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RBI MPC की अहम तीन दिवसीय बैठक शुरू, Repo Rate पर 7 अक्टूबर को फैसला; महंगे कच्चे तेल और महंगाई पर नजर

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की छह सदस्यीय Monetary Policy Committee (MPC) की तीन दिवसीय बैठक 5 अक्टूबर 2026 को शुरू हो गई है। RBI Governor Sanjay Malhotra की अध्यक्षता वाली समिति 7 अक्टूबर को अपना नीतिगत फैसला घोषित करेगी। इस बार बाजार की सबसे बड़ी नजर इस बात पर है कि RBI मौजूदा 5.25% repo rate को बरकरार रखता है या बढ़ती महंगाई, महंगे crude oil और वैश्विक स्तर पर सख्त होती monetary policy के बीच ब्याज दर बढ़ाने का फैसला करता है।

RBI MPC की अहम तीन दिवसीय बैठक शुरू, Repo Rate पर 7 अक्टूबर को फैसला; महंगे कच्चे तेल और महंगाई पर नजर
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द्वारा जीत निर्मल

स्रोत: Reserve Bank of India (RBI), Reuters & Economic Times

RBI MPC की तीन दिवसीय बैठक शुरू

Reserve Bank of India की Monetary Policy Committee ने सोमवार को अक्टूबर की monetary policy review के लिए विचार-विमर्श शुरू कर दिया है। बैठक 5 से 7 अक्टूबर तक चलेगी और अंतिम दिन RBI Governor Sanjay Malhotra समिति के फैसले की घोषणा करेंगे। पिछली MPC बैठक में RBI ने repo rate को 5.25% पर अपरिवर्तित रखा था और policy stance को “neutral” बनाए रखा था।

इस बार परिस्थितियां पिछली बैठक से अलग हैं। महंगाई बढ़ी है, global crude oil prices ऊंचे बने हुए हैं और वित्तीय बाजारों में rate hike की उम्मीद मजबूत हुई है।

क्या Repo Rate 5.50% हो सकती है?

बैठक से पहले अर्थशास्त्रियों का एक बड़ा वर्ग 25 basis points की बढ़ोतरी की संभावना देख रहा है। ऐसा हुआ तो repo rate 5.25% से बढ़कर 5.50% हो जाएगी।

Reuters के poll में 61 में से 35 economists—यानी करीब 60%—ने 25 basis points की बढ़ोतरी का अनुमान लगाया है। हालांकि यह केवल economists का forecast है; अंतिम फैसला MPC के मतदान के बाद ही सामने आएगा।

Economic Times के एक अलग poll में 21 economists और bank executives में से 20 ने भी rate hike की उम्मीद जताई।

महंगाई क्यों बनी RBI की बड़ी चिंता?

भारत की retail inflation अगस्त में बढ़कर 4.82% पहुंच गई थी। यह लगातार तीसरा महीना था जब inflation RBI के 4% medium-term target से ऊपर रही।

महंगाई का बढ़ना MPC के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि RBI की monetary policy का प्रमुख उद्देश्य price stability बनाए रखना है, साथ ही growth की जरूरतों को ध्यान में रखना भी है।

पिछली बैठक में RBI ने संकेत दिया था कि headline inflation में बढ़ोतरी के बावजूद दबाव मुख्य रूप से food और fuel जैसे supply-side factors से आ रहा था और underlying core inflation अपेक्षाकृत नियंत्रित थी।

अब समिति यह आकलन करेगी कि inflationary pressure अस्थायी है या अर्थव्यवस्था के ज्यादा हिस्सों तक फैल रहा है।

Crude Oil ने बढ़ाई चुनौती

भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर imported crude oil पर निर्भर है। इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी domestic inflation पर दबाव डाल सकती है।

मौजूदा geopolitical तनाव के बीच crude oil की ऊंची कीमतें RBI के लिए प्रमुख risk factors में शामिल हैं। महंगा तेल transportation और production costs बढ़ा सकता है, जिसका असर धीरे-धीरे दूसरी वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों तक पहुंच सकता है।

यही कारण है कि अक्टूबर की MPC meeting को सामान्य policy review के मुकाबले अधिक महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

मजबूत Growth RBI को कितनी गुंजाइश देती है?

महंगाई के साथ RBI को growth का संतुलन भी बनाना होगा।

भारत की अर्थव्यवस्था ने अप्रैल-जून तिमाही में 7.8% growth दर्ज की। मजबूत economic growth कुछ economists के लिए इस तर्क को मजबूत करती है कि RBI inflation नियंत्रित करने के लिए rates बढ़ा सकता है, क्योंकि फिलहाल growth momentum अपेक्षाकृत resilient दिखाई दे रहा है।

लेकिन ब्याज दर बढ़ाने से borrowing cost बढ़ सकती है, इसलिए MPC को inflation control और growth support के बीच संतुलन बनाना होगा।

Repo Rate बढ़ी तो Home Loan EMI पर क्या असर पड़ेगा?

