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भारत का Current Account Deficit $7 अरब पहुंचा: आयात बढ़ा, लेकिन एक बड़े विदेशी मुद्रा प्रवाह ने संभाली स्थिति

भारत के बाहरी खाते पर जुलाई 2026 में दबाव तेज हुआ है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, जुलाई में देश का चालू खाता घाटा यानी Current Account Deficit (CAD) $7 अरब रहा। जुलाई 2025 में यह $3.2 अरब था। यानी एक साल में मासिक CAD में करीब 119% की बढ़ोतरी हुई। लेकिन केवल यही आंकड़ा देखने पर भारत की बाहरी वित्तीय स्थिति की तस्वीर अधूरी रह जाएगी। इसी महीने भारत का Overall Balance of Payments $20.8 अरब के बड़े surplus में रहा, जबकि जुलाई 2025 में यह सिर्फ $0.3 अरब था।

भारत का Current Account Deficit $7 अरब पहुंचा: आयात बढ़ा, लेकिन एक बड़े विदेशी मुद्रा प्रवाह ने संभाली स्थिति
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द्वारा जीत निर्मल

स्रोत: JantaScope

सबसे पहले समझें: $7 अरब का घाटा आखिर बढ़ा क्यों?

RBI के अनुसार जुलाई 2026 में भारत का merchandise trade deficit बढ़कर $31.7 अरब हो गया, जो जुलाई 2025 में $28.2 अरब था।

इसके पीछे आयात और निर्यात दोनों में तेज वृद्धि दिखी, लेकिन आयात का आकार कहीं बड़ा रहा।

जुलाई 2026 में merchandise exports बढ़कर $45.1 अरब हो गए, जबकि एक साल पहले ये $37.4 अरब थे। दूसरी तरफ merchandise imports $65.6 अरब से बढ़कर $76.8 अरब पहुंच गए।

इस तरह साल-दर-साल निर्यात में लगभग 20.6% की वृद्धि हुई, लेकिन आयात भी लगभग 17.1% बढ़ा। चूंकि भारत पहले से बड़े merchandise deficit के साथ चल रहा था, बढ़े हुए import bill ने current account पर दबाव बनाए रखा।

Services ने फिर दिया सहारा

भारत की बाहरी अर्थव्यवस्था की कहानी सिर्फ goods trade की नहीं है।

जुलाई में net services receipts $17.6 अरब रहे, जो पिछले साल इसी महीने $16.4 अरब थे। Services exports $33.7 अरब से बढ़कर $38.3 अरब हो गए।

इसका अर्थ यह है कि merchandise trade से पैदा हुए बड़े घाटे के एक हिस्से को भारत के services sector ने फिर संतुलित किया।

IT और business services जैसे क्षेत्रों की मजबूत निर्यात क्षमता लंबे समय से भारत के current account के लिए महत्वपूर्ण cushion रही है। Q1 FY27 के RBI आंकड़ों में भी computer services, other business services और transportation services में साल-दर-साल services exports बढ़ने की बात दर्ज की गई थी।

विदेश से भेजा गया पैसा भी बना महत्वपूर्ण सहारा

RBI के आंकड़ों में जुलाई 2026 के दौरान net transfers $13.2 अरब रहे, जबकि जुलाई 2025 में ये $12.6 अरब थे।

इस श्रेणी में विदेशों में रहने वाले भारतीयों से आने वाली remittances का महत्वपूर्ण योगदान रहता है।

दूसरी ओर income account पर net outflow बढ़कर $6.1 अरब हो गया, जो पिछले साल जुलाई में $4 अरब था। Investment income payments जैसी मदें इस खाते को प्रभावित करती हैं।

इसलिए जुलाई की तस्वीर कुछ इस तरह बनी:

बड़ा goods deficit → services surplus और transfers से आंशिक भरपाई → फिर भी $7 अरब का Current Account Deficit।

अप्रैल-जुलाई में भी घाटा बढ़ा

एक महीने के आंकड़े की तुलना में वित्त वर्ष के शुरुआती चार महीनों का डेटा व्यापक तस्वीर देता है।

अप्रैल-जुलाई 2026 के दौरान भारत का cumulative Current Account Deficit $11.2 अरब रहा। पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में यह $6.6 अरब था।

