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निवेशकों की बढ़ी चिंता: रुपया पड़ा डॉलर के सामने कमजोर: कच्चा तेल 105 यूएस डॉलर प्रति बैरल के पार।

8 अक्टूबर, गुरुवार को शेयर बाजार में भारी उतार-चढ़ाव होने के बाद भारतीय रुपया प्रति यूएस डॉलर के सामने काफी कमजोर होकर 96.78 पर गिरकर आ गया है। जबकि बाहर देशों से आयात करने वाला ब्रेंट क्रूड ऑयल (कच्चा तेल) 105 यूएस डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच चुका है। इसका मुख्य कारण ईरान के हमलों से होने वाला बड़ा सप्लाई रिस्क है।

निवेशकों की बढ़ी चिंता: रुपया पड़ा डॉलर के सामने कमजोर: कच्चा तेल 105 यूएस डॉलर प्रति बैरल के पार।
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द्वारा साधना गुप्ता

स्रोत: reuters, the economic times, ndtv

आखिर प्रति यूएस डॉलर के सामने क्यों पड़ रहा है रुपया कमजोर?

भारत देश का 80% कच्चा तेल आयात होता है, जिससे भारत के उद्योग में मदद मिलती है। लेकिन ईरान में हो रहे हमले, तेल की बढ़ती कीमत और सप्लाई रिस्क, के साथ एशियाई पैसों के कमजोर होने का सीधा प्रभाव भारतीय रुपयों पर पड़ रहा है। भारतीय रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के रेपो रेट बढ़ाने के बाद भारतीय रुपयों पर प्रभाव पड़ा है। बुधवार को रेपो रेट को 0.25% से बढ़ाया गया था। वहीं गुरुवार को भारतीय रुपया 96.40 से गिरकर 96.75 पर आ गया था। आज रुपया प्रति डॉलर के मुकाबले 96.78 पर बंद हुआ है। जो मई माह के मुकाबले ऐतिहासिक गिरावट के करीब था। रुपये के कमजोर होने का कारण विदेशी निवेशकों और शेयर बाजार में आया उतार-चढ़ाव भी बताया जा रहा है। वहीं कच्चे तेल की बढ़ती कीमत, विकसित बाजारों के ब्रांड यील्ड में उछाल और कमजोर पैसे के प्रवाह ने भी रुपयों को प्रति डॉलर के सामने बुरी तरह गिराया है।

सूत्रों के मुताबिक फंडर्स का कहना है कि, भारत द्वारा पिछले चार साल में पहली बार ब्याज दर में की गई वृद्धि से रिकॉर्ड उच्च पूंजी प्रवाह में कमी आने या आउटफ्लो होने की संभावना नहीं है, जिससे केंद्रीय बैंक को प्रतिकूल वैश्विक वातावरण, कमजोर मुद्रा और बढ़ती मुद्रास्फीति के दुश्चक्र से झुंझना पड़ रहा है।

लगातार क्यों बढ़ रही है कच्चे तेल की कीमत?

क्रूड ऑयल की कीमत लगातार बढ़ रही है। बीते गुरुवार को इसमें भारी उछाल देखने को मिला, कच्चे तेल की कीमत 105 डॉलर प्रति बैरल पहुंच चुकी है। वहीं ईरान की ओर से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तेल के टैंकरों पर हमले बढ़ गए हैं, और अमेरिका के गल्फ कोस्ट में तूफान आने के कारण तेल का प्रोडक्शन रोका गया है। इसी कारण वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल को लेकर चिंता बढ़ गई है। और तेल के भाव में उछाल आ रहा है। सप्लाई के रुकने के कारण गुरुवार को ब्रेंट क्रूड ऑयल के भाव मे करीब 4.81% की तेजी देखने को मिली। फिलहाल यह 105.02 डॉलर प्रति बैरल के भाव पर बिक रहा है। बीते 3 महीनों में ब्रेंट क्रूड की कीमत में 34% से ज्यादा का उछाल देखने को मिला है। 30 अप्रैल 2026 को इसकी कीमत सबसे ज्यादा थी, कच्चा तेल उस दिन 126 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था।

रॉयटर्स के मुताबिक, 28 सितंबर से 5 अक्टूबर के बीच में होर्मुज के आसपास एनएलजी और एलपीजी टैंकरों पर 12 से ज्यादा हमले किए गए थे । ईरान वॉर शुरू होने के बाद टैंकरों पर एक सप्ताह में इससे पहले कभी इतने हमले नहीं हुए हैं।

बता दें कि, कच्चे तेल को लेकर चिंता इसलिए भी बढ़ रही है क्योंकि, तेल उत्पादन करने वाले देशों के पास अपने तेल को इंटरनेशनल लेवल पर पहुंचाने के लिए काफी कम विकल्प हैं। इसी बीच अमेरिका गल्फ कोस्ट में भी सप्लाई को लेकर दबाव है । वहीं आने वाले तूफान के कारण अमेरिका के गल्फ ऑफ मैक्सिको क्षेत्र में तेल उत्पादन और रिफाइनरी का कुछ हिस्सा बंद किया गया है।

रॉयटर्स के मुताबिक, शेल और शेवरॉन ने तूफान आने से पहले कुछ ऑफशोर उत्पादन बंद कर दिए थे, इसलिए वैश्विक स्तर पर तेल सप्लाई की चिंता और भी ज्यादा बढ़ गई है।

भारतीय बाजार में निवेशकों की चिंता बढ़ने का मुख्य कारण…..

गिरता हुआ रुपया और बढ़ते कच्चे तेल का दाम निवेशकों को आए दिन चिंता में डाल रहा है, जिस कारण बहुत से फंडर्स तो भारतीय शेयर बाजार में पैसे निवेश करने से डर रहे हैं, और बहुत से फॉरेन फंडर बाजार से पैसे निकालकर डॉलर और अन्य करेंसी में इन्वेस्ट करने की सोच रहे हैं । यही कारण है कि रुपया और कमजोर हो रहा है। क्रूड ऑयल के बढ़ते दाम के पीछे भले ही वैश्विक तनाव है लेकिन इसका निवेशकों पर बड़ा प्रभाव पड़ रहा है। वहीं शेयर मार्केट में होने वाले उतार-चढ़ाव भी निवेशकों की चिंता का मुख्य कारण है। क्योंकि बीते 2 दिनों से शेयर बाजार का रुख बदला हुआ है, गुरुवार को जहां निफ्टी 50 और सेंसेक्स लाल रेखा के पार थे तो वहीं आज जब बाजार खुला तो लाल रेखा हरे में बदल चुकी थी और लॉस रिकवरी मोड पर था । भारतीय बाजार में होने वाला उतार-चढ़ाव ही निवेशकों की चिंता को और बढ़ा रहा है।

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