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India IPO Market में जबरदस्त वापसी: सिर्फ जुलाई-अगस्त में जुटे ₹55,500 करोड़, अब Jio-NSE पर नजर

2026 की पहली छमाही में कमजोर रहने के बाद भारत के IPO बाजार ने जुलाई और अगस्त में जोरदार वापसी की है। NSE से संकलित आंकड़ों के मुताबिक अगस्त में mainboard IPOs ने करीब ₹29,000 करोड़ और जुलाई में लगभग ₹26,500 करोड़ जुटाए। दोनों महीनों ने मिलकर 2026 में अब तक जुटाए गए करीब ₹75,518 करोड़ का लगभग 73% योगदान दिया। मजबूत IPO pipeline के कारण आने वाले महीनों में गतिविधि और तेज रह सकती है।

India IPO Market में जबरदस्त वापसी: सिर्फ जुलाई-अगस्त में जुटे ₹55,500 करोड़, अब Jio-NSE पर नजर
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द्वारा जीत निर्मल

स्रोत: Janta Scope

भारत का Initial Public Offering (IPO) market 2026 की कमजोर शुरुआत को पीछे छोड़कर तेजी से वापसी करता दिखाई दे रहा है।

साल की पहली छमाही में शेयर बाजार की अस्थिरता, ऊंचे crude oil prices, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और कमजोर रुपये ने कंपनियों तथा निवेशकों—दोनों के confidence को प्रभावित किया था।

लेकिन जुलाई और अगस्त आते-आते तस्वीर तेजी से बदल गई।

NSE से संकलित आंकड़ों के अनुसार अगस्त में mainboard IPOs के जरिए करीब ₹29,000 करोड़ और जुलाई में लगभग ₹26,500 करोड़ जुटाए गए।

यानी सिर्फ इन दो महीनों में करीब ₹55,500 करोड़ का fundraising हुआ।

2026 में अब तक mainboard IPOs के जरिए जुटाई गई कुल राशि करीब ₹75,518 करोड़ है। इसका लगभग 73% अकेले जुलाई और अगस्त में आया है।

अब बाजार की नजर Jio Platforms, National Stock Exchange (NSE), PhonePe और Zepto जैसे बड़े संभावित IPOs पर है।

पहली छमाही में क्यों सुस्त पड़ा था IPO Market?

2026 की शुरुआत भारतीय equity market के लिए आसान नहीं रही।

साल के शुरुआती हिस्से में Nifty 50 और Sensex अपने निचले स्तर पर करीब 14% तक गिर गए थे

इसके पीछे कई कारण एक साथ काम कर रहे थे।

ऊंचे crude oil prices ने भारत की inflation और import bill को लेकर चिंता बढ़ाई। Foreign portfolio investors की बिकवाली ने equity market पर दबाव बनाया और कमजोर रुपये ने sentiment को और प्रभावित किया।

Secondary market में इस volatility का सीधा असर primary market पर भी पड़ा।

IPO लाने की तैयारी कर रही कई कंपनियों के लिए कमजोर बाजार में सही valuation हासिल करना मुश्किल हो गया। इसलिए कई issuers ने अपनी listing plans को आगे खिसकाने का विकल्प चुना।

H1 2026 में Fundraising लगभग आधी रह गई थी

2025 की तुलना में 2026 की पहली छमाही का अंतर काफी बड़ा था।

एक अलग industry review के मुताबिक जनवरी-जून 2026 के दौरान IPOs ने करीब ₹22,573 करोड़ जुटाए थे।

2025 की समान अवधि में यह आंकड़ा करीब ₹45,376 करोड़ था।

यानी साल-दर-साल fundraising लगभग आधी रह गई थी।

दिलचस्प बात यह है कि listings की संख्या बढ़ने के बावजूद कुल fundraising कम थी।

इसका संकेत यह था कि बाजार में कंपनियां आ तो रही थीं, लेकिन बड़े issue sizes और investor appetite दोनों पर दबाव था।

जुलाई-अगस्त ने बदल दी पूरी तस्वीर

दूसरी छमाही शुरू होते ही IPO activity में बड़ा बदलाव दिखाई दिया।

Mainboard IPOs ने:

जुलाई 2026 — करीब ₹26,500 करोड़

अगस्त 2026 — करीब ₹29,000 करोड़

जुटाए।

इन दोनों महीनों का कुल fundraising करीब ₹55,500 करोड़ बैठता है।

2026 में अब तक जुटाए गए करीब ₹75,518 करोड़ में इन दो महीनों की हिस्सेदारी लगभग 73% है।

इसका अर्थ यह है कि साल के शुरुआती महीनों में रुका हुआ IPO supply अब तेजी से बाजार में आ रहा है।

आखिर अचानक IPO की बाढ़ क्यों आई?