यानी चार महीनों के आधार पर भी CAD लगभग 70% बढ़ा है।

इस अवधि में merchandise trade deficit $97.1 अरब से बढ़कर $117.8 अरब पहुंच गया।

हालांकि कुछ सकारात्मक buffers भी मजबूत हुए। Net services receipts $64.3 अरब से बढ़कर $69.3 अरब और net transfers $43.4 अरब से बढ़कर $53.9 अरब हो गए।

इससे एक महत्वपूर्ण निष्कर्ष निकलता है: भारत का services और remittance engine मजबूत बना हुआ है, लेकिन बढ़ता merchandise deficit उससे मिलने वाले लाभ के बड़े हिस्से को सोख रहा है।

असली चौंकाने वाला आंकड़ा CAD नहीं, NRI deposits हैं

जुलाई के Balance of Payments डेटा में सबसे असामान्य बदलाव capital flows में दिखाई देता है।

भारत का net capital account जुलाई में $27.7 अरब surplus में रहा, जबकि जुलाई 2025 में यह सिर्फ $3.5 अरब था।

इसमें सबसे बड़ा योगदान banking capital का रहा।

RBI के अनुसार जुलाई 2026 में net NRI deposits $33.5 अरब तक पहुंच गए। एक साल पहले इसी महीने यह आंकड़ा केवल $1 अरब था।

इसी बड़े प्रवाह के कारण Current Account में $7 अरब का deficit होने के बावजूद देश का overall Balance of Payments $20.8 अरब surplus में पहुंच गया।

यही जुलाई के आंकड़ों का सबसे महत्वपूर्ण पहलू है।

Current Account Deficit और Balance of Payments surplus एक साथ कैसे?

दोनों आंकड़े विरोधाभासी लग सकते हैं, लेकिन वास्तव में ऐसा नहीं है।

Current Account मुख्य रूप से goods, services, income और transfers से जुड़े अंतरराष्ट्रीय लेन-देन को दर्शाता है।

इसके विपरीत Balance of Payments में capital और financial flows भी शामिल होते हैं।

इसलिए कोई देश goods और services से जुड़े current account में घाटा दर्ज कर सकता है, लेकिन अगर पर्याप्त विदेशी पूंजी आती है तो उसका overall Balance of Payments surplus में रह सकता है।

जुलाई में भारत के साथ लगभग यही हुआ।

$7 अरब का current account deficit था, लेकिन $27.7 अरब के net capital account surplus ने उसे कहीं अधिक मात्रा में offset कर दिया।

FDI सुधरा, लेकिन portfolio flows की कहानी अधिक जटिल

RBI डेटा के अनुसार जुलाई में net Foreign Direct Investment (FDI) $7.3 अरब रहा, जो जुलाई 2025 के $4.5 अरब से अधिक है।

Foreign Portfolio Investment (FPI) भी जुलाई में $4.1 अरब net inflow रहा, जबकि एक साल पहले $2.5 अरब का net outflow दर्ज हुआ था।

हालांकि अप्रैल-जुलाई की cumulative तस्वीर अलग है। इस अवधि में FPI $5.5 अरब के net outflow में रहा।

इसलिए केवल जुलाई के मजबूत portfolio inflow को पूरे वित्त वर्ष का trend मानना जल्दबाजी होगी।

Q1 से जुलाई तक तस्वीर कितनी बदली?

RBI ने 1 सितंबर को जारी Q1 FY27 आंकड़ों में अप्रैल-जून 2026 का Current Account Deficit $4.2 अरब या GDP का 0.5% बताया था। पिछले साल इसी तिमाही में यह $3.4 अरब या GDP का 0.4% था।

Q1 में merchandise trade deficit $68.9 अरब से बढ़कर $86.1 अरब हो गया था।

अब जुलाई को जोड़ने के बाद अप्रैल-जुलाई CAD $11.2 अरब पहुंच चुका है।

इससे पता चलता है कि वित्त वर्ष की शुरुआत में अपेक्षाकृत सीमित दिख रहा external current-account gap जुलाई में तेजी से बढ़ा।

अगस्त का trade data क्या संकेत देता है?

