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कच्चे तेल में उबाल से शेयर बाजार धड़ाम, Sensex 800 अंक तक टूटा; Nifty 23,850 के नीचे

भारतीय शेयर बाजार में बुधवार, 2 सितंबर 2026 को तेज बिकवाली देखने को मिली। शुरुआती कारोबार में BSE Sensex 800 अंक से अधिक तक गिरा, जबकि Nifty 50 ने 23,850 का स्तर तोड़ दिया। अमेरिका-ईरान तनाव बढ़ने से कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल, ऊंची वैश्विक बॉन्ड यील्ड और महंगाई व ब्याज दरों को लेकर बढ़ी चिंता ने निवेशकों का सेंटीमेंट कमजोर किया।

कच्चे तेल में उबाल से शेयर बाजार धड़ाम, Sensex 800 अंक तक टूटा; Nifty 23,850 के नीचे
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द्वारा जीत निर्मल

स्रोत: Janta Scope

कच्चे तेल में उछाल से भारतीय शेयर बाजार पर दबाव, Sensex-Nifty में तेज गिरावट

मुंबई: भारतीय शेयर बाजार ने बुधवार, 2 सितंबर 2026 को भारी दबाव के साथ कारोबार शुरू किया। मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ने निवेशकों को जोखिम वाली संपत्तियों से दूर किया, जिसका असर दलाल स्ट्रीट पर साफ दिखाई दिया।

शुरुआती कारोबार में BSE Sensex 808 अंक तक गिर गया, जबकि Nifty 50 ने 23,850 का अहम स्तर तोड़ते हुए 23,807 का इंट्राडे निचला स्तर छुआ।

सुबह करीब 9:25 बजे Sensex 684.87 अंक यानी 0.89% गिरकर 76,259.41 पर था, जबकि Nifty 50 228.85 अंक यानी 0.95% की गिरावट के साथ 23,826.20 पर कारोबार कर रहा था।

बाजार की कमजोरी कुछ चुनिंदा शेयरों तक सीमित नहीं रही। शुरुआती कारोबार में NSE के सभी प्रमुख सेक्टोरल इंडेक्स लाल निशान में थे।

Gap-Down Opening के साथ शुरू हुआ बाजार

बाजार में कमजोरी शुरुआत से ही दिखाई दी।

Nifty 50 बुधवार को 197.80 अंक या 0.82% गिरकर 23,858 पर खुला। Sensex ने 472.96 अंक यानी 0.61% की गिरावट के साथ 76,471.32 पर कारोबार शुरू किया।

इसके बाद बिकवाली और तेज हुई और Sensex की गिरावट 800 अंक तक पहुंच गई।

इससे साफ हुआ कि घरेलू निवेशकों पर भारतीय कारकों से ज्यादा तत्काल प्रभाव वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाओं और ऊर्जा कीमतों का पड़ रहा था।

सबसे बड़ा कारण: अमेरिका-ईरान तनाव

बाजार में आई गिरावट के पीछे सबसे महत्वपूर्ण कारण अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता सैन्य तनाव रहा।

अमेरिका द्वारा ईरानी सैन्य ठिकानों पर नए हमले किए जाने और इसके बाद ईरान की जवाबी कार्रवाई से मध्य पूर्व में संघर्ष और फैलने की आशंका बढ़ गई।

वैश्विक निवेशकों की सबसे बड़ी चिंता यह है कि संघर्ष लंबे समय तक जारी रहने या महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में बाधा आने से दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।

इसी आशंका ने कच्चे तेल को फिर तेजी से ऊपर पहुंचा दिया।

Brent Crude $95 के पार, भारत के लिए क्यों चिंता?

अंतरराष्ट्रीय बाजार में Brent crude करीब $95.4 प्रति बैरल तक पहुंच गया। तेल की कीमतों में लगातार तेजी भारत जैसे बड़े crude importer के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।

भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है। ऐसे में लंबे समय तक महंगा कच्चा तेल रहने से देश का आयात बिल बढ़ सकता है।

इसका असर महंगाई पर भी पड़ सकता है क्योंकि महंगा ईंधन परिवहन, उत्पादन और लॉजिस्टिक्स की लागत बढ़ाता है।

इसलिए बाजार के लिए तेल की कीमत केवल energy-sector का मुद्दा नहीं है। यह inflation, corporate margins, rupee, current account और interest-rate expectations तक असर डाल सकती है।

Strait of Hormuz पर बाजार की नजर

मध्य पूर्व के मौजूदा तनाव में Strait of Hormuz सबसे संवेदनशील बिंदुओं में से एक बन गया है।

यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री तेल परिवहन मार्गों में शामिल है। इस रास्ते से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता रहा है।

इस मार्ग पर यातायात में गंभीर बाधा की आशंका पैदा होने पर crude prices में तेज उतार-चढ़ाव हो सकता है।

यही वजह है कि भारतीय शेयर बाजार के निवेशक भी अमेरिका-ईरान घटनाक्रम के साथ Hormuz की स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।

