्रति औंस पर लगभग सपाट रहे। दूसरी ओर, चांदी में बिकवाली जारी रही और सिल्वर फ्यूचर्स 1% से अधिक गिरकर लगभग $61 प्रति औंस पर पहुंच गए। The Financial Express

एक दिन पहले दबाव कहीं ज्यादा तेज था। सोमवार को सोने में 3% से अधिक और चांदी में लगभग 5% की गिरावट देखी गई थी।

भारत में सोना ₹1.48 लाख के आसपास, चांदी ₹2.25 लाख के करीब

भारतीय वायदा बाजार में भी वैश्विक संकेतों का असर दिखाई दिया।

MCX पर दिसंबर गोल्ड फ्यूचर्स करीब ₹1,48,600 प्रति 10 ग्राम पर लगभग स्थिर रहे, जबकि दिसंबर सिल्वर फ्यूचर्स करीब 0.9% गिरकर ₹2,25,500 प्रति किलोग्राम पर कारोबार कर रहे थे।

इससे पहले सोमवार को घरेलू बाजार में भी दोनों धातुओं में तेज बिकवाली देखने को मिली थी।

अमेरिकी यील्ड क्यों बनी सोने के लिए बड़ी चुनौती?

कीमती धातुओं पर दबाव का सबसे महत्वपूर्ण कारण अमेरिकी बॉन्ड बाजार में आया बदलाव है।

रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका की 10-वर्षीय रियल यील्ड करीब 2.85% तक पहुंच गई है, जो लगभग 18 वर्षों का उच्च स्तर है। वहीं, सामान्य 10-वर्षीय अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड सोमवार को 5.2% से ऊपर पहुंची और 2007 के बाद के उच्च स्तरों को छुआ।

यह सोने के लिए इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि गोल्ड स्वयं कोई ब्याज नहीं देता।

जब सरकारी बॉन्ड से मिलने वाला वास्तविक रिटर्न बढ़ता है, तो निवेशकों के सामने ब्याज देने वाली सुरक्षित संपत्तियां अधिक आकर्षक हो सकती हैं। इससे सोने जैसी non-yielding asset को रखने की opportunity cost बढ़ जाती है।

Fed की आगे की नीति पर बाजार की नजर

बाजार में यह उम्मीद भी सोने पर दबाव डाल रही है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व ब्याज दरों को और ऊंचा कर सकता है।

Reuters के मुताबिक, सोमवार को बाजार अक्टूबर में लगातार दूसरी Fed rate hike की लगभग 70% संभावना को कीमतों में शामिल कर रहा था। बढ़ती ब्याज दरों की उम्मीद ने छोटी अवधि की अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड को भी ऊपर धकेला है।

यदि दरें लंबे समय तक ऊंची रहती हैं, तो सोने और चांदी को ब्याज देने वाले निवेश विकल्पों से अधिक प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ सकता है।

महंगा कच्चा तेल भी क्यों बढ़ा रहा चिंता?

तेल की कीमतों में तेजी ने तस्वीर को और जटिल बना दिया है।

कच्चे तेल की ऊंची कीमतें महंगाई को बढ़ाने का जोखिम पैदा करती हैं। यदि ऊर्जा की बढ़ती लागत अमेरिका में inflation को ऊंचा रखती है, तो Fed के लिए ब्याज दरों को जल्दी कम करना मुश्किल हो सकता है—और जरूरत पड़ने पर दरें और बढ़ाने का दबाव भी बन सकता है।

यही कारण है कि तेल की तेजी, बॉन्ड यील्ड और डॉलर की मजबूती फिलहाल bullion market के लिए महत्वपूर्ण संकेतक बन गए हैं।

मजबूत डॉलर से भी सोने को नुकसान

अमेरिकी डॉलर का मजबूत होना भी सोने के लिए एक अतिरिक्त दबाव है।

सोने की अंतरराष्ट्रीय कीमत मुख्य रूप से डॉलर में तय होती है। डॉलर मजबूत होने पर अन्य मुद्राओं का इस्तेमाल करने वाले खरीदारों के लिए सोना तुलनात्मक रूप से महंगा हो सकता है, जिससे मांग प्रभावित हो सकती है।

Reuters के अनुसार, डॉलर दो महीने के उच्च स्तर के आसपास था, जबकि ऊंची Treasury yields ने सोने को रखने की opportunity cost और बढ़ा दी।

क्या सोने के लिए सभी संकेत नकारात्मक हैं?

जरूरी नहीं।

अल्पावधि में ऊंची यील्ड और ब्याज दरों की उम्मीद सोने पर दबाव डाल सकती है, लेकिन बाजार में कुछ सहायक कारक भी मौजूद हैं।

Financial Express द्वारा उद्धृत World Gold Council के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले सप्ताह वैश्विक Gold ETFs में $134.2 million का net inflow दर्ज किया गया। इससे संकेत मिलता है कि ऊंची real yields के बावजूद निवेशकों का एक हिस्सा सोने में एक्सपोजर बनाए हुए है।

Reuters की रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि केंद्रीय बैंकों की खरीद और भारत में दिवाली तथा शादी के सीजन से जुड़ी मांग सोने को कुछ समर्थन दे सकती है। हालांकि, ऐतिहासिक रूप से ऊंची कीमतें price-sensitive jewellery demand को सीमित भी कर सकती हैं।

निवेशकों के लिए अब क्या महत्वपूर्ण होगा?

आगे सोने और चांदी की दिशा केवल एक कारण से तय होने की संभावना नहीं है। अमेरिकी Treasury yields, डॉलर की चाल, कच्चे तेल की कीमतें और Fed की अगली ब्याज-दर नीति प्रमुख संकेतक बने रहेंगे।

यदि अमेरिकी यील्ड और बढ़ती है और बाजार अधिक rate hikes की उम्मीद करता है, तो bullion पर दबाव जारी रह सकता है। दूसरी तरफ, वित्तीय बाजार में तनाव, केंद्रीय बैंक की खरीद या सुरक्षित निवेश की मांग बढ़ने से सोने को समर्थन मिल सकता है।

इसलिए मौजूदा स्थिति को सोने के दीर्घकालिक रुझान का निश्चित संकेत मानने के बजाय ब्याज दरों और वित्तीय बाजारों में तेजी से बदलती परिस्थितियों का परिणाम समझना अधिक उचित होगा।

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