मुंबई, 3 अक्टूबर 2026: देश की प्रमुख गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों में शामिल Bajaj Finance ने ₹17,500 करोड़ तक की नई पूंजी जुटाने की योजना को बोर्ड की मंजूरी दे दी है। प्रस्ताव के तहत कंपनी ₹11,700 करोड़ तक Qualified Institutions Placement (QIP) से और ₹5,800 करोड़ तक preferential warrants जारी करके जुटाएगी। हालांकि पूरी प्रक्रिया अभी shareholder तथा जरूरी regulatory/statutory approvals के अधीन है।
यह Bajaj Finance का नवंबर 2023 के बाद पहला बड़ा equity fund-raising कदम है। नई पूंजी कंपनी को अपनी balance sheet और capital buffers मजबूत रखने तथा आगे की lending growth के लिए अतिरिक्त क्षमता दे सकती है।
₹11,700 करोड़ QIP से जुटाने की तैयारी
बोर्ड ने QIP के जरिए ₹11,700 करोड़ तक जुटाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इसके तहत ₹1 face value वाले नए equity shares qualified institutional buyers को जारी किए जा सकते हैं।
QIP सूचीबद्ध कंपनियों को mutual funds, insurance companies और दूसरे eligible institutional investors से अपेक्षाकृत सीधे तरीके से equity capital जुटाने की सुविधा देता है।
अभी QIP का अंतिम issue price और जारी किए जाने वाले shares की संख्या तय नहीं हुई है। इसलिए संभावित equity dilution की सटीक मात्रा भी इस चरण पर निर्धारित नहीं की जा सकती।
Bajaj Finserv को ₹5,800 करोड़ के Warrants
दूसरा हिस्सा ₹5,800 करोड़ तक के preferential warrants का होगा। ये warrants Bajaj Finance की promoter और holding company Bajaj Finserv को जारी किए जाने प्रस्तावित हैं। बाद में इन्हें समान संख्या में equity shares में convert किया जा सकेगा।
प्रस्तावित व्यवस्था में warrant allotment के समय कम-से-कम 25% consideration देना होगा, जबकि शेष 75% conversion के समय देय होगा।
इसका मतलब है कि ₹5,800 करोड़ की पूरी रकम तत्काल कंपनी के पास नहीं आएगी; उसका एक हिस्सा warrants के equity shares में convert होने के साथ मिलेगा।
कुल Fundraising का गणित
Qualified Institutions Placement (QIP) ₹11,700 करोड़, Preferential Warrants ₹5,800 करोड़, कुल प्रस्तावित Fundraise ₹17,500 करोड़
कंपनी के बोर्ड ने दोनों प्रस्तावों को 1 अक्टूबर 2026 की बैठक में मंजूरी दी थी।
Shareholders की मंजूरी अभी बाकी
बोर्ड की मंजूरी मिलने का अर्थ यह नहीं है कि ₹17,500 करोड़ की पूरी पूंजी पहले ही जुटा ली गई है।
Bajaj Finance दोनों प्रस्तावों के लिए shareholders की मंजूरी लेने के उद्देश्य से Extraordinary General Meeting (EGM) बुलाएगी। इसके अलावा transaction को लागू नियमों और आवश्यक regulatory तथा statutory approvals का पालन करना होगा।
इसलिए खबर को “Bajaj Finance ने ₹17,500 करोड़ जुटा लिए” के बजाय “Bajaj Finance ने ₹17,500 करोड़ तक जुटाने की योजना को मंजूरी दी” कहना अधिक सटीक है।
कंपनी को इतनी बड़ी पूंजी की जरूरत क्यों?
Fundraising ऐसे समय प्रस्तावित है जब Bajaj Finance का lending business तेजी से विस्तार कर रहा है। 30 सितंबर 2026 तक कंपनी का Assets Under Management (AUM) लगभग ₹5.85 लाख करोड़ था, जो सालाना आधार पर करीब 26.5% अधिक है। Customer franchise करीब 12.89 करोड़ तक पहुंच गई, जबकि तिमाही में 1.345 करोड़ नए loans book किए गए।
तेजी से बढ़ने वाली lending company के लिए पर्याप्त capital buffers बनाए रखना महत्वपूर्ण होता है। Equity capital बढ़ने से भविष्य में loan book के विस्तार के लिए अतिरिक्त balance-sheet capacity मिल सकती है।
हालांकि कंपनी द्वारा जुटाई जाने वाली वास्तविक रकम, timing और final terms अनुमोदनों तथा transaction के execution पर निर्भर करेंगी।
2023 में भी QIP से जुटाए थे ₹8,800 करोड़
यह Bajaj Finance के लिए नया funding route नहीं है।
कंपनी ने नवंबर 2023 में लगभग ₹8,800 करोड़ का QIP पूरा किया था। उस समय 1.21 करोड़ से अधिक equity shares Qualified Institutional Buyers को ₹7,270 प्रति share के भाव पर जारी किए गए थे।
इसके अलावा नवंबर 2023 में Bajaj Finserv को preferential basis पर warrants जारी किए गए थे, जिनकी aggregate value लगभग ₹1,188.85 करोड़ थी।
2026 का प्रस्ताव आकार में काफी बड़ा है और कंपनी की बढ़ती balance sheet के साथ आया है।
निवेशकों के लिए क्या मायने रखता है?
नई equity capital के दो अलग प्रभाव हो सकते हैं।
एक तरफ ₹17,500 करोड़ तक की अतिरिक्त पूंजी Bajaj Finance की capital position को मजबूत कर सकती है और loan book बढ़ाने की क्षमता को सहारा दे सकती है। Promoter Bajaj Finserv का ₹5,800 करोड़ तक warrants के जरिए निवेश भी promoter participation को दर्शाता है।
दूसरी तरफ QIP में नए shares और warrants के conversion से कुल outstanding equity shares बढ़ सकते हैं, जिससे मौजूदा shareholders के percentage ownership और per-share financial metrics पर dilution का प्रभाव पड़ सकता है।
इस प्रभाव की सही मात्रा final issue price, जारी shares की संख्या और warrants के conversion terms स्पष्ट होने के बाद ही मापी जा सकेगी।
Growth और Dilution के बीच संतुलन अहम
Bajaj Finance की fundraising योजना को केवल बड़ी रकम जुटाने की घटना के रूप में देखने के बजाय उसके business growth के संदर्भ में देखना महत्वपूर्ण है।
कंपनी का AUM तेजी से बढ़ रहा है और customer base भी विस्तार कर रहा है। ऐसे में अतिरिक्त equity capital भविष्य की lending growth को वित्तीय समर्थन दे सकती है।
वहीं shareholders के लिए यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि नई पूंजी से कंपनी कितनी अतिरिक्त growth और returns उत्पन्न करती है तथा equity dilution का प्रभाव कितना रहता है।
अगले महत्वपूर्ण संकेत QIP pricing, warrant issue price, final share count, shareholder approval और fund deployment से मिलेंगे।
