समाचार एजेंसी Reuters ने 22 अक्टूबर को चार बुलियन कारोबारियों के हवाले से इसकी जानकारी दी। हालांकि, अनुमति मिलने का मतलब यह नहीं है कि इतनी चांदी तत्काल भारत पहुंच जाएगी या इसकी कीमतों में निश्चित रूप से गिरावट आएगी। भारत दुनिया के सबसे बड़े चांदी उपभोक्ता बाजारों में शामिल है। यहां आभूषणों, सिक्कों, निवेश और औद्योगिक गतिविधियों के लिए चांदी की मांग रहती है।
सरकार ने चांदी के आयात की प्रक्रिया में क्यों दी राहत?
भारत अपनी कुल चांदी की जरूरत का 80 प्रतिशत से अधिक हिस्सा आयात से पूरा करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति में बदलाव और आयात संबंधी नियमों का असर घरेलू बाजार पर पड़ता है। मई 2026 में केंद्र सरकार ने चांदी की कई श्रेणियों के आयात को प्रतिबंधित किया था। जून में चांदी के दानों और पाउडर को भी प्रतिबंधित श्रेणी में शामिल कर दिया गया। इसके बाद कारोबारियों के लिए आयात से पहले अनुमति लेना अनिवार्य हो गया। इन प्रतिबंधों का उद्देश्य कीमती धातुओं के आयात को नियंत्रित करना, विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम करना और रुपये को सहारा देना था। हालांकि, लाइसेंस संबंधी प्रक्रियाओं के कारण चांदी की आपूर्ति प्रभावित हुई और घरेलू बाजार में अतिरिक्त प्रीमियम बढ़ने लगा।
DGFT ने अक्टूबर में बदली आयात अनुमति की प्रक्रिया
विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) ने 13 अक्टूबर 2026 को ट्रेड नोटिस संख्या 30/2026-27 जारी किया। इसके अंतर्गत चांदी की कुछ निर्धारित श्रेणियों के लिए आयात अनुमति प्राप्त करने की प्रक्रिया सरल बनाई गई। नई व्यवस्था 15 अक्टूबर से प्राप्त पात्र आवेदनों पर लागू हो सकती है। आयातकों को आवश्यक घोषणाएं करनी होंगी और प्रस्तावित आयात की मात्रा तथा मूल्य का उचित कारण बताना होगा। सरल प्रक्रिया के तहत अनुमति प्राप्त आयातकों को निर्धारित नियमों के अनुसार India International Bullion Exchange या अधिसूचित बैंकों और एजेंसियों के माध्यम से चांदी खरीदनी होगी। इस व्यवस्था में जारी आयात अनुमति छह महीने के लिए मान्य होगी और उसकी अवधि नहीं बढ़ाई जा सकेगी।
चांदी के प्रीमियम में आई बड़ी गिरावट
आयात से जुड़ी नई खबरों का असर चांदी के घरेलू प्रीमियम पर दिखाई देने लगा है। Reuters के अनुसार, 22 अक्टूबर को घरेलू आधिकारिक कीमतों के ऊपर लगने वाला चांदी का प्रीमियम घटकर लगभग 45 अमेरिकी सेंट प्रति औंस रह गया। इससे पिछले सप्ताह यह 2.50 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गया था। प्रीमियम वह अतिरिक्त राशि है जो सीमित उपलब्धता, स्थानीय मांग और आपूर्ति संबंधी परिस्थितियों के कारण निर्धारित संदर्भ कीमत के ऊपर देनी पड़ती है। इसमें कमी आने से संकेत मिलता है कि कारोबारियों को भविष्य में चांदी की उपलब्धता बेहतर होने की उम्मीद है। हालांकि प्रीमियम कम होने और खुदरा कीमतों में गिरावट आने को एक समान नहीं समझना चाहिए।
क्या भारत में चांदी और सस्ती हो सकती है?
