भारत के पास अब रिकॉर्ड $740.8 अरब का Forex Reserve
भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में अगस्त के आखिरी सप्ताह में तेज बढ़ोतरी हुई और कुल reserves पहली बार $740 अरब के पार निकल गए।
Reserve Bank of India के आंकड़ों के अनुसार, 28 अगस्त को समाप्त सप्ताह में देश का forex reserve $11.475 अरब बढ़कर $740.803 अरब हो गया। इससे एक सप्ताह पहले यह $729.328 अरब था।
यह बढ़त इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत ने लगातार दूसरे सप्ताह अपने forex reserves का नया रिकॉर्ड बनाया है। Reuters के मुताबिक, reserves में यह लगातार नौवीं साप्ताहिक वृद्धि थी।
इस तेजी में सबसे बड़ा योगदान foreign currency assets का रहा, लेकिन सोने के बढ़ते मूल्य ने भी RBI के reserve portfolio को मजबूत किया।
Foreign Currency Assets में $9.33 अरब की बढ़त
कुल forex reserves का सबसे बड़ा हिस्सा Foreign Currency Assets (FCA) हैं। ताजा सप्ताह में FCA $9.337 अरब बढ़कर $600.670 अरब हो गए।
यह आंकड़ा केवल RBI के पास रखे अमेरिकी डॉलर को नहीं दर्शाता। Foreign Currency Assets में euro, pound और yen जैसी दूसरी प्रमुख मुद्राओं में रखी संपत्तियां भी शामिल होती हैं।
इन currencies की value डॉलर में report की जाती है। इसलिए exchange rates में बदलाव होने पर FCA का dollar value बदल सकता है, भले ही underlying assets की वास्तविक मात्रा में उतना बदलाव न हुआ हो।
यही वजह है कि एक सप्ताह में FCA में आई पूरी बढ़त को सीधे तौर पर RBI की dollar buying के बराबर नहीं माना जा सकता।
मार्च 2026 के अंत से FCA में $48.387 अरब की वृद्धि हुई है। एक साल पहले की तुलना में यह आंकड़ा $16.733 अरब अधिक है।
सोने ने भी बढ़ाई RBI की ताकत
Foreign currency assets के बाद इस सप्ताह का दूसरा बड़ा योगदान gold reserves से आया।
RBI के पास मौजूद सोने की reported value $2.191 अरब बढ़कर $116.409 अरब हो गई।
सालाना तुलना में अंतर और बड़ा है। Gold reserves की value एक साल पहले के मुकाबले $29.641 अरब अधिक है।
यहां भी valuation को वास्तविक खरीद से अलग समझना जरूरी है। RBI के gold reserves की गणना डॉलर में होती है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत बढ़ने पर reserve की reported value भी बढ़ सकती है।
इसका मतलब है कि gold reserves में डॉलर के लिहाज से हुई पूरी वृद्धि को नए सोने की खरीद नहीं माना जा सकता।
SDR और IMF Position में मामूली गिरावट
Forex reserves के बाकी दो हिस्सों ने इस सप्ताह मुख्य आंकड़े को ज्यादा प्रभावित नहीं किया।
International Monetary Fund से जुड़े Special Drawing Rights (SDRs) $43 million घटकर $18.810 अरब रह गए।
IMF में भारत की Reserve Tranche Position भी $11 million की मामूली गिरावट के साथ $4.914 अरब रही।
28 अगस्त को समाप्त सप्ताह में भारत के reserves की तस्वीर इस तरह बनी:
Foreign Currency Assets: $600.670 अरब
Gold Reserves: $116.409 अरब
Special Drawing Rights: $18.810 अरब
IMF Reserve Tranche Position: $4.914 अरब
कुल Forex Reserves: $740.803 अरब
इन आंकड़ों से साफ है कि सप्ताह की लगभग पूरी बढ़ोतरी FCA और gold reserves से आई।
फरवरी का रिकॉर्ड टूटा, लेकिन रास्ता सीधा नहीं था
$740.8 अरब का स्तर अचानक नहीं आया।
इससे पहले 27 फरवरी को समाप्त सप्ताह में भारत का forex reserve $728.494 अरब के तत्कालीन रिकॉर्ड पर पहुंचा था। उसके बाद वैश्विक जोखिम बढ़ने और रुपये पर दबाव के बीच reserves नीचे आए।
