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वैश्विक बाजार में सोने ने मजबूती दर्ज की और कीमत दो महीने से अधिक के उच्च स्तर तक पहुंच गई। बाजार की चाल के पीछे सबसे बड़ा कारण अमेरिका से आए जुलाई के महंगाई आंकड़े रहे, जिन्होंने तत्काल मौद्रिक सख्ती की आशंकाओं को कुछ हद तक कम कर दिया।
अमेरिकी Consumer Price Index (CPI) जुलाई में मासिक आधार पर केवल 0.1% बढ़ा, जो बाजार की उम्मीदों के अनुरूप था। सालाना आधार पर CPI महंगाई जून के 3.5% से घटकर 3.4% रही। हालांकि यह स्तर अभी भी Federal Reserve के 2% लक्ष्य से ऊपर है, लेकिन आंकड़ों में तेज उछाल नहीं आने से सितंबर में ब्याज दर बढ़ाने की जरूरत को लेकर बाजार की धारणा नरम हुई है।
इस माहौल में स्पॉट गोल्ड करीब 0.9% बढ़कर $4,406.64 प्रति औंस तक पहुंचा, जबकि अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स लगभग 0.6% की बढ़त के साथ $4,467.50 प्रति औंस पर बंद हुए।
Fed की ब्याज दर नीति पर क्यों बदली धारणा?
अमेरिकी केंद्रीय बैंक ने जुलाई की बैठक में अपनी प्रमुख ब्याज दर को 3.50%-3.75% के दायरे में बरकरार रखा था। हालांकि कुछ नीति निर्माताओं ने दर बढ़ाने का समर्थन किया था, जिससे बाजार में अगली बैठकों में मौद्रिक सख्ती की संभावना बनी हुई थी।
नए महंगाई आंकड़ों के बाद सितंबर में दर बढ़ोतरी की बाजार-आधारित संभावना कम हुई है। इसका अर्थ यह नहीं है कि आगे दरें बढ़ने की संभावना पूरी तरह समाप्त हो गई है। महंगाई अभी भी Fed के लक्ष्य से ऊपर है और आने वाले आर्थिक आंकड़े केंद्रीय बैंक के फैसले के लिए महत्वपूर्ण रहेंगे।
कम ब्याज दर की उम्मीद सोने के लिए क्यों सकारात्मक?
सोना निवेशकों को नियमित ब्याज या डिविडेंड नहीं देता। इसलिए जब ब्याज दरें और बॉन्ड यील्ड ऊंची होती हैं, तो ब्याज देने वाली संपत्तियां सोने की तुलना में अधिक आकर्षक हो सकती हैं।
इसके विपरीत, जब बाजार को लगता है कि ब्याज दरों में बढ़ोतरी टल सकती है या मौद्रिक नीति अपेक्षाकृत नरम रह सकती है, तो सोना रखने की अवसर लागत कम होती है। यही कारण है कि Fed की ब्याज दर नीति को लेकर बदलती उम्मीदें सोने की कीमतों पर तेज असर डाल सकती हैं। World Gold Council भी ब्याज दरों, भू-राजनीतिक जोखिम और निवेशक धारणा को 2026 की दूसरी छमाही में सोने के महत्वपूर्ण कारकों में गिनता है।
डॉलर और वैश्विक अनिश्चितता से भी मिला सहारा
महंगाई आंकड़ों के बाद अमेरिकी डॉलर में कमजोरी ने भी सोने को समर्थन दिया। डॉलर कमजोर होने पर अन्य मुद्राओं में सोना खरीदने वाले निवेशकों के लिए इसकी प्रभावी लागत कम हो सकती है।
इसके साथ ही वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव सुरक्षित निवेश विकल्पों की मांग को प्रभावित कर रहे हैं। ऐसी परिस्थितियों में सोने को अक्सर 'सेफ-हेवन' एसेट के रूप में देखा जाता है, हालांकि भू-राजनीतिक घटनाओं पर इसकी प्रतिक्रिया हर बार समान नहीं होती।
आगे किन आंकड़ों पर रहेगी बाजार की नजर?
निवेशकों का ध्यान अब अमेरिका के Producer Price Index (PPI) सहित आने वाले आर्थिक संकेतकों पर रहेगा। यदि आगामी आंकड़े भी महंगाई के दबाव में नरमी का संकेत देते हैं, तो सितंबर में Fed की दर बढ़ोतरी की संभावना और कमजोर हो सकती है।
दूसरी ओर, यदि महंगाई फिर तेज होती है या ऊर्जा कीमतों का दबाव बढ़ता है, तो Federal Reserve के लिए सख्त रुख अपनाने का तर्क दोबारा मजबूत हो सकता है। इसलिए सोने की मौजूदा तेजी को सीधे लंबी अवधि की एकतरफा तेजी का संकेत मानना जल्दबाजी होगी।
संतुलित विश्लेषण
सोने के लिए फिलहाल नरम अमेरिकी महंगाई, दर बढ़ोतरी की घटती उम्मीदें और वैश्विक अनिश्चितता सकारात्मक कारक हैं। लेकिन CPI महंगाई अभी भी Fed के 2% लक्ष्य से काफी ऊपर है। इसलिए केंद्रीय बैंक के अगले कदम को लेकर अनिश्चितता समाप्त नहीं हुई है।
यदि आने वाले महीनों में महंगाई फिर बढ़ती है, अमेरिकी डॉलर मजबूत होता है या बॉन्ड यील्ड ऊपर जाती है, तो सोने पर दबाव लौट सकता है। इसके विपरीत, कमजोर आर्थिक आंकड़े और अपेक्षाकृत नरम Fed नीति की उम्मीद बुलियन को अतिरिक्त समर्थन दे सकती है।