इस revival के पीछे केवल बेहतर investor sentiment नहीं है।

एक महत्वपूर्ण कारण regulatory approval deadlines भी हैं।

कई कंपनियों को Securities and Exchange Board of India (SEBI) से IPO लाने की मंजूरी पहले मिल चुकी थी। लेकिन market volatility के कारण उन्होंने issue launch करने में देरी की।

अब इनमें से कई approvals अपनी validity के अंतिम चरण की ओर बढ़ रहे हैं।

अगर कंपनियां निर्धारित अवधि के भीतर IPO नहीं लातीं, तो उन्हें regulatory process के कुछ हिस्से दोबारा पूरे करने पड़ सकते हैं।

इसीलिए बेहतर market conditions और approval deadlines ने मिलकर IPO launches को तेजी दी है।

‘Pent-up Supply’ अब बाजार में आ रही है

2026 के शुरुआती महीनों में IPO टालने वाली कंपनियां गायब नहीं हुई थीं।

उनमें से कई सही समय का इंतजार कर रही थीं।

जैसे ही secondary market में conditions बेहतर हुईं और हाल की listings को अच्छा investor response मिलने लगा, issuers ने फिर से IPO window का इस्तेमाल करना शुरू किया।

इसे बाजार की भाषा में pent-up supply कहा जा सकता है—ऐसी deals जो तैयार थीं, लेकिन खराब परिस्थितियों के कारण launch नहीं हो पा रही थीं।

जुलाई और अगस्त में इसी रुकी हुई pipeline का बड़ा हिस्सा बाजार में आया।

Listing Gains ने भी बढ़ाया Investors का Confidence

IPO revival में listing performance ने भी भूमिका निभाई है।

हाल की रिपोर्ट के मुताबिक average listing-day return में उल्लेखनीय सुधार आया।

जनवरी-मार्च quarter में IPOs का average debut करीब 2% discount पर था।

अप्रैल-जून में तस्वीर सुधरी और average listing gain लगभग 7% हो गया।

जुलाई-अगस्त में यह average premium बढ़कर करीब 25% तक पहुंच गया।

हाल की अवधि में list हुई 22 कंपनियों में से 18 ने पहले दिन positive return दिया।

ऐसे प्रदर्शन से retail और institutional investors दोनों की IPO market में रुचि बढ़ना स्वाभाविक है।

लेकिन Listing Gain का मतलब Long-Term Profit नहीं

मजबूत listing performance के बावजूद निवेशकों के लिए एक महत्वपूर्ण सावधानी जरूरी है।

IPO का premium पर list होना यह guarantee नहीं देता कि शेयर लंबे समय तक अच्छा प्रदर्शन करेगा।

Listing-day return मुख्य रूप से demand-supply, issue pricing और short-term market sentiment से प्रभावित हो सकता है।

लंबी अवधि में कंपनी की earnings, cash flow, debt, competitive position, valuation और corporate governance जैसे factors ज्यादा महत्वपूर्ण होते हैं।

इसलिए 25% का average listing premium IPO market में मजबूत momentum का संकेत जरूर है, लेकिन इसे हर नए issue में निश्चित profit का संकेत नहीं माना जाना चाहिए।

Foreign Investors भी IPOs में लगा रहे पैसा

एक और दिलचस्प trend foreign portfolio investors यानी FPIs से जुड़ा है।

Secondary equity market से विदेशी निवेशकों के outflow के बावजूद primary market में उनकी दिलचस्पी बनी हुई है।

2026 के पहले आठ महीनों में FPIs ने IPOs में करीब $4.9 billion यानी ₹45,848 करोड़ लगाए।

2025 की समान अवधि में यह investment करीब $4.7 billion यानी ₹40,309 करोड़ था।

इसका मतलब है कि विदेशी निवेशक broader listed market में cautious होने के बावजूद चुनिंदा नई कंपनियों में निवेश के अवसर तलाश रहे हैं।

239 कंपनियां IPO Pipeline में?

आने वाले महीनों की pipeline भी बड़ी दिखाई दे रही है।

Prime Database के आंकड़ों पर आधारित रिपोर्ट के मुताबिक करीब 239 कंपनियां listing की कतार में हैं।

इनमें से 164 कंपनियों के पास SEBI approval मौजूद है और उनके प्रस्तावित offers का अनुमानित आकार लगभग ₹2.65 लाख करोड़ बताया गया है।

यह जरूरी नहीं कि सभी कंपनियां तुरंत IPO launch करें।

Market conditions, valuation expectations और company-specific factors के आधार पर timelines बदल सकती हैं।

फिर भी इतनी बड़ी approved pipeline आने वाले महीनों में primary market activity मजबूत रहने की संभावना दिखाती है।

