गुरुवार के भारी नुकसान के बाद शुक्रवार को फिर से उठा इंडियन स्टॉक मार्केट।
8 अक्टूबर 2026, शुक्रवार को इंडियन शेयर मार्केट में भारी गिरावट देखने को मिली थी, जिसका निफ्टी और सेंसेक्स पर बहुत ही बुरा प्रभाव पड़ा था। ट्रेड रुकने पर सेंसेक्स 1,045 अंक यानी 1.44% से गिरकर 71,593.34 अंक पर बंद हुआ था। और निफ्टी 50 , 371.25 अंक यानी कि 1.64% से गिरकर 22,231 अंक पर आ गया था। गिरावट के बाद दोनों मेजर इंडिसेज कई महीनों के पुराने रिकॉर्ड पर पहुंच गए थे, जिसके बाद शुक्रवार को फंडर्स ने कुछ चुनिंदा शेयर्स की खरीदारी की, जिससे स्टॉक मार्केट शेयर्स में बढ़ोतरी हुई।
रॉयटर्स के रिपोर्ट के मुताबिक, गुरुवार की भारी गिरावट के बाद। शेयर मार्केट टेक्निकली ओवरसोल्ड स्थिति में पहुंच गया था, ऐसी परिस्थिति में कुछ फंडर्स कम कीमत पर शेयर खरीदते हैं जिससे बाजार में अनिश्चित तेजी आती है, और ट्रेड में उछाल देखने को मिल सकता है।
शेयर मार्केट में हो रहे उतार-चढ़ाव के बीच आईटी शेयर्स ने तेजी से संभाला बाजार।
9 अक्टूबर, शुक्रवार को शेयर मार्केट ट्रेड के बढ़ने में आईटी सेक्टर का बड़ा हाथ रहा है। निफ्टी आईटी इंडेक्स में लगभग 3.3 % की बढ़त देखने को मिली है। इसी बढ़त के कारण बाजार में फंडर्स ने बड़ी आईटी कंपनियों में फंडिंग करने में रुचि दिखाई। जिससे शेयर बाजार का माहौल पहले से बेहतर हुआ।
इस बढ़ोतरी के पीछे टीसीएस के सितंबर माह के नतीजे सामने आए, कंपनी ने अपने नतीजे में राजस्व और मुनाफे में बढ़ोतरी दर्ज की, इसके साथ ही एआई से जुड़ी होने वाली सेवाओं से होने वाले आय में भी बढ़ोतरी हुई है।
क्या भारतीय शेयर मार्केट में ऐसे ही वृद्धि जारी रहेगी।
9 अक्टूबर 2026 में भारतीय शेयर मार्केट में आए उछाल के बाद फंडर्स को कुछ राहत तो जरूर मिली है लेकिन, आगे की वृद्धि कई महत्वपूर्ण बातों पर निर्भर करती है। इसमें कंपनियों के 3 महीनों के नतीजे, शेयर मार्केट में फॉरेन फंडर्स की गतिविधियां, और सबसे मुख्य कच्चे तेल की कीमतें, रुपये का उतार-चढ़ाव और अमेरिकी आर्थिक नीतियों के संग वर्ल्ड ट्रेड का रुख भी शामिल है।
अगर कंपनियों के नतीजे मजबूत रहते हैं , तो फंडर्स का भरोसा मजबूत होगा जिससे फंडर्स भारतीय कंपनियों में अपने पैसे लगाना सेफ मान सकते हैं। बाजार के रिकवरी में काफी ज्यादा समर्थन मिल सकता है और पिछले सत्र में हुआ लॉस जल्दी कवर हो सकता है। लेकिन वैश्विक अनिश्चितता बढ़ने और फॉरेन फंडर्स के फंडिंग विदड्रॉ करने पर शेयर मार्केट में फिर से गिरावट देखने को मिल सकती है, और दबाव बढ़ सकता है। इसीलिए केवल एक दिन की वृद्धि को स्टॉक मार्केट में स्थिरता मानना सही नहीं होगा।
मनीकंट्रोल के मुताबिक, शेयर मार्केट में स्थिरता का दूसरा कारण है, अमेरिकी राष्ट्रपति का बयान।
दरअसल ,अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यह कहा कि, ईरान पर हमला मध्यावधि चुनावों के बाद ही होगा, इससे फंडर्स के फंडिंग करने की क्षमता में सुधार आया। सैन्य कार्रवाई में देरी की संभावना ने जमीनी राजनीति तनावों को लेकर वर्तमान में हो रही परेशानियों को कम कर दिया है, जिससे भारतीय शेयर बाजार में तनाव कम हुआ है, और निवेशकों के मनोबल को बल मिला है।
कच्चे तेल की कीमतों में हुई गिरावट भी भारतीय शेयर बाजार के उछाल का मुख्य कारण है।
वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड की कीमत 1.11 % से गिरी है। कच्चे तेल की कम कीमतें भारत जैसे प्रमुख तेल आयातक देश को तेल को आयात करने में लगने वाली लागत और मुद्रास्फीति संबंधित चिंताओं को कम करके राहत दे सकती हैं। क्योंकि भारत का 80% तेल आयात होता है। तो तेल की कीमत में गिरावट भी ट्रेड को बढ़ाने में मददगार है।
एक दिन शेयर बाजार में भारी गिरावट और दूसरे दिन उछाल, निवेशकों के लिए क्या है इसका संकेत?
बाजार में भारी गिरावट आने के बाद बढ़ते शेयर्स के रेट को देखकर फंडर्स को जल्दबाजी में फैसला लेने से बचना चाहिए। किसी शेयर में गिरावट आने पर तुरंत खरीदना भी सही नहीं है। शेयर में निवेश करने से पहले कंपनी के फाइनेंशियल नतीजे, कारोबार की संभावनाएं, मूल्यांकन और अपने रिस्क बेयरिंग क्षमता का आकलन करना भी बहुत जरूरी है, झटपट ट्रेड करने वाले ट्रेडर्स को शेयर मार्केट के उतार-चढ़ाव और जोखिम प्रबंधन पर मुख्य रूप से गौर करना चाहिए।
