विज्ञापन - शीर्ष बैनर
Read in English —JantaScope English
वित्त

GIFT Nifty में 100 से ज्यादा अंकों की गिरावट, भारतीय शेयर बाजार की कमजोर शुरुआत के संकेत

भारतीय शेयर बाजार गुरुवार, 24 सितंबर 2026 को कमजोर शुरुआत कर सकता है। शुरुआती कारोबार में GIFT Nifty 100 से अधिक अंक नीचे था। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेज उछाल, ऊंची कच्चे तेल की कीमतें और वैश्विक बाजारों की कमजोरी निवेशकों की धारणा पर दबाव डाल रही हैं।

GIFT Nifty में 100 से ज्यादा अंकों की गिरावट, भारतीय शेयर बाजार की कमजोर शुरुआत के संकेत
विज्ञापन

द्वारा जीत निर्मल

स्रोत: Business Standard

भारतीय बाजार पर दबाव, GIFT Nifty ने दिए कमजोर ओपनिंग के संकेत

भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार, 24 सितंबर को कारोबार की शुरुआत दबाव के साथ होने के संकेत मिले। सुबह के शुरुआती कारोबार में GIFT Nifty में 100 से अधिक अंकों की गिरावट दर्ज की गई, जिससे Nifty 50 के गैप-डाउन खुलने की आशंका बढ़ी।

सुबह के अलग-अलग समय पर GIFT Nifty में गिरावट की तीव्रता बदलती रही। Financial Express के अनुसार शुरुआती कारोबार में GIFT Nifty करीब 130 अंक यानी 0.57% गिरकर लगभग 23,300 पर था। बाद में Business Standard ने GIFT Nifty को 23,268.50 पर 182 अंक नीचे रिपोर्ट किया। यह अंतर बाजार के लगातार बदलते प्री-ओपन संकेतों को दर्शाता है।

अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में उछाल बना बड़ी चिंता

वैश्विक बाजारों पर दबाव की एक प्रमुख वजह अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में तेज बढ़ोतरी रही। 10-वर्षीय अमेरिकी ट्रेजरी नोट की यील्ड 15 बेसिस पॉइंट बढ़कर 5.11% तक पहुंच गई। Business Standard के मुताबिक यह एक दिन की बड़ी छलांग थी।

ऊंची बॉन्ड यील्ड आमतौर पर इक्विटी बाजारों के लिए चुनौती पैदा कर सकती है, क्योंकि इससे बॉन्ड जैसे फिक्स्ड-इनकम एसेट्स की आकर्षकता बढ़ती है और कंपनियों के लिए वित्तीय लागत बढ़ने की चिंता भी पैदा हो सकती है।

अमेरिका के मजबूत आर्थिक आंकड़ों और आगे ब्याज दरें बढ़ने की बढ़ती उम्मीदों ने भी निवेशकों की चिंता बढ़ाई। Reuters की रिपोर्ट के अनुसार अक्टूबर में अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा दर बढ़ाए जाने की बाजार-आधारित संभावना एक दिन पहले के 53% से बढ़कर 66% हो गई थी।

Wall Street पर बिकवाली

अमेरिकी शेयर बाजारों में पिछला सत्र कमजोरी के साथ समाप्त हुआ। Dow Jones Industrial Average 0.68% और S&P 500 0.75% नीचे बंद हुए, जबकि टेक्नोलॉजी शेयरों वाले Nasdaq Composite में 1.13% की गिरावट दर्ज हुई।

अमेरिकी बाजारों की कमजोरी और बॉन्ड यील्ड में तेजी का असर एशियाई बाजारों की धारणा पर भी दिखाई दिया, हालांकि क्षेत्रीय सूचकांकों का प्रदर्शन मिला-जुला रहा।

एशियाई बाजारों में मिला-जुला कारोबार

गुरुवार सुबह एशिया-प्रशांत बाजारों में एक समान रुझान नहीं था। जापान का Nikkei 225 करीब 1.47% और दक्षिण कोरिया का Kospi लगभग 0.9% ऊपर था। इसके विपरीत चीन का CSI 300 करीब 0.73% और हांगकांग का Hang Seng लगभग 0.68% नीचे था।

इस तरह भारतीय बाजार को एशिया से स्पष्ट सकारात्मक संकेत नहीं मिले, जबकि अमेरिकी बॉन्ड बाजार की हलचल वैश्विक जोखिम धारणा के लिए महत्वपूर्ण बनी रही।

$100 के ऊपर कच्चा तेल भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण?

कच्चे तेल की ऊंची कीमतें भारतीय बाजार के लिए एक और अहम जोखिम हैं। Reuters के अनुसार Brent crude गुरुवार सुबह लगभग $102.5 प्रति बैरल के आसपास था, जबकि पिछले सत्र में इसमें करीब 4% की तेजी आई थी।

भारत कच्चे तेल का बड़ा आयातक है। इसलिए तेल की कीमतों में लगातार तेजी आयात बिल, महंगाई और कंपनियों की लागत पर दबाव बढ़ा सकती है। Reuters ने भी ऊंचे तेल को भारत के आयात बिल, मुद्रास्फीति संबंधी चिंताओं और कॉरपोरेट मुनाफे के लिए प्रतिकूल कारक बताया।

पिछले सत्र में Sensex-Nifty में रही थी तेजी

कमजोर प्री-मार्केट संकेतों से पहले बुधवार का घरेलू सत्र सकारात्मक रहा था। 23 सितंबर को Nifty 50 117.80 अंक यानी 0.50% बढ़कर 23,446.80 पर बंद हुआ था। Sensex भी 299.17 अंक यानी 0.40% की बढ़त के साथ 74,828.25 पर बंद हुआ।

इसलिए गुरुवार के कमजोर वैश्विक संकेत पिछले सत्र की तेजी के बाद भारतीय बाजार की मजबूती की परीक्षा ले सकते हैं।

FII और DII दोनों रहे नेट खरीदार

घरेलू बाजार के लिए एक सकारात्मक संकेत संस्थागत निवेशकों की खरीदारी रही। 23 सितंबर को विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने भारतीय शेयरों में नेट ₹1,617.45 करोड़ की खरीदारी की, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) की नेट खरीदारी ₹2,341.46 करोड़ रही।

हालांकि एक दिन के संस्थागत प्रवाह को बाजार की आगे की दिशा का निश्चित संकेत नहीं माना जा सकता, लेकिन वैश्विक दबाव के बीच इन आंकड़ों पर निवेशकों की नजर रह सकती है।

आज बाजार में किन संकेतों पर रहेगी नजर?

गुरुवार के कारोबार में अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड, Brent crude की चाल, वैश्विक इक्विटी बाजारों का रुख और विदेशी निवेशकों के प्रवाह जैसे संकेत महत्वपूर्ण रह सकते हैं।

सुबह के संकेत भारतीय बाजार की कमजोर शुरुआत की ओर इशारा कर रहे थे, लेकिन GIFT Nifty केवल प्री-मार्केट संकेतक है। वास्तविक कारोबार शुरू होने के बाद घरेलू खरीदारी, सेक्टर-विशिष्ट गतिविधि और वैश्विक बाजारों में बदलाव से Sensex और Nifty की दिशा बदल सकती है।

साझा करें
विज्ञापन - मध्य लेख
विज्ञापन - नीचे