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भारत के Forex Reserves में रिकॉर्ड $44.9 अरब का उछाल, पहली बार $785.7 अरब के पार

भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 4 सितंबर 2026 को समाप्त सप्ताह में रिकॉर्ड $44.903 अरब बढ़कर $785.706 अरब के नए सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया। RBI के आंकड़ों के मुताबिक, इस उछाल का सबसे बड़ा योगदान foreign currency assets में हुई तेज बढ़ोतरी का रहा। बड़े विदेशी मुद्रा प्रवाह और केंद्रीय बैंक की विशेष forex swap सुविधाओं ने भी reserves को मजबूत किया।

भारत के Forex Reserves में रिकॉर्ड $44.9 अरब का उछाल, पहली बार $785.7 अरब के पार
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द्वारा जीत निर्मल

स्रोत: Janta Scope

भारत के Forex Reserves ने बनाया नया रिकॉर्ड

भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में एक ही सप्ताह में अब तक की सबसे बड़ी छलांग दर्ज की गई है।

Reserve Bank of India के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, 4 सितंबर 2026 को समाप्त सप्ताह में forex reserves $44.903 अरब बढ़कर $785.706 अरब हो गए। इससे एक सप्ताह पहले reserves $740.803 अरब पर थे और उस दौरान भी इनमें $11.475 अरब की बढ़ोतरी दर्ज हुई थी।

इस तरह केवल दो reporting weeks में भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में $56 अरब से अधिक की बढ़ोतरी हुई।

Foreign Currency Assets ने दिया सबसे बड़ा सहारा

इस रिकॉर्ड साप्ताहिक बढ़ोतरी के पीछे सबसे महत्वपूर्ण कारण Foreign Currency Assets (FCA) रहे।

Reuters के मुताबिक, latest week में foreign currency assets करीब $47.4 अरब बढ़े। हालांकि इस बढ़ोतरी का एक हिस्सा gold holdings के मूल्य में लगभग $2.6 अरब की गिरावट से offset हुआ।

FCA भारत के forex reserves का सबसे बड़ा हिस्सा होते हैं। इनमें अमेरिकी डॉलर के अलावा euro, pound और yen जैसी अन्य currencies में रखी assets का dollar-equivalent value भी शामिल होता है। इसलिए इन currencies की exchange-rate movements भी FCA के reported dollar value को प्रभावित कर सकती हैं।

अचानक इतना बड़ा पैसा कहां से आया?

इस असाधारण उछाल के पीछे RBI और सरकार द्वारा जून में विदेशी मुद्रा प्रवाह बढ़ाने के लिए उठाए गए कदम महत्वपूर्ण रहे।

Reuters के मुताबिक, इन उपायों में overseas borrowings के लिए discounted hedging तथा banks द्वारा विदेशों से foreign-currency deposits जुटाने के लिए free-of-cost hedging facility जैसी व्यवस्थाएं शामिल थीं।

RBI ने 5 जून से 31 अगस्त के बीच इन schemes के तहत $136.3 अरब जुटाए। इनमें लगभग $127 अरब non-resident Indian deposits से जुड़े थे।

प्रवाह इतना मजबूत रहा कि केंद्रीय बैंक को deposit hedging facility को पहले निर्धारित समय से पहले बंद करना पड़ा। अगस्त के अंत से पहले भी इसी व्यवस्था से reserves लगातार बढ़ रहे थे।

लगातार 10वें सप्ताह बढ़े Forex Reserves

यह केवल एक सप्ताह की असाधारण बढ़ोतरी नहीं है।

Reuters के अनुसार, 4 सितंबर तक भारत के forex reserves में लगातार 10 सप्ताह वृद्धि दर्ज हुई और इस अवधि में कुल बढ़ोतरी करीब $120 अरब रही।

21 अगस्त तक reserves $729.33 अरब के तत्कालीन रिकॉर्ड पर थे। उस समय तक आठ लगातार सप्ताह की बढ़ोतरी करीब $63 अरब थी। इसके बाद भी inflows जारी रहने से reserves ने तेजी से नए रिकॉर्ड बनाए।