IT, Realty और Auto में तेज बिकवाली

बाजार की गिरावट broad-based रही।

शुरुआती कारोबार में IT, Realty और Auto सेक्टर सबसे ज्यादा दबाव वाले क्षेत्रों में शामिल रहे।

करीब 9:25 बजे तक Nifty IT लगभग 2.5%, Realty करीब 2.14% और Auto लगभग 1.88% तक नीचे थे।

Midcap और Smallcap शेयर भी बिकवाली से नहीं बच सके। BSE 150 MidCap Index करीब 1.19% गिरा, जबकि BSE 250 SmallCap Index लगभग 0.81% नीचे था।

BSE पर उस समय 1,097 शेयर बढ़त में और 2,139 शेयर गिरावट में थे, जबकि 211 शेयरों में बदलाव नहीं था।

यह market breadth बताती है कि कमजोरी कुछ heavyweight stocks तक सीमित नहीं थी।

Oil Marketing, Airlines, Paint और Tyre कंपनियों पर दबाव क्यों?

कच्चे तेल की तेजी का प्रभाव अलग-अलग उद्योगों पर अलग तरीके से पड़ता है।

तेल महंगा होने से BPCL, HPCL और Indian Oil जैसी oil-marketing कंपनियों को margin संबंधी दबाव का सामना करना पड़ सकता है।

वहीं aviation कंपनियों के लिए jet fuel एक प्रमुख लागत है। इसलिए तेल की तेज कीमतें airlines के operating costs बढ़ा सकती हैं।

Paint और tyre उद्योग भी petroleum-linked raw materials का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में crude की लगातार तेजी उनकी input costs और margins को प्रभावित कर सकती है।

इसी वजह से crude-price shock को भारतीय बाजार में कई सेक्टरों के लिए जोखिम के रूप में देखा जा रहा है।

Global Bond Yields ने भी बढ़ाई चिंता

तेल के अलावा वैश्विक बॉन्ड बाजार ने भी equities पर दबाव बढ़ाया।

अमेरिकी 10-year Treasury yield करीब 4.81% तक पहुंच गई, जो लगभग तीन वर्षों का उच्च स्तर था।

तेल की ऊंची कीमतों से महंगाई बढ़ने की आशंका ने इस चिंता को मजबूत किया कि केंद्रीय बैंकों को monetary policy अपेक्षा से ज्यादा सख्त रखनी पड़ सकती है।

ऊंची bond yields आम तौर पर equities के लिए चुनौती पैदा कर सकती हैं क्योंकि इससे सुरक्षित fixed-income assets अधिक आकर्षक होते हैं और कंपनियों की financing तथा valuation assumptions पर भी असर पड़ता है।

Asian Markets में भी भारी गिरावट

भारतीय बाजार की गिरावट अकेली घटना नहीं थी।

एशिया के दूसरे प्रमुख बाजारों में भी बुधवार को भारी दबाव देखा गया। व्यापक MSCI Asia-Pacific Index करीब 2% नीचे था।

दक्षिण कोरिया का KOSPI लगभग 4% और जापान का Nikkei 225 करीब 2.9% गिरा।

इससे संकेत मिला कि भारतीय शेयरों की बिकवाली एक व्यापक global risk-off environment का हिस्सा थी।

फिर भी कुछ शेयरों में दिखी मजबूती

व्यापक बिकवाली के बावजूद कुछ शेयर बाजार की दिशा के विपरीत बढ़े।

Coal India में लगभग 3.6% की तेजी देखी गई। कंपनी ने अगस्त में coal supplies में 5.5% वृद्धि की जानकारी दी और अपनी Mahanadi Coalfields इकाई के IPO की योजना की पुष्टि की।

वहीं Sun Pharma में भी लगभग 0.5% की बढ़त दर्ज की गई।

इससे पता चलता है कि कमजोर बाजार में भी company-specific developments कुछ शेयरों को समर्थन दे रहे थे।

आगे बाजार के लिए क्या महत्वपूर्ण होगा?

आने वाले कारोबारी सत्रों में बाजार की दिशा काफी हद तक मध्य पूर्व की स्थिति और कच्चे तेल पर निर्भर कर सकती है।

विशेष रूप से निवेशकों की नजर Brent crude, Strait of Hormuz, US-Iran conflict, US Treasury yields, dollar और rupee की चाल पर रहेगी।

यदि तेल लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बना रहता है, तो भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए imported inflation और बढ़ते import bill की चिंता बढ़ सकती है।

दूसरी ओर, भू-राजनीतिक तनाव कम होने और crude prices में नरमी आने पर बाजार को राहत मिल सकती है।

महत्वपूर्ण नोट

यह बाजार रिपोर्ट 2 सितंबर 2026 के शुरुआती/इंट्राडे कारोबार पर आधारित है। Sensex और Nifty के स्तर पूरे कारोबारी दिन में बदल सकते हैं, इसलिए यहां दिए गए आंकड़ों को closing levels नहीं माना जाना चाहिए।

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