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दिल्ली मास्टर प्लान 2047: 40 लाख नए घर, लैंड पूलिंग और किराये के आवास पर बड़ा फोकस

दिल्ली के भविष्य के शहरी विकास की दिशा तय करने वाले Master Plan for Delhi (MPD) 2047 में आवास को प्रमुख प्राथमिकताओं में रखा गया है। योजना में 2047 तक करीब 40 लाख अतिरिक्त आवास इकाइयों की जरूरत का अनुमान लगाया गया है। छोटे आकार के किफायती घर, अफोर्डेबल रेंटल हाउसिंग, लैंड पूलिंग क्षेत्रों और ट्रांजिट-ओरिएंटेड डेवलपमेंट के जरिए नई आवासीय क्षमता विकसित करने पर जोर दिया गया है।

दिल्ली मास्टर प्लान 2047: 40 लाख नए घर, लैंड पूलिंग और किराये के आवास पर बड़ा फोकस
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द्वारा जीत निर्मल

स्रोत: mint

दिल्ली के लिए क्यों महत्वपूर्ण है Master Plan 2047?

दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) ने Master Plan for Delhi 2047 को मंजूरी दे दी है। इसके बाद योजना को अंतिम मंजूरी और अधिसूचना के लिए केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय के पास भेजा जाना है। यह योजना आने वाले दशकों में राजधानी में आवास, परिवहन, भूमि उपयोग, पर्यावरण और शहरी बुनियादी ढांचे के विकास की व्यापक दिशा निर्धारित करेगी।

DDA के अनुसार, मास्टर प्लान किसी शहर के दीर्घकालिक विकास और पुनर्विकास के लिए नीतिगत ढांचा उपलब्ध कराता है। दिल्ली इससे पहले 1962, 2001 और 2021 के मास्टर प्लान देख चुकी है।

2047 तक करीब 40 लाख अतिरिक्त घरों की जरूरत

MPD 2047 में 2011 से 2047 की अवधि के लिए दिल्ली की आवासीय मांग करीब 40 लाख dwelling units आंकी गई है। यह अनुमान औसतन 4.5 सदस्यों वाले परिवार के आधार पर तैयार किया गया है। योजना में 2047 तक दिल्ली की आबादी करीब 3.2 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान भी सामने आया है।

इतनी बड़ी आवासीय जरूरत को केवल पारंपरिक कॉलोनियों के विस्तार से पूरा करना आसान नहीं होगा। इसलिए प्रस्तावित रणनीति में नई जमीन के नियोजित विकास के साथ मौजूदा आवासीय क्षेत्रों के पुनर्विकास और बेहतर उपयोग पर भी ध्यान दिया गया है।

छोटे और किफायती घरों पर जोर

मास्टर प्लान की आवास रणनीति में छोटे आकार के घरों और किफायती आवास की उपलब्धता बढ़ाने पर जोर है। इसका उद्देश्य ऐसे परिवारों और कामकाजी लोगों के लिए औपचारिक हाउसिंग विकल्प बढ़ाना है जिनके लिए दिल्ली में बाजार दर पर घर खरीदना मुश्किल हो सकता है।

इसके साथ ही Affordable Rental Housing को भी रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया है। किराये के औपचारिक और किफायती विकल्प बढ़ने से प्रवासी कामगारों, निम्न एवं मध्यम आय वाले परिवारों तथा उन लोगों को फायदा हो सकता है जो घर खरीदने के बजाय किराये पर रहना पसंद करते हैं।

Land Pooling से खुलेंगे नए हाउसिंग क्षेत्र

दिल्ली में नई आवासीय क्षमता विकसित करने के लिए Land Pooling Areas की भूमिका महत्वपूर्ण रहने वाली है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत निजी जमीन को नियोजित विकास प्रक्रिया में शामिल करके बड़े क्षेत्रों में सड़क, आवास, सार्वजनिक सुविधाओं और अन्य बुनियादी ढांचे का विकास किया जा सकता है।

नई हाउसिंग सप्लाई के लिए Land Pooling Areas के अलावा Transit-Oriented Development (TOD) Zones, High Density Corridors और Low Density Areas का भी इस्तेमाल प्रस्तावित है। निजी क्षेत्र की भागीदारी को भी इस प्रक्रिया का हिस्सा माना गया है।

मेट्रो और सार्वजनिक परिवहन के आसपास अधिक विकास

Transit-Oriented Development का उद्देश्य सार्वजनिक परिवहन नेटवर्क के आसपास अधिक व्यवस्थित और अपेक्षाकृत सघन शहरी विकास को बढ़ावा देना है।

