RBI के बड़े FX Swap ऑपरेशन की रिपोर्ट
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बैंकिंग सिस्टम में जमा अतिरिक्त नकदी को कम करने के लिए हाल के हफ्तों में कम से कम $10 अरब के foreign-exchange swaps किए हैं।
Bloomberg की रिपोर्ट के अनुसार, मामले की जानकारी रखने वाले लोगों ने बताया कि केंद्रीय बैंक ने पिछले लगभग दो हफ्तों में बैंकों के साथ dollar-rupee sell-buy swaps किए। इन सौदों की maturity करीब एक महीने से छह महीने के बीच बताई गई है।
यह जानकारी आधिकारिक RBI घोषणा के बजाय मामले से परिचित अज्ञात सूत्रों पर आधारित है। रिपोर्ट के अनुसार, RBI के प्रवक्ता ने टिप्पणी के अनुरोध का जवाब नहीं दिया था।
Sell-Buy FX Swap कैसे कम करता है Liquidity?
Sell-buy swap में RBI पहले चरण में बैंकों को डॉलर बेचता है और बदले में उनसे रुपये लेता है। केंद्रीय बैंक बाद की निर्धारित तारीख पर इस लेनदेन को उलटने पर सहमत होता है।
पहले चरण में बैंकों से रुपये RBI के पास चले जाने के कारण बैंकिंग सिस्टम में उपलब्ध rupee liquidity अस्थायी रूप से कम होती है।
यही वजह है कि FX swaps का इस्तेमाल अतिरिक्त नकदी को सोखने के लिए किया जा सकता है, बिना केवल परंपरागत liquidity-management उपायों पर निर्भर हुए।
सामान्य सार्वजनिक Swap Auctions से बड़ा ऑपरेशन
रिपोर्ट के मुताबिक, हाल के swaps का आकार पिछले कुछ वर्षों में सार्वजनिक रूप से घोषित RBI के कई समान ऑपरेशनों की तुलना में बड़ा है।
आमतौर पर केंद्रीय बैंक के सार्वजनिक swap auctions लगभग $3 अरब से $5 अरब की tranche में देखे गए हैं।
इस बार बड़े पैमाने पर कार्रवाई की वजह बैंकिंग सिस्टम में पैदा हुआ असाधारण liquidity surplus बताया जा रहा है।
बैंकिंग सिस्टम में ₹11 लाख करोड़ तक पहुंचा था Surplus
विदेशी पूंजी आकर्षित करने के RBI के उपायों से $140 अरब से अधिक का inflow आया, जो आधिकारिक अपेक्षाओं से काफी ज्यादा था।
इसके बाद इस महीने की शुरुआत में बैंकिंग सिस्टम का surplus liquidity लगभग ₹11 लाख करोड़ ($115 अरब) के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गया।
इतनी अधिक नकदी borrowing costs को नीचे धकेल सकती है। साथ ही, ऊंची तेल कीमतों के माहौल में अत्यधिक liquidity महंगाई से जुड़े जोखिम को बढ़ा सकती है।
Bond Sales और FX Swaps दोनों का इस्तेमाल
RBI केवल currency swaps पर निर्भर नहीं रहा है। Reuters की 22 सितंबर की रिपोर्ट के मुताबिक, लगातार bond sales, FX swaps और currency-market operations के बीच बैंकिंग सिस्टम का surplus liquidity रिकॉर्ड ₹11.16 लाख करोड़ से घटकर 21 सितंबर को ₹4.92 लाख करोड़ रह गया था—करीब 55% की कमी।
Reuters ने traders के हवाले से यह भी बताया कि RBI ने लगभग 10 trading sessions में करीब $1 अरब प्रतिदिन के FX swaps किए थे। उस रिपोर्ट में सूत्रों की पहचान नहीं बताई गई थी क्योंकि वे मीडिया से बात करने के लिए अधिकृत नहीं थे।
IDFC First Bank की Chief Economist ने क्या कहा?
IDFC First Bank की Chief Economist Gaura Sen Gupta ने Bloomberg से कहा कि RBI liquidity build-up को bond sales और sell-buy swaps के जरिए manage कर रहा है।
उनके अनुमान के मुताबिक, इन उपायों के बिना surplus liquidity ₹15.5 लाख करोड़ तक पहुंच सकती थी।
उन्होंने यह भी अनुमान लगाया कि RBI ने चालू वित्त वर्ष में 31 मार्च तक mature होने वाले करीब $10 अरब से $15 अरब के sell-buy swaps किए हो सकते हैं।
यह आंकड़ा उनका अनुमान है, RBI की आधिकारिक पुष्टि नहीं।
Forward Market पर भी दिख रहा असर
रिपोर्ट के अनुसार, इस महीने तीन से छह महीने की maturity वाले dollar-rupee contracts की दरें बढ़ी हैं। गुरुवार को छह महीने और एक साल की दरों में करीब 20 basis points की बढ़ोतरी हुई और वे मई के बाद के उच्च स्तर तक पहुंचीं।
FX sell-buy swaps forward premiums को प्रभावित कर सकते हैं। Reuters ने इस महीने की शुरुआत में बताया था कि RBI के ऐसे swaps ने forward premiums बढ़ाए थे और इससे रुपये को अप्रत्यक्ष समर्थन भी मिल सकता है, क्योंकि currency को short करने और dollar liabilities hedge करने की लागत प्रभावित होती है।
RBI के लिए Liquidity Management क्यों महत्वपूर्ण है?
अत्यधिक banking liquidity monetary policy के transmission को प्रभावित कर सकती है। यदि सिस्टम में जरूरत से बहुत ज्यादा नकदी उपलब्ध हो, तो short-term borrowing rates केंद्रीय बैंक की इच्छित policy conditions से नीचे जा सकती हैं।
इसी महीने RBI Governor Sanjay Malhotra ने कहा था कि केंद्रीय बैंक liquidity management के लिए उपलब्ध विकल्पों को खुला रख रहा है और bond sales तथा FX swaps उन साधनों में शामिल हैं।
इसलिए हालिया swap activity को केवल currency-market intervention के रूप में देखना पर्याप्त नहीं होगा। यह RBI की व्यापक liquidity-management strategy का हिस्सा दिखाई देती है, जिसका उद्देश्य surplus cash को नियंत्रित करना, money-market conditions को policy stance के अनुरूप रखना और inflation risks पर नजर बनाए रखना है।
Source
Primary report: Bloomberg, 24 September 2026 — मामले की जानकारी रखने वाले अज्ञात सूत्रों के हवाले से RBI के कम से कम $10 अरब के sell-buy FX swaps की रिपोर्ट।
Additional context: Reuters, 22 September 2026 — banking-system liquidity, bond sales और FX swap activity पर रिपोर्टिंग।
RBI position: रिपोर्ट प्रकाशित होने तक कम से कम $10 अरब के इन हालिया swap transactions के आकार पर RBI की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं थी।