Repo rate वह दर है जिस पर RBI बैंकों को short-term funds उपलब्ध कराता है। इसमें बदलाव banking system की दूसरी interest rates को प्रभावित कर सकता है।

अगर RBI repo rate बढ़ाता है और banks इसका असर lending rates में पास करते हैं, तो floating-rate home loans और कुछ अन्य loans की ब्याज दरें बढ़ सकती हैं। इसका परिणाम higher EMI या loan tenure बढ़ने के रूप में सामने आ सकता है।

इसके विपरीत, higher interest-rate environment में deposits पर मिलने वाली दरों में सुधार की संभावना हो सकती है। हालांकि इसका समय और मात्रा अलग-अलग banks की funding position और pricing strategy पर निर्भर करेगी।

Rupee और Bond Market भी फैसले पर नजर रखेंगे

RBI का फैसला केवल borrowers और depositors के लिए महत्वपूर्ण नहीं है।

Bond market पहले ही tighter monetary policy की संभावना को price-in कर रहा है। Reuters के मुताबिक swap markets अगले 12 महीनों में करीब 100 basis points तक की rate increases की संभावना दर्शा रहे हैं।

Rupee पर भी दबाव रहा है। ऐसे में policy decision के साथ RBI की future guidance currency और government bond yields की दिशा के लिए महत्वपूर्ण होगी।

सिर्फ Repo Rate नहीं, RBI की भाषा भी होगी महत्वपूर्ण

7 अक्टूबर को केवल यह देखना पर्याप्त नहीं होगा कि repo rate बढ़ती है या नहीं।

Markets मुख्य रूप से चार संकेतों पर नजर रखेंगे: repo rate decision, policy stance, inflation forecast और GDP growth projections।

अगर RBI दर बढ़ाता है लेकिन आगे की hikes पर cautious language अपनाता है, तो बाजार इसे सीमित policy adjustment के रूप में देख सकता है। इसके उलट, inflation risks पर ज्यादा सख्त टिप्पणी आने वाली बैठकों में further tightening का संकेत दे सकती है।

पिछली MPC बैठक में क्या हुआ था?

अगस्त 2026 की बैठक में MPC ने repo rate को 5.25% पर अपरिवर्तित रखने के लिए सर्वसम्मति से मतदान किया था।

इसके साथ Standing Deposit Facility (SDF) rate 5.00% और Marginal Standing Facility (MSF) तथा Bank Rate 5.50% पर बने रहे। समिति ने “neutral” stance बरकरार रखते हुए inflation और growth की बदलती परिस्थितियों पर नजर रखने की बात कही थी।

RBI के आधिकारिक minutes में अगली MPC meeting की तारीख भी 5-7 अक्टूबर 2026 निर्धारित की गई थी।

यह MPC Meeting क्यों महत्वपूर्ण है?

अक्टूबर की बैठक महत्वपूर्ण है क्योंकि RBI को एक साथ कई दिशाओं से बदलते संकेत मिल रहे हैं।

एक तरफ economic growth मजबूत है। दूसरी तरफ inflation RBI के 4% target से ऊपर है, crude oil महंगा हुआ है और global monetary environment भी tighter हो रहा है।

ऐसी स्थिति में RBI का फैसला आने वाले महीनों में home loans, corporate borrowing costs, fixed deposits, government bond yields और rupee पर असर डाल सकता है।

संतुलित विश्लेषण

इस बैठक से पहले rate hike की उम्मीद काफी मजबूत है, लेकिन 25 basis points की बढ़ोतरी अभी फैसला नहीं, केवल बाजार और economists की expectation है।

RBI के सामने दोतरफा चुनौती है। जल्दी और ज्यादा tightening economic activity तथा borrowing demand पर दबाव डाल सकती है। वहीं लंबे समय तक rates अपरिवर्तित रखने से, अगर inflation लगातार बढ़ती है, तो price pressures को नियंत्रित करना कठिन हो सकता है।

इसलिए 7 अक्टूबर के फैसले में repo rate के आंकड़े जितनी ही महत्वपूर्ण Governor Sanjay Malhotra की commentary होगी। उससे यह संकेत मिल सकता है कि RBI किसी लंबे rate-hike cycle की शुरुआत देख रहा है या मौजूदा परिस्थितियों के जवाब में केवल सीमित recalibration पर विचार कर रहा है।

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