Jio Platforms और NSE बन सकते हैं Game Changer

IPO market में सबसे ज्यादा चर्चा कुछ बड़े संभावित issues की है।

इनमें Jio Platforms और National Stock Exchange (NSE) प्रमुख हैं।

इसके अलावा PhonePe, Zepto और अन्य बड़ी कंपनियां भी broader IPO pipeline का हिस्सा हैं।

इनमें से किसी mega IPO का launch कुल fundraising numbers को काफी ऊपर ले जा सकता है।

इसी कारण सितंबर को लेकर market expectations काफी ऊंची हैं।

कुछ investment banking estimates में सामान्य pipeline से सितंबर में करीब ₹20,000-₹25,000 करोड़ fundraising की संभावना जताई गई है।

वहीं अगर Jio Platforms या NSE जैसा mega issue भी इसी अवधि में बाजार में आता है, तो fundraising इससे काफी ऊपर जा सकती है।

क्या सितंबर में ₹70,000 करोड़ जुट सकते हैं?

कुछ investment banking estimates ने सितंबर में IPO fundraising ₹70,000 करोड़ तक पहुंचने की संभावना जताई है।

लेकिन यहां एक महत्वपूर्ण distinction जरूरी है।

यह confirmed fundraising figure नहीं बल्कि conditional estimate है।

₹70,000 करोड़ का आंकड़ा तभी संभव माना जा रहा है जब Jio Platforms या NSE जैसे बड़े प्रस्तावित issues सितंबर में launch होते हैं।

इसलिए इसे निश्चित लक्ष्य के बजाय संभावित upper-end scenario के रूप में देखना चाहिए।

Mainboard मजबूत, लेकिन SME Segment की तस्वीर अलग

IPO revival सभी segments में समान नहीं है।

बड़ी और स्थापित कंपनियों वाले mainboard IPO market में activity तेजी से बढ़ी है।

लेकिन SME IPO segment में fundraising अपेक्षाकृत subdued बनी हुई है।

यह अंतर महत्वपूर्ण है क्योंकि headline IPO numbers देखकर पूरे primary market को समान रूप से मजबूत मान लेना सही नहीं होगा।

Mainboard companies को institutional demand, brand recognition और बड़े issue sizes का फायदा मिल सकता है, जबकि छोटी कंपनियों के लिए investor risk assessment अलग होता है।

क्या IPO Boom आगे भी जारी रहेगा?

फिलहाल pipeline मजबूत है और July-August momentum issuers को market में आने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है।

लेकिन IPO window कई बाहरी factors पर निर्भर करेगी।

Crude oil prices, global geopolitical tensions, foreign fund flows, रुपये की चाल, domestic interest rates और secondary market performance में अचानक बदलाव sentiment को फिर प्रभावित कर सकता है।

अगर equity market relatively stable रहता है और हाल के IPOs अच्छा प्रदर्शन जारी रखते हैं, तो कंपनियों के लिए public market से capital जुटाने का माहौल अनुकूल रह सकता है।

निवेशकों के लिए क्या मायने?

IPO activity बढ़ने का मतलब निवेश के ज्यादा विकल्प हैं, लेकिन ज्यादा options अपने आप बेहतर returns की guarantee नहीं देते।

हर IPO में निवेश से पहले कंपनी के business model, profitability, debt, cash flows, promoters, use of proceeds और valuation की तुलना listed peers से करना महत्वपूर्ण है।

विशेष रूप से तेजी वाले IPO market में FOMO यानी Fear of Missing Out निवेशकों को केवल listing gain के आधार पर decision लेने के लिए प्रेरित कर सकता है।

2026 की पहली छमाही और जुलाई-अगस्त के बीच आया तेज बदलाव यही दिखाता है कि primary market sentiment कितनी जल्दी बदल सकता है।

निष्कर्ष

भारत का IPO market 2026 की कमजोर पहली छमाही के बाद मजबूत comeback करता दिखाई दे रहा है।

NSE से संकलित आंकड़ों के अनुसार जुलाई में करीब ₹26,500 करोड़ और अगस्त में लगभग ₹29,000 करोड़ mainboard IPOs से जुटाए गए।

दोनों महीनों ने मिलकर 2026 में अब तक के करीब ₹75,518 करोड़ fundraising का लगभग 73% योगदान दिया है।

बेहतर listing performance, मजबूत domestic liquidity, regulatory deadlines और पहले से तैयार IPO pipeline ने इस revival को गति दी है।

अब नजर Jio Platforms, NSE, PhonePe और Zepto जैसे बड़े नामों पर है।

लेकिन निवेशकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण संदेश यह है कि IPO market का गर्म होना और हर IPO का अच्छा investment होना दो अलग बातें हैं।

2026 की दूसरी छमाही भारतीय primary market के लिए बेहद सक्रिय हो सकती है—लेकिन इस तेजी के बीच valuation और company fundamentals पर नजर रखना उतना ही जरूरी होगा।


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