नई दिल्ली: वित्त वर्ष 2025-26 में म्यूचुअल फंड निवेशकों के लिए बाजार का प्रदर्शन सभी स्कीमों में एक जैसा नहीं रहा। FY26 के दौरान घाटे में रहने वाली म्यूचुअल फंड स्कीमों की संख्या करीब तीन गुना बढ़ गई। यह स्थिति म्यूचुअल फंड निवेश में बाजार से जुड़े जोखिमों को एक बार फिर सामने लाती है।
म्यूचुअल फंड को अक्सर लंबी अवधि में निवेश और विविधीकरण के साधन के रूप में देखा जाता है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि प्रत्येक स्कीम हर वित्त वर्ष में सकारात्मक रिटर्न देगी। बाजार की दिशा, स्कीम की निवेश रणनीति और पोर्टफोलियो में शामिल कंपनियों या एसेट्स का प्रदर्शन रिटर्न को प्रभावित कर सकता है।
घाटे वाली स्कीमों की संख्या बढ़ना क्यों महत्वपूर्ण?
घाटे में रहने वाली स्कीमों की संख्या का करीब तीन गुना होना इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे अलग-अलग निवेश रणनीतियों पर बाजार की परिस्थितियों के प्रभाव का संकेत मिलता है।
म्यूचुअल फंड का प्रदर्शन व्यापक बाजार के साथ-साथ फंड की श्रेणी, पोर्टफोलियो आवंटन और फंड मैनेजर की रणनीति पर निर्भर करता है। इसलिए एक ही अवधि में कुछ स्कीमें कमजोर प्रदर्शन कर सकती हैं, जबकि दूसरी स्कीमें बेहतर नतीजे दे सकती हैं।
किसी एक वित्त वर्ष का नकारात्मक रिटर्न अपने आप में यह साबित नहीं करता कि कोई स्कीम लंबी अवधि के लिए खराब निवेश है। इसी तरह, पिछले वर्षों का मजबूत प्रदर्शन भी भविष्य में अच्छे रिटर्न की गारंटी नहीं देता।
बाजार में उतार-चढ़ाव का म्यूचुअल फंड पर असर
इक्विटी आधारित म्यूचुअल फंड बाजार में सूचीबद्ध कंपनियों के शेयरों में निवेश करते हैं। शेयर बाजार में गिरावट या किसी विशेष सेक्टर अथवा निवेश थीम पर दबाव आने की स्थिति में संबंधित फंड के नेट एसेट वैल्यू (NAV) पर भी असर पड़ सकता है।
यही कारण है कि म्यूचुअल फंड निवेश को बैंक डिपॉजिट जैसे निश्चित रिटर्न वाले साधन के समान नहीं माना जा सकता। बाजार से जुड़े फंडों में लाभ की संभावना के साथ पूंजी के मूल्य में गिरावट का जोखिम भी मौजूद रहता है।
क्या निवेशकों को चिंतित होना चाहिए?
घाटे वाली स्कीमों की संख्या बढ़ना निवेशकों के लिए सतर्कता का संकेत हो सकता है, लेकिन केवल इसी आधार पर जल्दबाजी में निवेश संबंधी फैसला लेना उचित नहीं होगा।
किसी स्कीम का आकलन करते समय लंबी अवधि का प्रदर्शन, उसके बेंचमार्क से तुलना, जोखिम का स्तर, पोर्टफोलियो की संरचना और निवेशक के अपने वित्तीय लक्ष्य जैसे पहलुओं को भी देखना जरूरी है।
उदाहरण के तौर पर, लंबी अवधि के लक्ष्य के लिए निवेश करने वाले व्यक्ति और कम समय में पैसा निकालने की योजना रखने वाले निवेशक की जोखिम सहने की क्षमता अलग हो सकती है।
SIP निवेशकों के लिए क्या मायने हैं?
सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) के जरिए निवेश करने वाले लोगों के लिए बाजार की गिरावट का प्रभाव एकमुश्त निवेश से अलग हो सकता है। SIP में अलग-अलग समय पर निश्चित राशि निवेश होने के कारण निवेशक विभिन्न NAV स्तरों पर यूनिट खरीदता है।
हालांकि SIP भी नुकसान से सुरक्षा की गारंटी नहीं देता। यदि बाजार या संबंधित स्कीम का प्रदर्शन कमजोर रहता है, तो निवेश का मूल्य घट सकता है। इसलिए SIP को जोखिम-मुक्त निवेश समझने के बजाय अनुशासित निवेश की एक पद्धति के रूप में देखना चाहिए।
एक साल का रिटर्न पूरी तस्वीर नहीं
FY26 में घाटे वाली म्यूचुअल फंड स्कीमों की संख्या में तेज वृद्धि ध्यान खींचती है, लेकिन किसी फंड के प्रदर्शन का आकलन केवल एक वित्त वर्ष के आधार पर करना अधूरा हो सकता है।
निवेशकों के लिए यह देखना भी महत्वपूर्ण है कि स्कीम ने अलग-अलग बाजार चक्रों में कैसा प्रदर्शन किया, उसने अपने निर्धारित बेंचमार्क के मुकाबले कैसा रिटर्न दिया और बेहतर रिटर्न के लिए कितना जोखिम लिया।
संतुलित विश्लेषण
FY26 का रुझान म्यूचुअल फंड निवेश से जुड़े एक बुनियादी सिद्धांत को रेखांकित करता है—बाजार आधारित निवेश में रिटर्न की गारंटी नहीं होती।
घाटे वाली स्कीमों की संख्या करीब तीन गुना बढ़ना निश्चित रूप से निवेशकों का ध्यान खींचने वाला बदलाव है। हालांकि इससे पूरे म्यूचुअल फंड उद्योग के प्रदर्शन को कमजोर मान लेना भी सही निष्कर्ष नहीं होगा। अलग-अलग श्रेणियों और निवेश रणनीतियों का प्रदर्शन काफी अलग हो सकता है।
निवेशकों के लिए बेहतर तरीका यह है कि वे अल्पकालिक रिटर्न के साथ लंबी अवधि के रिकॉर्ड, जोखिम, लागत, पोर्टफोलियो और अपने निवेश लक्ष्य को भी ध्यान में रखें। बाजार में अस्थिरता के दौर में पोर्टफोलियो की समीक्षा महत्वपूर्ण हो सकती है, लेकिन फैसले केवल डर या हालिया प्रदर्शन के आधार पर नहीं होने चाहिए।
