Indian Government Bond Yield में आई नरमी
भारतीय सरकारी बॉन्ड बाजार में सोमवार, 5 अक्टूबर को शुरुआती कारोबार में सुधार देखने को मिला।
Benchmark 10-year government bond yield 7.2060% पर कारोबार कर रही थी, जबकि पिछली trading session में यह 7.2133% पर थी।
पिछला स्तर करीब ढाई साल के उच्च स्तर के आसपास था।
Bond market में yield और price विपरीत दिशा में चलते हैं। इसका मतलब है कि yield में गिरावट आम तौर पर bond prices में सुधार को दर्शाती है।
Brent Crude में गिरावट से क्यों मिली राहत?
भारतीय bond market के लिए crude oil एक महत्वपूर्ण global indicator है क्योंकि भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है।
Brent crude overnight नरम होकर $101 प्रति barrel से थोड़ा ऊपर कारोबार कर रहा था।
Middle East से crude exports बढ़ने के संकेत और अतिरिक्त global supply की संभावना ने तत्काल supply shortage को लेकर चिंता कुछ कम की।
हालांकि energy infrastructure से जुड़े geopolitical risks अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुए हैं।
इसलिए crude की मौजूदा गिरावट को लंबे समय की trend reversal मानना जल्दबाजी होगी।
Crude Oil और Indian Bonds के बीच क्या संबंध है?
भारत जैसे बड़े oil-importing देश के लिए crude की कीमतों में तेज वृद्धि कई आर्थिक जोखिम पैदा कर सकती है।
महंगा crude भारत के import bill को बढ़ा सकता है, रुपये पर दबाव डाल सकता है और fuel तथा transportation costs के जरिए inflation को प्रभावित कर सकता है।
अगर inflation का खतरा बढ़ता है, तो Reserve Bank of India को interest rates ऊंची रखने या बढ़ाने की जरूरत पड़ सकती है।
ऐसे माहौल में existing government bonds कम आकर्षक हो सकते हैं और उनकी yields बढ़ सकती हैं।
इसी कारण crude की कीमतों में नरमी bond investors के लिए सकारात्मक संकेत मानी जाती है।
कमजोर US Jobs Data से भी मिला Support
Indian bonds को केवल crude से ही राहत नहीं मिली।
सितंबर के अमेरिकी employment data ने Federal Reserve की अगली policy को लेकर market expectations भी बदली हैं।
अमेरिकी employers ने सितंबर में लगभग 29,000 jobs जोड़ीं, जबकि बाजार को करीब 90,000 नई नौकरियों की उम्मीद थी।
कमजोर employment growth के बाद traders ने Federal Reserve की अक्टूबर बैठक में एक और rate hike की संभावना कम कर दी।
Market pricing के अनुसार Fed के rates unchanged रखने की संभावना लगभग 80% तक पहुंच गई थी।
इससे global bond markets को कुछ राहत मिली और Indian bonds को भी support मिला।
US Treasury Yield अब भी ऊंची
Fed को लेकर expectations नरम होने के बावजूद global bond market का दबाव पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है।
Benchmark US 10-year Treasury yield करीब 5.21% पर बनी हुई थी, जो लगभग दो दशकों के ऊंचे स्तरों के आसपास है।
जब अमेरिकी government bonds पर yield बढ़ती है, तो emerging markets को investors को आकर्षित करने के लिए comparatively बेहतर returns देने का दबाव बढ़ सकता है।
इसलिए US Treasury yields भारतीय bond market की दिशा के लिए महत्वपूर्ण बनी हुई हैं।
अब RBI Policy पर बाजार की नजर
Indian bond investors के लिए सबसे बड़ा घरेलू trigger Reserve Bank of India की Monetary Policy Committee की आगामी बैठक है।
बाजार का एक बड़ा हिस्सा मान रहा है कि RBI policy rate में बढ़ोतरी कर सकता है।
Reuters के 61 economists के poll में 35—यानी करीब 60%—ने 25 basis points की बढ़ोतरी का अनुमान लगाया है।
अगर ऐसा होता है तो repo rate मौजूदा 5.25% से बढ़कर 5.50% हो सकती है।
यह लगभग चार वर्षों में RBI की पहली rate hike होगी।
Inflation क्यों बढ़ा रही RBI पर दबाव?