RBI विदेशी मुद्रा बाजार में जरूरत के मुताबिक हस्तक्षेप करता है। जब केंद्रीय बैंक रुपये में अत्यधिक उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करने के लिए डॉलर बेचता है, तो उसका असर reserves पर पड़ सकता है।
जून के बाद तस्वीर फिर बदली। Foreign-currency inflows बढ़े और reserves ने तेजी से खोई हुई जमीन वापस हासिल की।
21 अगस्त तक आंकड़ा $729.328 अरब पहुंच गया। एक सप्ताह बाद इसमें $11 अरब से ज्यादा जुड़ गए और नया रिकॉर्ड बन गया।
लगातार नौ सप्ताह में करीब $75 अरब जुड़े
हालिया तेजी की रफ्तार सामान्य साप्ताहिक उतार-चढ़ाव से कहीं बड़ी रही है।
Reuters के अनुसार, reserves लगातार नौ सप्ताह बढ़े हैं और इस दौरान करीब $75 अरब का इजाफा हुआ।
इस तेजी के पीछे RBI द्वारा foreign-currency flows आकर्षित करने के लिए शुरू किए गए विशेष उपायों की भी भूमिका रही है।
Overseas borrowings और foreign-currency deposits को आकर्षक बनाने के लिए concessional forex swaps सहित hedging facilities उपलब्ध कराई गईं। Reuters के मुताबिक, 5 जून से 31 अगस्त के बीच इन व्यवस्थाओं के जरिए RBI को $136 अरब से अधिक प्राप्त हुए।
इसमें करीब $127 अरब non-resident Indian deposits से आया।
यह आंकड़ा हाल की reserve accumulation को समझने के लिए महत्वपूर्ण है। पिछले कुछ हफ्तों की बढ़ोतरी केवल portfolio investment या currency valuation की कहानी नहीं है; विशेष deposit flows ने भी इसमें बड़ी भूमिका निभाई है।
रिकॉर्ड Forex Reserve से भारत को क्या मिलता है?
बड़ा विदेशी मुद्रा भंडार किसी देश के लिए वित्तीय सुरक्षा की एक अतिरिक्त परत उपलब्ध कराता है।
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात से पूरा करता है और अंतरराष्ट्रीय व्यापार में कई भुगतान डॉलर में होते हैं। पर्याप्त reserves होने से बाहरी भुगतान संबंधी दबाव को संभालने की क्षमता बढ़ती है।
RBI के लिए इसका दूसरा उपयोग foreign exchange market में है। रुपये में असामान्य volatility होने पर केंद्रीय बैंक डॉलर की liquidity उपलब्ध करा सकता है।
लेकिन $740.8 अरब का reserve यह नहीं बताता कि रुपये का कोई निश्चित स्तर सुरक्षित हो गया है।
RBI का घोषित रुख किसी खास exchange rate को defend करने के बजाय बाजार में अत्यधिक volatility को नियंत्रित करने का रहा है। इसलिए reserves को fixed rupee level की गारंटी के बजाय policy buffer के रूप में देखना ज्यादा उचित है।
Headline Number से ज्यादा महत्वपूर्ण है Reserve की बनावट
रिकॉर्ड reserve अपने आप में बड़ी आर्थिक खबर है, लेकिन $740.803 अरब के headline figure के पीछे अलग-अलग ताकतें काम कर रही हैं।
सबसे बड़ा हिस्सा अब भी foreign currency assets का है। Gold reserves का मूल्य भी तेजी से बढ़ा है। साथ ही हाल के महीनों में विशेष foreign-currency deposit arrangements ने डॉलर inflows को मजबूत किया है।
यही composition आगे भी महत्वपूर्ण रहेगी।
अगर वैश्विक बाजारों में volatility बढ़ती है, capital flows बदलते हैं या रुपये पर फिर दबाव आता है, तो RBI के पास अब पहले से बड़ा buffer मौजूद है। दूसरी ओर, special schemes से आए flows कितने समय तक बने रहते हैं, यह reserve trajectory को प्रभावित कर सकता है।
28 अगस्त तक तस्वीर स्पष्ट है: भारत का foreign exchange reserve $740.803 अरब पर है, जो अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है।