ऐसे क्षेत्रों में आवास, कार्यालय, दुकानें और दूसरी सुविधाएं एक-दूसरे के करीब विकसित होने से लोगों की निजी वाहनों पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है। हालांकि इसका वास्तविक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि परिवहन, पानी, सीवर, बिजली और सार्वजनिक सुविधाओं की क्षमता को बढ़ती आबादी के अनुरूप कितनी तेजी से बढ़ाया जाता है।

झुग्गी और JJ क्लस्टर के पुनर्वास पर भी ध्यान

योजना में स्लम और JJ क्लस्टर के इन-सिटू पुनर्वास का प्रस्ताव भी शामिल है। इसका मतलब है कि जहां संभव हो, निवासियों को दूर स्थानांतरित करने के बजाय उसी क्षेत्र या उसके आसपास बेहतर आवास उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जाए।

अनियोजित क्षेत्रों में रणनीति ऐसे विकास को प्राथमिकता देने की बात करती है जिसमें विस्थापन कम हो और साथ ही आवास की गुणवत्ता तथा बुनियादी सेवाओं तक पहुंच सुधरे।

अनधिकृत कॉलोनियों के लिए क्या प्रस्ताव है?

दिल्ली की अनधिकृत कॉलोनियां लंबे समय से शहरी नियोजन की बड़ी चुनौती रही हैं। DDA के मुताबिक दिल्ली में लाखों लोग ऐसी कॉलोनियों में रहते हैं, जहां कई जगह नियोजित सड़क नेटवर्क, सार्वजनिक सुविधाओं और सामाजिक बुनियादी ढांचे की कमी है।

MPD 2047 में नियमित की गई अनधिकृत कॉलोनियों के regeneration की गुंजाइश रखी गई है। इसके जरिए बेहतर सड़क नेटवर्क, खुले स्थान, सार्वजनिक सुविधाएं और फायर ब्रिगेड तथा आपातकालीन वाहनों की पहुंच जैसी व्यवस्थाओं में सुधार का लक्ष्य है। भविष्य में अनधिकृत निर्माण को हतोत्साहित करने के लिए अधिक संपत्ति कर या पानी-बिजली के अधिक शुल्क जैसे उपायों का प्रस्ताव भी सामने आया है।

मौजूदा हाउसिंग क्षेत्रों का भी होगा पुनर्विकास

नई कॉलोनियां बसाना ही योजना का एकमात्र लक्ष्य नहीं है। मौजूदा आवासीय क्षेत्रों को regenerate और upgrade करने का प्रस्ताव भी इसमें शामिल है।

इस दायरे में employer housing, resettlement colonies, cooperative group housing societies और DDA द्वारा विकसित आवासीय परिसरों जैसे क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे और सार्वजनिक सुविधाओं को बेहतर करने की संभावना शामिल है।

40 लाख घर बनाना आसान क्यों नहीं होगा?

40 लाख अतिरिक्त घरों की जरूरत का अनुमान दिल्ली के सामने अवसर के साथ एक विशाल बुनियादी ढांचा चुनौती भी पेश करता है। इतनी बड़ी आबादी और आवासीय क्षमता के लिए केवल इमारतें बनाना पर्याप्त नहीं होगा।

नई बस्तियों के साथ पानी, बिजली, सीवरेज, कचरा प्रबंधन, सड़कें, सार्वजनिक परिवहन, स्कूल, अस्पताल और खुले स्थानों की क्षमता भी बढ़ानी होगी। MPD के अनुमानों के मुताबिक 2047 की आबादी को संभालने के लिए मौजूदा व्यवस्था की तुलना में बिजली उत्पादन और ठोस कचरा प्रबंधन क्षमता में बड़े विस्तार की आवश्यकता पड़ सकती है।

संतुलित विश्लेषण: योजना से आगे असली परीक्षा क्रियान्वयन की

Master Plan 2047 दिल्ली के आवास संकट से निपटने के लिए कई रास्तों को एक साथ जोड़ने की कोशिश करता है—किफायती घर, किराये के आवास, लैंड पूलिंग, TOD, पुनर्विकास और झुग्गी पुनर्वास।

यदि इन नीतियों को प्रभावी ढंग से लागू किया जाता है तो राजधानी में औपचारिक और किफायती आवास की आपूर्ति बढ़ सकती है और अनियोजित विस्तार पर दबाव कम हो सकता है।

दूसरी ओर, इतने बड़े पैमाने पर विकास के लिए जमीन की उपलब्धता, विभिन्न सरकारी एजेंसियों के बीच समन्वय, निजी क्षेत्र की भागीदारी, पर्यावरण संरक्षण और बुनियादी सेवाओं के विस्तार जैसी चुनौतियां महत्वपूर्ण रहेंगी। इसलिए योजना की सफलता का वास्तविक पैमाना केवल प्रस्तावित घरों की संख्या नहीं, बल्कि यह होगा कि वे घर कितने किफायती, रहने योग्य और परिवहन तथा नागरिक सुविधाओं से जुड़े होते हैं।


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