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Gold-Silver Price Today: MCX पर सोना-चांदी 1% तक फिसले, कच्चे तेल में तेजी से बढ़ी ब्याज दरों की चिंता

भारतीय कमोडिटी बाजार में मंगलवार, 18 अगस्त 2026 को सोने और चांदी की कीमतों पर दबाव देखने को मिला। MCX पर दोनों कीमती धातुओं में शुरुआती कारोबार के दौरान करीब 1% तक की गिरावट दर्ज की गई। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी और ब्याज दरों को लेकर बदली उम्मीदों ने बुलियन बाजार की धारणा को प्रभावित किया।

Gold-Silver Price Today: MCX पर सोना-चांदी 1% तक फिसले, कच्चे तेल में तेजी से बढ़ी ब्याज दरों की चिंता
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द्वारा जीत निर्मल

स्रोत: mint

सोना-चांदी में क्यों आई गिरावट?

मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी MCX पर मंगलवार सुबह सोने और चांदी के भाव कमजोर रहे। घरेलू बाजार की यह कमजोरी ऐसे समय आई जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी कीमती धातुओं पर दबाव दिखाई दिया। वैश्विक बाजार में स्पॉट गोल्ड करीब 0.5% और चांदी लगभग 1% नीचे कारोबार करती दिखी।

इस गिरावट के पीछे केवल मुनाफावसूली नहीं, बल्कि वैश्विक मैक्रोइकोनॉमिक परिस्थितियों में तेजी से हो रहा बदलाव भी अहम है। खास तौर पर कच्चे तेल की कीमतों में उछाल ने महंगाई को लेकर चिंता दोबारा बढ़ा दी है।

महंगा कच्चा तेल बना बड़ी चिंता

मध्य पूर्व से जुड़ी भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बीच ब्रेंट क्रूड 91 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गया। तेल की कीमतों में ऐसी तेजी भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि लंबे समय तक महंगा तेल महंगाई, आयात बिल और रुपये पर दबाव बढ़ा सकता है।

वैश्विक स्तर पर भी ऊर्जा की ऊंची कीमतें मुद्रास्फीति के जोखिम को बढ़ाती हैं। यही कारण है कि निवेशक यह आकलन कर रहे हैं कि अगर महंगाई फिर मजबूत हुई तो अमेरिकी फेडरल रिजर्व के लिए ब्याज दरों को कम करना मुश्किल हो सकता है—और जरूरत पड़ने पर सख्त मौद्रिक नीति की आशंका भी बाजार में लौट सकती है।

ब्याज दर और सोने का क्या संबंध है?

सोना निवेशकों को नियमित ब्याज नहीं देता। इसलिए जब सरकारी बॉन्ड की यील्ड और ब्याज दरें बढ़ती हैं, तब ब्याज देने वाली संपत्तियां अपेक्षाकृत अधिक आकर्षक हो सकती हैं।

अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में तेजी ने भी सोने पर दबाव बढ़ाया। ऊंची यील्ड सोना रखने की अवसर लागत बढ़ाती है, जिससे बुलियन की मांग कमजोर हो सकती है।

हालांकि तस्वीर पूरी तरह एकतरफा नहीं है। कमजोर आर्थिक आंकड़े फेड को दरें स्थिर रखने की ओर भी ले जा सकते हैं। इसी वजह से निवेशक अमेरिकी केंद्रीय बैंक के आगामी संकेतों और उसकी जुलाई बैठक के मिनट्स पर नजर बनाए हुए हैं।

सुरक्षित निवेश होने के बावजूद सोना क्यों गिर रहा है?

भू-राजनीतिक तनाव आम तौर पर सोने जैसे सुरक्षित निवेश विकल्पों की मांग बढ़ाता है। लेकिन मौजूदा परिस्थिति में दो विपरीत ताकतें एक साथ काम कर रही हैं।

एक तरफ अंतरराष्ट्रीय तनाव सोने को सहारा दे सकता है, जबकि दूसरी ओर महंगा तेल, बढ़ती बॉन्ड यील्ड और ऊंची ब्याज दरों की आशंका कीमतों पर दबाव बना रही है। फिलहाल बाजार में दूसरा प्रभाव ज्यादा मजबूत दिखाई दे रहा है।

यही कारण है कि भू-राजनीतिक अनिश्चितता के बावजूद सोना तत्काल मजबूत तेजी नहीं दिखा रहा।

चांदी पर ज्यादा दबाव क्यों?

चांदी की प्रकृति सोने से कुछ अलग है। यह कीमती धातु होने के साथ-साथ बड़े पैमाने पर औद्योगिक उपयोग में भी आती है। इसलिए ब्याज दर, डॉलर और निवेश मांग के अलावा वैश्विक आर्थिक गतिविधियों को लेकर उम्मीदें भी इसके भाव को प्रभावित करती हैं।

मंगलवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी लगभग 1% कमजोर रही। प्लेटिनम और पैलेडियम में भी गिरावट देखने को मिली, जिससे संकेत मिला कि दबाव केवल सोने तक सीमित नहीं था।

भारतीय निवेशकों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह बदलाव?

भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के बड़े हिस्से के लिए आयात पर निर्भर है। कच्चे तेल की कीमतों में लगातार तेजी रुपये, महंगाई और देश के आयात बिल पर असर डाल सकती है।

मंगलवार को बढ़ते तेल और अमेरिकी यील्ड के बीच भारतीय रुपये पर भी दबाव की आशंका बनी रही। इसलिए घरेलू सोने की कीमत तय करते समय अंतरराष्ट्रीय गोल्ड प्राइस के साथ डॉलर-रुपया विनिमय दर भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

आगे किन संकेतों पर रहेगी नजर?

निकट अवधि में सोने और चांदी की दिशा मुख्य रूप से कच्चे तेल की चाल, अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड, मध्य पूर्व के घटनाक्रम और फेडरल रिजर्व के ब्याज दर संबंधी संकेतों से प्रभावित हो सकती है।

यदि तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं और महंगाई की चिंता बढ़ती है, तो ब्याज दरों को लेकर सख्त रुख की आशंका बुलियन पर दबाव बनाए रख सकती है। इसके विपरीत, कमजोर आर्थिक आंकड़े या भू-राजनीतिक जोखिमों में तेज बढ़ोतरी सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की मांग को फिर समर्थन दे सकती है।

संतुलित विश्लेषण

मौजूदा गिरावट को केवल सोने और चांदी के लिए नकारात्मक दीर्घकालिक संकेत मानना जल्दबाजी होगी। बाजार इस समय महंगाई, ब्याज दरों और भू-राजनीतिक जोखिमों के बीच संतुलन तलाश रहा है।

महंगा कच्चा तेल एक तरफ महंगाई और ब्याज दरों की चिंता बढ़ाकर सोने पर दबाव डाल सकता है, तो दूसरी तरफ गंभीर भू-राजनीतिक तनाव सुरक्षित निवेश की मांग को बढ़ा सकता है। इसलिए आने वाले सत्रों में बुलियन बाजार में उतार-चढ़ाव बने रहने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।


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