Russia को पीछे छोड़ चौथे स्थान पर भारत

रिकॉर्ड बढ़ोतरी ने भारत की वैश्विक ranking को भी प्रभावित किया है।

Bloomberg द्वारा संकलित आंकड़ों का हवाला देते हुए रिपोर्टों में कहा गया कि भारत ने Russia को पीछे छोड़कर दुनिया का चौथा सबसे बड़ा foreign-exchange reserve holder बनने की स्थिति हासिल की है। भारत से आगे China, Japan और Switzerland हैं।

हालांकि विभिन्न देशों के reserve data की reporting dates अलग हो सकती हैं, इसलिए ऐसी global rankings समय के साथ बदल सकती हैं।

इतने बड़े Forex Reserve का भारत को क्या फायदा है?

बड़ा विदेशी मुद्रा भंडार किसी अर्थव्यवस्था के लिए बाहरी वित्तीय झटकों के खिलाफ buffer का काम करता है।

भारत के मामले में मजबूत reserves RBI को currency market में जरूरत पड़ने पर हस्तक्षेप करने की अधिक क्षमता देते हैं। इससे crude oil जैसी जरूरी imports के भुगतान, external liabilities और अचानक global capital outflows से पैदा होने वाले दबाव को संभालने की क्षमता भी बढ़ती है।

यह पहलू मौजूदा परिस्थितियों में खास तौर पर महत्वपूर्ण है। 9 सितंबर को crude oil की कीमतों में तेजी और geopolitical तनाव के बीच रुपया ₹95 प्रति डॉलर के स्तर से कमजोर हुआ था। Reuters के मुताबिक RBI ने currency market में हस्तक्षेप किया और rupee liquidity को नियंत्रित करने के लिए forex swaps का भी इस्तेमाल किया।

इसलिए record reserves का मतलब यह नहीं है कि रुपया स्वतः मजबूत हो जाएगा, लेकिन वे RBI को volatility से निपटने के लिए बड़ा financial cushion देते हैं।

रिकॉर्ड reserves के साथ एक चुनौती भी

$785.7 अरब का आंकड़ा प्रभावशाली है, लेकिन इसके पीछे की mechanics को समझना भी जरूरी है।

विशेष swap और deposit schemes के जरिए आए dollars जब RBI के पास जाते हैं, तो उसके बदले banking system में rupee liquidity बढ़ सकती है। इसका अर्थ है कि केंद्रीय बैंक को अतिरिक्त घरेलू liquidity को manage करने के लिए दूसरे monetary operations करने पड़ सकते हैं।

Reuters के मुताबिक, इन inflows से spot forex reserves तो बढ़ते हैं, लेकिन RBI की future liabilities भी बढ़ सकती हैं। Analysts ने यह भी संकेत दिया है कि existing forward dollar sales आगे लाई जाती हैं तो headline reserves मौजूदा peak से नीचे स्थिर हो सकते हैं।

इसलिए $785.7 अरब को केवल “अतिरिक्त उपलब्ध नकदी” समझना सही नहीं होगा।

2026 में तेजी से मजबूत हुआ भारत का बाहरी सुरक्षा कवच

2026 के दौरान forex reserves की trajectory तेजी से बदली है।

21 अगस्त को reserves $729.33 अरब थे, 28 अगस्त तक वे $740.803 अरब पहुंचे और 4 सितंबर को $785.706 अरब के नए रिकॉर्ड पर पहुंच गए।

इस तेजी के पीछे policy-driven foreign currency inflows की बड़ी भूमिका रही है। आगे reserves किस स्तर पर टिकते हैं, यह capital flows, RBI के currency-market interventions, rupee की चाल, global interest rates, gold valuation और geopolitical परिस्थितियों जैसे कई कारकों पर निर्भर करेगा।

फिलहाल इतना स्पष्ट है कि $44.9 अरब की रिकॉर्ड साप्ताहिक बढ़ोतरी ने भारत के पास बाहरी वित्तीय दबाव से निपटने के लिए उपलब्ध reserve buffer को ऐतिहासिक रूप से बड़े स्तर पर पहुंचा दिया है।


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