अतिरिक्त आयात से घरेलू बाजार में चांदी की कमी दूर होने की संभावना है। इससे कीमतों पर दबाव कम हो सकता है, लेकिन खुदरा दरों में कितनी कमी आएगी, इसका अनुमान लगाना अभी मुश्किल है। भारत में चांदी की कीमत कई कारणों से प्रभावित होती है। इनमें अंतरराष्ट्रीय भाव, डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति, आयात शुल्क, घरेलू मांग और स्थानीय कारोबारी खर्च शामिल हैं। सरकार ने 2026 में सोने और चांदी पर आयात शुल्क 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत किया था। नई अनुमति व्यवस्था अपने आप इस शुल्क को कम नहीं करती। अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी महंगी होती है या रुपया कमजोर पड़ता है, तो अतिरिक्त आयात के बावजूद घरेलू कीमतें बढ़ सकती हैं। इसलिए फिलहाल कीमतों में निश्चित गिरावट की भविष्यवाणी करना उचित नहीं होगा।
त्योहारी सीजन में मांग बढ़ने की उम्मीद, लेकिन बाजार में सुस्ती
भारत में दिवाली, धनतेरस और शादी-विवाह के अवसरों पर चांदी की खरीदारी का विशेष महत्व है। आभूषणों के अलावा चांदी के सिक्के, बर्तन और उपहार भी बड़ी मात्रा में खरीदे जाते हैं। इसके बावजूद इस साल बाजार में मांग अपेक्षाकृत कमजोर बनी हुई है। कारोबारियों के अनुसार, हाल के महीनों में चांदी की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव और गिरावट के कारण कई निवेशकों को नुकसान हुआ है। इससे कुछ खरीदार फिलहाल नई खरीदारी करने से बच रहे हैं। यही कारण है कि इतनी बड़ी मात्रा में आयात की अनुमति ने बाजार को हैरान भी किया है।
ज्वेलर्स और कारोबारियों को कैसे मिलेगा फायदा?
चांदी की आपूर्ति बढ़ने से ज्वेलरी कारोबारियों के लिए कच्चा माल जुटाना आसान हो सकता है। विशेष रूप से छोटे आभूषण निर्माताओं और थोक व्यापारियों को सीमित उपलब्धता के कारण अतिरिक्त लागत का सामना करना पड़ता है। यदि बाजार में प्रीमियम घटता है और आपूर्ति नियमित होती है, तो कारोबारियों को अपनी खरीद और उत्पादन की योजना बनाने में मदद मिल सकती है। चांदी का उपयोग केवल आभूषणों तक सीमित नहीं है। इलेक्ट्रॉनिक्स, सौर ऊर्जा उपकरण और अन्य औद्योगिक उत्पादों में भी इसका इस्तेमाल होता है। इसलिए बेहतर आपूर्ति का असर औद्योगिक खरीदारों के लिए भी महत्वपूर्ण हो सकता है।
अंतरराष्ट्रीय चांदी बाजार पर क्या पड़ेगा असर?
भारत की ओर से बड़े पैमाने पर आयात होने की संभावना वैश्विक बाजार के लिए भी महत्वपूर्ण है। अगर भारतीय आयातक वास्तव में बड़ी मात्रा में चांदी खरीदते हैं, तो अंतरराष्ट्रीय मांग को समर्थन मिल सकता है। ऐसी स्थिति में एक दिलचस्प अंतर दिखाई दे सकता है। घरेलू बाजार में अतिरिक्त प्रीमियम घट सकता है, जबकि वैश्विक चांदी की कीमतों को भारतीय खरीद से सहारा मिल सकता है। हालांकि इसका प्रभाव वास्तविक आयात की मात्रा और अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति पर निर्भर करेगा।
निवेशकों और आम खरीदारों को क्या ध्यान रखना चाहिए?
चांदी में निवेश करने वालों के लिए केवल आयात संबंधी खबर के आधार पर फैसला लेना जोखिम भरा हो सकता है। चांदी की कीमतों में सोने की तुलना में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। ऐसे में खरीदारी से पहले मौजूदा बाजार दर, कर, अतिरिक्त शुल्क और निवेश के उद्देश्य को समझना जरूरी है। आभूषण खरीदने वाले ग्राहकों को चांदी की शुद्धता और बिल की भी जांच करनी चाहिए।
निष्कर्ष: बाजार में राहत के संकेत, लेकिन कीमतों पर अंतिम फैसला बाकी
चांदी के आयात की प्रक्रिया में राहत और करीब 6,500 टन की अनुमतियों की रिपोर्ट भारतीय सर्राफा बाजार के लिए महत्वपूर्ण घटनाक्रम है। इससे आने वाले महीनों में आपूर्ति बढ़ सकती है और स्थानीय प्रीमियम कम होने की संभावना है। हालांकि अभी सबसे बड़ा सवाल यही है कि अनुमति प्राप्त मात्रा में से वास्तविक आयात कितना होगा और घरेलू मांग कितनी तेजी से लौटेगी।
अतिरिक्त चांदी की उपलब्धता खरीदारों के लिए सकारात्मक संकेत है, लेकिन सस्ती चांदी की गारंटी नहीं। आने वाले दिनों में घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजार की चाल ही तय करेगी कि इस फैसले का कितना लाभ आम उपभोक्ताओं तक पहुंचता है।
