आठ सप्ताह की गिरावट के बाद बाजार में राहत
भारतीय शेयर बाजार ने सोमवार को मजबूत तेजी के साथ कारोबार किया और हाल की लगातार बिकवाली के बाद निवेशकों को कुछ राहत मिली।
कारोबार के दौरान 30 शेयरों वाला BSE Sensex 705.70 अंक की बढ़त के साथ 72,594.57 तक पहुंचा। इसी दौरान NSE Nifty 187.30 अंक चढ़कर 22,605.10 तक पहुंच गया।
यह तेजी इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे पहले भारतीय बाजार लगातार आठ सप्ताह गिरावट में रहा था—करीब 25 वर्षों में ऐसा सबसे लंबा weekly losing streak बताया गया है।
हालांकि, करीब 700 अंकों की तेजी intraday movement है। बाजार बंद होने से पहले इसमें बदलाव संभव है, इसलिए इसे अंतिम closing gain के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
बाजार में तेजी के पीछे क्या कारण रहे?
सोमवार की तेजी के पीछे किसी एक घटना के बजाय घरेलू और वैश्विक परिस्थितियों का मिश्रित असर दिखाई दिया।
सबसे महत्वपूर्ण संकेतों में crude oil prices में नरमी रही। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर तेल आयात करता है, इसलिए महंगा crude inflation, current-account balance और रुपये पर दबाव बढ़ा सकता है।
तेल की कीमतों में गिरावट से इन चिंताओं में कुछ राहत मिली और equity investors की risk appetite बेहतर हुई।
US Federal Reserve को लेकर चिंता हुई कम
अमेरिका से आए अपेक्षाकृत कमजोर employment data के बाद बाजार में यह उम्मीद बढ़ी कि Federal Reserve अपनी आगामी बैठक में aggressive monetary tightening से बच सकता है।
अमेरिकी ब्याज दरों का भारतीय बाजार पर भी असर पड़ता है।
ऊंची अमेरिकी yields विदेशी निवेशकों के लिए dollar assets को ज्यादा आकर्षक बना सकती हैं, जिससे emerging markets जैसे भारत से पूंजी बाहर जाने का जोखिम बढ़ता है।
Fed को लेकर चिंता कम होने से सोमवार को global risk sentiment को समर्थन मिला।
Financial Stocks ने संभाला मोर्चा
भारतीय बाजार की तेजी में financial stocks की भूमिका महत्वपूर्ण रही।
Bajaj Finance, Bajaj Finserv, Axis Bank, State Bank of India और HDFC Bank जैसे शेयरों में खरीदारी दिखाई दी।
Reuters के अनुसार Bajaj Finance के शेयर में मजबूत बढ़त दर्ज की गई, जबकि PSU banking stocks को भी quarterly business updates से समर्थन मिला।
HDFC Bank को लेकर sentiment तब बेहतर हुआ जब Anup Bagchi को बैंक का नया Managing Director और CEO नियुक्त किए जाने की खबर सामने आई।
Financial companies का benchmark indices में बड़ा weight होने के कारण इन शेयरों में तेजी Sensex और Nifty दोनों को मजबूत सहारा दे सकती है।
IT Shares में भी दिखी खरीदारी
Information Technology sector में भी सकारात्मक रुझान रहा।
Accenture के बेहतर revenue और bookings data ने भारतीय IT कंपनियों के लिए sentiment बेहतर करने में मदद की।
भारतीय IT कंपनियों की कमाई का बड़ा हिस्सा अमेरिकी और दूसरे विदेशी बाजारों से आता है। इसलिए global technology spending और बड़ी international IT कंपनियों के results को domestic IT stocks के लिए महत्वपूर्ण संकेत माना जाता है।
Midcap और Smallcap भी तेजी में शामिल
सोमवार की तेजी केवल बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं रही।
Reuters के अनुसार 16 प्रमुख sectoral indices में से 13 बढ़त में रहे, जबकि mid-cap और small-cap indices में भी तेजी दर्ज की गई।