RBI के सामने चुनौती केवल crude oil की नहीं है।
भारत की consumer inflation अगस्त में बढ़कर 4.82% पहुंच गई थी और लगातार तीसरे महीने RBI के 4% medium-term target से ऊपर रही।
इसके साथ भारतीय अर्थव्यवस्था ने अप्रैल-जून quarter में मजबूत 7.8% growth दर्ज की।
तेज economic growth और बढ़ती inflation का combination central bank को monetary policy tight करने के लिए अधिक जगह दे सकता है।
इसी कारण bond market RBI के policy statement और आगे की guidance पर बारीकी से नजर रख रहा है।
State Borrowing भी Bond Market के लिए चुनौती
Bond yields पर एक और महत्वपूर्ण दबाव government securities की supply से आ रहा है।
State governments ने आने वाले borrowing period के लिए करीब ₹3.61 लाख करोड़ की indicative borrowing योजना सामने रखी है।
बाजार की अपेक्षा से अधिक bond supply होने पर investors को अधिक securities absorb करनी पड़ती हैं।
यदि demand उसी अनुपात में नहीं बढ़ती, तो bond prices पर दबाव और yields में बढ़ोतरी हो सकती है।
यही वजह है कि crude में राहत मिलने के बावजूद yields में गिरावट फिलहाल सीमित है।
पिछले सप्ताह लगातार सातवीं साप्ताहिक बढ़त
भारतीय 10-year benchmark yield ने पिछले सप्ताह लगातार सातवीं weekly rise दर्ज की थी।
Yield 7.2133% तक पहुंच गई थी, जो अप्रैल 2024 के बाद सबसे ऊंचे स्तरों में से एक है।
यह दिखाता है कि bond market पिछले कुछ समय से केवल oil prices ही नहीं, बल्कि global yields, domestic inflation, RBI policy expectations और government borrowing जैसे कई factors से दबाव में है।
Investors के लिए Yield गिरने का क्या मतलब?
Government bond yield में गिरावट का सीधा मतलब यह नहीं है कि अर्थव्यवस्था की सभी financial conditions आसान हो गई हैं।
फिलहाल यह मुख्य रूप से हाल की तेज yield वृद्धि के बाद सीमित राहत को दर्शाती है।
अगर Brent crude आगे भी गिरता है और US yields नरम होती हैं तो Indian bonds को अतिरिक्त support मिल सकता है।
लेकिन RBI rate hike, inflation और heavy government borrowing supply yields को फिर ऊपर धकेल सकती हैं।
इसलिए bond market की अगली दिशा किसी एक factor के बजाय इन सभी forces के balance से तय होने की संभावना है।
Rupee पर भी Crude का असर
Crude oil की कीमतें Indian rupee के लिए भी महत्वपूर्ण हैं।
महंगा oil import bill बढ़ाता है, जिससे dollar demand बढ़ सकती है और rupee पर दबाव पड़ सकता है।
हाल के महीनों में elevated crude prices और global bond yields ने भारतीय currency और domestic financial assets पर दबाव बढ़ाया है।
अगर crude में sustained गिरावट आती है तो इससे inflation expectations के साथ-साथ rupee को भी कुछ support मिल सकता है।
Bond Yield की गिरावट को लेकर सावधानी क्यों जरूरी?
5 अक्टूबर की शुरुआती गिरावट सकारात्मक है, लेकिन इसे अभी बड़े trend reversal के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
Brent crude अब भी $100 प्रति barrel से ऊपर है।
US Treasury yields भी ऐतिहासिक रूप से ऊंचे स्तरों के आसपास हैं।
इसके अलावा domestic inflation RBI target से ऊपर है और markets monetary tightening की संभावना को price कर रहे हैं।
इन परिस्थितियों में Indian government bond market में volatility बने रहने की संभावना है।
आगे किन चीजों पर रहेगी नजर?
अब bond investors के लिए सबसे महत्वपूर्ण event RBI की Monetary Policy Committee का फैसला होगा।
Market खास तौर पर repo rate decision, inflation outlook और RBI की आगे की monetary-policy guidance पर नजर रखेगा।
इसके अलावा Brent crude, US Treasury yields, rupee movement और government borrowing calendar भी bond yields की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
फिलहाल crude की नरमी ने Indian bonds को राहत जरूर दी है, लेकिन आने वाले दिनों में RBI का फैसला यह तय कर सकता है कि यह राहत टिकाऊ बनती है या yields फिर ऊपर जाती हैं।
