केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भारत में बढ़ते ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि अब समय केवल वैश्विक कंपनियों के बैक-ऑफिस या सपोर्ट सेंटर बनने का नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत को अनुसंधान, नवाचार और नई तकनीकों के विकास का वैश्विक केंद्र बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ना चाहिए। उनके अनुसार, GCCs को केवल संचालन संबंधी कार्यों तक सीमित रखने के बजाय उन्हें उत्पाद विकास, अत्याधुनिक तकनीकों और वैश्विक समाधान तैयार करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभानी चाहिए।
वित्त मंत्री ने कहा कि भारत के पास कुशल मानव संसाधन, मजबूत डिजिटल बुनियादी ढांचा और तेजी से बढ़ता स्टार्टअप इकोसिस्टम है, जो देश को वैश्विक नवाचार केंद्र बनाने की क्षमता रखता है। उन्होंने उद्योग जगत से अनुसंधान एवं विकास (R&D) में अधिक निवेश करने, नई तकनीकों को अपनाने और प्रतिभाओं को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने का आह्वान किया। उनका मानना है कि इससे भारत की अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी और उच्च गुणवत्ता वाले रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।
निर्मला सीतारमण ने यह भी कहा कि सरकार ऐसी नीतियों पर काम कर रही है जो डिजिटल परिवर्तन, तकनीकी नवाचार और वैश्विक निवेश को प्रोत्साहित करें। उनका विश्वास है कि यदि GCCs नवाचार, अनुसंधान और उत्पाद विकास पर अधिक ध्यान देंगे, तो भारत वैश्विक मूल्य श्रृंखला (Global Value Chain) में और मजबूत स्थान हासिल कर सकेगा तथा भविष्य की ज्ञान-आधारित अर्थव्यवस्था का प्रमुख केंद्र बनकर उभरेगा।
