हालांकि, मुनाफे में गिरावट के बावजूद कंपनी के राजस्व में अच्छी बढ़ोतरी हुई है। जुलाई से सितंबर 2026 के बीच ITC का रेवेन्यू फ्रॉम ऑपरेशंस 43.85 प्रतिशत बढ़कर ₹30,578.40 करोड़ पहुंच गया, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह ₹21,255.86 करोड़ था। इससे पता चलता है कि कंपनी की बिक्री से होने वाली आय बढ़ी है, लेकिन बढ़ती लागत और टैक्स के दबाव ने उसकी कमाई पर असर डाला है।
कंपनी ने 2 नवंबर 2026 को बाजार बंद होने के बाद अपने तिमाही नतीजों की घोषणा की। अब निवेशकों की नजर इस बात पर है कि आने वाली तिमाहियों में ITC अपने सबसे बड़े कमाई वाले कारोबार को किस तरह संभालती है।
सिगरेट कारोबार पर बढ़े टैक्स का सबसे ज्यादा असर
ITC के कुल मुनाफे में सिगरेट कारोबार की अहम भूमिका रही है। लेकिन इस बार इसी सेगमेंट ने कंपनी की कमाई पर सबसे ज्यादा दबाव बनाया। सितंबर तिमाही में कंपनी के सिगरेट कारोबार का सेगमेंट प्रॉफिट करीब 27.2 प्रतिशत घटकर ₹3,813 करोड़ रह गया, जो पिछले साल की समान अवधि में ₹5,241 करोड़ था। इस गिरावट के पीछे सिगरेट पर बढ़ा टैक्स प्रमुख कारण रहा। 1 फरवरी 2026 से सिगरेट पर GST की दर में बदलाव किया गया। पहले जहां 28 प्रतिशत GST ट्रांजैक्शन वैल्यू पर लगता था, वहीं इसे बढ़ाकर रिटेल सेल प्राइस पर 40 प्रतिशत कर दिया गया। इसके अलावा एक्साइज ड्यूटी में भी बढ़ोतरी की गई।
टैक्स बढ़ने के बाद कंपनियों के सामने दोहरी चुनौती खड़ी हो गई। एक तरफ कीमतें बढ़ाने से ग्राहकों की मांग प्रभावित होने का खतरा था, तो दूसरी तरफ कीमतों में पूरी बढ़ोतरी ग्राहकों पर डालने से बिक्री घटने की आशंका थी। ITC के मुताबिक, टैक्स में असाधारण बढ़ोतरी के कारण कानूनी सिगरेट बाजार की बिक्री की मात्रा पर दबाव बना हुआ है। कंपनी ने अपनी बाजार हिस्सेदारी बचाने के लिए नए प्रोडक्ट वेरिएंट और ब्रांड रणनीति पर काम किया है। साथ ही, अवैध और तस्करी के जरिए आने वाली सिगरेट से प्रतिस्पर्धा को भी एक बड़ी चुनौती बताया है।
FMCG कारोबार ने दिखाई मजबूती, 19% बढ़ा रेवेन्यू
जहां सिगरेट कारोबार कमजोर रहा, वहीं ITC का नॉन-सिगरेट FMCG कारोबार कंपनी के लिए राहत लेकर आया। सितंबर तिमाही में इस सेगमेंट के राजस्व में सालाना आधार पर करीब 19 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
कंपनी के बिस्कुट, स्नैक्स, नूडल्स, मसाले, नमक, फ्रोजन फूड, होमकेयर और स्टेशनरी उत्पादों की मांग में अच्छी बढ़ोतरी देखी गई। इनमें से कई श्रेणियों ने 20 प्रतिशत से अधिक की ग्रोथ दर्ज की। वहीं डेयरी और पर्सनल वॉश उत्पादों में भी मजबूत वृद्धि देखने को मिली। ITC के FMCG पोर्टफोलियो में Aashirvaad, Sunfeast, Bingo!, YiPPee!, Savlon और Classmate जैसे लोकप्रिय ब्रांड शामिल हैं। इन ब्रांडों की बाजार में मौजूदगी कंपनी को सिगरेट कारोबार से अलग अपनी कमाई बढ़ाने में मदद कर रही है।
कंपनी ने बताया कि बढ़ती इनपुट लागत के बावजूद बेहतर प्रोडक्ट मिक्स, लागत नियंत्रण और संतुलित कीमतों में बदलाव से FMCG कारोबार के EBITDA मार्जिन में सालाना आधार पर 50 बेसिस पॉइंट से अधिक का सुधार हुआ। इस प्रदर्शन से संकेत मिलता है कि ITC अपने पारंपरिक सिगरेट कारोबार के अलावा पैकेज्ड फूड और रोजमर्रा के उपभोक्ता उत्पादों में भी अपनी स्थिति मजबूत कर रही है।
