विज्ञापन - शीर्ष बैनर
Read in English —JantaScope English
वित्त

Kore Digital के खातों पर SEBI के गंभीर सवाल: ₹541 करोड़ की आय पर क्या मिला?

SEBI ने Kore Digital के खातों में ₹541.3 करोड़ की कथित आय गड़बड़ी का प्रारंभिक निष्कर्ष निकाला है। कंपनी के मुख्य बोर्ड स्थानांतरण पर रोक लगी है और फॉरेंसिक ऑडिट होगा।

Kore Digital के खातों पर SEBI के गंभीर सवाल: ₹541 करोड़ की आय पर क्या मिला?
विज्ञापन

द्वारा जीत निर्मल

स्रोत: JantaScope

भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) ने SME मंच पर सूचीबद्ध दूरसंचार अवसंरचना कंपनी Kore Digital Limited के वित्तीय खातों पर गंभीर सवाल उठाए हैं। नियामक की प्रारंभिक जांच के मुताबिक, कंपनी ने वित्त वर्ष 2024-25 और 2025-26 के दौरान अपनी समेकित आय में करीब ₹541.3 करोड़ की ऐसी आय दिखाई, जिसे SEBI ने प्रथम दृष्टया गलत पाया है। यह राशि इन दो वर्षों की कंपनी की कुल आय का लगभग 73% बताई गई है।

यह अभी अंतिम दोष-सिद्धि नहीं है। SEBI ने 17 सितंबर 2026 को अंतरिम आदेश जारी किया है और साफ किया है कि उसके निष्कर्ष प्रथम दृष्टया हैं। आगे विस्तृत जांच और फॉरेंसिक ऑडिट होना बाकी है।

फिर भी नियामक ने मामले को इतना गंभीर माना कि Kore Digital को सार्वजनिक बाजार से नया पैसा जुटाने से रोक दिया गया है और NSE को निर्देश दिया गया है कि SEBI की अनुमति के बिना कंपनी को SME मंच से मुख्य बोर्ड पर स्थानांतरित न किया जाए।

₹541 करोड़ का मामला आखिर है क्या?

SEBI की जांच का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा Kore Digital द्वारा वित्त वर्ष 2024-25 में खरीदी गई तीन सहायक कंपनियों से जुड़ा है।

नियामक के अनुसार, इन तीन सहायक कंपनियों और उनकी आगे की सहायक इकाइयों ने अधिग्रहण के बाद Kore Digital की समेकित आय में बहुत बड़ा योगदान दिखाना शुरू किया। SEBI के मुताबिक, वित्त वर्ष 2024-25 और 2025-26 में इनका औसत योगदान कंपनी की समेकित आय का करीब 75% था।

लेकिन जांच के दौरान एक बड़ी विसंगति सामने आई।

SEBI ने इन कंपनियों के बताए गए पतों पर भौतिक सत्यापन कराया। नियामक के अनुसार, वहां इन सहायक और उनकी आगे की सहायक कंपनियों के वास्तव में काम करने के प्रमाण नहीं मिले। इसी आधार पर SEBI ने उनके अस्तित्व और उनसे दिखाई गई आय पर सवाल उठाया।

अंतरिम आदेश में नियामक का प्रारंभिक निष्कर्ष है कि इन सहायक कंपनियों का अधिग्रहण वास्तविक नहीं था और इनके जरिए वित्त वर्ष 2024-25 तथा 2025-26 में Kore Digital की आय करीब ₹541.3 करोड़ तक गलत दिखाई गई।

यह संख्या इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि मामला किसी छोटी लेखांकन त्रुटि तक सीमित नहीं है। SEBI के अनुसार, सवालों के घेरे में आई आय इन दो वर्षों की कुल आय का करीब 73% थी।

अकेले समेकित खातों पर ही सवाल नहीं

SEBI की आपत्तियां सहायक कंपनियों तक सीमित नहीं हैं।

नियामक ने Kore Digital के अलग वित्तीय खातों में भी ऐसी प्रविष्टियां मिलने की बात कही है जिनसे आय बढ़ी हुई दिखाई देने का संदेह पैदा हुआ।

SEBI के अनुसार, वित्त वर्ष 2023-24 और 2024-25 के दौरान NECL, Vodafone और Airtel से जुड़े लेनदेन के माध्यम से करीब ₹31.49 करोड़ की आय बढ़ाकर दिखाई गई। इसके अलावा वित्त वर्ष 2024-25 में Kashvee Infra Projects Private Limited नाम की इकाई के जरिए ₹26.42 करोड़ की आय दिखाने पर भी नियामक ने सवाल उठाया है। SEBI ने Kashvee को प्रथम दृष्टया गैर-वास्तविक इकाई माना है।

