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वित्त

Indian Oil की कमाई में ऐतिहासिक उछाल, एक तिमाही में ₹21,630 करोड़ का मुनाफा; रिफाइनिंग कारोबार ने बदली तस्वीर।

नई दिल्ली: सरकारी तेल कंपनी Indian Oil Corporation (IOC) ने वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में शानदार वित्तीय प्रदर्शन करते हुए अब तक का सबसे अधिक तिमाही स्टैंडअलोन मुनाफा दर्ज किया है। 30 सितंबर 2026 को समाप्त हुई जुलाई-सितंबर तिमाही में कंपनी का शुद्ध मुनाफा सालाना आधार पर 184.2 प्रतिशत बढ़कर ₹21,630.03 करोड़ पहुंच गया। पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में यह ₹7,610.45 करोड़ था। कंपनी के नतीजे 30 अक्टूबर 2026 को घोषित किए गए।

Indian Oil की कमाई में ऐतिहासिक उछाल, एक तिमाही में ₹21,630 करोड़ का मुनाफा; रिफाइनिंग कारोबार ने बदली तस्वीर।
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द्वारा साधना गुप्ता

स्रोत: Indian Oil Corporation , ICICI Direct, Moneycontrol, The Daily Jagran (PTI) और Indian Masterminds.

इस बढ़ोतरी के पीछे बेहतर रिफाइनिंग मार्जिन, पेट्रोलियम उत्पादों के कारोबार में सुधार और पेट्रोकेमिकल व गैस सेगमेंट का योगदान रहा। हालांकि, कंपनी की इस शानदार कमाई के साथ LPG सब्सिडी से जुड़ी देनदारियां और वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव जैसी चुनौतियां भी बनी हुई हैं।

₹2.63 लाख करोड़ के पार पहुंचा राजस्व

Indian Oil का दूसरी तिमाही में स्टैंडअलोन ऑपरेशंस से राजस्व 29.5 प्रतिशत बढ़कर ₹2,62,935.58 करोड़ हो गया। पिछले साल की समान अवधि में कंपनी ने ₹2,02,992.34 करोड़ का राजस्व दर्ज किया था।

वहीं, कंपनी का प्रॉफिट बिफोर टैक्स (PBT) 164.4 प्रतिशत बढ़कर ₹26,616.62 करोड़ पहुंच गया। पिछले साल इसी तिमाही में यह ₹10,065.57 करोड़ था। कंपनी की प्रति शेयर कमाई यानी EPS भी ₹5.53 से बढ़कर ₹15.71 हो गई।

कंसोलिडेटेड नतीजों पर नजर डालें तो कंपनी का राजस्व 29.8 प्रतिशत बढ़कर ₹2,68,039.38 करोड़ रहा। वहीं, कंसोलिडेटेड शुद्ध मुनाफा ₹22,502.62 करोड़ दर्ज किया गया, जो पिछले साल की समान तिमाही के ₹8,190.86 करोड़ से लगभग 175 प्रतिशत अधिक है।

यहां ध्यान देने वाली बात है कि ₹21,630 करोड़ का आंकड़ा स्टैंडअलोन और ₹22,503 करोड़ का आंकड़ा कंसोलिडेटेड मुनाफा है। दोनों आंकड़ों का आधार अलग-अलग है।

रिफाइनिंग मार्जिन में सुधार बना बड़ी वजह

Indian Oil के मुनाफे में इस तेज बढ़ोतरी की सबसे बड़ी वजह रिफाइनिंग कारोबार का बेहतर प्रदर्शन माना जा रहा है। रिफाइनिंग में कच्चे तेल को पेट्रोल, डीजल, एटीएफ और अन्य पेट्रोलियम उत्पादों में बदला जाता है। इस प्रक्रिया में कंपनी की कमाई को प्रभावित करने वाला एक महत्वपूर्ण पैमाना ग्रॉस रिफाइनिंग मार्जिन (GRM) होता है।

जब कंपनी कच्चा तेल खरीदकर उससे तैयार पेट्रोलियम उत्पादों को बेहतर कीमत पर बेच पाती है, तो रिफाइनिंग कारोबार की कमाई में सुधार होता है। दूसरी तिमाही में बेहतर रिफाइनिंग मार्जिन ने Indian Oil के मुनाफे को मजबूती दी।

इसके अलावा, पेट्रोकेमिकल और गैस कारोबार से भी कंपनी को फायदा मिला। इन क्षेत्रों में बेहतर प्रदर्शन ने कंपनी की कुल परिचालन कमाई को सहारा दिया। हालांकि, वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में बदलाव आगे भी रिफाइनिंग मार्जिन को प्रभावित कर सकता है।

