क्यों हुआ पीपीबीएल अनुसूचित बैंकों की लिस्ट से बाहर?
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने पेटीएम पेमेंट बैंक को सुरक्षित न बताते हुए उसे अनुसूचित बैंकों की लिस्ट से बाहर कर दिया है, और पीपीबीएल का लाइसेंस अप्रैल में ही रद्द कर दिया गया था क्योंकि, आरबीआई के अनुसार, पेटीएम पेमेंट बैंक सेफ ट्रांजैक्शन प्रोसेस फॉलो नहीं कर रहा था। आरबीआई द्वारा जारी की गई गाइडलाइंस को पीपीबीएल द्वारा फॉलो नहीं किया जा रहा था। नियमों का उल्लंघन खाताधारकों के लिए एक बड़ा रिस्क है। वहीं लाइसेंस रद्द होने के बाद दिल्ली हाईकोर्ट ने बैंक को बंद करने का आदेश जारी किया था, और लाइसेंस न होने के कारण अब रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने पेटीएम पेमेंट बैंक को मान्यता प्राप्त शेड्यूल्ड बैंकों की लिस्ट से बाहर कर दिया है।
अनुसूचित बैंकों की लिस्ट में कौन-सी बैंक शामिल होती हैं?
वास्तव में शेड्यूल बैंक वो बैंक होती है, जिसका नाम भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम 1934 की दूसरी अनुसूची यानी सेकंड शेड्यूल में शामिल होता है। इसके लिए बैंक को निर्धारित कानूनी और नियामकीय शर्तें पूरी करनी पड़ती हैं। शेड्यूल बैंक का दर्जा मिलने के कारण बैंकों को आरबीआई की कुछ बैंकिंग सुविधाओं और व्यवस्था तक पहुंच मिल जाती है। लेकिन किसी बैंक को इस लिस्ट से हटाने का मतलब सिर्फ बैंक का नाम हटाना नहीं होता है। पेटीएम पेमेंट बैंक के मामले में यह कदम बैंक का बैंकिंग लाइसेंस रद्द होने के बाद उठाया गया था।
आरबीआई के इस फैसले के बाद क्या पेटीएम यूजर्स को पेटीएम का इस्तेमाल जारी रखना चाहिए?
सबसे पहली बात पेटीएम ऐप और पेटीएम पेमेंट बैंक दोनों अलग चीजें हैं। पेटीएम डिजिटल पेमेंट प्लेटफॉर्म है, वहीं पेटीएम पेमेंट बैंक एक बैंकिंग संस्था है। पेटीएम कंपनी के अनुसार पेटीएम की प्रमुख सर्विसेज दूसरे बैंकों के साथ भी काम करती हैं। इसलिए बैंक का लाइसेंस रद्द होने के बाद भी पेटीएम की सभी सेवाएं बंद नहीं होंगी। वहीं पीपीबीएल के जिन खाताधारकों के बैंक या वॉलेट में पैसा है उन्हें बैंक की तरफ से जारी गाइडलाइंस को फॉलो करके व्यवस्था के अनुसार अपने पैसे का स्टेटस चेक करना चाहिए, बैंक के बंद होने की प्रक्रिया के दौरान जमाकर्ताओं के पैसे उन्हें वापस लौटाना तय है।
पेटीएम पेमेंट बैंक के अनुसूचित बैंकिंग लिस्ट से बाहर होने के बाद क्या खाताधारकों का पैसा सुरक्षित है?
अप्रैल में पीपीबीएल का लाइसेंस रद्द करते समय भारतीय रिजर्व बैंक ने कहा था कि, बैंक के पास समापन प्रक्रिया के दौरान अपनी पूरी जमा देनदारियां चुकाने के लिए पर्याप्त धन है, यह आश्वासन लाइसेंस रद्द करते समय जमा राशि की वापसी के संबंध में था।
वहीं वन97 कम्युनिकेशंस द्वारा संचालित पेटीएम ने कहा है कि, आरबीआई ने पीपीबीएल के खिलाफ जो कार्रवाई की है, उसका बैंकिंग सेवाओं पर कोई असर नहीं पड़ा है। इसकी यूपीआई सर्विसेज कई बैंकों के साथ कंबाइन होती है, वहीं पेटीएम कंपनी ने कहा कि, उन्होंने मार्च 2024 में इस पेमेंट बैंक के साथ अपने सारे जरूरी व्यावसायिक समझौते खत्म कर दिए थे। मतलब पेटीएम और पेटीएम पेमेंट बैंक दोनों बहुत समय पहले से अलग हो चुके थे, और बैंक के बंद होने के बाद भी ऐप की सारी सर्विसेज वैसी ही काम करेगी।
पीपीबीएल को आरबीआई ने कई बार दी थी चेतावनी।
पेटीएम पेमेंट बैंक का लाइसेंस रद्द होने के पहले आरबीआई ने कई बार बैंक को चेतावनी दी थी, 11 मार्च 2022 को रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने बैंकिंग रूल और काम करने के तरीके को लेकर चिंता जताते हुए पेटीएम पेमेंट बैंक लिमिटेड को नए अकाउंट ओपनिंग से रोका था। साथ में बैंक के आईटी सिस्टम को चेक करने का आदेश दिया था।
जिसके बाद 31 जनवरी और 16 फरवरी 2024 को आरबीआई ने बैंक पर और सख्ती की थी, इसके तहत बैंक के खातों में वॉलेट और प्रीपेड कार्ड जैसी सेवाओं में नया पैसा जमा करने, पैसे डालने और बैलेंस टॉपअप करने पर रोक लगाई थी।
आरबीआई द्वारा लगाए गए सारे नियमों का उल्लंघन करने और रूल्स और रेगुलेशन को सीरियस न लेने के कारण अप्रैल 2026 में आरबीआई ने पेटीएम पेमेंट बैंक का लाइसेंस रद्द कर दिया था। और उसके बाद ही दिल्ली हाईकोर्ट ने जुलाई मे बैंक को बंद करने का आदेश दिया था।
पीपीबीएल से जुड़े ग्राहकों को अब क्या करना चाहिए?
अपने पेटीएम पेमेंट बैंक खाते और वॉलेट में बचे पैसे की जानकारी सुरक्षित रखें।
पीपीबीएल बैंक से जुड़ी आधिकारिक सूचना और समापन प्रक्रिया से जुड़े गाइड्लाइन पर नजर रखें।
खाते में पैसे हों तो उसे चेक करें और कैश करने के लिए बैंक द्वारा बताए गए प्रोसेस को फॉलो करें।
किसी अनजान इंसान को ओटीपी, पासवर्ड या बैंक से जुड़ी जानकारी मत बताइए।
पेटीएम ऐप की सेवाओं और पेटीएम पेमेंट बैंक की सेवाओं को अलग-अलग देखें क्योंकि ये दोनों भी अलग हैं।