पेपर और पैकेजिंग कारोबार में भी शानदार रिकवरी
ITC के पेपरबोर्ड, पेपर और पैकेजिंग कारोबार ने भी सितंबर तिमाही में अच्छा प्रदर्शन किया। इस सेगमेंट का राजस्व सालाना आधार पर करीब 36 प्रतिशत बढ़ा, जबकि सेगमेंट का प्रॉफिट बिफोर इंटरेस्ट एंड टैक्स (PBIT) लगभग 48 प्रतिशत बढ़ा। इस वृद्धि के पीछे बेहतर मांग, कीमतों में बदलाव और वैल्यू-एडेड उत्पादों का योगदान रहा। कंपनी ने 1 अगस्त 2026 को Century Pulp and Paper के कारोबार का अधिग्रहण भी पूरा किया था। इससे पेपर सेगमेंट के प्रदर्शन को अतिरिक्त समर्थन मिला। हालांकि, कंपनी के सामने लकड़ी की बढ़ती कीमतों और कच्चे माल की लागत जैसी चुनौतियां बनी हुई हैं। ITC का मानना है कि आने वाले समय में मांग में सुधार और बेहतर कीमतों से इस कारोबार को फायदा मिल सकता है।
एग्री बिजनेस में 12% की बढ़ोतरी, लेकिन निर्यात पर दबाव
कंपनी का एग्री बिजनेस भी सितंबर तिमाही में सकारात्मक स्थिति में रहा। इस सेगमेंट के राजस्व में करीब 12 प्रतिशत की सालाना बढ़ोतरी हुई। मसालों, फल-सब्जियों और अन्य वैल्यू-एडेड कृषि उत्पादों की मांग ने इसमें योगदान दिया। हालांकि, पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण व्यापार और सप्लाई चेन प्रभावित हुई है। शिपिंग की उपलब्धता में कमी, समुद्री मालभाड़े में बढ़ोतरी और ग्राहकों की ओर से ऑर्डर में देरी जैसी समस्याओं ने कृषि निर्यात पर दबाव बनाया। कंपनी अब नए अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कारोबार बढ़ाने और वैल्यू-एडेड कृषि उत्पादों की हिस्सेदारी मजबूत करने पर ध्यान दे रही है।
आगे ITC के सामने क्या होंगी चुनौतियां?
ITC के तिमाही नतीजे बताते हैं कि कंपनी के अलग-अलग कारोबारों का प्रदर्शन एक जैसा नहीं रहा है। FMCG, पेपर और एग्री बिजनेस में अच्छी वृद्धि के बावजूद सिगरेट कारोबार में गिरावट ने कुल मुनाफे को प्रभावित किया है। आने वाले समय में कंपनी के लिए सबसे बड़ी चुनौती बढ़े हुए टैक्स के बीच सिगरेट कारोबार की बिक्री और मुनाफे को स्थिर करना होगा। इसके अलावा कच्चे माल की महंगाई, वैश्विक व्यापार में अनिश्चितता, परिवहन लागत और मौसम से जुड़ी चुनौतियां भी कंपनी के प्रदर्शन को प्रभावित कर सकती हैं। कंपनी ने अपने नतीजों में यह भी कहा कि ग्रामीण और शहरी दोनों बाजारों में घरेलू मांग मजबूत बनी हुई है। हालांकि, असमान मानसून और अल नीनो की मजबूत होती परिस्थितियां कृषि उत्पादन तथा महंगाई के लिए जोखिम पैदा कर सकती हैं।
निवेशकों के लिए क्या है संकेत?
ITC के नतीजे निवेशकों के सामने एक मिली-जुली तस्वीर पेश करते हैं। एक तरफ कंपनी का कुल मुनाफा घटा है, वहीं दूसरी तरफ उसके FMCG और पेपर कारोबार ने मजबूत वृद्धि दर्ज की है। ऐसे में आने वाले समय में निवेशकों की नजर सिगरेट कारोबार की रिकवरी, FMCG सेगमेंट की ग्रोथ और कंपनी के ऑपरेटिंग मार्जिन पर रहेगी।
कुल मिलाकर, ITC के लिए सितंबर तिमाही चुनौतीपूर्ण रही। कंपनी का बढ़ता राजस्व उसके कारोबार में मांग की मौजूदगी दिखाता है, लेकिन मुनाफे में गिरावट बताती है कि केवल बिक्री बढ़ना पर्याप्त नहीं है। असली चुनौती बढ़ती लागत और टैक्स के बीच लाभप्रदता बनाए रखने की है। आने वाली तिमाहियां तय करेंगी कि कंपनी अपने गैर-सिगरेट कारोबार की मजबूती के दम पर इस दबाव की कितनी भरपाई कर पाती है।