इन नामों का उल्लेख SEBI के निष्कर्षों के संदर्भ में है; इससे यह निष्कर्ष नहीं निकलता कि नामित ग्राहक कंपनियों ने स्वयं कोई गलत काम किया था।

यही अंतर इस मामले की रिपोर्टिंग में महत्वपूर्ण है। फिलहाल आरोप Kore Digital के खातों और उनमें दर्ज लेनदेन की वास्तविकता को लेकर हैं।

अधिमान्य शेयर निर्गम से जुटाए पैसे पर भी सवाल

मामले का दूसरा बड़ा पहलू केवल आय से नहीं, बल्कि कंपनी द्वारा निवेशकों से जुटाए गए पैसे के इस्तेमाल से जुड़ा है।

Kore Digital ने मार्च 2024 में अधिमान्य शेयर निर्गम पूरा किया था।

SEBI का आरोप है कि इससे जुटाई गई रकम का एक बड़ा हिस्सा Kashvee Infra Projects Private Limited और SD Square Manpower Private Limited जैसी इकाइयों की ओर भेजा गया। नियामक ने दोनों को प्रथम दृष्टया फर्जी या गैर-वास्तविक पाया है।

इस पहलू की जांच इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि शेयर जारी कर जुटाई गई पूंजी के इस्तेमाल के बारे में सूचीबद्ध कंपनियों को निवेशकों और शेयर बाजारों के सामने सही जानकारी देनी होती है।

यदि पैसा घोषित उद्देश्य के बजाय किसी अन्य रास्ते से भेजा गया हो, तो सवाल केवल लेखांकन तक सीमित नहीं रहता—यह निवेशकों को दी गई जानकारी की विश्वसनीयता से भी जुड़ जाता है।

हालांकि इन आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष अभी नहीं आया है।

मुख्य बोर्ड पर जाने की योजना क्यों महत्वपूर्ण है?

Kore Digital जून 2023 में NSE के SME मंच, NSE Emerge, पर सूचीबद्ध हुई थी। कंपनी 14 जून 2026 से मुख्य बोर्ड पर स्थानांतरण की पात्रता की स्थिति में पहुंची थी।

यहीं SEBI की जांच का एक और महत्वपूर्ण पहलू सामने आता है।

नियामक ने सवाल उठाया है कि क्या कंपनी की बढ़ी हुई दिखाई गई आय ने उसे मुख्य बोर्ड पर स्थानांतरण से जुड़ी वित्तीय पात्रता पूरी करने में मदद की।

SEBI के मुताबिक, सवालों के घेरे में आई तीन सहायक कंपनियों के योगदान को हटाने पर कुछ अवधियों में Kore Digital की अलग आय उस सीमा से नीचे चली जाती, जिसकी मुख्य बोर्ड पर स्थानांतरण के लिए जरूरत थी।

इसी पृष्ठभूमि में SEBI ने NSE को निर्देश दिया है कि नियामक की अनुमति मिलने तक Kore Digital को SME मंच से मुख्य बोर्ड पर स्थानांतरित न किया जाए।

इसका मतलब यह नहीं कि SEBI ने अंतिम रूप से तय कर दिया है कि सहायक कंपनियां केवल पात्रता हासिल करने के लिए बनाई गई थीं। यह जांच का विषय है। लेकिन आय और मुख्य बोर्ड स्थानांतरण के बीच संभावित संबंध ने मामले को ज्यादा गंभीर बना दिया है।

कंपनी के अपने वित्तीय खुलासे क्या कहते थे?