अगस्त के merchandise trade आंकड़ों में कुछ राहत दिखाई देती है।

अगस्त 2026 में भारत का merchandise trade deficit घटकर लगभग $26.86 अरब रहा। Merchandise exports करीब $43.81 अरब और imports करीब $70.67 अरब रहे।

इससे जुलाई की तुलना में goods trade gap में कमी दिखाई देती है।

लेकिन merchandise trade deficit और Current Account Deficit एक ही चीज नहीं हैं। Services, transfers और income flows शामिल होने के बाद ही CAD की पूरी गणना होती है।

इसलिए अगस्त का कम trade deficit यह संकेत तो देता है कि goods side पर दबाव कुछ घटा, लेकिन इससे अपने आप यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि अगस्त का CAD भी उसी अनुपात में कम होगा।

JantaScope Analysis: $7 अरब का आंकड़ा कितना चिंताजनक है?

एक महीने में CAD का $3.2 अरब से $7 अरब होना स्पष्ट रूप से deterioration है, लेकिन इसे अकेले देखकर external-sector crisis का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।

तीन indicators को साथ देखना अधिक उपयोगी है।

पहला, merchandise trade deficit बढ़ रहा है, जो current account पर संरचनात्मक दबाव पैदा करता है।

दूसरा, services exports और transfers लगातार महत्वपूर्ण cushion दे रहे हैं। इनके बिना भारत का current account gap कहीं बड़ा होता।

तीसरा, जुलाई में capital inflows ने current-account deficit से कहीं अधिक financing उपलब्ध कराई, जिससे overall BoP $20.8 अरब surplus में रहा।

यानी जुलाई का डेटा एक दोहरी तस्वीर पेश करता है—current account कमजोर हुआ, लेकिन financing side बेहद मजबूत रही।

तेल की कीमतें अब क्यों महत्वपूर्ण हैं?

आने वाले महीनों में सबसे महत्वपूर्ण variables में global crude oil prices शामिल हैं।

भारत बड़ी मात्रा में ऊर्जा आयात करता है। इसलिए लंबे समय तक ऊंची crude prices import bill को बढ़ा सकती हैं और merchandise trade deficit के जरिए current account पर अतिरिक्त दबाव डाल सकती हैं।

हाल के वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता के कारण यह जोखिम और महत्वपूर्ण हो गया है।

लेकिन भविष्य का CAD केवल तेल से तय नहीं होगा। Merchandise exports, IT और business-services exports, remittances, gold imports तथा domestic demand के कारण होने वाले non-oil imports भी परिणाम को प्रभावित करेंगे।

निवेशकों और आम पाठकों को अब किन आंकड़ों पर नजर रखनी चाहिए?

अगले कुछ महीनों में सिर्फ headline CAD देखने के बजाय पांच चीजें अधिक उपयोगी होंगी—merchandise trade deficit, crude-oil import bill, services surplus, NRI/FDI/FPI flows और RBI के foreign-exchange reserve movements।

विशेष रूप से यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जुलाई में आया असाधारण NRI deposit inflow आगे भी जारी रहता है या यह अस्थायी उछाल साबित होता है।

यदि merchandise deficit ऊंचा रहता है लेकिन services, remittances और स्थिर capital inflows उसे finance करते रहते हैं, तो external pressure का स्वरूप अलग होगा। इसके विपरीत goods deficit बढ़ने के साथ capital inflows कमजोर हुए तो रुपये और foreign-exchange reserves पर दबाव बढ़ सकता है।

निष्कर्ष

जुलाई 2026 का $7 अरब Current Account Deficit headline के स्तर पर बड़ी छलांग है—एक साल पहले के $3.2 अरब से दोगुने से भी ज्यादा।

लेकिन RBI के पूरे Balance of Payments डेटा से अधिक महत्वपूर्ण कहानी सामने आती है।

भारत का merchandise deficit बढ़ा, services और transfers ने उसका एक हिस्सा संभाला और अंततः current account घाटे में रहा। वहीं दूसरी तरफ NRI deposits सहित बड़े capital inflows के कारण overall Balance of Payments $20.8 अरब surplus में पहुंच गया।

इसलिए जुलाई का डेटा केवल “CAD दोगुना हुआ” वाली कहानी नहीं है। असली सवाल यह है कि आने वाले महीनों में बढ़ते import bill के मुकाबले services earnings, remittances और capital inflows कितने टिकाऊ रहते हैं।

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