पेट्रोल-डीजल की बिक्री से मिला अतिरिक्त सहारा

Indian Oil के लिए पेट्रोल और डीजल की बिक्री भी कमाई का महत्वपूर्ण हिस्सा है। Moneycontrol की रिपोर्ट के अनुसार, मई 2026 में खुदरा ईंधन की कीमतों में कुल ₹7 प्रति लीटर की बढ़ोतरी के बाद कंपनी के मार्केटिंग मार्जिन को समर्थन मिला।

दूसरी तिमाही में कंपनी की घरेलू पेट्रोलियम उत्पादों की बिक्री बढ़कर 23.977 मिलियन टन रही, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 22.85 मिलियन टन थी। यानी घरेलू बिक्री में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई।

हालांकि, कंपनी का निर्यात पिछले साल की समान तिमाही के 1.411 मिलियन टन से घटकर 1.251 मिलियन टन रह गया। इससे पता चलता है कि घरेलू बाजार में मांग और बिक्री का प्रदर्शन बेहतर रहा, लेकिन निर्यात कारोबार में कुछ दबाव देखने को मिला।

LPG सब्सिडी और सरकारी मुआवजे का भी असर

Indian Oil के वित्तीय प्रदर्शन को समझने के लिए घरेलू LPG कारोबार की स्थिति पर ध्यान देना जरूरी है। घरेलू रसोई गैस की बिक्री पर कई बार कंपनियों को लागत और बिक्री मूल्य के बीच अंतर का सामना करना पड़ता है। इसे अंडर-रिकवरी कहा जाता है।

सरकार की ओर से घरेलू LPG अंडर-रिकवरी के लिए मुआवजे की व्यवस्था की गई है। कंपनी ने अप्रैल से सितंबर 2026 की अवधि के लिए करीब ₹7,243 करोड़ की राशि अपने खातों में राजस्व के रूप में दर्ज की। इससे LPG कारोबार से जुड़े वित्तीय दबाव को कुछ राहत मिली।

हालांकि, LPG से जुड़ी संचयी नकारात्मक बफर राशि अभी भी कंपनी के लिए एक महत्वपूर्ण चुनौती है। इसलिए आने वाले समय में सरकारी मुआवजे, LPG की लागत और बिक्री मूल्य के बीच अंतर पर निवेशकों की नजर बनी रहेगी।

पिछली तिमाही के मुकाबले भी बड़ा सुधार

Indian Oil का प्रदर्शन पिछली तिमाही यानी अप्रैल-जून 2026 के मुकाबले भी काफी बेहतर रहा। कंपनी ने पहली तिमाही में ₹2,661.37 करोड़ का स्टैंडअलोन शुद्ध घाटा दर्ज किया था। इसके मुकाबले दूसरी तिमाही में ₹21,630.03 करोड़ का मुनाफा कंपनी के लिए बड़ा बदलाव है।

यह सुधार बताता है कि तेल की कीमतों, रिफाइनिंग मार्जिन और ईंधन बिक्री से जुड़ी परिस्थितियों में बदलाव का तेल कंपनियों के वित्तीय नतीजों पर कितना बड़ा असर पड़ सकता है।

निवेशकों के लिए क्या हैं संकेत?

Indian Oil के मजबूत नतीजे कंपनी के कारोबार में सुधार का संकेत देते हैं। बेहतर रिफाइनिंग मार्जिन, घरेलू बिक्री में वृद्धि और पेट्रोकेमिकल कारोबार का योगदान सकारात्मक पहलू हैं। लेकिन निवेशकों को यह भी देखना होगा कि क्या कंपनी आने वाली तिमाहियों में इसी स्तर की कमाई बनाए रख पाती है।

वैश्विक कच्चे तेल की कीमतें, रुपये और डॉलर की विनिमय दर, पेट्रोल-डीजल के मार्केटिंग मार्जिन और LPG मुआवजे से जुड़े फैसले कंपनी के मुनाफे को प्रभावित कर सकते हैं।

कुल मिलाकर, Indian Oil के Q2 FY27 नतीजे कंपनी के लिए बड़ी उपलब्धि हैं। ₹21,630 करोड़ का स्टैंडअलोन मुनाफा और लगभग ₹2.63 लाख करोड़ का राजस्व कंपनी की मजबूत तिमाही को दर्शाते हैं। अब बाजार की नजर इस बात पर रहेगी कि रिफाइनिंग कारोबार की यह मजबूती आगे भी जारी रहती है या नहीं।

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