Kore Digital द्वारा मई 2026 में NSE को दिए गए वित्तीय परिणाम इस मामले में एक दिलचस्प संदर्भ देते हैं।

कंपनी के बोर्ड ने 30 मई को 31 मार्च 2026 को समाप्त वर्ष के अलग और समेकित लेखा-परीक्षित वित्तीय परिणाम मंजूर किए थे। कंपनी ने यह भी घोषणा की थी कि उसके वैधानिक लेखा परीक्षक J N Gupta & Co. ने वित्त वर्ष 2025-26 के परिणामों पर बिना किसी संशोधन वाली राय दी थी।

इसके अगले दिन Kore Digital ने वित्त वर्ष 2024-25 के समेकित लाभ-हानि विवरण में एक गलती सुधारते हुए NSE को बताया कि वह केवल टंकण संबंधी त्रुटि थी और उससे कंपनी की वित्तीय स्थिति, लाभ, शुद्ध संपत्ति या नकदी प्रवाह पर कोई असर नहीं पड़ता।

उस मई वाले सुधार को SEBI द्वारा सितंबर में लगाए गए व्यापक आरोपों के बराबर मानना सही नहीं होगा। दोनों अलग मामले हैं।

लेकिन यह घटनाक्रम एक महत्वपूर्ण सवाल जरूर खड़ा करता है: जिन खातों को बाजार के सामने लेखा-परीक्षित रूप में रखा गया था, उनमें SEBI को बाद में इतनी बड़ी संभावित विसंगतियां कैसे मिलीं?

इसी कारण नियामक ने अपने आदेश की प्रति National Financial Reporting Authority को भी भेजी है, ताकि वह लेखा परीक्षकों से संबंधित मामले में जरूरत के मुताबिक कार्रवाई पर विचार कर सके।

SEBI ने अभी क्या कार्रवाई की है?

अंतरिम आदेश में Kore Digital के साथ Managing Director Ravindra Doshi, CEO Chaitanya Doshi और CFO Kashmira Doshi को भी नामित किया गया है।

तीनों अधिकारियों को अगले आदेश तक Kore Digital के शेयरों को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से खरीदने, बेचने या उनमें लेनदेन करने से रोक दिया गया है।

कंपनी को सार्वजनिक निर्गम दस्तावेज या विज्ञापन के जरिए जनता से प्रतिभूति बाजार में पैसा जुटाने से भी रोका गया है।

सबसे महत्वपूर्ण अगला कदम फॉरेंसिक ऑडिट होगा।

SEBI ने Kore Digital की सूचीबद्धता की तारीख से 31 मार्च 2026 तक के खातों की विस्तृत फॉरेंसिक जांच कराने का फैसला किया है। कंपनी और अन्य नोटिस पाने वाले पक्ष आदेश मिलने के 21 दिनों के भीतर अपना जवाब दाखिल कर सकते हैं और व्यक्तिगत सुनवाई की मांग कर सकते हैं।

इसलिए अभी किसी भी आरोप को अंतिम रूप से सिद्ध धोखाधड़ी कहना समय से पहले होगा।

निवेशकों के लिए ₹541 करोड़ से बड़ी सीख

इस मामले का महत्व केवल Kore Digital तक सीमित नहीं है।

SME कंपनियों में निवेश करते समय तेज आय वृद्धि अक्सर सबसे आकर्षक संकेतों में से एक दिखाई देती है। लेकिन किसी कंपनी की आय कितनी तेजी से बढ़ रही है, उससे ज्यादा जरूरी यह समझना है कि वह आय कहां से आ रही है

अगर किसी कंपनी की कुल आय अचानक खरीदी गई सहायक कंपनियों पर बहुत ज्यादा निर्भर हो जाए, तो निवेशक कुछ बुनियादी सवाल पूछ सकते हैं—उन कंपनियों के वास्तविक ग्राहक कौन हैं, नकदी प्रवाह आय के अनुरूप है या नहीं, संबंधित पक्षों से कितने लेनदेन हो रहे हैं और अधिग्रहण के बाद आय में अचानक कितना बदलाव आया है।

Kore Digital के मामले में SEBI का प्रारंभिक निष्कर्ष इसी जोखिम को सामने लाता है। नियामक का कहना है कि हाल में खरीदी गई तीन सहायक कंपनियों ने औसतन लगभग तीन-चौथाई समेकित आय दिखाई, जबकि स्थल निरीक्षण में उनके घोषित पतों पर संचालन के प्रमाण नहीं मिले।

फिलहाल ₹541.3 करोड़ को “सिद्ध फर्जी आय” कहना सही नहीं होगा। यह SEBI की प्रारंभिक जांच में सामने आई कथित गलत आय है।

अब निर्णायक चरण फॉरेंसिक ऑडिट, विस्तृत जांच और Kore Digital तथा उसके अधिकारियों के जवाब का होगा। इन्हीं के बाद यह अधिक स्पष्ट होगा कि SEBI के प्रारंभिक निष्कर्ष किस हद तक कायम रहते हैं।

साझा करें
विज्ञापन - मध्य लेख
विज्ञापन - नीचे