Broad-based participation बाजार के लिए महत्वपूर्ण संकेत हो सकती है क्योंकि इससे पता चलता है कि खरीदारी केवल कुछ heavyweight stocks तक सीमित नहीं थी।
फिर भी एक दिन की तेजी को sustainable trend reversal मानना जल्दबाजी होगी।
विदेशी निवेशकों की बिकवाली अभी भी बड़ा जोखिम
बाजार की तेजी के बावजूद Foreign Institutional Investors यानी FIIs की लगातार बिकवाली चिंता का विषय बनी हुई है।
Exchange data के अनुसार पिछले trading session में विदेशी निवेशकों ने भारतीय equities में लगभग ₹9,484 करोड़ की net selling की थी।
इसके विपरीत domestic institutional investors ने बाजार को समर्थन दिया।
अगर विदेशी निवेशकों की निकासी जारी रहती है, तो short-term rebound के बावजूद Sensex और Nifty पर फिर दबाव आ सकता है।
Crude Oil नीचे आया, लेकिन जोखिम खत्म नहीं
Crude oil में नरमी ने सोमवार की तेजी में योगदान दिया, लेकिन global energy market अभी भी अस्थिर बना हुआ है।
Geopolitical developments, supply disruptions और global demand में बदलाव तेल की कीमतों को तेजी से प्रभावित कर सकते हैं।
भारत जैसे बड़े oil importer के लिए crude की दिशा inflation और currency दोनों के लिहाज से महत्वपूर्ण है।
इसलिए केवल एक दिन की गिरावट के आधार पर oil-related risk खत्म मानना उचित नहीं होगा।
RBI की Policy भी बाजार के लिए महत्वपूर्ण
भारतीय निवेशकों की नजर अब Reserve Bank of India की monetary policy पर भी है।
Inflation में बढ़ोतरी के कारण बाजार में RBI की अगली ब्याज दर कार्रवाई को लेकर चर्चा बढ़ी है।
Reuters के एक economist poll में लगभग 60% अर्थशास्त्रियों ने 25 basis points की repo-rate increase का अनुमान लगाया है।
अगर RBI दरें बढ़ाता है तो banking, real estate, automobile और दूसरे interest-rate-sensitive sectors पर उसका प्रभाव बाजार की अगली दिशा निर्धारित करने में महत्वपूर्ण हो सकता है।
क्या Sensex की तेजी Trend Reversal का संकेत है?
सोमवार की तेजी महत्वपूर्ण है, खासकर लगातार आठ सप्ताह की गिरावट के बाद। लेकिन इसे अभी निश्चित trend reversal कहना जल्दबाजी होगी।
बाजार को तीन तरह के संकेतों पर नजर रखनी होगी—विदेशी निवेशकों का flow, crude oil की दिशा और भारत-अमेरिका दोनों की monetary policy।
इसके अलावा corporate earnings और global bond yields भी आने वाले sessions में volatility को प्रभावित कर सकते हैं।
हाल की गिरावट के बाद valuations में सुधार ने buyers को वापस आकर्षित किया है, लेकिन बाजार की असली मजबूती तभी स्पष्ट होगी जब तेजी अगले कुछ sessions में टिके और foreign selling में कमी आए।
निवेशकों के लिए क्या मायने रखती है यह तेजी?
सोमवार का rebound बाजार sentiment के लिए राहत देने वाला है, लेकिन short-term तेजी को बिना जोखिम के संकेत के रूप में नहीं देखना चाहिए।
Sensex का करीब 700 अंक उछलना headline के लिहाज से बड़ा movement है, लेकिन भारतीय बाजार अभी भी global interest rates, crude oil, FII flows और RBI policy जैसे कई अनिश्चित factors से प्रभावित है।
इसलिए आने वाले sessions यह तय करने में ज्यादा महत्वपूर्ण होंगे कि सोमवार की तेजी केवल oversold market का technical rebound थी या भारतीय equities किसी अधिक स्थायी recovery की शुरुआत कर रही हैं।
